रेवती

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                                       रेवती के साथ ही नक्षत्रों की तीसरी श्रृंखला जो मूल से शुरु होकर रेवती तक जाती है, समाप्त हो जाती है। इसी के साथ रेवती 27 नक्षत्रों की इस यात्रा का अन्तिम पडाव भी है। भारतीय वैदिक ज्योतिष  की गणनाओं के लिये महत्वपूर्ण माने जाने वाले 27 नक्षत्रों में से रेवती को 27वां तथा अन्तिम नक्षत्र माना जाता है। रेवती का शाब्दिक अर्थ है धनवान अथवा धनी और इसी के अनुसार वैदिक ज्योतिष इस नक्षत्र को धन सम्पदा की प्राप्ति तथा सुखमय जीवन के साथ जोड़ कर देखता है । वैदिक ज्योतिष के अनुसार  पानी में तैरती हुई एक मछली को रेवती नक्षत्र के प्रतीक चिन्ह के रूप में माना जाता है । कुछ वैदिक ज्योतिषियों का यह मानना है की मछली का यह प्रतीक चिन्ह आत्मा की उस स्थिति को दर्शाता है जो दुनिया तथा माया के भवसागर से जूझते हुए मुक्ति का रास्ता ढूँढ रही है । इन वैदिक ज्योतिषियों की इस मान्यता को इस तथ्य से बल प्राप्त होता है कि रेवती नक्षत्र का मीन राशि के साथ गहरा संबंध है तथा मीन राशि को वैदिक ज्योतिष में मृत्यु के पश्चात आने वाले जीवन तथा आत्मा की मोक्ष यात्रा के साथ जोड़ा जाता है ।

                                        कुछ वैदिक ज्योतिषियों का यह मानना है कि मछली सामान्यतः पानी में रहने पर बहुत खुश होती है तथा इसी प्रकार रेवती नक्षत्र के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातक बहुत खुश तथा समृद्ध रहतें हैं तथा इन्हें अपने जीवन में धन तथा समृद्धि उसी प्रकार प्राप्त रहती है जिस प्रकार मछली के आस पास जल रहता है । इसी प्रकार कुछ अन्य वैदिक ज्योतिष रेवती नक्षत्र के इस प्रतीक की कुछ अन्य व्याख्याएँ भी करते हैं । कुछ वैदिक ज्योतिषी नगाड़े को भी रेवती नक्षत्र का प्रतीक चिन्ह मानते हैं । यहाँ पर ध्यान देने योग्य है कि प्राचीन काल में नगाड़ों का प्रयोग जन समुदाय को एकत्रित करने के लिए किया जाता था जिसका मुख्य उदेश्य आम तौर पर किसी न किसी प्रकार की सूचना जारी करना ही होता था । इसी के अनुसार रेवती नक्षत्र को सूचना तथा संचार व्यवस्था के साथ जोड़ा जाता है । वैदिक ज्योतिष में पूषा को रेवती नक्षत्र का देवता माना जाता है । कुछ वैदिक ग्रंथों के अनुसार पूषा सूर्य का ही एक नाम है तथा इस देवता को प्रकाश का देवता माना जाता है । कुछ विद्वानों का यह मानना है आत्मा को प्रकाशमयी करके परमात्मा के साथ जोड़ना पूषा के कार्यक्षेत्र में आता है । अधिकतर वैदिक ज्योतिषी यह मानते हैं कि पूषा जीवन तथा जगत के उन सभी भागों में प्रकाश लातें हैं जहां इसकी आवश्यकता होती है । बहुत से वैदिक ज्योतिषी पूषा को धन समृद्धि का देवता भी मानते है तथा पूषा के चरित्र कि ये सभी विशेषताएं रेवती नक्षत्र के माध्यम से साकार होती हैं । जिसके चलते रेवती नक्षत्र के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातक धनवान तथा उदार होतें हैं । बहुत से वैदिक ज्योतिषी भगवान विष्णु को भी रेवती नक्षत्र के अधिष्ठ देवता मानते हैं। जैसा कि हम सब जानतें हैं भगवान विष्णु देवी लक्ष्मी के पति हैं तथा देवी लक्ष्मी धन तथा समृद्धि की देवी हैं अतः विष्णु जी के सहयोग से इस नक्षत्र के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातक धनवान तथा समृद्ध होतें हैं । जैसा कि हम सब जानतें हैं कि भगवान विष्णु अपने वाक कौशल के चलते त्रिदेवों में से सबसे चतुर देव मानें जातें हैं उसी प्रकार इस नक्षत्र के प्रभाव वाले व्यक्ति भी बुद्धिमान तथा वाक कौशल के धनी होतें हैं ।

                                      वैदिक ज्योतिष के अनुसार बुध रेवती नक्षत्र का शासक ग्रह है तथा इसी लिए इस नक्षत्र में बुध ग्रह का भी प्रभाव देखा जा सकता है । बुध ग्रह वाक कौशल ,बुद्धिमानी, विश्लेषणात्मक प्रकृति एवम व्यापार कौशल का प्रतीक है तथा ये बुध ग्रह की ये सब विशेषताएं रेवती नक्षत्र में भी झलकती हैं । रेवती नक्षत्र के सभी चरण  मीन राशि में आते है जो पुनः बृहस्पति के प्रभाव में है अतः रेवती नक्षत्र मीन और बृहस्पति दोनों के प्रभाव में आता है । मीन राशि का प्रतीक चिन्ह मछली आत्मा की मुक्ति का सूचक है तथा बृहस्पति उदारता, आशा तथा बुद्धिमानी का तथा मीन तथा बृहस्पति की ये विशेषताएं रेवती नक्षत्र में होने के कारण इस नक्षत्र के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातक भौतिक तथा आध्यात्मिक दोनों ही क्षेत्रों में बहुत सफल होते हैं। इसका एक कारण रेवती नक्षत्र मे बुध तथा बृहस्पति की सकारात्मक उर्जाओं का मिश्रण होना भी माना गया है । रेवती नक्षत्र के प्रभाव में आने वाले जातक अधिकतर सकारात्मकता से भरपूर होते हैं तथा विफलताओं के पश्चात भी वें अपने उदेश्य की प्राप्ति के लिए प्रयासरत रहते हैं । इस नक्षत्र के प्रभाव वाले जातकों की काल्पनिक शक्ति बहुत तीव्र होती है जिसे वें अपनी रचनात्मकता के लिए प्रयोग में लातें हैं। परन्तु ये तभी सम्भव होता है यदि जातक की कुंडली में स्थित बाकी ग्रह भी इसका समर्थन करें अन्यथा जातक की ये रचनात्मकता सीमित हो जाती है तथा इसके कुछ परिणाम नहीं मिल पाते । संभवतः यही कारण है कि कईं वैदिक ज्योतिषियों का मानना है कि इस नक्षत्र के प्रभाव में आने वाले जातकों में अपनी स्वप्नों तथा कल्पनाओं की अलग दुनिया बनाने की प्रवृति होती है । कभी कभी तो इस नक्षत्र के प्रभाव में आने वाले जातक अपनी इस दुनिया में इतना खो जाते हैं कि व्यावहारिक दुनिया से अपने आप को जोड़ ही नहीं पाते ।

                                       कुछ वैदिक ज्योतिषियों का ये मानना है कि रेवती नक्षत्र के प्रभाव वाले जातकों का माया के साथ गहरा सम्बन्ध होता है । अपने निचले स्तर पर यह माया जातक को भटका कर व्यावहारिकता से दूर कर सकती है तथा ऐसा जातक कल्पना की दुनिया में ही खोया रहता है जबकि यही माया अपने उपरी स्तर पर जातक को दिव्य ज्ञान भी प्रदान कर सकती है जिससे जातक को सृष्टि के सभी रहस्यों का भेद पता चल सकता है तथा इसी माया के प्रभाव के चलते जातक को मुक्ति अथवा मोक्ष का मार्ग भी मिल सकता है । कुछ वैदिक ज्योतिषियों के अनुसार माया का यह प्रभाव भगवान विष्णु का इस नक्षत्र से संबंध होने के कारण है क्योंकि वैदिक ग्रंथों के अनुसार भगवान विष्णु प्रत्येक प्रकार की माया के स्वामी हैं । वहीँ  कुछ अन्य वैदिक ज्योतिषी यह मानते हैं कि रेवती का माया से सम्बन्ध होने का कारण मीन राशि का इस नक्षत्र पर गहरा प्रभाव है क्योंकि वैदिक ज्योतिष में मीन राशि को माया के साथ जोड़ कर देखा जाता है ।

परन्तु दोनों ही स्थितियों में, यह बात स्पष्ट हो जाती है कि रेवती नक्षत्र का माया के साथ गहरा संबंध है जिसके चलते इस नक्षत्र के प्रभाव में आने वाले जातक माया का भेद समझने के लिए निरंतर प्रयास करते रहते हैं जिनमें से कुछ जातक तो माया के इन भेदों को सुलझा लेते है जबकि कुछ इन्ही में गुम हो जाते हैं। इसीलिए रेवती को माया का नक्षत्र भी कहा जाता है । रेवती नक्षत्र के प्रभाव में आने वाले जातक सामान्यतः बहुत सभ्य तथा संस्कारी प्रवृत्ति के होते हैं, वे जानते हैं कि समाज में किस तरह का व्यवहार करना है बल्कि ये कहें कि वे  सुसंस्कृत समाज के स्तम्भ कहलाते है तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। इस नक्षत्र के प्रभाव वाले जातकों को लोगों से मिलना जुलना पसंद होता है तथा उनके अपने मित्रों तथा सम्बंधियों से अच्छे रिश्ते होते हैं तथा जातक के इन रिश्तों के प्रगाढ़ होने का एक कारण उनका वाक कौशल भी होता है जिससे वो लोगों को अपने से जोड़े रखने में सफल रहते हैं । इस नक्षत्र के प्रभाव में आने वाले जातक अपने मित्रों तथा सम्बंधियों की सहायता के लिए सदैव तैयार रहते हैं तथा समय आने पर उनसे सहायता पाते भी हैं ।

                           दया तथा सौभाग्य रेवती नक्षत्र के प्रभाव में आने वाले जातक के दो मुख्य लक्षण हैं तथा सामान्यतया इस नक्षत्र के प्रभाव में आने वाले जातक यह मानते हैं कि सुकर्मों से ही सौभाग्य की प्राप्ति संभव है । रेवती नक्षत्र के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातक अपने मानवीय मूल्यों के लिए जाने जाते हैं, वें दूसरों का दर्द समझते हैं तथा उसको दूर करने के लिए हर संभव प्रयास भी करते हैं। यही वजह है कि इस नक्षत्र के प्रभाव  में आने वाले अधिकतर जातक किसी धर्मार्थ संस्था अथवा ऐसे किसी अभियान से जुड़े पाए जाते हैं जो गरीब तथा कमज़ोर लोगों की सहायता के लिए धन एकत्रित करते हैं । वैदिक ज्योतिष के अनुसार रेवती के जातक बहुत से व्यावसायिक क्षेत्रों में कार्यरत पाए जातें है जैसे कि आध्यात्मिक गुरु, योगाचार्य, धार्मिक उपदेशक तथा प्रवाचक, दार्शनिक, ज्योतिषी, हस्त रेखा विशेषज्ञ, गणितज्ञ, वास्तु विशेषज्ञ, फेंग शुई विशेषज्ञ,  कलाकार, हास्य अभिनेता, मूर्तिकार ,चित्रकार, संगीतकार, कवि, तथा अन्य क्षेत्र जिनमें काल्पनिक शक्ति का प्रयोग हो, चिकित्सक, शल्य-चिकित्सक,अध्यापक, वैज्ञानिक,शोधकर्ता, विश्लेषक, अंतरिक्ष यात्री, गोताखोर तथा मछली उद्योग से जुड़े अन्य लोग तथा अन्य कई प्रकार के व्यवसायिक क्षेत्रों मे कार्यरत लोग।

                                 आइए अब चर्चा करते हैं रेवती नक्षत्र से जुड़े कुछ अन्य तथ्यों की जो वैदिक ज्योतिष के अनुसार विवाह हेतु प्रयोग में लाई जाने वाली गुण मिलान की विधि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं । वैदिक ज्योतिष में रेवती को एक स्त्री नक्षत्र माना जाता है तथा कई वैदिक ज्योतिषी रेवती नक्षत्र के इस लिंग निर्धारण का कारण इस नक्षत्र का माया से गहरा संबंध बताते हैं। यहां पर यह बात ध्यान देने योग्य है कि वैदिक मिथिहास में माया को भी स्त्रीलिंग माना गया है । वैदिक ज्योतिष के अनुसार रेवती एक नम्र तथा संतुलित तरीके से कार्य करने वाला नक्षत्र माना गया है । वैदिक ज्योतिष में रेवती नक्षत्र को शुद्र वर्ण के रूप में माना जाता है जो इस नक्षत्र की विशेषताओं को देखते हुए हैरान करने वाली बात है । कुछ वैदिक ज्योतिषी रेवती नक्षत्र के इस वर्ण निर्धारण की व्याख्या इस तथ्य से करते है कि रेवती नक्षत्र देने और सेवा भाव रखने वाला नक्षत्र माना गया है तथा सेवा भाव शुद्र जाति की विशेषता मानी जाती है । वैदिक ज्योतिष के अनुसार रेवती नक्षत्र गण में देव तथा गुण में सात्विक है तथा इस नक्षत्र के स्वभाव को देखते हुए रेवती नक्षत्र के इस गुण तथा गण निर्धारण को समझना आसान है। वैदिक ज्योतिष आकाश तत्व को इस नक्षत्र के साथ जोड़ता है ।

लेखक
हिमांशु शंगारी