उत्तरभाद्रपद

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                             भारतीय वैदिक ज्योतिष  की गणनाओं के लिये महत्वपूर्ण माने जाने वाले 27 नक्षत्रों में से उत्तरभाद्रपद को 26वां नक्षत्र माना जाता है। उत्तरभाद्रपद का शाब्दिक अर्थ है उत्तर अर्थात बाद में आने वाला भाग्यशाली पैरों वाला व्यक्ति। कुछ वैदिक ज्योतिषी का यह मानते हैं कि इस नक्षत्र के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातक बहुत ही भाग्यशाली होते हैं। वैदिक ज्योतिष के अनुसार चारपाई के पिछले हिस्से को उत्तरभाद्रपद नक्षत्र के प्रतीक चिन्ह के रूप में माना जाता है तथा कुछ वैदिक ज्योतिषियों का यह मानना है कि यह चारपाई कोई साधारण चारपाई ना होकर शव को रखने के लिए प्रयोग की जाने वाली चारपाई है जिसका वर्णन पूर्वभाद्रपद नक्षत्र में भी किया गया है तथा यह उसी चारपाई का पिछ्ला भाग है। यह प्रतीक चिन्ह यह दर्शाता है कि उत्तरभाद्रपद नक्षत्र का सम्बन्ध मृत्यु तथा मृत्यु के पश्चात के समय से है। पूर्वभाद्रपद उत्तरभाद्रपद के साथ उसी प्रकार जोड़ा बनाता है जिस प्रकार पूर्वफाल्गुनी-उत्तरफाल्गुनी तथा पूर्वाषाढ़-उत्तराषाढ़। यहाँ यह बात ध्यान देने योग्य है कि उत्तरभाद्रपद नक्षत्र  की कार्यशैली पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र से बहुत भिन्न है तथा इन दोनों  नक्षत्रों में कई समानताएँ भी हैं। कुछ वैदिक ज्योतिषी एक कुंडली मारे हुए सर्प को भी इस नक्षत्र के प्रतीक चिन्ह के रूप में मानते है। इस कुंडली मारे हुए सर्प को मनुष्य की रीढ़ की हड्डी में पाए जाने वाली कुंडलिनी शक्ति के रूप में चित्रित किया गया है जो कि मानसिक उर्जा का बहुत शक्तिशाली स्तोत्र माना जाता है तथा इस कुंडलिनी का जागृत होना मनुष्य के अलौकिक संसार से जुड़ने की प्रक्रिया में बहुत महत्वपूर्ण चरण माना जाता है। अतः उत्तरभाद्रपद नक्षत्र का अलौकिक संसार से विशेष संबंध माना जाता है  तथा इस नक्षत्र के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातकों का अलौकिक तथा असाधारण मान्यताओं के प्रति झुकाव न्युनतम स्तर से उच्चतम स्तर तक हो सकता है तथा ऐसे कुछ जातकों को तो वास्तव में  ऐसी शक्तियों के साथ जुड़े पाया भी गया है।

                         वैदिक ज्योतिष में अहिर बुधन्य को उत्तरभाद्रपद नक्षत्र का देवता माना जाता है तथा इस नक्षत्र में अहिर बुधन्य की कईं विशेषताएं पायी जाती हैं। वैदिक ज्योतिष के अनुसार अहिर बुधन्य एक नाग देवता हैं जो पृथ्वी के तल में रहते हैं जबकि कुछ  वैदिक ज्योतिषियों की यह भी मान्यता है कि अहिर बुधन्य का वास समुद्र तल में है। अहिर बुधन्य को पूर्वभाद्रपद नक्षत्र के देवता अजा एकपद की तुलना में अधिक बुद्धिमान तथा करुणामय देवता माना जाता है तथा इन्हीं विभिन्नताओं के कारण इनके प्रभाव के अंतर्गत आने वाले नक्षत्र पूर्वभाद्रपद तथा उत्तरभाद्रपद आपस में कुछ समानता होने पर भी एक दूसरे से बहुत भिन्न नक्षत्र पाए गए हैं। उदहारण के लिए उत्तरभाद्रपद नक्षत्र भी जीवन के रहस्यों से सम्बन्धित है जैसे कि पूर्वभाद्रपद नक्षत्र तथा उत्तरभाद्रपद नक्षत्र के प्रभाव में आने वाले जातक के स्वभाव का अनुमान लगाना उसी प्रकार कठिन है जिस प्रकार पूर्वभाद्रपद नक्षत्र के प्रभाव में आने वाले जातक का। परन्तु यहाँ यह बात ध्यान देने योग्य है कि उत्तरभाद्रपद नक्षत्र के प्रभाव में आने वाले जातक अपनी ऊर्जा का प्रयोग सकारात्मक तरीके अर्थात समाज की भलाई आदि के लिए करते है जबकि पूर्वभाद्रपद के प्रभाव में आने वाले जातक इस नक्षत्र से मिली ऊर्जा का प्रयोग नकारात्मक तरीके जैसे हिंसा तथा विनाश के लिए भी कर सकते हैं। अतः कुछ समानताओं के चलते भी इन दोनों नक्षत्रों की कार्यशैली में बहुत अंतर है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार भगवान शिव को उत्तरभाद्रपद नक्षत्र का अंतिम अधिपति देवता माना जाता है। वैदिक ज्योतिषियों का यह मानना है कि इस नक्षत्र का सम्बन्ध मृत्यु तथा मृत्यु के पश्चात के समय से है तथा मृत्यु के देव भगवान शिव हैं इसी कारण भगवान शिव को इस नक्षत्र का इष्टदेव माना जाता है। यहाँ पर यह बात ध्यान देने योग्य है कि पिछले नक्षत्र अर्थात पूर्वभाद्रपद नक्षत्र का संबंध भी भगवान शिव से दिखाया गया है तथा यह संबंध अजा एकपद के कारण है जो भगवान शिव के रूद्र रूप का ही एक हिस्सा है परन्तु उत्तरभाद्रपद नक्षत्र से भगवान शिव का संबंध उनके नम्र तथा दयालु रूप में है ना कि पूर्वभाद्रपद नक्षत्र के तरह रूद्र रूप में। अतः दोनों नक्षत्रों से जुड़े होने पर भी भगवान शिव का दोनों नक्षत्रों पर अलग अलग प्रभुत्व होता है।

                    वैदिक ज्योतिष में उत्तर भाद्रपद नक्षत्र का शासक ग्रह शनि को माना जाता है तथा इस नक्षत्र पर शनि का प्रबल प्रभाव होने के कारण शनि की कुछ विशेषताएं जैसे बुद्धिमानी, सहनशीलता, दृढ़ता तथा लक्ष्य को पाना तथा उस सफलता का आनंद उठाना आदि इस नक्षत्र में भी पायी जाती हैं। कुछ वैदिक ज्योतिषियों के अनुसार शनि इस नक्षत्र में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देते हैं जबकि पुष्य तथा अनुराधा जैसे शुभ नक्षत्र भी शनि देव के प्रभाव में ही आते हैं । कुछ वैदिक ज्योतिषी यह मानते हैं कि उत्तर भाद्रपद नक्षत्र पर शनि का नम्र तथा परोपकारी पक्ष प्रभाव डालता है जिसके कारण ही यह नक्षत्र तथा इसके प्रबल प्रभाव में आने वाले जातक बुद्धिमान, परोपकारी तथा निस्वार्थ सेवा भाव से भरपूर होते हैं। इस नक्षत्र के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातक दूसरों के कल्याण हेतु कार्यरत रहते हैं तथा ऐसे कल्याणकारी कार्यों से इन्हें भी लाभ प्राप्त होता रहता है। उत्तर भाद्रपद के चारों चरण बृहस्पति के अधीन आने वाली मीन राशि में आते हैं इसीलिए इस नक्षत्र पर मीन राशि तथा बृहस्पति का भी प्रभाव है। वैदिक ज्योतिष में बृहस्पति को एक बुद्धिमान तथा परोपकारी ग्रह माना जाता है तथा मीन राशि अच्छे कर्मों के प्रति निष्ठा भाव, मृत्यु, मृत्यु के बाद के जीवन तथा अंतिम आत्मज्ञान को चित्रित करती है तथा बृहस्पति और मीन राशि की ये विशेषताएं उत्तर भाद्रपद नक्षत्र में भी  झलकती हैं। अतः इस नक्षत्र के स्वभाव को समझने के लिए इस नक्षत्र के शासक ग्रहों तथा देवताओं के प्रभाव को समझना आवश्यक है क्योंकि हर कुंडली में यह नक्षत्र अलग तरीके से कार्य करता है जो कि उस कुंडली में इन ग्रहों तथा राशियों की स्थिति तथा क्षमता पर निर्भर होता है।

                       उत्तर भाद्रपद नक्षत्र के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातक साधारण बुद्धिमता से असाधारण बुद्धिमता तक के धनी हो सकते है। ये जातक पूर्वभाद्रपद के प्रभाव में आने वाले जातकों की तरह ही अपने आप को हर स्थिति के अनुकूल ढालने में सक्षम होते हैं। कईं वैदिक ज्योतिषियों का यह मानना है कि कभी कभी पूर्वभाद्रपद तथा उत्तर भाद्रपद नक्षत्रों के प्रभाव में आने वाले जातकों के स्वभाव  में अंतर करना कठिन हो जाता है। उत्तर भाद्रपद के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातक स्थिति के अनुसार व्यवहार करने में भी निपुण होते हैं। इस नक्षत्र के प्रभाव वाले जातक अपने लक्ष्य प्राप्ति हेतु दृढ़- निश्चयी होकर प्रयास करते हैं। यहाँ यह बात ध्यान देने योग्य है कि अन्य नक्षत्रों के प्रभाव वाले जातकों कि भांति उत्तर भाद्रपद नक्षत्र के प्रभाव वाले जातक अपने लक्ष्य प्राप्ति के लिए उतावले नहीं होते बल्कि ये जातक संयम तथा बुद्धिमानी से अपने लक्ष्य को प्राप्त करने तथा उनका परिणाम देखने में विश्वास रखते हैं। इस नक्षत्र के प्रभाव में आने वाले जातक बहुत ही शांत दिखने वाले माने जाते हैं जो अपने लक्ष्य को बहुत ही सुनियोजित तरीके से प्राप्त करने में विश्वास रखने वाले होते हैं। उत्तर भाद्रपद नक्षत्र के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातक अपनी बुद्धिमता तथा सहनशीलता के कारण समाज में बहुत सम्मान पाते हैं तथा अधिकतर लोग इनकी संगति में रहना इसीलिए पसंद करते है ताकि वें इन जातकों से सलाह तथा मदद प्राप्त कर सकें जो इस नक्षत्र के प्रभाव वाले जातक सदैव ही करते हैं।

                       उत्तर भाद्रपद के प्रभाव में आने वाले जातक हर काम को सुनियोजित तथा व्यवस्थित ढंग से करना पसंद करते है फिर काम चाहे छोटा हो या बड़ा, ये जातक उसके हर छोटे बड़े पक्ष को ध्यान में रखते हुए उसको करते है। उत्तर भाद्रपद के प्रभाव वाले जातक दयालु तथा विचारशील होते हैं। वें सदैव ही समाज तथा कमज़ोर वर्ग के लिए कुछ रचनात्मक करने की कोशिश करते हैं इसीलिए इस नक्षत्र के प्रभाव में आने वाले अधिकतर जातक किसी धर्मार्थ संस्था के साथ जुड़े पाए गए हैं। उत्तर भाद्रपद के प्रबल प्रभाव  में आने वाले जातकों में बदला लेने की तथा ईर्ष्या की भावना ना के बराबर होती है क्योंकि वें लोगों की त्रुटियों को तथा उनके द्वारा किये गए बुरे कामों को  बहुत जल्दी भूल कर उन्हें क्षमा कर देते हैं इसलिए इन्हें साधु-संतों जैसे लोग भी कहा जाता है। उत्तर भाद्रपद नक्षत्र के प्रभाव में आने वाले जातक अलौकिक तथा पराविज्ञान के क्षेत्र में भी बहुत रूचि रखते हैं तथा इन में से बहुत से जातक इन क्षेत्रों में  कार्यशील भी पाए जाते हैं। यहाँ पर यह बात ध्यान देने योग्य है कि उत्तर भाद्रपद के प्रभाव के कारण अलौकिक तथा पराविज्ञान के क्षेत्रों में जाने वाले जातक सामान्यतः ऐसे ही कार्यक्षेत्रों में अभ्यास करते है जिन्हें सभ्य समाज में अच्छा तथा आदरणीय माना जाता है। उदाहरण के लिए इस नक्षत्र के प्रभाव के कारण अलौकिक तथा पराविज्ञान के क्षेत्रो में अभ्यास करने वाले जातक सामान्यतः ज्योतिष, अंक विज्ञान, हस्त रेखा विज्ञान, अध्यात्मिक साधना, योग तथा ऐसी ही अन्य विद्याओं में कार्यशील होते हैं तथा ये जातक सामान्यतः सभ्य समाज के द्वारा बुरे तथा निन्दित माने जाने वाले कार्यक्षेत्रों जैसे कि काला जादू, अघोर साधना तथा ऐसी तन्त्र साधनाओं  में रूचि नहीं रखते जिन में सिद्धि प्राप्त करने के लिए पशुओं तथा कईं बार मनुष्यों कि बलि भी दी जाती है। उत्तर भाद्रपद के जातक अपने संत स्वभाव के लिए जाने जाते हैं तथा अनैतिक, अवैध एवम समाज के लिए अहितकारी कार्यों में इनकी रूचि नहीं होती।

                     उत्तर भाद्रपद वाले जातक अधिकतर संतोषी स्वभाव के होते हैं। वें प्रतिदिन आने वाली छोटी छोटी घटनाओं पर चिंतित होकर जीवन दुखमय बनाने की जगह जीवन में आने वाली हर स्थिति में खुश रहने की कोशिश करते हैं। इस नक्षत्र वाले जातक अपनी बुद्धिमता तथा पारखी नज़र के कारण बहुत अच्छे मध्यस्थ सिद्ध होते हैं तथा इनके इर्द-गिर्द रहने वाले लोग अधिकतर अपने विवादों को सुलझाने में इनकी मदद लेते है तथा अधिकतर विवादों का निर्णय करने से पूर्व उत्तर भाद्रपद के प्रभाव वाले जातक सभी तथ्यों तथा तर्कों को ध्यान में रखते हुए ही निर्णय लेते हैं। उत्तर भाद्रपद नक्षत्र वाले जातकों की प्रवृति अधिकतर गलत काम करने वालों को माफ करने की होती है इसलिए किसी विवाद का निर्णय लेते समय वे दोषी को सुधरने का एक और मौका देने में विश्वास रखते हैं क्योंकि उनका मानना है कि गलती करने वाले को प्यार तथा दया से समझाया जा सकता है ना कि दंड देने से। कईं वैदिक ज्योतिषियों का यह मानना है कि उत्तर भाद्रपद एक सौभाग्यशाली नक्षत्र है तथा इस नक्षत्र के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातकों को सामान्यतः उपहार, अचानक मिलने वाले लाभ, अनुकूल निर्णय तथा विरासत से होने वाले लाभ अक्सर ही बिना कोई कठिन कोशिश के ही मिल जाते हैं। जैसा कि पहले बताया जा चुका है कि उत्तर भाद्रपद के प्रभाव वाले जातक परोपकारी स्वभाव के होते है तथा इन जातकों के इसी स्वभाव के चलते ही अधिकतर लोग इनसे मित्रता करना चाहते हैं क्योंकि इनकी संगति में लोग अपने आप को बहुत ही सहज तथा सुरक्षित महसूस करते हैं।

                    वैदिक ज्योतिष ने उत्तर भाद्रपद नक्षत्र को कईं व्यवसायिक क्षेत्रों के साथ जोड़ा है तथा इस के अनुसार उत्तर भाद्रपद के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातक  अधिकतर  योग शिक्षक, ज्योतिष विज्ञान,अंक विज्ञान,हस्तरेखा विज्ञान,वास्तु विज्ञान जैसे क्षेत्रों में कार्यरत पाए जाते है। ये जातक शिक्षक,प्रचारक, सलाहकार, वित्तीय सलाहकार,न्यायधीश, प्रशासक तथा कुछ अन्य संस्थाओं जो जनता कि सेवा के लिए काम करती हो के संचालक के तौर पर काम करते पाए जाते हैं। उत्तर भाद्रपद के प्रभाव वाले जातक कईं व्यावसायिक क्षेत्रों में कार्यशील होते हैं इसलिए इन्हें कुछ ही व्यवसायों से विशेष रूप से जोड़ना मुश्किल है। उदाहरण के लिए कुछ जातक जो उत्तर भाद्रपद के प्रबल प्रभाव में आते है उनको पत्रकार के रूप में भी कार्य करते देखा जा सकता है परन्तु सामान्य तौर पर ऐसे जातक धार्मिक क्षेत्रों तथा ऐसे कुछ अन्य क्षेत्रों के बारे में हमें जानकारी देते हैं जो लोगों को किसी प्रकार का ज्ञान दे तथा जिस से लोग लाभ ले सकें।

                   आइये अब चर्चा करें उत्तर भाद्रपद नक्षत्र से जुड़े कुछ अन्य तथ्यों की जिनको वैदिक ज्योतिष के अनुसार विवाह कार्यों के लिए प्रयोग में लायी जाने वाली गुण मिलान की प्रणाली में महत्वपूर्ण माना जाता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार उत्तर भाद्रपद को पुरुष नक्षत्र माना जाता है। कुछ वैदिक ज्योतिषी इस लिंग निर्धारण का कारण इस तथ्य को मानते हैं कि इस नक्षत्र के शासक देवता तथा शासक ग्रह दोनों ही पुरुष है तथा इन्ही ग्रहों तथा देवताओं का प्रभाव इस नक्षत्र को भी पुरुष नक्षत्र बनाता है। बहुत से वैदिक ज्योतिषी उत्तर भाद्रपद नक्षत्र के इस लिंग निर्धारण का आधार इस नक्षत्र की  विशेषताओं जैसे बुद्धिमता तथा अच्छी न्यायिक क्षमता को मानते है जो कि अधिकतर पुरुषों में ही पायी जाती हैं। वैदिक ज्योतिषियों का यह मानना है कि उत्तर भाद्रपद नक्षत्र स्थिर तथा संतुलित स्वभाव का है जो कि इस नक्षत्र की कार्यशैली से स्पष्ट भी है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार इस नक्षत्र का वर्ण क्षत्रिय माना जाता है जो कि हैरान करने वाली बात है क्योंकि वैदिक ज्योतिष तो इसे संत स्वभाव वाला नक्षत्र मानता है। परन्तु कुछ विद्वानो के अनुसार उत्तर भाद्रपद नक्षत्र भगवान शिव के परोपकारी रूप से प्रभावित है जो भगवान राम की तरह एक सच्चा योद्धा बनकर रहता है, जो बहुत ही दयालु स्वभाव का है तथा अपने शत्रुओं को माफ करने में सक्षम है परन्तु इसके साथ समय आने पर उग्र रूप भी धारण कर सकता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार उत्तर भाद्रपद नक्षत्र गुण से तामसिक है तथा ऐसा इसलिए है  क्योकि इस नक्षत्र का सम्बन्ध भगवान शिव से है जो अपने आप में ही तमो गुणों के देव हैं। वैदिक ज्योतिष में उत्तर भाद्रपद नक्षत्र को मानव गण प्रदान किया जाता है जिसका कारण इस नक्षत्र की लोगों का कल्याण करने के प्रति सक्रियता तथा भौतिकवाद से सम्बन्ध है। वैदिक ज्योतिष आकाश तत्व को इस नक्षत्र के साथ जोड़ता है।

लेखक
हिमांशु शंगारी