पूर्वाभाद्रपद

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                            पूर्वभाद्रपद निःसन्देह सभी नक्षत्रों में से सबसे साहसी, नाटकीय, रहस्यमयी तथा हिंसक नक्षत्रों में से एक है। भारतीय वैदिक ज्योतिष  की गणनाओं के लिये महत्वपूर्ण माने जाने वाले 27 नक्षत्रों में से पूर्वभाद्रपद  को 25वां नक्षत्र माना जाता है। पूर्वभाद्रपद का शाब्दिक अर्थ है पहले आने वाला भाग्यशाली पैरों वाला व्यक्ति। कई वैदिक ज्योतिषियों के अनुसार इस नक्षत्र के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातक भी सौभाग्य के पक्ष से भरपूर होते हैं| इस नक्षत्र का मुख्य प्रतीक चिन्ह चारपाई के अगले दो पैरों को माना गया है तथा वैदिक ज्योतिषियों के अनुसार यह चारपाई कोई साधारण चारपाई ना होकर शव को रखे जाने वाली चारपाई है। पूर्वभाद्रपद नक्षत्र का सम्बन्ध मृत्यु तथा निद्रा के क्षेत्र से भी है। वैदिक ज्योतिषी यह मानते हैं कि पूर्वभाद्रपद  का मृत्यु के बाद के जीवन से गहरा सम्बन्ध है तथा इस नक्षत्र के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातक कईं माध्यमों से मृतकों की दुनिया से जुड़ने तथा उन आत्माओं को किसी काम के लिए प्रयोग करने का प्रयास करते हैं। बहुत से वैदिक ज्योतिषी इस विचार पर एकमत है कि पूर्वभाद्रपद के प्रबल प्रभाव में आने वाले कुछ जातक एक समय में बहुत घातक, विनाशकारी तथा हिंसक प्रवृति के हो सकते हैं तथा यही जातक दूसरे ही पल बहुत सभ्य व्यवहार करने लगते हैं।

                            कुछ वैदिक ज्योतिषी दो मुंह वाले एक व्यक्ति को भी पूर्वभाद्रपद नक्षत्र का प्रतीक चिन्ह मानते हैं जिसका एक चेहरा  बहुत नम्र, सभ्य, तथा सुसंस्कारी है तथा दूसरा चेहरा बहुत हिंसक तथा विनाशकारी है तथा इसी के अनुसार पूर्वभाद्रपद नक्षत्र के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातक के व्यक्तित्व के भी दो पहलू होते हैं जिसका एक पहलू बहुत सौम्य तथा सभ्य है वहीँ दूसरा पहलू अत्यधिक विनाशकारी तथा हिंसक है। मैने इस नक्षत्र के प्रबल प्रभाव में आने वालीं बहुत सी कुंडलियों के व्यवहारिक अवलोकन तथा विश्लेषण में यह पाया गया है कि यह दोमुखी व्यक्ति वाला प्रतीक चिन्ह किसी भी अन्य प्रतीक चिन्ह से कहीं अधिक प्रभावशाली है तथा पूर्वभाद्रपद के प्रभाव वाले जातक दो व्यक्तित्व रखते है तथा ये दोनों ही व्यक्तित्व एक दूसरे से बिल्कुल विपरीत हैं तथा एक बात जो  ध्यान देने योग्य भी है तथा रुचिकर भी वो ये है कि पूर्वभाद्रपद के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातक इन दोनों ही व्यक्तित्वों को बनाए रखने तथा स्थितिनुसार अपने एक व्यक्तित्व को दूसरे व्यक्तित्व  में बदलने के सक्षम होते हैं। इसी कारण पूर्वभाद्रपद के प्रभाव वाले जातक यदि किसी अपराधिक गतिविधि में संलग्न हो तो उनका सामना करना सबसे कठिन है। ऐसा इसलिए क्योंकि पूर्वभाद्रपद के प्रभाव में आने वाले अपराधी जातक अपना वेष बदलने में इतने चतुर होते हैं कि कभी कभी तो समझदार से समझदार व्यक्ति भी इनके व्यक्तित्व का ये रंग समझ नहीं पाता। उदहारण के लिए, एक कॉलेज प्रोफेसर जिसकी  कॉलेज तथा समाज में बहुत अच्छी मान-प्रतिष्ठा है तथा जो समाज में एक बहुत ही सभ्य तथा अच्छे इंसान माना जाता है, जो हमेशा क़ानून की मान- प्रतिष्ठा बनाए रखे तथा उसका कभी उलंघन ना करे तथा वास्तव में वह एक ऐसे माफ़िया संगठन या आंतंकवादी समूह का सदस्य पाया जाए जो बड़े पैमाने पर विनाश करने के लिए ज़िम्मेदार हो, यह पूर्वभाद्रपद के नकारात्मक प्रभाव वाले जातकों का एक सटीक उदहारण है।

                           दूसरी ओर यदि यह कॉलेज प्रोफेसर किसी उच्चतम स्तर की किसी सरकारी संस्था के लिए एक गुप्तचर की तरह काम करता है तो ये पूर्वभाद्रपद के सकारात्मक प्रभाव का एक विशिष्ट उदहारण है। अतः इस नक्षत्र के प्रबल प्रभाव वाले जातक अपने व्यक्तित्व का दूसरा पहलू छुपा कर रखने में सक्षम होते हैं जो कि उनके प्रत्यक्ष व्यक्तित्व के बिल्कुल विपरीत होता है। कुछ वैदिक ज्योतिषी तलवार को भी पूर्वभाद्रपद नक्षत्र के प्रतीक चिन्ह के रूप में देखते हैं। इन में से कुछ ज्योतिषी ऐसा मानते हैं कि यह प्रतीक चिन्ह एक दोधारी तलवार का है न कि एक आम तलवार का जो कि इस नक्षत्र के दोहरे स्वभाव को चित्रित करती है तथा वहीँ यह प्रतीक चिन्ह इस नक्षत्र को सुरक्षा, विनाश तथा युद्ध के साथ भी जोड़ता है क्योंकि एक तलवार का प्रयोग इन सभी उद्देश्यों की  प्राप्ति के लिए होता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार अजा एकपद को इस नक्षत्र का शासक देवता माना जाता है। अजा एकपद का शाब्दिक अर्थ एक पाँव वाली बकरा होता है तथा वैदिक मिथिहास में इस देवता को एक असपष्ट रूप से दिखने वाले किसी राक्षसी प्राणी के रूप में चित्रित किया है जो कि एक बकरे की तरह दिखता है तथा जिसका एक ही पाँव या एक ही टांग है तथा जिसका व्यक्तित्व बहुत ही भयानक है। कुछ वैदिक ज्योतिषी यह मानतें है कि अजा एकपद भगवान शिव के रूद्र रूप में आने वाले कईं वेषों में से एक है। इसलिए अजा एकपद इस नक्षत्र को भगवान शिव के साथ जोड़ता है। परन्तु यहाँ यह बात ध्यान देने योग्य है कि अजा एकपद भगवान शिव के रूद्र तथा विनाशकारी रूप से सम्बन्धित है ना कि उनके नम्र तथा परोपकारी रूप से। अतः पूर्वभाद्रपद के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातकों में अपने शासक देवता के स्वभाव के चलते हिंसा तथा विनाश से जुड़े क्षेत्रों तथा गतिविधियों से जुड़ने की प्रबल प्रवृति पायी जा सकती है।

                     वैदिक ज्योतिष में बृहस्पति को इस नक्षत्र का शासक ग्रह माना जाता है तथा बृहस्पति का पूर्वभाद्रपद जैसे एक हिंसक तथा विनाश्कारी नक्षत्र से सम्बन्ध कईं वैदिक ज्योतिषियों के लिए भ्रम का कारण है क्योंकि बृहस्पति अपने आप में एक परोपकारी तथा लाभकारी ग्रह माना जाता है जबकि पूर्वभाद्रपद इसके बिल्कुल विपरीत विशेषताओं का मालिक है। अतः कुछ वैदिक ज्योतिषी यह मानते हैं कि इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए ये माना जा सकता है कि पूर्वभाद्रपद नक्षत्र के इस  विनाशक तथा हिंसक स्वभाव को रूद्र द्वारा ब्रह्मांड की अस्तित्व की रक्षा तथा जीवन के नवीनीकरण के लिए किये जाने वाले शुद्धिकरण की प्रक्रिया के रूप में देखा जाना चाहिए। पूर्वभाद्रपद नक्षत्र के पहले तीन चरण शनि द्वारा शासित कुम्भ राशि में आते हैं जबकि इस का अंतिम चरण बृहस्पति के प्रभाव में आने वाली मीन राशि के अंतर्गत आता हैं जिसके कारण इस नक्षत्र में शनि के कुछ गुण जैसे कि गहन ध्यान, तप तथा यथार्थवाद आदि पाए जा सकते हैं। पूर्वभाद्रपद नक्षत्र के मूल स्वभाव का अनुमान इस पर प्रभाव डालने वाले ग्रहों तथा शासक देवताओं की स्थिति व उस स्थान पर उनकी क्षमता पर निर्भर करता है जो हर कुंडली में भिन्न हो सकती है। पूर्वभाद्रपद के प्रभाव वाले जातकों में दोहरे स्वभाव की प्रकृति प्रगाढ़ रूप से पायी जाती है तथा कुछ वैदिक ज्योतिषियों द्वारा तो इनकी इस वेष तथा व्यक्तित्व बदलने की क्षमता के कारण इन्हें छद्मवेश धारण करने में निपुण की उपाधि भी दी गयी है। कईं वैदिक ज्योतिषियों का यह मानना है कि पूर्वभाद्रपद नक्षत्र की ऊर्जा को संभालना वैसे ही बहुत कठिन है और यदि यह ऊर्जा कहीं नकारात्मक प्रवृति की हो तो यह विश्व के लिए एक चिंता का विषय है क्योंकि यह आने वाले समय में हिंसा तथा विनाश का कारण बन सकती है। अतः पूर्वभाद्रपद को अधिकतर वैदिक ज्योतिषियों ने एक नकारात्मक नक्षत्र ही माना है हालाँकि यह नक्षत्र सकारात्मक तरीके से काम करने में भी सक्षम है।

                          पूर्वभाद्रपद नक्षत्र के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातक कानून द्वारा अवैध माने जाने वाली तथा हिंसक और विनाशक गतिविधियों से सम्बन्ध रख सकते हैं। उदहारण के लिए, अच्छे तथा आम लोगों के भेष में हत्यारे या सीरियल किलर और नशीले पदार्थों का व्यापार करने वाले लोग जो आम लोगो में ये दवाएं बेच कर उनका जीवन संकट में डालते हैं। ऐसे सभी लोगों पर सम्भवतः पूर्वभाद्रपद नक्षत्र का प्रबल नकारात्मक प्रभाव होता है। कुछ वैदिक ज्योतिषी यह मानते है कि पूर्वभाद्रपद नक्षत्र से जोड़े जाने वाला विनाश तथा हिंसा वास्तव में किसी ना किसी प्रकार की शुद्धिकरण के साथ जुड़े होते हैं तथा इस नक्षत्र के प्रबल प्रभाव में आने वाले कुछ जातक अपने शुद्धिकरण की प्रक्रिया को अपने शरीर को प्रताड़ना दे कर तथा चरम स्थितियों से जूझ कर पूरा करते हैं। उदहारण के लिए, इस नक्षत्र के प्रबल प्रभाव में आने वाले बहुत से साधु अपनी तपस्या के लिए ऐसी ही चरम स्थितियों का चुनाव करते हैं जिनमें उनके शरीर को कष्ट तथा पीड़ा होती हो जैसे कि निरंतर कईं दिनों तक उपवास रखना, अत्यधिक ठंडे या गर्म वातावरण में तपस्या करना, वृक्षों की शाखाओं से उल्टा लटक कर तपस्या करना, एक पाँव पर खड़े हो कर तपस्या करना तथा ऐसी ही अन्य दुष्कर परिस्थितियों में तपस्या करना जिनसे उनके शरीर को अधिक से अधिक पीड़ा पहुँचती हो। इसलिए यह नक्षत्र किसी ना किसी प्रकार की हिंसा, विनाश, आत्मपीड़न अथवा गुप्त गतिविधियों के साथ जोड़ा कर देखा जाता है तथा इस नक्षत्र के जातकों में दोहरे व्यक्तित्व को सफलतापूर्वक निभाने की प्रबल क्षमता भी होती है। स्वयं मूर्ख होने का नाटक रच कर दूसरों को मूर्ख बनाने वाले अधिकतर जातक इसी नक्षत्र के प्रबल प्रभाव में होते है|

                        वैदिक ज्योतिष ने पूर्वभाद्रपद नक्षत्र को कईं व्यवसायों से जोड़ा है इसलिए इस नक्षत्र के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातक जासूस, गुप्तचर अथवा इस क्षेत्र से जुड़े कई और लोग, श्मशानभूमि का रखवाला, शव रखने की सामग्री तैयार करने से सम्बन्धित कोई कार्य अथवा अंतिम संस्कार से जुड़ी क्रियाओं, हथियार बनाने उन्हें बेचने अथवा प्रयोग करने जैसे व्यवसाय ,काला जादू अथवा तन्त्र मंत्र, अघोर क्रियाओं तथा इनसे सम्बन्धित व्यवसायों से जुड़े पाए जाते है। ये जातक टी.वी अथवा रंगमंच से जुड़े कलाकार भी हो सकते है तथा आतंकवादी या आतंकवादी संगठनों से किसी प्रकार जुड़े हो सकते हैं।जबकि वहीँ कुछ जातक अपराध क्षेत्र के दूसरे पहलू से जुड़े हो सकते है जैसे पुलिसकर्मी , सेनाकर्मी आदि भी हो सकते हैं। अतः वैदिक ज्योतिष ने इस नक्षत्र को व्यवसायों के पहलू से बहुत विशाल क्षेत्र प्रदान किया है इसलिए इस नक्षत्र को कुछ व्यवसायों तक सीमित करना उचित नहीं होगा। पूर्वभाद्रपद नक्षत्र के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातक रहस्यमयी लेख, भयभीत करने वाले लेख, पत्रकार विशेषतः अपराधिक गतिविधियों, युद्ध, हत्या अथवा ऐसे अन्य क्षेत्रों के बारे में जानकारी देने वाले पत्रकार के पद पर कार्यरत हो सकते हैं।

                      आईये अब चर्चा करते है इस नक्षत्र से जुड़े कुछ अन्य तथा वैदिक ज्योतिष में गुण मिलान तथा कुंडली मिलान की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण माने जाने वाले तथ्यों के बारे में। वैदिक ज्योतिष में पूर्वभाद्रपद को एक पुरुष नक्षत्र माना जाता है तथा इस बात की पुष्टि इस तथ्य पर की जाती है कि इस नक्षत्र का सम्बन्ध बृहस्पति ग्रह है जो कि एक पुरुष ग्रह ही है तथा इस  नक्षत्र का शासक देव अजा एकपद भी पुरुष ही माना जाता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार पूर्वभाद्रपद एक उग्र स्वभाव का नक्षत्र है तथा इस नक्षत्र के कार्यशैली निष्क्रिय पायी जाती है तथा बहुत से वैदिक ज्योतिषी यह मानते है कि इस नक्षत्र का निष्क्रियता की विशेषता ही इस नक्षत्र के प्रभाव वाले जातकों को छदम वेष में सुरक्षित रहने में सहायता करती है। वैदिक ज्योतिष ने इस नक्षत्र को ब्राह्मण वर्ण से जोड़ा है जो कि इस नक्षत्र के स्वभाव तथा कार्यशैली से बिल्कुल विपरीत है। कुछ वैदिक ज्योतिषियों के अनुसार इस नक्षत्र को यह वर्ण इस नक्षत्र के बृहस्पति ग्रह से सम्बन्ध होने के कारण दिया गया है जो कि भारतीय ज्योतिष में ब्राह्मण ग्रह माना जाता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार इस नक्षत्र का गुण सात्विक है तथा यह वर्गीकरण भी इस नक्षत्र को इसके बृहस्पति ग्रह से सम्बन्धित होने के कारण ही मिला प्रतीत होता है। वैदिक ज्योतिष में पूर्वभाद्रपद नक्षत्र का गण मानव माना जाता है तथा वैदिक ज्योतिष आकाश तत्व को भी इस नक्षत्र के साथ जोड़ता है परन्तु एक बार फिर इस गण वर्गीकरण का कोई ठोस कारण दे पाना कठिन है।

लेखक
हिमांशु शंगारी