धनिष्ठा

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                                   वैदिक ज्योतिष की गणनाओं के लिए महत्वपूर्ण माने जाने वाले 27 नक्षत्रों में से धनिष्ठा को  23वां नक्षत्र माना जाता है। धनिष्ठा का शाब्दिक अर्थ है सबसे धनवान तथा वैदिक ज्योतिष के अनुसार इस नक्षत्र का अर्थ है बहुत धनवान तथा लाभकारी नक्षत्र। कई वैदिक ज्योतिषियों का यह मानना है कि किसी कुंडली में इस नक्षत्र का प्रबल प्रभाव उस जातक को अत्यंत सुख समृद्धि तथा मान प्रतिष्ठा का अधिकारी बनाता है तथा इस नक्षत्र के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातक एक सुखमय जीवन जीते हैं। बहुत से वैदिक ज्योतिषी एक ढोल या मृदंग को इस नक्षत्र का मुख्य प्रतीक चिन्ह मानते हैं जो इस नक्षत्र को हर प्रकार के संगीत से जोड़ता है तथा इस के अनुसार इस नक्षत्र के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातकों का संगीत के प्रति गहरा रुझान होता है। कुछ वैदिक ज्योतिष यह भी मानते हैं कि इस नक्षत्र का प्रतीक चिन्ह मृदंग वास्तव में भगवान शिव का डमरू है तथा इस चिन्ह के अंतर्गत ही भगवान शिव का इस नक्षत्र से सम्बन्ध जुड़ता है इस लिए इस नक्षत्र में भगवान शिव की तरह शून्य में से सृजन करने तथा उनके डमरू की तरह खोखली वस्तु से भी संगीत उत्पन्न करने जैसी क्षमता भी पाई जा सकती है। कुछ वैदिक ज्योतिषी बांसुरी को भी धनिष्ठा का दूसरा प्रतीक चिन्ह मानते हैं जो पुनः इस नक्षत्र को संगीत के साथ जोड़ता है तथा जो पुनः एक खोखली वस्तु से संगीत उत्पन्न करने को दर्शाता है।इस का अर्थ यह कि इस नक्षत्र के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातक धनवान, अच्छी रूचियाँ रखने वाले तथा संगीत प्रेमी होते हैं तथा उनमें किसी शून्यता में से भी कुछ उत्पन्न करके दिखाने की क्षमता होती है।

                     वैदिक ज्योतिष ने आठ वसुओं को इस नक्षत्र के अधिपति देवता माना है। वसुओं को भी रुद्रों तथा आदित्यों की भांति देव स्वरुप माना जाता है तथा वसु श्रेष्ठता, सुरक्षा,धन धान्य तथा ऐसी अन्य अच्छी वस्तुओं के ही दूसरे नाम हैं। ये आठ वसु है -: अपः, ध्रुव, धारा, अनिल, सोम , अनल, प्रत्युष तथा प्रभास। धनिष्ठा नक्षत्र में इन आठ वसुओं कि अपनी विशेषताएं पायी जाती हैं जिसके परिणामस्वरूप धनिष्ठा नक्षत्र में व्यवहारिक कौशल, ऊर्जा से भरपूर , ध्रुव की भांति दृढ़ स्वभाव तथा इन आठ वसुओं की अन्य विशेषताएं पायी जाती हैं। धनिष्ठा नक्षत्र में भगवान शिव की नृत्यकला, संगीत कला तथा कई अन्य विशेषताएं प्रदर्शित होती हैं।वैदिक ज्योतिष ने मंगल को इस नक्षत्र का शासक ग्रह माना है जिसके चलते इस नक्षत्र में मंगल ग्रह के कुछ गुण जैसे कि साहस अथवा किसी योद्धा के गुण भी पाए जाते हैं। मंगल ग्रह की ऊर्जा इस नक्षत्र में अपने चरमोत्कर्ष को छूती है तथा कुछ वैदिक ज्योतिषियों के अनुसार इस नक्षत्र में मंगल अपने सर्वोच्च बल को प्राप्त करते हैं जिसके कारण वैदिक ज्योतिष में इन्हें उच्च का मंगल भी कहा जाता है। धनिष्ठा नक्षत्र के पहले दो चरण शनि के प्रभाव में आने वाली मकर राशि में स्थित होते हैं जबकि इस नक्षत्र के शेष दो चरण शनि की ही एक अन्य राशि कुम्भ में स्थित होते है। अतः धनिष्ठा नक्षत्र पर शनि का भी प्रभाव माना जाता है। शनि ग्रह में पायी जाने वाली विशेषताएं जैसे कि व्यवहारिक कौशल, दीर्घ प्रयत्नशीलता तथा अनुशासन धनिष्ठा नक्षत्र में भी प्रदर्शित होती हैं। यही विशेषताएं इस नक्षत्र को लक्ष्य केंद्रित बनाती हैं अर्थात इस नक्षत्र के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातक अपने लक्ष्य को प्राप्ति हेतु निरंतर प्रयासरत रहते हैं |

            धनिष्ठा नक्षत्र के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातक संगीत के प्रति गहरी रूचि रखते हैं तथा उनमें से कुछ संगीत क्षेत्र से व्यवसायिक रूप से जुड भी जाते हैं। धनिष्ठा नक्षत्र के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातक आत्म विश्वास तथा साहस से भरपूर होते हैं जिसका कारण इस नक्षत्र पर मंगल ग्रह का प्रभाव माना जाता है इसीलिए इस नक्षत्र के प्रभाव वाले अधिकतर जातक सेना,पुलिस तथा ऐसे अन्य क्षेत्रों से जुड़े पाए गए हैं। धनिष्ठा नक्षत्र के प्रभाव वाले जातकों में एक अन्य गुण है उनका दृढ़ स्वभाव तथा इसी दृढ़ स्वभाव के चलते ये जातक अपने लक्ष्य प्राप्ति हेतु निरंतर प्रयासरत रहते हैं जब तक कि सफल ना हो जायें। धनिष्ठा नक्षत्र के प्रभाव वाले जातकों में व्यवसाय करने, कूटनीति करने की अच्छी समझ होती है तथा ये विशेषताएं इन जातकों को सफलता की सीढ़ी चढ़ने में सहायता करती हैं। धनिष्ठा नक्षत्र के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातक जीवन में आने वाली हर परिस्थिति में खुश रहते हैं। ये जातक भौतिकवादी स्वभाव के होते हैं विशेषतः जब जातक की कुंडली में  यह नक्षत्र मकर राशि के प्रभाव में हो जबकि यही नक्षत्र यदि कुंडली में कुम्भ राशि के प्रभाव में आ जाए तो उस कुंडली के जातक पर भौतिकवाद के स्थान पर अध्यात्मिक प्रवृति का अधिक प्रभाव होता है। यहाँ यह बात ध्यान देने योग्य है कि धनिष्ठा नक्षत्र के कई जातक इस नक्षत्र पर मंगल के प्रभाव के कारण जिद्दी स्वभाव के होते हैं अतः इसी कारण उन्हें किसी प्रकार के दबाव में लाकर अपनी बात मनवा लेना बहुत कठिन होता है तथा ऐसे जातकों को तर्क के साथ समझा कर अपनी बात मनवा लेना अपेक्षाकृत आसान होता है। धनिष्ठा नक्षत्र के प्रभाव में आने वाले जातक अधिकतर अभिमानी, अड़ियल तथा जिद्दी स्वभाव के होते हैं तथा इसी स्वभाव के कारण इन जातकों को तर्क दे कर ही किसी बात पर आश्वस्त किया जा सकता है ताकि वे अपने निर्णय पर दोबारा विचार कर सके।

            धनिष्ठा नक्षत्र के प्रभाव वाले जातक समाजिक व्यवहार में कुशल होते हैं। वे जानते हैं कि समाजिक सम्बन्ध कैसे बनाए और निभाए जाते हैं यही कारण है कि इन जातकों का समाजिक क्षेत्र बहुत बड़ा होता है तथा इसका एक कारण धनिष्ठा नक्षत्र के जातकों का वाक कौशल का भी होता है। कुछ वैदिक ज्योतिषी यह मानते हैं कि किसी कुंडली में धनिष्ठा नक्षत्र का अत्यधिक प्रभाव उन जातक के विवाह तथा वैवाहिक जीवन के लिए अच्छा नहीं है। ऐसे जातकों को अपने वैवाहिक जीवन में कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है जिसका एक कारण इन जातकों का जिद्दी स्वभाव भी है जो कि उनके वैवाहिक जीवन में वाद-विवाद से होने वाली समस्याओं को जन्म देता है। वैदिक ज्योतिष ने इस नक्षत्र को कई व्यवसायिक क्षेत्रों से जोड़ा है जिनमें धनिष्ठा नक्षत्र के प्रभाव वाले जातक कार्यरत पाए जा सकते हैं।ये हैं – संगीतकार, नर्तक, कलाकार, बांसुरीवादक, ढोलवादक अथवा ऐसे वाद्ययंत्र बजाना जो अंदर से खोखले होते हैं, पुलिसकर्मी, सेनाकर्मी, सुरक्षाकर्मी अथवा सुरक्षा एजेंसी के लिए काम करने वाले व्यक्ति, खिलाड़ी अथवा ऐसे किसी क्षेत्र जिनमें शारीरिक श्रम की आवश्यकता हो। कुछ वैदिक ज्योतिष यह मानते हैं कि किसी कुंडली पर इस नक्षत्र कर कोई विशेष प्रभाव उस कुंडली के जातक को ज्योतिष, आध्यत्मिक अथवा मनोविज्ञान, तांत्रिक, अघोरी अथवा ऐसे किसी क्षेत्र से भी सम्बन्धित कर सकता है।

                आइये अब देखें इस नक्षत्र से जुड़े कुछ अन्य तथ्यों को जिन्हें वैदिक ज्योतिष के अनुसार विवाह कार्यों के लिए प्रयोग की जाने वाली गुण मिलान की प्रणाली में महत्वपूर्ण माना जाता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार धनिष्ठा एक स्त्री नक्षत्र है जोकि एक आश्चर्यजनक बात है क्योंकि इस नक्षत्र के सभी शासक ग्रह तथा देव पुलिंग हैं। वैदिक ज्योतिष के अनुसार धनिष्ठा एक चल स्वभाव का नक्षत्र है तथा यह नक्षत्र हर समय क्रियाशील रहता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार धनिष्ठा को वर्ण से शूद्र माना जाता है जो पुनः एक आश्चर्य में डालने वाला तथ्य है क्योंकि धनिष्ठा नक्षत्र का सम्बन्ध आठ वसुओं से बताया गया है जो कि अच्छी विशेषताओं को प्रदर्शित करते है ना कि बुरी। वैदिक ज्योतिष के अनुसार धनिष्ठा नक्षत्र को गुण से तामसिक तथा गण से राक्षस माना जाता है तथा इस श्रेणी निर्धारण का पुनः कोई ठोस कारण विदित नहीं है हालाँकि कुछ वैदिक ज्योतिषी इस का कारण धनिष्ठा का मंगल तथा शनि से सम्बन्ध मानते हैं। वैदिक ज्योतिष धनिष्ठा नक्षत्र को पंच तत्वों में से आकाश तत्व के साथ जोड़ता है।

लेखक
हिमांशु शंगारी