उत्तराषाढ़

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                          वैदिक ज्योतिष के अनुसार कुंडली से की जाने वाली गणनाओं के लिए महत्वपूर्ण माने जाने वाले सताइस नक्षत्रों में से उत्तराषाढ़ को 21वां नक्षत्र माना जाता है। उत्तराषाढ़ का शाब्दिक अर्थ है बाद में आने वाला अपराजित अथवा बाद में आने वाले अजेय और इस प्रकार उत्तराषाढ़ नक्षत्र भी अपने से पूर्व आने वाले नक्षत्र पूर्वाषाढ़ की भांति ही अपराजित तथा अजेय होने जैसी विशेषताओं का प्रदर्शन करता है। पूर्वाषाढ़ तथा उत्तराषाढ़ नक्षत्र भी उसी प्रकार से जोड़ा बनाते हैं जिस प्रकार पूर्वाफाल्गुणी तथा उत्तरा फाल्गुनी जिसके चलते इन दोनों नक्षत्रों के चरित्र में कुछ समानताएं भी पायीं जातीं हैं। वैदिक ज्योतिष के अनुसार हाथी के दांत को उत्तराषाढ़ नक्षत्र का प्रतीक चिन्ह माना जाता है तथा हाथी दांत का यह प्रतीक चिन्ह हमें इस नक्षत्र की बहुत सी विशेषताओं के बारे में बताता है। हाथी को अपने दांत बहुत प्रिय होते हैं तथा हाथी के दांत उसकी शारीरिक संरचना का सबसे मूल्यवान अंग होते हैं जिसके कारण हाथी दांत प्राप्त करने के लिए हाथियों का शिकार भी किया जाता है। हाथी दांत का बहुत मूल्यवान होना उत्तराषाढ़ नक्षत्र को भी मूल्यवान होने की विशेषता से जोड़ता है जिसक अर्थ है कि इस नक्षत्र के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातकों को समाज में प्रभुत्व तथा प्रतिष्ठा प्राप्त होती है तथा इनके इर्द गिर्द के लोग इन्हें आदर से देखते हैं। हाथी अपने दांत का प्रयोग एक दूसरे के साथ लड़ाई करते समय भी करते हैं जिसके कारण उत्तराषाढ़ नक्षत्र को लड़ाई तथा युद्ध की कला के साथ भी जोड़ा जाता है। कुछ वैदिक ज्योतिषी हाथी दांत को नेतृत्व तथा प्रभुत्व के साथ भी जोड़ते हैं क्योंकि हाथी के दांत इनके समुदाय में इनके प्रभुत्व का निर्णय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं तथा नेतृत्व और प्रभुत्व जैसी ये विशेषताएं उत्तराषाढ़ नक्षत्र के माध्यम से भी प्रदर्शित होतीं हैं।

                        प्राचीन काल में राजा युद्ध के समय हाथी पर बैठ कर जाते थे तथा हाथियों का प्रयोग युद्ध में प्रयोग की जाने वाली सेना की प्रथम पंक्ति में किया जाता था जिसके चलते उत्तराषाढ़ नक्षत्र को प्रभुत्व, शक्ति के प्रदर्शन तथा युद्ध और विजय के साथ भी जोड़ा जाता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार दस विश्वदेवों को उत्तराषाढ़ नक्षत्र के अधिपति देवता माना जाता है जिसके कारण इस नक्षत्र पर इन विश्वदेवों का प्रभाव पड़ता है। विश्वदेवों को शुभता, इच्छाशक्ति, दक्षता, सत्यता, आकांक्षा तथा आभा जैसी विशेषताओं के साथ जोड़ा जाता है तथा विश्वदेवों की ये विशेषताएं उत्तराषाढ़ नक्षत्र के माध्यम से भी प्रदर्शित होतीं हैं तथा इन शुभ विशेषताओं का प्रदर्शन करने के कारण उत्तराषाढ़ नक्षत्र को अच्छाई का प्रतीक भी माना जाता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार विघ्न हर्ता के नाम से विख्यात भगवान श्री गणेश को उत्तराषाढ़ नक्षत्र का अंतिम अधिपति देवता माना जाता है जिसके चलते श्री गणेश की विघ्न दूर करने, युद्ध में अजेय रहने तथा समस्त जगत का कल्याण करने की विशेषताएं भी उत्तराषाढ़ नक्षत्र के माध्यम से प्रदर्शित होतीं हैं जो उत्तराषाढ़ को और भी अधिक सकारात्मक नक्षत्र बना देतीं हैं। वैदिक ज्योतिष के अनुसार नवग्रहों के राजा सूर्य को उत्तराषाढ़ नक्षत्र का अधिपति ग्रह माना जाता है जिसके कारण सूर्य का भी इस नक्षत्र पर प्रभाव पड़ता है और सूर्य की सत्यनिष्ठा, कर्तव्यपरायणता, प्रभुत्व, साहस तथा न्यायप्रियता जैसी विशेषताएं इस नक्षत्र के माध्यम से प्रदर्शित होतीं हैं। सूर्य की आक्रमकता तथा युद्ध करने की विशेषताएं भी इस नक्षत्र के माध्यम से प्रदर्शित होतीं हैं किन्तु उत्तराषाढ़ नक्षत्र के जातक युद्ध तथा आक्रमकता का प्रयोग तभी करते हैं जब ऐसा करना जन कल्याण के लिए आवश्यक हो जाए जिसके कारण वैदिक ज्योतिष में उत्तराषाढ़ नक्षत्र को पूर्वाषाढ़ नक्षत्र की तुलना में कहीं अधिक संतुलित माना जाता है।

                              वैदिक ज्योतिष के अनुसार उत्तराषाढ़ नक्षत्र का पहला चरण धनु राशि में स्थित होता है तथा इस नक्षत्र के शेष तीन चरण मकर राशि में स्थित होते हैं जिसके चलते इस नक्षत्र पर धनु राशि तथा इस राशि के स्वामी ग्रह बृहस्पति तथा मकर राशि तथा इस राशि के स्वामी ग्रह शनि का भी प्रभाव पड़ता है। शनि की व्यवहारिकता तथा अनुशासन जैसी विशेषताएं इस नक्षत्र के माध्यम से प्रदर्शित होतीं हैं जो उत्तराषाढ़ को पूर्वाषाढ़ की तुलना में कहीं अधिक संतुलित नक्षत्र बना देतीं हैं तथा इस नक्षत्र में आधारहीन तथा अव्यवहारिक लक्ष्यों के पीछे भागने की प्रवृति नहीं देखी जाती। उत्तराषाढ़ नक्षत्र के जातकों में संयम भी भरपूर मात्रा में होता है जिसके कारण ये जातक अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए तथा अपने प्रयासों का परिणाम मिलने के लिए प्रतीक्षा करने में भी सक्षम होते हैं किन्तु पूर्वाषाढ़ नक्षत्र के जातकों के विपरीत उत्तराषाढ़ नक्षत्र के जातक किसी कार्य अथवा लक्ष्य के आधारहीन अथवा अव्यवहारिक हो जाने पर उसे छोड़ कर किसी अन्य लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित कर देने की विशेषता भी प्रदर्शित करते हैं जिसके चलते इन जातको का स्वभाव पूर्वाषाढ़ नक्षत्र के जातकों की तुलना में कहीं अधिक संतुलित हो जाता है। मकर राशि के प्रभाव के कारण उत्तराषाढ़ के जातक अनुशासन तथा नियमों की पालना को लेकर कई बार कठोर व्यवहार भी कर देते हैं क्योंकि वैदिक ज्योतिष के अनुसार मकर राशि को अनुशासन, नियम तथा व्यवहारिकता के साथ जोड़ा जाता है। उत्तराषाढ़ नक्षत्र के जातक परंपराओं का सम्मान करने वाले होते हैं तथा परंपराओं को तोड़ने वाले लोग इन जातकों को पसंद नहीं होते तथा कई बार इस नक्षत्र के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातक परंपराओं की अवमानना करने वाले लोगों से कठोर व्यवहार भी करते हैं।

                           कुछ वैदिक ज्योतिषी यह मानते हैं कि उत्तराषाढ़ नक्षत्र के जातकों में उचित और अनुचित में भेद कर सकने की प्रबल क्षमता होती है तथा इन जातकों को केवल अच्छी तथा व्यवहारिक परंपराओं की अवमानना पर ही क्रोध आता है जबकि इस नक्षत्र के जातक अव्यवहारिक तथा हानिकारक हो चुकी परंपराओं को जनहित के लिए स्वयं ही बदल देने की क्षमता भी प्रदर्शित करते हैं। इसी प्रकार उत्तराषाढ़ नक्षत्र के जातक किसी प्रकार के युद्ध अथवा लड़ाई में भी तभी संलग्न होते हैं जब ऐसा करना समाज के एक बड़े वर्ग के हित में हो तथा इस नक्षत्र के जातक आम तौर पर अपने निजि लाभ के लिए युद्ध अथवा लड़ाई को बढ़ावा नहीं देते। अपनी इसी विशेषता के कारण उत्तराषाढ़ के जातक समाज में अपना एक विशेष स्थान बना पाने में सक्षम होते हैं तथा इन जातकों के इर्द गिर्द के लोग इन जातकों का बहुत आदर करते हैं। कुछ वैदिक ज्योतिषी यह मानते हैं कि उत्तराषाढ़ नक्षत्र के जातक युद्ध का आरंभ केवल तभी करते हैं जब शांति बनाए रखने के लिए युद्ध आवश्यक हो जाए तथा इस नक्षत्र के जातक शत्रु को क्षमा कर देने की विशेषता का भी प्रदर्शन करते हैं। ये सारी विशेषताएं उत्तराषाढ़ को अन्य कई नक्षत्रों की तुलना में अधिक संतुलित नक्षत्र बना देतीं हैं तथा इस नक्षत्र के जातक समाज तथा सभ्यता के हित को ध्यान में रखते हुए ही व्यवहार तथा आचरण करते हैं।

                           आइए अब इस नक्षत्र से जुड़े कुछ अन्य तथ्यों के बारे में चर्चा करते हैं जिन्हें वैदिक ज्योतिष के अनुसार विवाह कार्यों के लिए प्रयोग की जाने वाली गुण मिलान की प्रणाली के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। वैदिक ज्योतिष उत्तराषाढ़ को एक स्त्री नक्षत्र मानता है जो इस नक्षत्र पर पड़ने वाले प्रभावों तथा इस नक्षत्र की विशेषताओं को देखते हुए आश्चर्यजनक लगता है। वैदिक ज्योतिष उत्तराषाढ़ नक्षत्र को क्षत्रिय वर्ण प्रदान करता है जिसका कारण इस नक्षत्र का युद्ध कला जैसी विशेषताओं के साथ जुड़ा होने को माना जाता है। वैदिक ज्योतिष में उत्तराषाढ़ नक्षत्र को गण से मानव माना जाता है जिसका कारण भी इस नक्षत्र के आचरण को ही माना जाता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार उत्तराषाढ़ को गुण से सात्विक माना जाता है जिसका कारण बहुत से वैदिक ज्योतिषी इस नक्षत्र पर विश्वदेवों के प्रभाव को तथा इस तथ्य को मानते हैं कि उत्तराषाढ़ नक्षत्र के जातक इस उर्जा का प्रयोग जन हित तथा विश्व शांति के कार्यों के लिए ही करते हैं जो अपने आप में एक सात्विक गुण माना जाता है। वैदिक ज्योतिष पंच तत्वों में से वायु तत्व को उत्तराषाढ़ नक्षत्र के साथ जोड़ता है।

लेखक
हिमांशु शंगारी