पूर्वाषाढ़

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                     वैदिक ज्योतिष के अनुसार कुंडली से गणनाएं करने के लिए महत्वपूर्ण माने जाने वाले सताइस नक्षत्रों में से पूर्वाषाढ़ को 20वां नक्षत्र माना जाता है। पूर्वाषाढ़ का शाब्दिक अर्थ है पहले आने वाला अपराजित अथवा पहले आने वाला अजेय तथा इसी के अनुसार वैदिक ज्योतिष में इस नक्षत्र को अजेय तथा अपराजित रहने के साथ जोड़ा जाता है तथा अनेक वैदिक ज्योतिषी यह मानते हैं कि पूर्वाषाढ़ नक्षत्र के प्रबल प्रभाव वाले जातक अपने जीवन में कभी हार नहीं मानते तथा सफलता प्राप्त हो जाने तक संघर्ष करते रहते हैं। वैदिक ज्योतिष के अनुसार हाथ के पंखे को पूर्वाषाढ़ नक्षत्र का प्रतीक चिन्ह माना जाता है जो अपने विभिन्न उपयोगों के माध्यम से विभिन्न प्रकार की विशेषताएं प्रदर्शित करता है। हाथ के पंखे का प्रयोग गर्मी से राहत पाने के लिए किया जाता है तथा इसी के अनुसार पूर्वाषाढ़ नक्षत्र के जातक भी कठिन से कठिन समय में भी अपने आप को शांत रखकर तथा किसी प्रकार की गर्मी न दिखा कर समय तथा परिस्थितियों के अपने पक्ष में होने की प्रतीक्षा करने में सक्षम होते हैं। जिस प्रकार हाथ के पंखे को चलाने के लिए लगातार परिश्रम की आवश्यकता होती है उसी प्रकार पूर्वाषाढ़ के जातक भी किसी कार्य को करने के लिए कठिन से कठिन परिश्रम करने में सक्षम होते हैं। प्राचीन काल में एक प्रकार के हाथ के पंखे का प्रयोग अग्नि को जलाए रखने के लिए तथा उसे तेज करने के लिए भी किया जाता था तथा पूर्वाषाढ़ नक्षत्र के जातकों में भी अपने भीतर इतनी आवश्यक अग्नि जलाए रखने की क्षमता होती है जो इन्हें लंबे समय तक अपने लक्ष्य के लिए कार्य करते रहने में सहायता करती है। अग्नि को हवा देना एक नकारात्मक विशेषता भी माना जाता है जिसके चलते पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के जातकों में आक्रमकता भी देखने को मिलती है।

                              हाथ के पंखे का प्रयोग कुछ प्राचीन सभ्यताओं में सजावट तथा सुंदरता के प्रदर्शन के लिए भी किया जाता था तथा आज भी जापान जैसे देशों में स्त्रियां इन पंखों का प्रयोग सुंदरता का प्रदर्शन करने के लिए करतीं हैं तथा इसी प्रकार पूर्वाषाढ़ नक्षत्र को भी सुंदरता तथा सुंदरता के प्रदर्शन तथा दिखावा करने की प्रवृति के साथ जोड़ा जाता है। सुंदरता तथा सुंदरता के प्रदर्शन की विशेषताओं को भौतिक जीवन जीने की कला के साथ जोड़ा जाता है तथा इसी के अनुसार पूर्वाषाढ़ नक्षत्र के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातक जीवन को जीने की कला जानने वाले होते हैं हाथ के पंखे का प्रयोग कहीं कहीं मुख को छिपाने के लिए भी किया जाता है तथा इसी प्रकार पूर्वाषाढ़ नक्षत्र को भी रहस्य छिपाने के साथ जोड़ा जाता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार अप: नामक जल की एक देवी को पूर्वाषाढ़ नक्षत्र की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है जिसके कारण अप: के चरित्र की बहुत सी विशेषताएं इस नक्षत्र के माध्यम से प्रदर्शित होतीं हैं। अप: की रहस्यमयी तथा गुप्त रहने जैसी विशेषताएं इस नक्षत्र के माध्यम से प्रदर्शित होतीं हैं जिनके चलते इस नक्षत्र के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातक रहस्यमयी, गुप्त तथा भेद को छिपाने वाले होते हैं। अप: को स्वभाव से दयालु देवी माना जाता है किन्तु समय की मांग के अनुसार अप: बहुत क्रूर देवी का रूप धारण करने में भी सक्षम है जिसके चलते इस नक्षत्र के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातक भी समय की मांग पर अथवा कई बार अपने स्वार्थ को सिद्ध करने के लिए क्रूरता से काम ले सकते हैं।

                            वैदिक ज्योतिष के अनुसार नवग्रहों में से शुक्र को पूर्वाषाढ़ नक्षत्र का अधिपति ग्रह माना जाता है जिसके चलते इस नक्षत्र पर शुक्र का प्रभाव भी पड़ता है तथा शुक्र की सुंदरता तथा सुंदरता का प्रदर्शन जैसीं विशेषताएं इस नक्षत्र के माध्यम से प्रदर्शित होतीं हैं। शुक्र का पूर्वाषाढ़ नक्षत्र पर प्रभाव इसे जीवन से प्रेम करने वाला तथा जीवन को जीने की कला जानने वाला नक्षत्र बना देता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार पूर्वाषाढ़ नक्षत्र के चारों चरण धनु राशि में स्थित होते हैं जिसके चलते इस नक्षत्र पर धनु राशि तथा इस राशि के स्वामी ग्रह बृहस्पति का प्रभाव भी पड़ता है तथा बृहस्पति की कुछ विशेषताएं जैसे कि महात्वाकांक्षी होना, आशावादी होना, प्रसन्न रहकर जीवन को जीना तथा विस्तार के लिए प्रयासरत रहना आदि इस नक्षत्र के माध्यम से प्रदर्शित होतीं हैं। इस प्रकार विभिन्न प्रकार की शक्तियों के प्रभाव में आने के कारण पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र विभिन्न कुंडलियों में एक दूसरे से भिन्न आचरण कर सकता है जिसका निर्धारण किसी कुंडली विशेष में इस नक्षत्र पर प्रभाव डालने वालीं शक्तियों के बल तथा स्वभाव को देख कर किया जाता है। आम तौर पर पूर्वाषाढ़ नक्षत्र के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातक प्रबल इच्छा शक्ति के स्वामी होते हैं जिसके कारण ये जातक अपने रास्ते में आने वाली रुकावटों तथा असफलताओं से विचलित नहीं होते तथा अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहते हैं। पूर्वाषाढ़ नक्षत्र के जातकों में अपार संयम होता है तथा ये जातक अपने द्वारा किये गए प्रयास का फल मिलने के लिए बहुत लंबे समय तक प्रतीक्षा करने में सक्षम होते हैं तथा अपनी इस विशेषता के चलते कई बार ये जातक किसी परिणाम की प्राप्ति के लिए आवश्यकता से भी बहुत अधिक समय तक प्रतीक्षा करते रहते हैं जिसके कारण इन जातकों का बहुत सा समय प्रतीक्षा में ही व्यर्थ हो जाता है। पूर्वाषाढ़ नक्षत्र के अधिकतर जातकों के लिए पराजय स्वीकार कर लेना बहुत ही कठिन होता है जिसके चलते ये जातक अपने जीवन में कई बार ऐसे लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए भी बहुत लंबे समय तक प्रयास करते रहते हैं जिनकी प्राप्ति की सभी संभावनाएं बहुत समय पहले ही समाप्त हो गईं हों। इसलिए पूर्वषाढ़ नक्षत्र के जातकों को समय समय पर व्यवहारिकता से काम लेने की आदत डालनी चाहिए जिससे इन्हें अपने प्रयासों को उचित दिशा देने में सहायता मिले।

                      पूर्वाषाढ़ नक्षत्र सभी नक्षत्रों में से संभवत: सबसे अधिक आशावादी नक्षत्र है जिसका कारण आशावाद से जुड़े बृहस्पति तथा धनु राशि का इस नक्षत्र पर पड़ने वाला प्रभाव है जिसके कारण पूर्वाषाढ़ नक्षत्र के जातकों को अपने द्वारा किये जाने वाले प्रत्येक प्रयास का सकारात्मक परिणाम मिलने का पूरा विश्वास होता है। कुछ वैदिक ज्योतिषी यह मानते हैं कि पूर्वाषाढ़ नक्षत्र के जातकों का यही प्रबल आशावाद तथा आत्मविश्वास कई बार इन्हें संकट में भी डाल देता है क्योंकि पूर्वाषाढ़ नक्षत्र के जातक कई बार इसी आशावाद तथा आत्मविश्वास के चलते लगभग असंभव प्रतीत होने वाले कार्यों को करने का प्रयास भी करते हैं क्योंकि इन जातकों का मानना होता है कि संसार में ऐसा कोई कार्य नहीं है जो इनके लिए असंभव हो। पूर्वाषाढ़ के जातकों के लिए किसी काम को बीच में ही छोड़ देना बहुत कठिन होता है जिसके चलते कई बार ये जातक ऐसे किसी कार्य को पूरा करने में बहुत समय तथा साधन व्यर्थ कर देते हैं जिसके होने की कोई संभावना ही शेष न रह गयी हो। पूर्वाषाढ़ के जातकों में अव्यवहारिक लक्ष्यों को प्राप्त करने की प्रबल रूचि भी पायी जाती है जिसके चलते ये जातक अपना बहुत सा समय ऐसे ही अव्यवहारिक लक्ष्यों की प्राप्ति में व्यर्थ गंवा देते हैं। पूर्वाषाढ़ नक्षत्र के जातक पराजय के विचार को भी सहन नहीं कर सकते तथा पराजय के बिल्कुल सपष्ट दिखने पर ये जातक चरम प्रतिक्रियाएं भी कर देते हैं जिनमे आत्महत्या तथा किसी अन्य व्यक्ति की हत्या भी सम्मिलित है। अपने लक्ष्य को अपने से छिनता देखकर पूर्वाषाढ़ के जातक बहुत उग्र, निष्ठुर तथा हिंसक भी हो सकते हैं तथा किसी प्रकार की विनाशकारी लीला को भी अंजाम दे सकते हैं। पूर्वाषाढ़ के जातक अपनी भौतिक स्थितियों को सुधारने के लिए निरंतर प्रयास करते रहते हैं तथा शुक्र के प्रभाव के कारण इन जातकों में सुंदरता अथवा किसी उपलब्धि का बाहरी प्रदर्शन करने की प्रवृति भी प्रबल होती है।

                          आइए अब चर्चा करते हैं इस नक्षत्र से जुड़े कुछ अन्य तथ्यों के बारे में जिन्हें वैदिक ज्योतिष के अनुसार विवाह कार्यों में प्रयोग की जाने वाली गुण मिलान की विधि के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। वैदिक ज्योतिष पूर्वाषाढ़ को एक स्त्री नक्षत्र मानता है जिसका कारण इस नक्षत्र का अप: तथा शुक्र के साथ संबंध माना जाता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार पूर्वाषाढ़ नक्षत्र को वर्ण से ब्राह्मण माना जाता है जिसका कारण इस नक्षत्र का बृहस्पति तथा शुक्र जैसे ग्रहों के साथ जुड़ा होना माना जाता है क्योंकि वैदिक ज्योतिष के अनुसार इन दोनों ग्रहों को ही ब्राहमण माना जाता है। वैदिक ज्योतिष पूर्वाषाढ़ नक्षत्र को गुण से राजसिक तथा गण से मानव मानता है जिसका कारण इस नक्षत्र का भौतिक सुखों की प्रबल लालसा रखना माना जाता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार पंच तत्वों में से पूर्वाषाढ़ नक्षत्र को वायु तत्व के साथ जोड़ा जाता है तथा अनेक वैदिक ज्योतिषी यह मानते हैं कि वायु तत्व का इस नक्षत्र पर प्रभाव होने के कारण भी इस नक्षत्र के जातक अव्यवहारिक तथा आधारहीन लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए प्रयास करते हैं।

लेखक
हिमांशु शंगारी