अनुराधा

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                   वैदिक ज्योतिष के अनुसार कुंडली से गणनाएं करने के लिए महत्वपूर्ण माने जाने वाले सताइस नक्षत्रों में से अनुराधा को 17वां नक्षत्र माना जाता है। अनुराधा का शाब्दिक अर्थ है राधा के बाद आने वाली अथवा राधा जैसी। राधा शब्द को वैदिक ज्योतिष में सफलता, आनंद तथा सौभाग्य के साथ जोड़ा जाता है जिसके चलते अनुराधा नक्षत्र को भी इन विशेषताओं के साथ जोड़ा जाता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार तपस्वियों द्वारा धारण किये जाने वाले दंड को अनुराधा नक्षत्र का प्रतीक चिन्ह माना जाता है। यहां पर यह बात ध्यान देने योग्य है कि सिद्ध तपस्वियों द्वारा धारण किया जाने वाला दंड देखने में तो किसी साधारण से डंडे के समान ही लगता है किन्तु इस दंड के भीतर इन तपस्वियों की वर्षों की तपस्या से प्राप्त की हुई शक्ति वास करती है जिसका प्रयोग समय समय पर इन तपस्वियों द्वारा आत्मरक्षा के लिए तथा दुर्जनों को दंड देने के लिए किया जाता है। सिद्ध तपस्वी अपने इस शक्तिशाली दंड का प्रयोग कभी भी विनाश लीला करने के लिए अथवा अपना स्वार्थों की पूर्ति के लिए नहीं करते बल्कि इस दंड का प्रयोग वे केवल आवश्यकता पड़ने पर तथा हितकारी कामों के लिए ही करते हैं। इस प्रकार अनुराधा नक्षत्र के प्रतीक चिन्ह के रूप में प्रयोग होने वाला यह दंड इस नक्षत्र को बुद्धिमता, विवेक, संरक्षण की क्षमता, शक्ति धारण करने तथा उस शक्ति का सदुपयोग करने की क्षमता के साथ जोड़ता है तथा ये सारी विशेषताएं इस नक्षत्र के नाम से प्रकट हुइं विशेषताओं जैसे कि सफलता तथा सौभाग्य आदि के साथ जुड़ कर इस नक्षत्र के माध्यम से प्रदर्शित होतीं हैं। वैदिक ज्योतिष के अनुसार कमल के फूल को भी अनुराधा नक्षत्र का प्रतीक चिन्ह माना जाता है। कमल के फूल को देवी सरस्वती का आसन माना जाता है जिसके चलते कमल के फूल को विद्या, ज्ञान, प्रकाश तथा शुभता के साथ जोड़ा जाता है और कमल के फूल की ये सारी विशेषताएं भी अनुराधा नक्षत्र के माध्यम से प्रदर्शित होतीं हैं जिसके चलते वैदिक ज्योतिष में अनुराधा को एक शुभ नक्षत्र माना जाता है।

                       बारह आदित्यों में से एक माने जाने वाले मित्र देव को वैदिक ज्योतिष के अनुसार अनुराधा नक्षत्र का अधिपति देवता माना जाता है जिसके कारण इस नक्षत्र पर मित्र देव का भी प्रभाव पड़ता है। मित्र देव अपने नाम के अर्थ के साथ मेल खातीं विशेषताओं जैसे कि मित्र बनाना, मित्रों की सहायता करना तथा मित्रों से सहायता प्राप्त करना, दूसरे लोगों की सहायता करना तथा उदारता आदि जैसी विशेषताओं के स्वामी हैं तथा मित्र देव की ये सभी विशेषताएं अनुराधा नक्षत्र के माध्यम से प्रदर्शित होतीं हैं। मित्र देव को जीवन के प्रत्येक स्तर पर मित्रता को प्रोत्साहित करने की विशेषता के लिए जाना जाता है जिसके चलते अनुराधा को एक ऐसा नक्षत्र माना जाता है जो विश्व बंधुत्व की भावना से काम करता है तथा इस नक्षत्र के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातक जीवन भर मित्र बनाते रहते हैं, मित्रों की सहायता करते रहते हैं, मित्रों की सहायता प्राप्त करके अपने कई कार्यों में सफलता प्राप्त करते हैं तथा अकेले कार्य करने की अपेक्षा समूह में काम करने में रूचि दिखाते हैं। वैदिक ज्योतिष के अनुसार देवी सरस्वती को भी अनुराधा नक्षत्र की देवी के रूप में जाना जाता है जिसके चलते देवी सरस्वती के चरित्र की कुछ विशेषताएं जैसे कि संगीत, कला तथा प्रत्येक प्रकार की विद्या और ज्ञान को सीखने की क्षमता आदि भी इस नक्षत्र के माध्यम से प्रदर्शित होतीं हैं।

                           नवग्रहों में से शनि ग्रह को वैदिक ज्योतिष के अनुसार अनुराधा नक्षत्र का अधिपति ग्रह माना जाता है जिसके कारण इस नक्षत्र पर शनि ग्रह का भी प्रभाव पड़ता है और फलस्वरूप शनि की कुछ विश्षताएं जैसे व्यवहारिकता, विश्लेषणात्मक क्षमता तथा अनुशासन आदि इस नक्षत्र के माध्यम से प्रदर्शित होतीं हैं। इन सभी विशेषताओं के कारण अनुराधा नक्षत्र अपने से पूर्व आने वाले नक्षत्र विशाखा की तुलना में बहुत संतुलित नक्षत्र बन जाता है तथा इस नक्षत्र के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातक अपने जीवन में अधिकतर निर्णय अपने विवेक तथा व्यवहारिकता से लेते हैं तथा अनुराधा नक्षत्र के इन जातकों का विशाखा नक्षत्र के जातकों की भांति पथ भ्रष्ट हो जाना अथवा अनुचित निर्णय लेते रहना बहुत कठिन होता है। अनुराधा नक्षत्र के जातक अधिकतर परिस्थितियों में उचित तथा अनुचित का विचार करके तथा अपने विवेक का प्रयोग करके सही निर्णय ही लेते हैं। वैदिक ज्योतिष के अनुसार अनुराधा नक्षत्र के चारों चरण वृश्चिक राशि में स्थित होते हैं जिसके चलते इस नक्षत्र पर वृश्चिक राशि तथा इस राशि के स्वामी ग्रह मंगल का प्रभाव भी पड़ता है तथा इस कारण मंगल के चरित्र की कुछ विशेषताएं भी इस नक्षत्र के माध्यम से प्रदर्शित होतीं हैं। मंगल को वैदिक ज्योतिष में उर्जा तथा मित्रता के साथ जुड़ा हुआ ग्रह माना जाता है तथा मंगल की ये विशेषताएं अनुराधा नक्षत्र के माध्यम से प्रदर्शित होतीं हैं जिसके कारण अनुराधा नक्षत्र के जातक मित्र बनाने में तथा मित्रों की सहायता से कठिन से कठिन कार्य भी कर लेने में सक्षम होते हैं। अनुराधा नक्षत्र के जातकों में सीखने की प्रबल क्षमता होती है जिसके चलते ये जातक अपने जीवन काल में बहुत से नए विषयों पर ज्ञान प्राप्त करते हैं। अनुराधा नक्षत्र के जातकों में जटिल गणनाओं को भी आसानी से कर लेने की क्षमता होती है जिसके चलते इस नक्षत्र के जातक उन व्यवसायिक क्षेत्रों में सफल देखे जाते हैं जिनमें सफलता प्राप्त करने के लिए तेज गणनाएं करने की आवश्यकता होती है।

                          वृश्चिक राशि का अनुराधा नक्षत्र पर प्रभाव इस नक्षत्र को रहस्यवाद के साथ जोड़ता है क्योंकि वैदिक ज्योतिष में वृश्चिक राशि को रहस्यों की राशि माना जाता है। इस प्रभाव के चलते तथा अपनी कुशल गणनात्मक क्षमता के चलते अनुराधा नक्षत्र के जातक ज्योतिष, अंक गणित, खगोल शास्त्र तथा ऐसे ही अन्य क्षेत्रों में भी सफल देखे जाते हैं। अनुराधा नक्षत्र के जातकों का वाणी कौशल भी अच्छा होता है तथा ऐसे जातक प्राय: किसी भी उम्र तथा किसी भी प्रकार के लोगों के साथ शीघ्र ही घुल मिल जाते हैं तथा लगभग प्रत्येक प्रकार के लोग इनकी संगत में बहुत शीघ्रता से सहज हो जाते हैं। अनुराधा नक्षत्र वैश्विक बंधुत्व को प्रोत्साहित करने वाला नक्षत्र है जिसके चलते इस नक्षत्र के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातक के मित्र विभिन्न उम्रों, देशों, जातियों तथा सभ्यताओं से संबंध रखने वाले होते हैं। मंगल के इस नक्षत्र पर प्रबल प्रभाव के कारण अनुराधा नक्षत्र के जातक समाज की पुरानी तथा निरर्थक हो चुकी परंपराओं तथा प्रथाओं को बदल देने की क्षमता रखते हैं तथा इस नक्षत्र के प्रबल प्रभाव में आने वाले कुछ विशेष जातक अपने जीवन काल में बहुत सी निरर्थक परंपराओं का अंत करके नई तथा सार्थक परंपराओं की नींव रखते हैं। शनि का इस नक्षत्र पर प्रभाव इन जातकों को जन समुदाय के साथ जुड़ने की क्षमता देता है जबकि मंगल का इस नक्षत्र पर प्रभाव इन जातकों को परिवर्तन लाने के लिए आवश्यक साहस तथा क्षमता प्रदान करता है क्योंकि मंगल को वैदिक ज्योतिष में उर्जा तथा क्रांति के साथ जुड़ा ग्रह माना जाता है तथा मंगल का अनुराधा नक्षत्र पर प्रभाव इस नक्षत्र के जातकों को भी क्रांतिकारी बना देता है। अनुराधा नक्षत्र के जातकों में नया से नया सीखने तथा नई से नई दुनिया की खोज करने की प्रबल रूचि होती है जिसके चलते ये जातक बहुत से देशों में भ्रमण करते हैं तथा बहुत सी विदेशी भाषाओं का ज्ञान भी प्राप्त करते हैं तथा इस नक्षत्र के कुछ जातक तो स्थायी तौर पर किसी विदेशी भूमि में ही बस जाते हैं। अनुराधा नक्षत्र के जातकों में परिस्थितियों के अनुसार अपने आप को ढाल लेने की प्रबल क्षमता होती है जिसके चलते ये जातक नई से नई परिस्थितियों में भी अपने आप को शीघ्र ही सहज कर लेते हैं।

                      आईए अब चर्चा करते हैं इस नक्षत्र से जुड़े कुछ अन्य तथ्यों के बारे में जिन्हें वैदिक ज्योतिष के अनुसार विवाह कार्यों के लिए प्रयोग की जाने वाली गुण मिलान की विधि के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। वैदिक ज्योतिष अनुराधा नक्षत्र को एक पुरुष नक्षत्र मानता है जिसका कारण बहुत से वैदिक ज्योतिषी इस नक्षत्र का मित्र, मंगल तथा शनि के साथ संबंध मानता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार अनुराधा नक्षत्र को वर्ण से शूद्र तथा गुण से तामसिक माना जाता है जिसका कारण अधिकतर वैदिक ज्योतिषी इस नक्षत्र का शनि तथा मंगल के साथ संबंध मानते हैं। वैदिक ज्योतिष अनुराधा नक्षत्र को देव गण प्रदान करता है जिसका कारण अधिकतर वैदिक ज्योतिषी इस नक्षत्र का मित्र देव के साथ संबंध तथा इस नक्षत्र की विशेषताओं को मानते हैं। अनुराधा नक्षत्र वैश्विक बंधुत्व को प्राप्त करने की दिशा में प्रयत्नशील रहता है तथा इस विशेषता को देवताओं के साथ जोड़ा जाता है। वैदिक ज्योतिष पंच तत्वों में से अग्नि तत्व को अनुराधा नक्षत्र के साथ जोड़ता है जिसका कारण इस नक्षत्र पर आग्नेय प्रवृति वाले ग्रह मंगल का प्रभाव माना जाता है। 

लेखक
हिमांशु शंगारी