विशाखा

Important Yogas in Vedic Astrology
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                          वैदिक ज्योतिष के अनुसार कुंडली से गणनाएं करने के लिए महत्वपूर्ण माने जाने वाले सताइस नक्षत्रों में से विशाखा को 16वां नक्षत्र माना जाता है। विशाखा का शाब्दिक अर्थ है विभाजित अथवा एक से अधिक शाखाओं वाला और इसी के अनुसार वैदिक ज्योतिष में यह माना जाता है कि विशाख नक्षत्र के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातक अपने जीवन में कई बार ऐसी परिस्थितियों का सामना करते हैं जब भाग्य इनके सामने एक से अधिक अथवा दो रास्ते या विकल्प रख देता है तथा इन जातकों की सफलता या असफलता इन दो रास्तों में से उचित या अनुचित विकल्प चुनने पर निर्भर करती है। भारतवर्ष में विवाह आदि जैसे कार्यों के लिए प्रयोग किये जाने वाले एक सुसज्जित द्वार को वैदिक ज्योतिष के अनुसार विशाखा नक्षत्र का प्रतीक चिन्ह माना जाता है। जिस प्रकार सुसज्जित द्वार का प्रयोग आम तौर पर किसी खुशी अथवा उपलब्धि के बाहरी दिखावे अथवा प्रदर्शन के लिए किया जाता है उसी प्रकार विशाखा नक्षत्र के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातक भी बाहरी दिखावे तथा प्रदर्शन में बहुत विश्वास रखने वाले होते हैं तथा ऐसे जातक अपने जीवन काल में समय समय पर प्राप्त होने वालीं उपलब्धियों का बाहरी प्रदर्शन अन्य बहुत से नक्षत्रों के जातकों की तुलना में कहीं अधिक करते हैं। यहां पर यह बात ध्यान देने योग्य है कि सुसज्जित द्वारों का प्रयोग आम तौर पर लोग अपनी समृद्धि, शक्ति तथा सामर्थ्य का प्रदर्शन करने के लिए ही करते हैं अथवा किसी ऐसी घटना की खुशी मनाने के लिए करते हैं जो उनके जीवन में नए अध्याय का आरंभ दर्शाती हो। इस प्रकार वैदिक ज्योतिष में विशाखा नक्षत्र को खुशी, उपलब्धि अथवा नए आरंभ के बाहरी प्रदर्शन के साथ तथा सुंदरता के साथ जोड़ा जाता है क्योंकि इन सभी उपलक्ष्यों में मनाए जाने वाले उत्सव सुंदरता से भरपूर होते हैं।

                     वैदिक ज्योतिष के अनुसार विशाखा नक्षत्र को दो अधिपति देवताओं के साथ जोड़ा जाता है जिनमें से पहले हैं देवताओं के राजा इन्द्र तथा दूसरे हैं पंच तत्वों में से अग्नि तत्व के स्वामी अग्नि देव तथा इसी कारण विशाखा नक्षत्र पर इन दोनों अधिपति देवताओं का प्रभाव रहता है। इन्द्र देव तथा अग्नि देव चरित्र एक दूसरे से भिन्न होने के कारण इन दोनों देवताओं का प्रभाव इस नक्षत्र को भी विभिन्न प्रकार की विशेषताओं का मिश्रण बना देता है। इन्द्र को स्वर्ग लोक तथा देवताओं का राजा माना जाता है जिनमें अग्नि देव भी शामिल हैं। इन्द्र को वैदिक ज्योतिष के अनुसार एक लक्ष्य केंद्रित देवता माना जाता है जो अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए उचित तथा अनुचित का विचार किए बिना किसी भी प्रकार के कार्य को कर देते हैं तथा अपनी इसी विशेषता के चलते इन्द्र कई बार ऐसे कार्य भी कर देते हैं जिन्हें वैदिक ज्योतिष की दृष्टि से अनुचित माना जाता है। उदाहरण के लिए इन्द्र ने एक बार राक्षसों के तत्कालीन राजा हिरण्यक्षिपु की गर्भवती पत्नी को मारने की चेष्टा की थी। हिरण्यक्षिपु शक्ति प्राप्ति के लिए ब्रह्मा जी की कठोर तपस्या कर रहा था तथा इन्द्र को यह भय हो गया था कि हिरण्यक्षिपु तपस्या से प्राप्त शक्ति के बल पर उनसे स्वर्ग लोक का राज्य छीन लेगा तथा इसी कारण इन्द्र ने हिरण्यक्षिपु की तपस्या भंग करने के लिए उसकी गर्भवती पत्नि का अपहरण कर लिया और हिरण्यक्षिपु को धमकी दी कि यदि उसने अपनी तपस्या को भंग नहीं किया तो वह उसकी गर्भवती पत्नि की हत्या कर देंगे जिसके साथ ही उसका पुत्र भी मृत्यु को प्राप्त हो जाएगा। बाद में देव ॠषि नारद ने हस्ताक्षेप करके इन्द्र को यह अनुचित कार्य करने से रोका तथा हिरण्यक्षिपु की गर्भवती पत्नि को देवर्षि नारद ने अपनी सुरक्षा में ले लिया।

                          उपरोक्त उदाहरण से यह सपष्ट हो जाता है कि इन्द्र एक लक्ष्य केंद्रित देवता हैं तथा अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए वे किसी भी प्रकार के उचित अथवा अनुचित कार्य को कर सकते हैं। किसी गर्भवती स्त्री की हत्या करना वैदिक ज्योतिष के अनुसार बहुत अनुचित कार्य माना जाता है परन्तु इन्द्र अपना सिंहासन बचाने के लिए इस कार्य को करने के लिए भी तत्पर हो गए थे जिससे उनकी लक्ष्य केंद्रित प्रवृति पूर्ण रूप से सपष्ट हो जाती है। इन्द्र के प्रबल प्रभाव में आने के कारण विशाखा नक्षत्र के जातक भी अपने जीवन काल में अनेक बार किसी लक्ष्य की प्राप्ति के लिए उचित तथा अनुचित की चिंता किये बिना ऐसे कार्य कर देते हैं जो बाद में इन जातकों को कठिनाई में डाल सकते हैं। इन्द्र अपनी मदिरापान, स्त्रियों के प्रति अपनी आसक्ति तथा प्रत्येक प्रकार के आनंद का भोग करने के लिए तत्पर रहने जैसी विशेषताओं के लिए भी जाने जाते हैं तथा इन्द्र के चरित्र के ये विशेषताएं भी विशाखा नक्षत्र के माध्यम से प्रदर्शित होतीं हैं जिसके चलते इस नक्षत्र के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातकों में इन्द्रियों का सुख भोगने की लालसा अन्य बहुत से नक्षत्रों के जातकों की तुलना में कहीं अधिक होती है। विशाखा नक्षत्र से जुड़े दूसरे देवता अग्नि देव का चरित्र इन्द्र से बिल्कुल भिन्न माना जाता है तथा वैदिक ज्योतिष के अनुसार अग्नि देव को उचित तथा अनुचित का विचार करके आचरण करने वाला देवता माना जाता है जिसके चलते अग्नि देव का विशाखा नक्षत्र पर पड़ने वाला प्रभाव जहां एक ओर इस नक्षत्र को अपने लक्ष्य प्राप्त करने के लिए आवश्यक उर्जा प्रदान करता है वहीं दूसरी ओर अग्नि देव का विशाखा नक्षत्र पर प्रभाव इस नक्षत्र को उचित तथा अनुचित में अंतर करके आचरण करने की विशेषता भी प्रदान करता है। इस प्रकार विशाखा नक्षत्र के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातक का चरित्र तथा आचरण बहुत सीमा तक इस तथ्य पर निर्भर करता है कि उसकी कुंडली में विशाखा नक्षत्र पर अधिक प्रभाव इन्द्र का है या अग्नि का।

                         नवग्रहों में से बृहस्पति को वैदिक ज्योतिष के अनुसार विशाखा नक्षत्र का अधिपति ग्रह माना जाता है जिसके कारण बृहस्पति का भी इस नक्षत्र पर प्रभाव पड़ता है। इन्द्र का इस नक्षत्र पर प्रबल प्रभाव होने के कारण बृहस्पति के चरित्र की कुछ नकारात्मक विशेषताएं भी इस नक्षत्र के माध्यम से प्रदर्शित होतीं हैं। बृहस्पति की लक्ष्य प्राप्ति के लिए कार्यरत रहने की क्षमता अथा आशावाद जैसीं विशेताओं का विशाखा नक्षत्र के माध्यम से नकारात्मक उपयोग हो सकता है क्योंकि इस नक्षत्र के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातक बृहस्पति की इन विशेषताओं का प्रयोग अनुचित लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए भी कर सकते हैं। वैदिक ज्योतिष के अनुसार विशाखा नक्षत्र के पहले तीन चरण तुला राशि में स्थित होते हैं जबकि इस नक्षत्र का चौथा चरण वृश्चिक राशि में स्थित होता है जिसके कारण इस नक्षत्र पर तुला राशि तथा इस राशि के स्वामी ग्रह शुक्र का और वृश्चिक राशि तथा इस राशि के स्वामी ग्रह मंगल का प्रभाव भी पड़ता है। इस प्रकार विशाखा नक्षत्र पर इन्द्र तथा अग्नि जैसे दो भिन्न स्वभावों वाले देवताओं की भांति बृहस्पति तथा शुक्र जैसे दो भिन्न चरित्रों वाले ग्रहों का भी प्रभाव पड़ता है जिसके कारण विशाखा एक जटिल नक्षत्र बन जाता है तथा इसकी उर्जा समय समय पर इन विभिन्न प्रभावों के चलते असंतुलित भी हो जाती है। कुछ वैदिक ज्योतिषी यह मानते हैं कि एक दूसरे से भिन्न देवताओं तथा ग्रहों के प्रभाव में आने के कारण ही इस नक्षत्र का नाम विशाखा रखा गया है क्योंकि इस नक्षत्र की उर्जा विभिन्न प्रभावों में विभाजित है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार बृहस्पति तथा शुक्र स्वभाव में एक दूसरे से लगभग विपरीत हैं तथा विशाखा नक्षत्र के माध्यम से शुक्र की विशेषताओं का ही अधिक प्रदर्शन होने की संभावना रहती है क्योंकि इस नक्षत्र के अधिपति देवता इंद्र की मदिरापान, भोग विलास में लिप्त रहने तथा उपलब्धियों का दिखावा करने के लिए उत्सव आयोजित करने की विशेषताएं शुक्र की विशेषताओं से ही मेल खातीं हैं। इसी के अनुसार विशाखा नक्षत्र के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातकों में लक्ष्य प्राप्ति की प्रबल अभिलाषा रहती है तथा ऐसे जातक आम तौर पर लक्ष्य के उचित या अनुचित होने का विचार नहीं करते जिसके कारण विशाखा नक्षत्र के जातकों की अनुचित अथवा अवैध कार्यों में संलग्न होने की भी आशंका रहती है क्योंकि इस नक्षत्र के जातकों के लिए लक्ष्य मायने रखता है, लक्ष्य को प्राप्त करने का ढंग नहीं। 

                          विशाखा नक्षत्र के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातक शराब, संभोग तथा अन्य भौतिक सुखों की प्रबल लालसा रखने वाले होते हैं तथा अपने इंद्रिय सुख की प्राप्ति करने के लिए इन जातकों को प्राय: बहुत धन तथा साधनों की आवश्यकता होती है जिसकी प्राप्ति सामान्यतया उचित, नैतिक तथा वैध कार्यों के माध्यम से संभव नहीं होती जिसके चलते विशाखा नक्षत्र के जातक अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए अनुचित रास्तों का चयन भी कर लेते हैं। विशाखा नक्षत्र के जातक भौतिक तथा दैहिक सुखों के प्रति आसानी से आकर्षित हो जाते हैं तथा इन जातकों में दैहिक सुखों को प्राप्त करने की प्रबल इच्छा होती है और विशाखा नक्षत्र के प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों में तो यह इच्छा इतनी प्रबल होती है कि ये जातक जितना ही इस प्यास को बुझाने की कोशिश करते हैं, ये और भी बढती जाती है। इसी कारण से विशाखा नक्षत्र के कई जातक अपने जीवन काल में मदिरापान, दैहिक सुख तथा अन्य भोगों के क्षेत्रों में चरम सींमाएं छूते देखे जाते हैं। विशाखा नक्षत्र के जातक आम तौर पर समाजिक तथा नैतिक मूल्यों की अधिक चिन्ता नहीं करते तथा अपना लक्ष्य प्राप्त करने की धुन में लगे रहते हैं फिर भले ही इनका लक्ष्य समाज के लिए हानिकारक ही क्यों न हो। अपने सकारात्मक स्तर पर विशाखा नक्षत्र की उर्जा जातक को दृढ़ संकल्प तथा लक्ष्य को प्राप्त कर लेने की क्षमता प्रदान करती है जिसके चलते विशाखा नक्षत्र के जातक बहुत आशावादी तथा संघर्षशील होते हैं। विशाखा नक्षत्र के जातक जीवन की हर खुशी का आनंद भोगना जानते हैं तथा इन्हें जीवन को आनंद से जीने की कला भी प्राप्त होती है। बहुत से वैदिक ज्योतिषी यह मानते हैं कि विशाखा नक्षत्र के जातकों के विषय में सबसे महत्वपूर्ण वस्तु इनका विवेक होता है जो यह निर्धारित करता है कि इन्हें अपने जीवन में उचित या अनुचित कौन सा रास्ता चुनना है।

                          आइए अब देखें इस नक्षत्र से जुड़े कुछ अन्य तथ्यों को जिन्हें वैदिक ज्योतिष के अनुसार विवाह कार्यों के लिए प्रयोग की जाने वाली गुण मिलान की विधि में महत्वपूर्ण माना जाता है। वैदिक ज्योतिष विशाखा को एक स्त्री नक्षत्र मानता है जिसका कारण बहुत से वैदिक ज्योतिषी इस तथ्य को मानते हैं कि विशाखा अपने माध्यम से इर्ष्या, दिखावा करने की प्रवृति तथा ऐसी ही अन्य कई विशेषताएं प्रदर्शित करता है जो स्त्री जाति के विशेष गुण कहलातीं हैं। वैदिक ज्योतिष के अनुसार विशाखा नक्षत्र को वर्ण से शूद्र माना जाता है तथा वैदिक ज्योतिष इस नक्षत्र को राक्षस गण प्रदान करता है। अधिकतर वैदिक ज्योतिषी विशाखा नक्षत्र के इस वर्ण और गण निर्धारण का कारण इस नक्षत्र के व्यवहार तथा आचरण को ही मानतें हैं। वैदिक ज्योतिष विशाखा नक्षत्र को सात्विक गुण प्रदान करता है जिसका कारण अधिकतर वैदिक ज्योतिषी इस नक्षत्र का बृहस्पति के साथ संबंध मानते हैं। वैदिक ज्योतिष विशाखा नक्षत्र को पंच तत्वों में से अग्नि तत्व के साथ जोड़ता है जिसका कारण इन नक्षत्र की कार्यशैली तथा इस नक्षत्र का अग्नि देव के साथ संबंध माना जाता है।

लेखक
हिमांशु शंगारी