हस्त

Important Yogas in Vedic Astrology
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                           वैदिक ज्योतिष के अनुसार कुंडली से गणना करने के लिए महत्वपूर्ण माने जाने वाले सताइस नक्षत्रों में से हस्त को तेरहवां नक्षत्र माना जाता है। हस्त का शाब्दिक अर्थ है हाथ और इसी के अनुसार वैदिक ज्योतिष में हस्त नक्षत्र को हाथ तथा इसके साथ जुड़ी विशेषताओं के साथ जोड़ा जाता है। वैदिक ज्योतिष में प्रचलित धारणा के अनुसार हाथ की खुली हुई हथेली को इस नक्षत्र का प्रतीक चिन्ह माना जाता है। हाथ की खुली हुई हथेली भाग्य को दर्शाती है क्योंकि खुली हुई हथेली में हाथ की रेखाएं चित्रित होतीं हैं जिनका अध्ययन हस्त रेखा विज्ञान में जातक का भाग्य बताने के लिए किया जाता है। कुछ विद्वानों के अनुसार हाथ का प्रयोग कर्म करने की क्षमता को दर्शाने के लिए भी किया जाता है जिसके चलते इस नक्षत्र को परिश्रम करने की क्षमता तथा विशेष रूप से हाथ की कला से किये जाने वालो कार्यों के साथ भी जोड़ा जाता है। इस प्रकार हस्त नक्षत्र का यह प्रतीक चिन्ह इस नक्षत्र की परिश्रम करने की विशेषता को दर्शाता है तथा साथ ही साथ इस नक्षत्र का कर्म करने में विश्वास तथा भाग्य के प्रति विश्वास भी दर्शाता है जिसके कारण इस नक्षत्र के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातक परिश्रम करने वाले तथा भाग्य को बताने वाली विद्याओं पर विश्वास करने वाले तथा उनमें रूचि रखने वाले होते हैं। कुछ वैदिक ज्योतिषी बंद मुट्ठी को भी हस्त नक्षत्र का प्रतीक चिन्ह मानते हैं। बंद मुट्ठी सामान्यतया व्यक्ति के दृढ़ संकल्प, गोपनीयता तथा कभी कभी क्रोध को भी दर्शाती है तथा बंद मुट्ठी के द्वारा प्रदर्शित की जाने वालीं ये विशेषताएं भी हस्त नक्षत्र के माध्यम से प्रदर्शित होतीं हैं।

                           बारह आदित्यों में से एक माने जाने वाले सावित्र को वैदिक ज्योतिष के अनुसार हस्त नक्षत्र का देवता माना जाता है। सावित्र को वैदिक ज्योतिष में रचना करने की प्रवृति तथा रचना करने को प्रोत्साहन देने की प्रवृति के साथ जोड़ा जाता है तथा सावित्र के चरित्र की ये विशेषताएं हस्त नक्षत्र के माध्यम से प्रदर्शित होतीं हैं। सावित्र को एक चंचल, चुलबुला तथा हंसमुख देवता भी माना जाता है जो प्रत्येक प्रकार के खेल तथा मनोरंजन को भी प्रोत्साहित करता है तथा विशेषतया उन खेलों को जिनमें शारीरिक क्षमता का प्रयोग होता हो अथवा मानसिक क्षमता का प्रयोग होता हो तथा सावित्र की ये विशेषताएं हस्त नक्षत्र के माध्यम से भी प्रदर्शित होती हैं। वैदिक ज्योतिष के अनुसार सावित्र को हस्तशिल्प की कला में भी निपुण माना जाता है जो हस्तशिल्प तथा हाथ की कला और कौशल से जुड़ी अन्य कलाओं को भी प्रोत्साहित करता है। सावित्र के चरित्र की ये सभी विशेषताएं हस्त नक्षत्र के माध्यम से प्रदर्शित होतीं हैं जिसके चलते इस नक्षत्र के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातक किसी न किसी प्रकार की हस्तकला, खेल अथवा शारीरिक क्षमता की मांग करने वाले क्षेत्रों में रूचि रखने वाले होते हैं। सावित्र को झूठ बोलने तथा छल करने की कला में भी निपुण माना जाता है तथा सावित्र की ये विशेषताएं भी हस्त नक्षत्र के माध्यम से प्रदर्शित होतीं हैं हालांकि हस्त नक्षत्र इन विशेषताओं का प्रदर्शन तभी करता है जब यह नक्षत्र किसी कुंडली में नकारात्मक रूप से काम कर रहा हो। किन्तु फिर भी बहुत से वैदिक ज्योतिषी यह मानते हैं कि हस्त नक्षत्र के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातकों का शीघ्रता से विश्वास नहीं करना चाहिए क्योंकि ऐसे जातकों में छल करने की प्रवृति पायी जाती है।

                          नवग्रहों में से चन्द्रमा को वैदिक ज्योतिष के अनुसार हस्त नक्षत्र का अधिपति देवता माना जाता है जिसके कारण इस नक्षत्र पर चन्द्रमा का भी प्रभाव रहता है तथा चन्द्रमा के चरित्र की कुछ विशेषताएं जैसे कि संवेदनशीलता, भावुकता, पारिवारिक मूल्यों में विश्वास रखना तथा संरक्षण आदि विशेषताएं इस नक्षत्र के माध्यम से प्रदर्शित होतीं हैं। चन्द्रमा की इन विशेषताओं के प्रभाव के कारण हस्त नक्षत्र का छलिया स्वभाव उन लोगों के प्रति बहुत सीमा तक कम हो जाता है जो हस्त जातकों के परिवार के सदस्य अथवा इनके अतरंग मित्र होते हैं जिसके कारण इन जातकों का व्यवहार इन सभी लोगों के प्रति आमतौर पर छलरहित ही रहता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार हस्त नक्षत्र के सभी चार चरण कन्या राशि में स्थित होते हैं जिसके कारण इस नक्षत्र पर कन्या राशि तथा इस राशि के स्वामी ग्रह बुध का भी प्रभाव रहता है। बुध के चरित्र की कई विशेषताएं जैसे कि परिश्रम करने की प्रवृति, विशलेषणात्मक स्वभाव, भेद करने की क्षमता, हास्य विनोद करने की विशेषता, छल तथा धोखा करने की विशेषता तथा ऐसीं हीं अन्य कुछ विशेषताएं इस नक्षत्र के माध्यम से प्रदर्शित होतीं हैं। इस प्रकार हस्त नक्षत्र के माध्यम से सावित्र, चन्द्रमा तथा बुध की विशेषताओं का मिश्रित रूप से प्रदर्शन होता है तथा किसी कुंडली में इस नक्षत्र का व्यवहार इस नक्षत्र पर प्रभाव डालने वाले ग्रहों और देवता के बल तथा स्वभाव पर भी निर्भर करता है। अपने सकारात्मक स्तर पर हस्त पारिवारिक मूल्यों को समझने वाले, परिवार बनाने में रुचि रखने वाले तथा परिवार का संरक्षण करने वाले नक्षत्र के रूप में जाना जाता है तथा किसी कुंडली में इस नक्षत्र का प्रबल प्रभाव संतान उत्पत्ति के लिए शुभ माना जाता है। हस्त नक्षत्र के प्रभाव में आने वाले जातक बहुत विनोदी स्वभाव के होते हैं जिसके चलते ये जातक अपने आप को तथा अपने संपर्क में आने वाले लोगों को भी समय समय पर हंसाते रहते हैं।

                          हस्त नक्षत्र के जातकों की बौधिक तथा गणनात्मक क्षमता अच्छी होती है जिसके चलते ऐसे जातक प्रत्येक स्थिति के अनुसार शीघ्रता से गणना करके व्यवहार करने में भी कुशल होते हैं। हस्त के जातक अपने संपर्क में आने वाले लोगों का शीघ्रता से विश्वास नहीं करते तथा ये जातक किसी का विश्वास करने में बहुत समय लेते हैं। यहां पर यह बात रोचक तथा ध्यान देने योग्य है कि हस्त नक्षत्र के जातक व्यवसायिक तथा सामाजिक संबंध बनाने में कुशल होते हैं तथा अपनी इस कुशलता के चलते ये जातक इन क्षेत्रों में सफल भी देखे जाते हैं किन्तु हस्त के जातक अपने व्यवसायिक तथा सामाजिक संपर्क में आने वाले अधिकतर लोगों का विश्वास नहीं करते भले ही वे लोग सामाजिक अथवा व्यवसायिक रूप से इनके बहुत समीप माने जाते हों। हस्त नक्षत्र के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातकों में शंका करने की प्रवृति स्वभाविक रूप से पायी जाती है जिसका कारण सामान्यतया इन जातकों के भीतर छिपी किसी न किसी प्रकार की असुरक्षा की भावना ही होती है। इसलिए भले ही हस्त नक्षत्र के जातक बहुत से लोगों के साथ मेल मिलाप तथा संबंध बनाते दिखते हों किन्तु इन जातकों के लिए अपने आस पास के इन लोगों पर पूर्ण रूप से विश्वास करना तथा इन लोगों के साथ विश्वास पर आधारित एक सुरक्षित संबंध बनाना कठिन होता है। हस्त नक्षत्र के जातक शारीरिक रूप से सक्रिय होते हैं तथा इसी के अनुसार ये जातक अपने लिए किसी ऐसे ही व्यवसायिक क्षेत्र का चुनाव करते हैं जिसमें इन्हें शारीरिक श्रम करते रहना पड़े। हस्त नक्षत्र के जातक बहुत सोच समझ कर चलने वाले तथा अनुशासित रहने वाले होते हैं तथा इन्हें किसी भी काम के सभी पक्षों को समझे बिना उसे करना पसंद नहीं होता।

                            कुंडली में हस्त नक्षत्र का प्रबल नकारात्मक प्रभाव जातक को छलिया, कपटी तथा ठग प्रवृति का बना देता है जिसके चलते ऐसे जातक को लोगों को छलने तथा मूर्ख बनाने में बहुत आनंद आता है। हस्त नक्षत्र के ये जातक बुद्धिमान से बुद्धिमान व्यक्ति को भी छलने में सक्षम होते हैं क्योंकि हस्त के ये जातक एक के बाद एक नए प्रपंचों तथा विचारों को जन्म देने में दक्ष होते हैं। हस्त नक्षत्र का प्रबल नकारात्मक प्रभाव जातक को कुशल जुआरी भी बना सकता है अथवा जातक हाथ की कला से अन्य लोगों के ठगने अथवा लूटने की कला में दक्ष हो सकता है जैसे कि ताश के खेल के माध्यम से लोगों को छलने वाले जातक, जेब काटने की कला के माध्यम से लोगों को छलने वाले जातक आदि। हस्त नक्षत्र के जातक अपने आप को वयस्त रखने में विश्वास रखते हैं तथा ये जातक अपने शरीर को कम से कम आराम देकर अधिक से अधिक काम लेने में भी विश्वास रखते हैं जिसके चलते इन्हें समय समय पर बैचेनी तथा अनिद्रा जैसी समस्याओं का भी सामना करना पड़ सकता है। बुध ग्रह का इस नक्षत्र पर प्रबल प्रभाव हस्त के जातकों को व्यापार तथा व्यवसाय से जुड़ीं सफलताएं प्रदान कर सकता है क्योंकि वैदिक ज्योतिष में बुध को व्यापार के साथ जुड़े हुए ग्रह के रुप में माना जाता है। हस्त नक्षत्र के जातकों को सामान्यतया ऐसे सभी विज्ञानों के प्रति गहरी रूचि होती है जिनके माध्यम से कोई व्यक्ति अपना भविष्य जान सकता है जैसे कि ज्योतिष, हस्त रेखा विज्ञान, अंक विज्ञान तथा ऐसी ही अन्य विद्याएं तथा कुंडली में कुछ विशेष योग होने पर ये जातक इन विद्याओं का व्यवासायिक रूप में अभ्यास भी करते हैं। 

                          आइए अब चर्चा करते हैं इस नक्षत्र से जुड़े कुछ अन्य तथ्यों की जिन्हें वैदिक ज्योतिष के अनुसार विवाह कार्य के लिए प्रयोग की जाने वाली गुण मिलान की विधि के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। वैदिक ज्योतिष हस्त नक्षत्र को एक पुरुष नक्षत्र मानता है जिसका कारण अधिकतर वैदिक ज्योतिषी इस नक्षत्र का सावित्र के साथ गहरा संबंध मानते हैं। वैदिक ज्योतिष के अनुसार हस्त नक्षत्र को वर्ण से वैश्य माना जाता है जिसका कारण अधिकतर वैदिक ज्योतिषी इस नक्षत्र का बुध के साथ संबंध मानते हैं क्योंकि बुध को वैदिक ज्योतिष के अनुसार व्यापार से जुड़ा हुआ ग्रह माना जाता है तथा व्यापार करने की कला वैश्य जाति से जोड़ी जाती है। वैदिक ज्योतिष में हस्त नक्षत्र को राजसिक गुण प्रदान किया जाता है जो इस नक्षत्र की कार्यशैली के आधार पर समझा जा सकता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार हस्त नक्षत्र को देव गण प्रदान किया जाता है जिसका कारण अधिकतर वैदिक ज्योतिषी इस नक्षत्र का सावित्र तथा चन्द्रमा के साथ संबंध मानते हैं। वैदिक ज्योतिष पंच तत्वों में से अग्नि तत्व को इस नक्षत्र के साथ जोड़ता है।

लेखक
हिमांशु शंगारी