उत्तराफाल्गुनी

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                          भारतीय वैदिक ज्योतिष के आधार पर कुंडली से गणना करने के लिए महत्वपूर्ण माने जाने वाले सताइस नक्षत्रों में से उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र को बारहवां नक्षत्र माना जाता है। उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र अपने से पिछले नक्षत्र पूर्वाफाल्गुनी के साथ जोड़ा बनाता है तथा अनेक वैदिक ज्योतिषी यह मानते हैं कि इन दोनों के व्यवहार तथा आचरण में बहुत सी समानताएं हैं। उत्तरा फाल्गुनी का शाब्दिक अर्थ है बाद में आने वाला लाल रंग वाला तथा इस अर्थ के अनुसार ही इस नक्षत्र की अनेक विशेषताएं पूर्वाफाल्गुनी के साथ मेल खातीं हैं। वैदिक ज्योतिष के अनुसार दिन के समय विश्राम करने के लिए प्रयोग किये जाने वाली चारपाई अथवा दीवान की पिछली दो टांगों को उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र का प्रतीक चिन्ह माना जाता है जिसके चलते इस नक्षत्र को भी पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र की भांति विश्राम आदि जैसी विशेषताओं के साथ जोड़ा जाता है। किन्तु यहां पर यह बात ध्यान देने योग्य है कि उत्तरा फाल्गुनी का यह प्रतीक चिन्ह विश्राम की प्रारंभिक स्थिति को न दर्शा कर विश्राम की अंतिम तथा हल्की स्थिति को दर्शाता है जो कि एक प्रकार का विस्तारित विश्राम कहा जा सकता है जो आवश्यक नहीं है बल्कि विश्राम करने वाले की कुछ और विश्राम करने की इच्छा के कारण किया जाता है। इस प्रकार उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र के प्रतीक चिन्ह दवारा प्रदर्शित किया जाने वाला विश्राम कुछ अर्थों में पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र द्वारा दर्शाये जाने वाले विश्राम के समान होने के पश्चात भी बहुत से अर्थों में उससे भिन्न भी है।

                     बहुत से वैदिक ज्योतिषी यह मानते हैं कि उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र के प्रतीक चिन्ह द्वारा दर्शाया जाने वाला विश्राम व्यक्ति की उस स्थिति को दर्शाता है जिसमें वह अपनी छोटी अवधि की निद्रा को पूरा कर चुका है तथा अब जागृत अवस्था में कुछ और शारीरिक विश्राम की इच्छा के चलते लेटा हुआ है। इस स्थिति में विश्राम करने वाले व्यक्ति का मानसिक विश्राम निद्रा के भंग होते ही समाप्त हो चुका है तथा यह व्यक्ति अब केवल शारीरिक विश्राम कर रहा है तथा यह व्यक्ति किसी मानसिक गतिविधि जैसे कि चिंतन करना अथवा किसी प्रकार की मनोरंजक गतिविधि जैसे कि टैलीविज़न आदि देखने में भी व्यस्त हो सकता है। इस प्रकार यह विश्राम का अंतिम चरण माना जा सकता है जिसमें व्यक्ति अपना विश्राम लगभग पूरा कर चुका है तथा अब कार्य करने के लिए तैयार हो रहा है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार आर्यमान को उत्तराफाल्गुनी का अधिपति देवता माना जाता है। आर्यमान भी भग की भांति बारह आदित्यों में से एक हैं तथा आर्यमान उदारता, दूसरों की सहायता करने तथा दूसरों से सहायता प्राप्त करने, आतिथ्य, सभ्य स्वभाव तथा ऐसी ही कई अन्य विशेषताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं और आर्यमान के चरित्र की ये विशेषताएं उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र पर उनका प्रबल प्रभाव होने के कारण इस नक्षत्र के माध्यम से भी प्रदर्शित होतीं हैं। वैदिक ज्योतिष के अनुसार आर्यमान को एक ऐसा देवता माना जाता है जो मित्र बनाने के लिए तत्पर रहता है, मित्रों की सहायता करने तथा उनसे सहायता प्राप्त करने के लिए भी तत्पर रहता है तथा जो मित्रों को बहुत महत्व देता है और आर्यमान के चरित्र की यह विशेषता भी उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र के माध्यम से प्रदर्शित होती है। 

                       नवग्रहों के राजा माने जाने वाले सूर्य को वैदिक ज्योतिष के अनुसार उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र का अधिपति ग्रह माना जाता है जिसके कारण सूर्य का भी इस नक्षत्र पर प्रबल प्रभाव रहता है और सूर्य के चरित्र की कई विशेषताएं इस नक्षत्र के माध्यम से प्रदर्शित होतीं हैं। वैदिक ज्योतिष के अनुसार उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र का पहला चरण सिंह राशि में स्थित होता है जबकि इस नक्षत्र के शेष तीन चरण कन्या राशि में स्थित होते हैं जिसके कारण इस नक्षत्र पर कन्या राशि तथा इस राशि के स्वामी ग्रह बुध का प्रभाव भी रहता है और इसी लिए बुध के चरित्र की कुछ विशेषताएं भीं इस नक्षत्र के माध्यम से प्रदर्शित होतीं हैं। सूर्य तथा बुध का संयुक्त प्रभाव इस नक्षत्र को विशिष्ट बना देता है क्योंकि वैदिक ज्योतिष के अनुसार सूर्य तथा बुध की युति को बहुत अच्छा माना जाता है। किसी कुंडली में सूर्य तथा बुध की युति होने पर बहुत से वैदिक ज्योतिषियों के अनुसार कुंडली में बुध आदित्य योग का निर्माण हो जाता है जिसके चलते इस योग के प्रभाव में आने वाले जातक बहुत बुद्धिमान, व्यवहारिक, संतुलित तथा शासकीय क्षमताओं के स्वामी हो जाते हैं। उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र पर सूर्य तथा बुध का संयुक्त प्रभाव होने के कारण बुधआदित्य योग की विशेषताएं भी इस नक्षत्र के माध्यम से प्रदर्शित होतीं हैं। यहां पर यह बात ध्यान देने योग्य है कि उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र के अधिपति देवता आर्यमान भी एक आदित्य अर्थात सूर्य पुत्र हैं तथा इसी के कारण आर्यमान के चरित्र की बहुत सी विशेषताएं भी सूर्य के चरित्र की विशेषताओं के साथ मेल खातीं हैं जिसके चलते उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र के उपर पड़ने वाला इसके अधिपति देवता तथा अधिपति ग्रहों का प्रभाव पूर्वाफाल्गुनी की भांति एक दूसरे के विपरीत न होकर समान प्रकार का प्रभाव है जिसके कारण उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र की तुलना में कहीं अधिक संतुलित नक्षत्र माना जाता है।

                            इस प्रकार उपर वर्णित ग्रहों तथा देवता का संयुक्त प्रभाव उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र पर प्रभावी रहता है जिसके कारण इस नक्षत्र के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातक बुद्धिमान, मित्रवत, मित्र बनाने में विश्वास रखने वाले तथा मित्रों और मित्रता को महत्वपूर्ण मानने वाले, दयालु, व्यवहारिक तथा सामाजिक व्यवहार में कुशल होते हैं। ऐसे जातक समय समय पर अपने मित्रों की सहायता करते रहते हैं तथा समय आने पर अपने मित्रों से सहायता प्राप्त भी करते हैं। उत्तरा फाल्गुनी के जातक स्वभाव से स्वतंत्र प्रवृति के होते हैं तथा ऐसे जातक आंखें बंद करके समाज अथवा लोगों के द्वारा निर्धारित किए गए रास्तों पर चलना पसंद नहीं करते बल्कि इस नक्षत्र के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातक अपने रास्ते स्वयं तय करने में विश्वास रखते हैं तथा इनके आस पास के बहुत से लोग इन जातकों के द्वारा बनाए गए रास्तों पर चलते हैं। अनेक वैदिक ज्योतिषी इसका कारण नवग्रहों के राजा सूर्य का इस नक्षत्र पर प्रबल प्रभाव मानते हैं जो इस नक्षत्र को स्वभाविक रूप से नेतृत्व क्षमता की विशेषता प्रदान करता है। यहां पर यह बार रोचक तथा ध्यान देने योग्य है कि पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र पर शुक्र का प्रभाव होने के कारण इस नक्षत्र के जातक आम तौर पर समाज के द्वारा निश्चित किये गए रास्तों पर ही चलना पसंद करते हैं जबकि सूर्य के प्रभाव वाले उत्तरफाल्गुनी के जातक अपने रास्ते स्वयं निश्चित करना पसंद करते हैं जिससे इन दोनों ग्रहों तथा इन दोनो नक्षत्रों के स्वभाव का एक बड़ा अंतर सपष्ट हो जाता है।

                             अनेक वैदिक ज्योतिषी यह मानते हैं कि सूर्य के चरित्र की अनेक विशेषताएं जैसे कि आक्रमकता, नेतृत्व करने की क्षमता, क्रोध, जीतने की प्रबल इच्छा रखने की प्रवृति, स्वतंत्र विचार रखने की और स्वतंत्र आचरण करने की प्रवृति तथा ऐसी ही अन्य कई विशेषताएं इस नक्षत्र के माध्यम से प्रदर्शित होतीं हैं। कुछ वैदिक ज्योतिषी यह मानते हैं कि उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र सूर्य के प्रतिनिधित्व में आने वाले अन्य नक्षत्र कृतिका की अपेक्षा कहीं अधिक नम्र स्वभाव का है तथा इस नक्षत्र के जातक आक्रमकता का प्रदर्शन तभी करते हैं जब ऐसा करना स्थिति के अनुसार अनिवार्य हो जाए तथा साथ ही साथ इस नक्षत्र के प्रभाव में आने वाले जातक क्रोध आने पर कृतिका नक्षत्र के जातकों की अपेक्षा अधिक संतुलित व्यवहार करते हैं और अपेक्षाकृत शीघ्रता से शांत भी हो जाते हैं। बुध का उत्तराफाल्गुनी पर प्रभाव इस नक्षत्र को बुद्धिमता, हास्य, व्यवहार कुशलता तथा व्यवहारिकता जैसी विशेषताएं प्रदान करता है जिसके चलते इस नक्षत्र के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातक ऐसे सभी क्षेत्रों में सफल देखे जाते हैं जिनमें सफलता प्राप्त करने के लिए इन विशेषताओं की आवश्यकता होती है। उत्तराफाल्गुनी के जातक सूर्य की भांति साहसी तथा बुध की भांति कुशल और बुद्धिमान होते हैं जिसके कारण ये जातक बहुत से क्षेत्रों में सफलता प्राप्त करने में सक्षम होते हैं।

                        आइए अब विचार करते हैं इस नक्षत्र से जुड़े कुछ अन्य तथ्यों की जिन्हें वैदिक ज्योतिष के अनुसार विवाह कार्यों में प्रयोग की जाने वाली गुण मिलान की विधि के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। वैदिक ज्योतिष उत्तरा फाल्गुनी को एक स्त्री नक्षत्र मानता है जो अपने आप में चकित कर देने वाला निर्धारण है क्योंकि इस नक्षत्र पर प्रभाव डालने वाला ग्रह सूर्य तथा देवता आर्यमान दोनो ही पुरुष ग्रह हैं तथा इस नक्षत्र का व्यवहार तथा आचरण भी अधिकतर पुरुषों के व्यवहार की भांति ही है। वैदिक ज्योतिष में उत्तराफाल्गुनी को स्वभाव से तीव्र नक्षत्र माना जाता है जिसका कारण इस नक्षत्र पर सूर्य के प्रबल प्रभाव को माना जाता है। वैदिक ज्योतिष उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र को क्षत्रिय वर्ण प्रदान करता है तथा इस नक्षत्र को गुण से राजसिक माना जाता है और इस नक्षत्र के गुण और गण निर्धारण के कारण को भी इस नक्षत्र पर सूर्य के प्रबल प्रभाव तथा इस नक्षत्र के आचरण के साथ जोड़ा जाता है। वैदिक ज्योतिष उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र को मानव गण के साथ जोड़ता है जिसका कारण इस नक्षत्र का भौतिकवाद के साथ जुड़ा होना तथा मानवता की विशेषताएं प्रदर्शित करने को माना जाता है। वैदिक ज्योतिष पंच तत्वों में से जल तत्व को इस नक्षत्र के साथ जोड़ता है।

लेखक
हिमांशु शंगारी