मघा

Important Yogas in Vedic Astrology
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                                 वैदिक ज्योतिष के अनुसार कुंडली से की जाने वाली गणनाओं के लिए महत्वपूर्ण माने जाने वाले सताइस नक्षत्रों में से मघा को दसवां नक्षत्र माना जाता है। अश्लेषा नक्षत्र के साथ ही नौ-नौ नक्षत्रों की तीन श्रृंखलाओं में से पहली श्रृंखला का अंत हो जाता है तथा मघा नक्षत्रों की दूसरी श्रृंखला का आरंभ है। मघा का शाब्दिक अर्थ है बलवान अथवा अति बलशाली तथा महत्वपूर्ण और इसी के अनुसार यह नक्षत्र किसी न किसी प्रकार की ताकत तथा प्रभुत्व के साथ जुड़ा होना दर्शाता है। कुछ वैदिक ज्योतिषी यह मानते हैं कि किसी कुंडली में मघा नक्षत्र का प्रबल प्रभाव होने पर जातक अपने जीवन काल में किसी न किसी की प्रकार शासकीय अथवा प्रशासकीय शक्ति अवश्य प्राप्त करता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार मघा नक्षत्र का प्रतीक चिन्ह राज सिंहासन को माना जाता है। जैसा कि हम जानते हैं कि राज सिहांसन सीधे तौर पर शासन, शक्ति, राजस, प्रभुत्व तथा दायित्व से जुड़ा होता है, इसी प्रकार ये सारी विशेषताएं मघा नक्षत्र के माध्यम से भी प्रदर्शित होतीं हैं जिसके चलते इस नक्षत्र के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातक किसी न किसी प्रकार के शासकीय या प्रशासकीय पद को प्राप्त कर पाने में सफल हो जाते हैं। बहुत से वैदिक ज्योतिषी मघा नक्षत्र के द्वारा प्रदर्शित की जाने वाली शक्ति तथा प्रभुत्व को उत्तराधिकार अथवा विरासत के साथ जोड़ते हैं तथा इन ज्योतिषियों का यह मानना है कि मघा नक्षत्र के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातकों को आम तौर पर शक्ति तथा प्रभुत्व उत्तराधिकार के रूप में ही प्राप्त होता है। उदाहरण के लिए अपने पिता के राजा अथवा शासक होने के कारण उनका पद उत्तराधिकार में पाने वाले जातक मघा नक्षत्र के प्रबल प्रभाव वाले जातक माने जाते हैं। हंसिया या दरांती को भी मघा नक्षत्र के प्रतीक चिन्ह के रूप में मान्यता दी जाती है तथा यह माना जाता है कि जिस प्रकार दरांती का संबंध पक चुकी फसल काटने से है, उसी प्रकार मघा नक्षत्र का संबंध पूर्व जन्म के पक चुके कर्म इस जन्म में काटने से है।

                            बहुत से वैदिक ज्योतिषी मानते हैं कि सताइस नक्षत्रों में से मघा वह पहला नक्षत्र है जिसमें आत्म का बोध तथा ज्ञान जन्म लेता है। पित्रों को वैदिक ज्योतिष के अनुसार मघा नक्षत्र के अधिपति देवता माना जाता है तथा इस प्रकार इस नक्षत्र पर पित्रों का प्रबल प्रभाव रहता है और संभवत यही कारण है कि मघा नक्षत्र को उत्तराधिकार के साथ जोड़ा जाता है क्योंकि उत्तराधिकार अपने आप में पित्रों से जुड़ा हुआ है। विद्वानों के मत के अनुसार मृत्यु के पश्चात कुछ विशेष पित्र उस समय तक पित्र लोक में वास करते हैं जब तक उनके अगले जन्म के लिए निश्चित किया गया समय नहीं आ जाता। यह एक सिद्ध वैज्ञानिक तथ्य है कि अधिकतर मनुष्य अपने पूर्वजों द्वारा आनुवंशिक रूप से मिले गुणों, अवगुणों तथा विशेषताओं का ही अनुसरण करते हैं। इसी कारण इस नक्षत्र के द्वारा प्रदर्शित आत्म बोध तथा आत्म ज्ञान को भी बहुत से वैदिक ज्योतिषी पित्रों की ही देन मानते हैं क्योंकि हम में से अधिकतर लोगों का वर्तमान रूप तथा विशेषताएं  हमें आनुवंशिक रूप से ही प्राप्त हुईं होतीं हैं। इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि हमारे वर्तमान व्यक्तित्व की बहुत सीं विशेषताएं हमें आनुवंशिक रूप से ही प्राप्त हुईं होतीं हैं तथा पित्रों के बिना हमारा वर्तमान व्यक्तित्व अपने आप में पूर्ण नहीं हो पाता।

                        वैदिक ज्योतिष के अनुसार केतु को मघा नक्षत्र का अधिपति ग्रह माना जाता है जिसके चलते इस नक्षत्र पर केतु का भी प्रबल प्रभाव रहता है। यहां पर यह बात ध्यान देने योग्य है कि वैदिक ज्योतिष के अनुसार केतु को भी आनुवंशिकता से जुड़ा हुआ ग्रह माना जाता है तथा बहुत से वैदिक ज्योतिषी केतु को प्रभुत्व, शक्ति तथा राजस के साथ भी जोड़ते हैं। वैदिक ज्योतिष के अनुसार मघा नक्षत्र के सभी चार चरण सिंह राशि में स्थित होते हैं जिसके कारण इस नक्षत्र पर सिंह राशि तथा इसके स्वामी ग्रह सूर्य का प्रभाव भी पड़ता है। सूर्य तथा सिंह राशि दोनो को ही वैदिक ज्योतिष में शक्ति, राजस, शासन तथा प्रभुत्व के साथ जोड़ा जाता है तथा सूर्य और सिंह राशि के चरित्र की ये विशेषताएं मघा नक्षत्र के माध्यम से प्रदर्शित होतीं हैं। सूर्य तथा केतु दोनों के प्रभाव में आने के कारण इन दोनों ग्रहों की एक दूसरे से समानता रखने वाली विशेताएं जैसे कि प्रभुत्व, शासन, शक्ति, गहरी अंतर्दृष्टि तथा ऐसी ही अन्य कई विशषताएं मघा नक्षत्र के माध्यम से प्रदर्शित होतीं हैं। यहां पर यह बात ध्यान देने योग्य है कि नवग्रहों में से सूर्य को आत्म तथा पित्रों के साथ जोड़ा जाता है तथा किसी कुंडली में सूर्य पर एक या एक से अधिक बुरे ग्रहों का प्रभाव कुंडली में पित्र दोष का निर्माण कर देता है। केतु को भी वैदिक ज्योतिष के अनुसार भूत काल से जुड़ा हुआ ग्रह माना जाता है तथा कुछ वैदिक ज्योतिषी यह मानते हैं कि हमारे पिछलों जन्मों के अच्छे बुरे कर्मों का फल भी बहुत सीमा तक हमें केतु के माध्यम से ही मिलता है तथा केतु ग्रह की इस विशेषता का प्रदर्शन भी मघा नक्षत्र के माध्यम से होता है।

                        बहुत से वैदिक ज्योतिषी यह मानते हैं कि मघा नक्षत्र भूत काल से जुड़ा हुआ एक नक्षत्र है तथा हमारे पिछले जन्मों के अच्छे बुरे कर्मों के अनुसार ही यह नक्षत्र हमें इस जीवन में फल प्रदान करता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार मघा को एक उग्र तथा सक्रिय नक्षत्र माना जाता है तथा अधिकतर वैदिक ज्योतिषी मानते हैं कि यह नक्षत्र अच्छा या बुरा किसी भी प्रकार का फल जातक को बहुत तीव्रता के साथ देने में सक्षम है जिसके चलते इस नक्षत्र के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातक बहुत कम समय में ही बहुत बड़े सौभाग्य के स्वामी बनते देखे गए हैं अथवा ऐसे जातक बहुत कम समय में ही बहुत भारी विपत्तियों में फंसते भी देखे गए हैं। हालांकि मघा के साथ जुड़े दोनो ही ग्रह सूर्य तथा केतु आत्मकेंद्रित ग्रह माने जाते हैं फिर भी मघा नक्षत्र को वैदिक ज्योतिष के अनुसार एक सामाजिक नक्षत्र माना जाता है तथा इस नक्षत्र के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातक सामान्य तौर पर सामाजिक व्यवाहार में अच्छे देखे जाते हैं। किन्तु यहां पर यह बात ध्यान देने योग्य है कि मघा नक्षत्र के प्रभाव में आने वाले जातक आम तौर पर अपने आप को अपने साथ जुड़े समाज से श्रेष्ठतर समझते हैं तथा ये जातक अपने साथ जुड़े लोगों से यह अपेक्षा भी करते हैं कि वे लोग इन्हें आदर तथा प्रभुत्व प्रदान करते रहें। मघा नक्षत्र के जातकों की इस विशेषता को बहुत से वैदिक ज्योतिषी इस नक्षत्र के प्रतीक चिन्ह तथा नवग्रहों में से राजा सूर्य के इस नक्षत्र पर प्रभाव के साथ जोड़ कर देखते हैं।

                     इस नक्षत्र के प्रभाव में आने वाले जातक आम तौर पर परंपराओं के प्रति बहुत आदर तथा दायित्व की भावना रखते हैं जिसका कारण इस नक्षत्र पर पित्रों का प्रबल प्रभाव माना जाता है क्योंकि परंपराएं भी हमें पित्रों से ही प्राप्त होतीं हैं। मघा के जातक सामान्यतया ऐसे लोगों को पसंद नहीं करते जो अपने परिवार तथा समाज की परंपराओं का आदर तथा पालन नहीं करते और मघा के जातक ऐसे लोगों के प्रति अपने क्रोध तथा असंतोष को अधिकतर स्थितियों में प्रकट भी कर देते हैं। कई बार तो मघा नक्षत्र के जातक परंपराओं को तोड़ने वाले लोगों पर बहुत क्रोधित होकर इन्हें किसी प्रकार का दंड भी दे देते हैं। मघा के जातक अपने वंश तथा वंशावली पर गर्व करने वाले होते हैं तथा अपने परिवार और वंश का नाम समाज में और उंचा करने के लिए ये जातक अपनी ओर से भरसक प्रयास करते हैं। मघा के जातक समाजिक तथा नैतिक नियमों का पालन करने में विश्वास रखने वाले होते हैं तथा नियम तोड़ने वाले लोगों को मघा के जातक पसंद नहीं करते। मघा के जातकों में प्रजनन के माध्यम से अपने वंश की वृद्धि करने की रूचि अन्य कई नक्षत्रों के जातकों की तुलना में बहुत अधिक होती है तथा ऐसे जातक मघा नक्षत्र के प्रबल प्रभाव के कारण आम तौर पर बहुत सी संतानें पैदा करने में सक्षम होते हैं। बहुत से वैदिक ज्योतिषी यह मानते हैं कि किसी कुंडली में मघा नक्षत्र का प्रबल प्रभाव जातक के वंश की वृद्धि में बहुत सहायक होता है।

                           आइए अब चर्चा करते हैं इस नक्षत्र से जुड़े कुछ अन्य तथ्यों की, जिन्हें वैदिक ज्योतिष के अनुसार विवाह कार्यों के लिए प्रयोग में लायी जाने वाली गुण मिलान की विधि के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार मघा को एक स्त्री नक्षत्र माना जाता है जो कि अपने आप में आश्चर्यचकित कर देने वाला है क्योंकि मघा से जुड़े ग्रह तथा देवता सभी पुरूष माने जाते हैं। वैदिक ज्योतिष में मघा को स्वभाव से उग्र तथा सक्रिय माना जाता है जो इस नक्षत्र की कार्यप्रणाली से सपष्ट ही है। वैदिक ज्योतिष में मघा नक्षत्र को शूद्र वर्ण प्रदान किया जाता है तथा मघा नक्षत्र का यह वर्ण निर्धारण अपने आप में पुन: चकित कर देने वाला है क्योंकि वैदिक ज्योतिष के अनुसार मघा नक्षत्र को सूर्य जैसे ग्रह तथा राज शासन जैसे कार्यों के साथ जोड़ा जाता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार मघा नक्षत्र को गुण से तामसिक तथा गण से राक्षस माना जाता है जो फिर से चकित कर देने वाला है तथा कुछ वैदिक ज्योतिष इसका कारण इस नक्षत्र का केतु के साथ संबंध मानते हैं। वैदिक ज्योतिष पंच तत्वों में से जल तत्व को इस नक्षत्र के साथ जोड़ता है।

लेखक
हिमांशु शंगारी