भरणी

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                                     भारतीय वैदिक ज्योतिष की गणनाओं के लिए महत्वपूर्ण माने जाने वाले सताइस नक्षत्रों में से भरणी को दूसरा नक्षत्र माना जाता है। भरणी का शाब्दिक अर्थ भरण-पोषण करना है तथा कुछ वैदिक ज्योतिषी इस भरण पोषण का अभिप्राय प्रजनन के समय होने वाले बच्चे के भरण पोषण को मानते हैं तथा इन वैदिक ज्योतिषियों की इस मान्यता के पीछे छिपे कारण को समझने के लिए भरणी नक्षत्र के प्रतीक चिन्ह को समझना आवश्यक है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार स्त्री के प्रजनन अंग अर्थात योनि को भरणी नक्षत्र का प्रतीक चिन्ह माना जाता है तथा इस प्रतीक चिन्ह को जानने के पश्चात भरणी के शाब्दिक अर्थ की उपर की गई व्याख्या को समझना कठिन नहीं रह जाता। जैसा कि हम जानते हैं कि पृथ्वी लोक पर जन्म लेने वाले सभी मनुष्य योनि के माध्यम से ही जन्म लेते हैं इसलिए बहुत से वैदिक ज्योतिषी भरणी नक्षत्र का रचनात्मकता के साथ गहरा संबंध मानते हैं क्योंकि मनुष्य का जन्म अपने आप में सृष्टि की रचनात्मकता का सबसे बड़ा उदाहरण है। इस प्रकार भरणी नक्षत्र अपने इस प्रतीक चिन्ह के माध्यम से रचनात्मकता तथ स्त्री जाती में पायी जाने वाली अन्य कई विशेषताओं के साथ जुड़ जाता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार यमराज को भरणी नक्षत्र का देवता माना जाता है जिसके चलते यह नक्षत्र यमराज के प्रभाव में भी आता है। यमराज को धर्मराज का नाम भी दिया जाता है तथा प्राणियों के कर्मों के अनुसार उनके अगले जन्म के लिए उचित समय, स्थान तथा स्थितियों का निर्णय करना भी यमराज के कार्यक्षेत्र में आता है। इस प्रकार प्राणियों की मृत्यु तथा मृत्यु के पश्चात उनके कर्मों के आधार पर उन्हें मिलने वाला दूसरा जीवन, ये दोनों ही कार्य यमराज के कार्यक्षेत्र में आते हैं।

                            बहुत से वैदिक ज्योतिषी यह मानते हैं कि जिस प्रकार जीव की मृत्यु से लेकर उसके नवजीवन तक तथा जीवन से पुन: मृत्यु तक प्रयोग में आने वाली यमराज की कार्यशाली सदा माया में घिरी रहती है, उसी प्रकार भरणी नक्षत्र का भी माया के साथ गहरा संबंध है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार देवी महाकाली को भी भरणी नक्षत्र की देवी माना जाता है जिसके चलते इस नक्षत्र की कार्यशैली में देवी महाकाली के गुणों का प्रभाव भी देखने में आता है। जिस प्रकार देवी महाकाली भीषण से भीषण शत्रु का भी सहज ही संहार करने में सक्षम है तथा सृष्टि के दुष्कर से दुष्कर कार्य भी उनके लिए सहज हैं, उसी प्रकार भरणी नक्षत्र के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातक भी कठिन से कठिन कार्य से भी नहीं चिंतित होते तथा इन कार्यों को बिना विचलित हुए करने का प्रयास करते हैं। वैदिक ज्योतिष के अनुसार शुक्र को भरणी नक्षत्र का स्वामी ग्रह माना जाता है तथा इसी के अनुसार शुक्र ग्रह की बहुत सीं विशेषताएं भरणी नक्षत्र के माध्यम से साकार रुप प्राप्त करतीं हैं। वैदिक ज्योतिष में शुक्र को स्त्री जाती तथा प्रजनन के साथ जोड़ा जाता है तथा शुक्र की यह विशेषताएं भरणी नक्षत्र में भी पायीं जातीं हैं। इसके अतिरिक्त शुक्र ग्रह को रचनात्मकता के साथ भी जोड़ा जाता है तथा शुक्र की यह रचनात्मकता भी भरणी के माध्यम से प्रदर्शित होती है। भरणी नक्षत्र के सभी चरण मेष राशि में स्थित होते हैं जिसके चलते इस नक्षत्र पर मेष राशि तथा इसके स्वामीं मंगल ग्रह का प्रभाव भी देखने में आता है। इस प्रकार भरणी जन्म देने में सहायता करने वाले शुक्र से लेकर मृत्यु को निर्धारित करने वाले यमराज के प्रभाव में आता है तथा इसी कारण भरणी नक्षत्र का स्वभाव निश्चित कर पाना बहुत कठिन हो जाता है तथा बहुत बार इस नक्षत्र के प्रभाव में आने वाले जातक अपने जीवन में जन्म तथा मृत्यु के जैसीं विपरीत चरम सीमाओं को छूते दिखाई देते हैं।

                          अधिकतर वैदिक ज्योतिषी यह मानते हैं कि भरणी नक्षत्र के प्रबल प्रभाव में आने वाले विभिन्न जातक एक दूसरे से बिल्कुल ही विपरीत स्वभाव के स्वामी हो सकते हैं। उदाहरण के लिए इस नक्षत्र के प्रबल प्रभाव में आने वाला एक जातक बिल्कुल ही रचनात्मक प्रवृति का हो सकता है जबकि इसी नक्षत्र के प्रबल प्रभाव में आने वाला दूसरा जातक बिल्कुल ही हिंसात्मक प्रवृति का हो सकता है। इसी प्रकार भरणी के प्रबल प्रभाव में आने वाले विभन्न जातक अति बुद्धिमान अथवा बिल्कुल ही मंद बुद्धि, बहुत पदार्थवादी अथवा बिल्कुल ही तटसथ हो सकते हैं। इसी अतिरेक के चलते भरणी नक्षत्र के जातक अपने जीवन में कई बार ऐसी चरम सीमाओं को छूते हैं जो एक दूसरे से बिल्कुल ही विपरीत होती हैं तथा किसी कुंडली में भरणी नक्षत्र का प्रबल प्रभाव जातक को अपने जीवन काल में कई बार बहुत बड़े उतार-चढ़ावों का सामना करवा सकता है जिसके चलते कई बार तो ऐसे जातकों का जीवन एक तेज चलते झूले की तरह हो जाता है जो कभी बहुत वेग से एक छोर की ओर चला जाता है तो कभी उतने ही वेग से दूसरे छोर की ओर। भरणी जातकों के जीवन में बार बार आने वाली अनिश्चितता की यह स्थिति इनके जीवन के व्यवसायिक, शारीरिक, मानसिक तथा अन्य कई प्रकार के क्षेत्रों पर अपना प्रभाव डालती है।

                         कुंडली में भरणी नक्षत्र का प्रबल प्रभाव जातक के व्यक्तित्व को बल प्रदान करता है जिसके चलते भरणी के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातक सामान्यतया अपने जीवन में आने वाली बड़ी से बड़ी कठिनाई से भी नहीं विचलित होते तथा ऐसे जातक बहुत बड़ी हानी उठाने के पश्चात भी शीघ्र ही संभल जाते हैं तथा पुन: अपने प्रयासों को आरंभ कर देते हैं। अपने चरित्र की इसी विशेषता के चलते भरणी के जातक अपने जीवन में कई बार विफल होने के पश्चात भी हार नहीं मानते तथा अविचलित भाव से अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए प्रयास करते रहते हैं जिसके कारण ऐसे जातक अतत: अपना लक्ष्य प्राप्त कर लेने में बहुत बार सफल भी हो जाते हैं। यहां पर यह बात ध्यान देने योग्य है कि भरणी के प्रबल प्रभाव में आने वाले अधिकतर जातकों के लिए प्रयास करना मह्त्वपूर्ण होता है तथा ये जातक सफलता या असफलता को बहुत महत्व नहीं देते। शुक्र के प्रभाव में आने के कारण भरणी के जातकों में सामान्यतया किसी न किसी प्रकार की रचनातक प्रवृति भी प्रबल रहती है जिसके चलते ऐसे जातक रचनात्मक क्षेत्रों में सफल देखे जा सकते हैं। वैदिक ज्योतिष के अनुसार भरणी नक्षत्र के प्रभाव में आने वाले जातक कई प्रकार के व्यवसायिक क्षेत्रों में कार्यशील पाए जा सकते हैं जैसे कि छोटे बच्चों से संबंधित व्यवासायों मे लगे लोग, शिशु की देखभाल करने वाली आया, नर्स, दाई, शिशु का जन्म करवाने में सहायता करने वाली चिकित्सक, छोटे बच्चों को पढ़ाने वाले अध्यापक तथा अध्यापिकाएं तथा बच्चों से जुड़े व्यवसायों में काम करने वाले अन्य लोग, मृत्यु के पश्चात की जाने वाली प्रथाओं से जुड़े लोग जैसे कि शमशान भूमि में कार्य करने वाले लोग, समाचार पत्रों में मृतकों के बारे में समाचार प्रकाशित करने वाले लोग, मृत्यु की जांच करने वाले जासूस तथा इसी प्रकार के लोग तथा अन्य कई प्रकार के रचनात्मक तथा विनाशकारी कार्यों को करने वाले लोग जिनमें कलाकारों से लेकर हथियारों का व्यापार करने वाले संगठन तथा इनमें काम करने वाले लोग, आतंकवादी संगठनो से जुड़े लोग तथा अन्य कई प्रकार के व्यवसायों से जुड़े लोग भी शामिल हैं।

                             आइए अब चर्चा करते हैं भरणी नक्षत्र से जुड़े कुछ अन्य तथ्यों के बारे में जिन्हें वैदिक ज्योतिष के अनुसार विवाह कार्यों के लिए प्रयोग में लायी जाने वाली गुण मिलान की विधि में महत्वपूर्ण माना जाता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार भरणी नक्षत्र को एक स्त्री नक्षत्र माना जाता है तथा बहुत से वैदिक ज्योतिष भरणी नक्षत्र के इस लिंग निर्धारण का कारण इस नक्षत्र का बहुत सी स्त्री शक्तियों के साथ जुड़ा होना मानते हैं जिनमें इस नक्षत्र का प्रतीक चिन्ह योनि, इस नक्षत्र का स्वामी ग्रह शुक्र तथा इस नक्षत्र से जुड़ी देवी महाकाली भी शामिल हैं। वैदिक ज्योतिष के अनुसार भरणी नक्षत्र को शूद्र वर्ण प्रदान किया जाता है जिसका कारण इस नक्षत्र की अनियंत्रित विनाशकारी शक्ति को माना जाता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार भरणी को गण से मानव माना जाता है जिसका कारण बहुत से वैदिक ज्योतिष इस नक्षत्र से जुड़ी रचनात्मकता तथा सृजन करने की प्रबल अभिलाषा को मानते हैं। वैदिक ज्योतिष भरणी नक्षत्र को गुण से राजसिक मानता है तथा भरणी का यह गुण निर्धारण भी इस नक्षत्र के गण निर्धारण की भांति ही समझा जा सकता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार भरणी नक्षत्र पंच तत्वों में से पृथ्वी तत्व का प्रतिनिधित्व करता है।

लेखक
हिमांशु शंगारी