अश्विनी

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                                       भारतीय वैदिक ज्योतिष की गणनाओं के लिए महत्वपूर्ण माने जाने वाले 27 नक्षत्रों में से अश्विनी को पहला नक्षत्र माना जाता है। घोड़े के सिर को अश्विनी नक्षत्र का प्रतीक चिह्न माना जाता है जो इस नक्षत्र को घोड़े के बहुत से गुणों के साथ जोड़ता है। उदाहरण के लिए घोड़े को यात्रा का प्रतीक माना जाता है तथा यात्रा अपने आप में किसी प्रकार के आरंभ का प्रतीक मानी जाती है। इसलिए अधिकतर वैदिक ज्योतिषी यह मानते हैं कि अश्विनी नक्षत्र का किसी न किसी प्रकार की यात्रा तथा किसी न किसी प्रकार की घटना के आरंभ से सीधा रिश्ता है। इसी प्रकार घोड़ा अपने साहस, गति तथा शक्ति के लिए भी जाना जाता है तथा घोड़े के यह गुण भी अश्विनी नक्षत्र के जातकों में सामान्यता ही पाये जाते हैं। घोड़ा अपनी जिद तथा अड़ियल स्वभाव के लिये भी जाना जाता है तथा घोड़े का यह गुण भी अश्विनी नक्षत्र के माध्यम से व्यवहार में आता है जिसके चलते अश्विनी नक्षत्र के प्रभाव में आने वाले जातक सामान्यतया जिद्दी अथवा अड़ियल स्वभाव के होते हैं तथा इनसे काम निकलवाना कई बार उसी प्रकार से मुश्किल हो जाता है जिस प्रकार किसी अड़ियल घोड़े को सधा कर उस पर सवारी करना। अश्विनी नक्षत्र अपने आप में एक बहुत विलक्षण नक्षत्र है तथा इसके जातक भी बहुत से विलक्षण गुणों के स्वामी होते हैं तथा कुंडली के अच्छा होने की स्थिति में ऐसे जातक अपने जीवन में बहुत से विलक्षण कार्य कर जाते हैं।

                                वैदिक ज्योतिष के अनुसार अश्विनी कुमारों को अश्विनी नक्षत्र का देवता माना जाता है। अश्विनी कुमारों को सूर्य देव के पुत्र माना जाता है तथा वैदिक ग्रंथों के अनुसार अश्विनी कुमार चिकित्सा शास्त्र के पूर्ण ज्ञाता हैं जिसके चलते इन्होनें च्यवन ॠषि को वृद्धावस्था से मुक्त करके पुन: युवा बना दिया था। वैदिक ग्रंथों के अनुसार अश्विनी कुमार स्वभाव से उदार, दूसरों की सहायता को तत्पर रहने वाले तथा स्थान स्थान पर घूमते रहने वाले स्वभाव के हैं तथा अश्विनी कुमारों के चरित्र की यह विशेषताएं अश्विनी नक्षत्र के माध्यम से साकार रुप प्राप्त करती हैं जिसके चलते इस नक्षत्र के प्रबल प्रभाव मे आने वाले जातकों में भी उपर वर्णित विशेषताएं पायीं जातीं हैं। वैदिक ज्योतिष के अनुसार नवग्रहों में से केतु को अश्विनी नक्षत्र का स्वामी ग्रह माना जाता है तथा केतु के चरित्र की बहुत सी विशेषताएं इस नक्षत्र के माध्यम से साकार रुप प्राप्त करती हैं। उदाहरण के लिए केतु को किसी प्रकार के आरंभ के साथ जुड़ा हुआ ग्रह माना जाता है तथा इसी प्रकार अश्विनी को भी आरंभ के साथ जुड़ा हुआ नक्षत्र माना जाता है बल्कि अश्विनी तो प्रथम नक्षत्र होने के कारण अपने आप में नक्षत्रों का ही आरंभ दर्शाता है। वैदिक ज्योतिष में केतु को कई प्रकार के चिकित्सा पद्धतियों के साथ जोड़ा जाता है तथा अश्विनी का भी चिकित्सा क्षेत्र के साथ गहरा संबंध है। इस प्रकार केतु की बहुत सी विशेषताएं इस ग्रह के प्रभाव में आने के कारण अश्विनी नक्षत्र में भी देखीं जातीं हैं।

                               अश्विनी नक्षत्र के सभी चार चरण मेष राशि में ही स्थित होते हैं जिसके कारण मेष राशि तथा इस राशि के स्वामी मंगल का भी इस नक्षत्र पर प्रभाव रहता है तथा मेष राशि एवम मंगल ग्रह की कई विशेषताएं इस नक्षत्र के माध्यम से साकार होती हैं। मंगल ग्रह के प्रभाव के चलते अश्विनी नक्षत्र में साहस तथा शौर्य जैसी विशेषताएं आ जातीं हैं तथा मेष राशि का अग्नि तत्व अश्विनी को तेज गति से कार्य करने की उर्जा प्रदान करता है। इस प्रकार विभिन्न प्रकार की शक्तियों के प्रभाव में आने के फलस्वरूप अश्विनी इन सभी शक्तियों की विशेषताओं का मिश्रित रूप प्रदर्शित करता है जिसके चलते इस नक्षत्र के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातकों में उपर बताईं गईं विशेषताओं में से बहुत सी विशेषताएं पायीं जातीं हैं। अश्विनी के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातक अपने कार्यों को शीघ्रता से आरंभ कर देने में विश्वास रखते हैं तथा इन जातकों को किसी भी प्रकार के कार्य को आरंभ करने से पूर्व प्रतीक्षा करना सामान्यतया बिल्कुल भी पसंद नहीं होता। अश्विनी के जातक समय को व्यर्थ गंवाना बिलकुल भी पसंद नहीं करते तथा गति एवम सपष्टवादिता इन जातकों की मुख्य विशेषताएं होती हैं। अपनी तेज गति तथा नया कार्य करने की विशेषता के कारण अश्विनी जातक कई प्रकार के नए व्यवसाय करने में, नए अविष्कार करने में, नईं खोजें करने में तथा नए प्रयोग करने में प्रत्येक प्रकार के नक्षत्र के जातकों से कई कदम आगे रहते हैं। बातचीत में अश्विनी के जातक बहुत सपष्टवादी होते हैं ऐसे जातक सामान्यतया किसी प्रकार की भूमिका बांधने में समय नष्ट करना पसंद नहीं करते तथा बिना समय गंवाएं सामने वाले व्यक्ति से अपने मन की बात कह देते हैं। अश्विनी जातकों की इस आदत के चलते कई बार सुनने वाला व्यक्ति आहत हो जाता है जिसके चलते इन जातकों को कई बार अशिष्ट अथवा रुखा भी कहा जाता है किन्तु अश्विनी जातक अपने बारे में की जाने वाली ऐसी बातों की तनिक भी चिंता नहीं करते तथा अपने स्वभाव के अनुसार कार्य करते रहते हैं।

                              अश्विनी जातक सामान्यतया किसी भी कार्य को करने में बहुत शीघ्रता दिखाते हैं जिसके चलते कई बार ऐसे जातक किसी प्रकार की हानि भी उठाते हैं किन्तु साथ ही साथ अश्विनी जातक अन्य कई नक्षत्रों के जातकों की तुलना में अधिक बुद्धिमान भी होते हैं जिसके चलते इन्हें तथ्यों को समझने में अधिक समय नहीं लगता जिससे यह किसी कार्य को शीघ्रता से कर लेने की क्षमता रखते हैं। कुंडली मे अश्विनी नक्षत्र के प्रभाव वाले जातक आम तौर पर अपनी आयु से कम ही दिखते हैं तथा बड़ी आयु में जाकर भी ऐसे जातक अन्य जातकों की तुलना में युवा दिखाई देते हैं। बहुत से वैदिक ज्योतिषी यह मानते हैं कि अश्विनी कुमारों का अपनी आयु से युवा दिखने का कारण अश्विनी कुमारों का इस नक्षत्र पर प्रभाव है। वैदिक ग्रंथों के अनुसार अश्विनी कुमार चिर युवा रहने वाले देवता हैं तथा इनके प्रभाव में आने के कारण अश्विनी के जातक भी अपनी आयु की तुलना में युवा दिखाई देते हैं। कुंडली में अश्विनी नक्षत्र के प्रबल प्रभाव वाले जातक सामान्यतया बुद्धिमान, जीवन जीने की कला को जानने वाले, मोहक तथा आकर्षक होते हैं तथा इनका जीवन को जीने का अपना ही एक ढंग होता है। अश्विनी जातकों को रोमांच से भरपूर नए काम करने का तथा रोमांच से भरपूर खेल खेलने का शौक होता है तथा ऐसे जातक बहुत से रोमांचकारी खेलों में हिस्सा लेते हैं। इन जातकों को सामान्यतया खतरों से खेलने का शौक होता है तथा ऐसे जातक नई से नई चुनौतियों का सामना करने के लिए तत्पर रहते हैं तथा अपने इस खतरों से खेलने के शौक के चलते कई बार ये जातक अपने आप को मुसीबत में भी डाल लेते हैं किन्तु मुसीबतें झेलने के बाद भी सामान्यतया ऐसे जातक खतरों से खेलना नहीं छोड़ते। कुंडली में अश्विनी नक्षत्र का प्रबल प्रभाव जातक को मिलनसार बना देता है तथा ऐसे जातक बातचीत करने की कला में भी अच्छे होते हैं जिसके चलते लोग इनके साथ तथा इनकी संगत में रहना पसंद करते हैं।

                          कुंडली में अश्विनी नक्षत्र के प्रबले प्रभाव के कारण जातक कई प्रकार की नकारत्मक प्रवृतियों का आदी भी हो जाता है। उदाहरण के लिए अश्विनी के प्रबल प्रभाव में आने वाले अधिकतर जातक प्रत्येक कार्य को शीघ्र से शीघ्र करने की कोशिश में रहते हैं तथा अपनी इस आदत के चलते ऐसे जातक बहुत से ऐसे कार्यों को करने में सक्षम नहीं होते जिन्हें करने के लिए धैर्य तथा सहनशीलता की आवश्यकता पड़ती है क्योंकि धैर्य तथा सहनशीलता आम तौर पर अश्विनी जातकों के पास बिल्कुल भी नहीं होते। अश्विनी के जातक अधिकतर स्थितियों में शीघ्र परिणामों की अपेक्षा रखते हैं तथा शीघ्र परिणाम प्राप्त न होने की स्थिति में आम तौर पर ये जातक कार्य को अधूरा ही छोड़ देते हैं तथा किसी अन्य कार्य में अपना ध्यान लगा देते हैं। अपनी इस आदत के चलते कई अश्विनी जातक जीवन भर अपने व्यवसाय बदलते रहते हैं तथा जिस भी किसी व्यवसाय से इन्हें कुछ समय तक सकारात्मक परिणाम प्राप्त नहीं होते, ये उस व्यवसाय को छोड़ कर नए व्यवसाय की खोज में लग जाते हैं। इसलिए बहुत से वैदिक ज्योतिषी यह मानते हैं कि कुंडली में अश्विनी के प्रबल प्रभाव वाले जातकों को अपने जीवन में धैर्य तथा सहनशीलता सीखना बहुत आवश्यक है तथा जो अश्विनी जातक अपने भीतर इन गुणों का विकास कर लेने में सक्षम हो जाते हैं वे अपने जीवन में बहुत सफल हो जाते हैं।

                         कुंडली में अश्विनी नक्षत्र का प्रबल प्रभाव जातक को जिद्दी अथवा बहुत जिद्दी भी बना सकता है जिसके चलते ऐसे जातक एक बार जो निर्णय ले लेते हैं, उसे बदल पाना बहुत कठिन हो जाता है तथा अपनी इस जिद के कारण ये जातक जीवन में कई बार भारी हानि उठाते हैं। कुछ वैदिक ज्योतिषी यह मानते हैं कि अश्विनी नक्षत्र का प्रतीक चिन्ह घोड़े का सिर यह दर्शाता है कि इस नक्षत्र का घोड़े के गुणों के साथ गहरा संबंध है तथा जिद्दी होना घोड़े के स्वभाव का एक विशेष गुण है जो अश्विनी के जातकों में भी आ जाता है जिसके चलते अश्विनी नक्षत्र के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातकों से इनकी जिद के विपरीत कोई कार्य करवाना वैसे ही कठिन हो जाता है जैसे किसी अड़ियल घोड़े को बस में करना। अपनी इसी आदत के चलते अश्विनी के जातक जीवन में बहुत बार अपने सबसे बड़े शुभचिंतकों की सलाह भी नहीं मानते जिसके चलते इन्हें अपने जीवन में कई बार बहुत भारी हानि भी उठानी पड़ती है। किन्तु अपने जीवन में बार बार हानि उठाने के बाद भी अधिकतर अश्विनी जातक अपनी गलतियों से सीख नहीं लेते तथा अपने स्वभाव की कमियों को दूर करने का प्रयास नहीं करते। जो अश्विनी जातक अपने स्वभाव में आवश्यक परिवर्तन लाने में सक्षम हो जाते हैं वे दूसरे अश्विनी जातकों की तुलना में जीवन के अधिकतर क्षेत्रों में अधिक सफल देखे जाते हैं।

                           आइए अब चर्चा करते हैं अश्विनी नक्षत्र से जुड़े कुछ अन्य तथ्यों की जिन्हें वैदिक ज्योतिष के अनुसार विवाह कार्यों के लिए प्रयोग में लायी जानी वाली गुण मिलान की प्रणाली में महत्वपूर्ण माना जाता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार अश्विनी को पुरुष नक्षत्र माना जाता है तथा बहुत से वैदिक ज्योतिषी इस लिंग निर्धारण का कारण अश्विनी के उपर अश्विनी कुमारों, केतु तथा मंगल का प्रभाव मानते हैं क्योंकि ये सभी के सभी ग्रह तथा देव पुरुष लिंग के ही हैं। वैदिक ज्योतिष में अश्विनी को वर्ण से वैश्य माना जाता है जिसका कारण कुछ विद्वान इस नक्षत्र का व्यापार क्षेत्र के साथ जुड़ा होना मानते हैं। वैदिक ज्योतिष अश्विनी नक्षत्र को गण में देव तथा गुण में सात्विक मानता है तथा बहुत से वैदिक ज्योतिषी अश्विनी नक्षत्र के इस गण तथा गुण निर्धारण का कारण इसके देवता अश्विनी कुमारों को मानते हैं। वैदिक ज्योतिष के अनुसार अश्विनी नक्षत्र पंच तत्वों में से पृथ्वी तत्व का प्रतिनिधित्व करता है।

लेखक
हिमांशु शंगारी