शेषनाग कालसर्प योग

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सभी बारह प्रकार के कालसर्प योगों में से शेषनाग कालसर्प योग अपना एक अलग ही महत्व रखता है तथा कुंडली में इस दोष की उपस्थिति जातक को ऐसे ऐसे तरीकों से परेशान कर सकती है कि इस दोष से पीड़ित जातक अपने जीवन में कई बार अपनी परेशानियों से तंग आकर अपना जीवन समाप्त करने के बारे में भी सोच लेता है किन्तु इस योग का प्रभाव आम तौर पर जातक को यह भी नहीं करने देता तथा यह योग जातक को तिल तिल कर जीने पर विवश कर देता है। शेषनाग कालसर्प योग की भारतीय ज्योतिष में प्रचलित परिभाषा के अनुसार यह माना जाता है कि यदि किसी कुंडली में राहू बारहवें घर में स्थित हों, केतु कुंडली के छठे घर में स्थित हों तथा शेष सभी ग्रह राहू तथा केतु के बीच में आते हों अर्थात शेष सभी ग्रह कुंडली के बारहवें घर से छठे घर के बीच में स्थित हों तो ऐसी कुंडली में शेषनाग कालसर्प योग बन जाता है जो जातक के जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में तरह तरह की समस्याएं तथा मुसीबतें पैदा करता है। किन्तु शेषनाग कालसर्प योग की प्रचलित परिभाषा में बताईं गईं शर्तें किसी कुंडली में इस दोष का निर्माण करने के लिए अपने आप में पर्याप्त नहीं हैं तथा किसी कुंडली में शेषनाग कालसर्प योग की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए कुंडली में उपस्थित अन्य कई महत्वपूर्ण तथ्यों का अधययन करना भी अति आवश्यक है तथा इन सभी तथ्यों का भली भांति अध्ययन करने के पश्चात ही कुंडली में शेषनाग कालसर्प योग की उपस्थिति सुनिश्चित करनी चाहिए। इनमें से अधिकतर तथ्यों का वर्णन मैने अनंत कालसर्प योग नामक लेख में किया है तथा इन तथ्यों के बारे में जानने के लिए पाठक इस लेख को पढ़ सकते हैं।

                           कुंडली में शेषनाग काल सर्प योग का प्रभाव होने पर आम तौर पर जातक की वित्तिय स्थिति खराब से लेकर बहुत खराब तक रहती है तथा जातक की वित्तिय स्थिति की यह खराबी उसकी कुंडली में इस दोष के बल तथा कुंडली में उपस्थित अन्य अच्छे बुरे योगों पर निर्भर करती है। शेषनाग कालसर्प योग के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातक को आम तौर पर अपना सारा जीवन ही धन की कमी का सामना करना पड़ता है तथा इस दोष के कारण जातक के सिर पर बहुत सा कर्ज भी चढ़ जाता है जो जातक को समय समय पर अपना जीवन निर्वाह करने के लिए अथवा कुछ और आवश्यकताओं के कारण लेना पड़ता है। इस योग के प्रभाव में आने वाले बहुत से जातक अपना सारा जीवन कर्ज के बोझ में ही निकाल देते हैं तथा मृत्यु के समय पर भी आम तौर पर इन जातकों के सिर पर कर्ज चढ़ा होता है। कुंडली में शेषनाग कालसर्प दोष के प्रभाव के कारण जातक का कमाया हुआ अधिकतर धन या तो जातक के अपने अथवा अपने रिश्तेदारों के रोगों का उपचार करने में खर्च हो जाता है अथवा जातक का बहुत सारा धन उसके जीवन में समय समय पर होने वाले झगड़ों अथवा मुकद्दमों के कारण खर्च हो जाता है। शेषनाग कालसर्प योग के प्रभाव के कारण कई बार जातक का बहुत सा धन जुआ खेलने में, शर्तें लगाने में अथवा परायी औरतों के चक्कर में खराब हो जाता है जिसके कारण जातक को अपने जीवन में बार बार कर्ज लेना पड़ता है तथा यह कर्ज निरंतर बढ़ता ही रहता है तथा कई बार यह कर्ज इतना बढ़ जाता है कि जातक इस कर्ज को वापिस करने में सक्षम न होने की स्थिति में शहर अथवा देश छोड़ कर भी भाग जाता है। शेषनाग कालसर्प योग के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातकों को अपने जीवन में कई बार कर्ज चुकाने से बचने के लिए अपना शहर अथवा देश बदलना पड़ सकता है।

                    शेषनाग कालसर्प योग के प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों को जुआ खेलने की लत लग जाती है जिसके कारण इन जातकों को अपने जीवन में बहुत बार भारी धन हानि का सामना करना पड़ता है। यहां पर यह बात ध्यान देने योग्य है कि विषधर कालसर्प योग से पीड़ित कई जातकों को भी जुआ खेलने की आदत के कारण धन हानि का सामना करना पड़ सकता है किन्तु विषधर कालसर्प योग के प्रभाव में आने वाले जातकों को अपने जीवन में कई बार जुआ खेलने के कारण बहुत लाभ भी हो जाता है तथा ऐसे जातक अपने जीवन में कई बार बहुत धनवान भी हो जाते हैं जबकि शेषनाग कालसर्प योग के प्रभाव में आकर जुआ खेलने वाले जातकों का भाग्य आम तौर पर शुरु से ही खराब होता है तथा इस दोष के प्रभाव में आने वाले जातकों को अधिकतर बार जुआ खेलने पर नुकसान ही होता है। शेषनाग कालसर्प योग के प्रभाव में आने वाले कुछ जातक तो अपनी जुआ खेलने की लत के चलते अपनी जमीन जायदाद तथा वाहन आदि तक जुए में हार देते हैं। इसलिए इस दोष से पीड़ित जातकों को अपने जीवन में जुआ खेलने से बचना चाहिए तथा जुआ खेलने की आदत लग जाने की स्थिति में प्रयत्न करके इस आदत से छुटकारा पाना चाहिए क्योंकि जुआ इन जातकों के लिए अधिकतर मौकों पर हानिकारक ही सिद्ध होता है।

                            शेषनाग कालसर्प योग के प्रभाव में आने वाले बहुत से जातकों को एक या एक से अधिक स्थायी रुप से रहने वाले रोग लग जाते हैं जिनके इलाज के लिए इन जातकों का बहुत सारा धन समय समय पर खर्च होता रहता है तथा इन रोगों के कारण जातक को शारीरिक अथवा मानसिक कष्ट भी उठाना पड़ता है। कुंडली में शेषनाग काल सर्प योग के अति प्रबल होने की स्थिति में जातक को कोई जानलेवा रोग भी लग सकता है जिसके चलते जातक का बहुत सा धन इस रोग के ईलाज में लग जाता है तथा इस रोग के कारण जातक को बहुत कष्ट भी झेलने पड़ते हैं और अंत में इसी रोग के कारण जातक की मृत्यु भी हो जाती है। इस योग से पिड़ित कुछ जातकों को अपने जीवन में बहुत बार आप्रेशन तथा शल्य चिकित्सा करवानी पड़ती है जिसके कारण इन जातकों के शरीर को बार बार चीरा फाड़ा जाता है तथा इससे होने वाले कष्ट तथा वेदना से परेशान होकर जातक कई बार अपनी जीवन लीला समाप्त करने के बारे में भी सोचने लगता है। कुंडली में शेषनाग दोष के प्रभाव के कारण जातक के वैवाहिक जीवन में भी कई प्रकार की समस्याएं पैदा हो सकती हैं जो समय समय पर जातक को परेशान करती रहती हैं। इस योग के प्रभाव के कारण जातक को अपनी संतान तथा विशेषतया नर संतान से संबंधित समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है। ऐसे जातक को अपनी संतान की बिमारी के कारण कष्ट उठाना पड़ सकता है अथवा जातक की संतान के नाजायज तथा अनैतिक कार्यों के कारण जातक को बदनामी का सामना भी करना पड़ सकता है।

लेखक
हिमांशु शंगारी