विषधर कालसर्प योग

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विषधर कालसर्प योग की भारतीय ज्योतिष में प्रचलित परिभाषा के अनुसार किसी कुंडली में अगर राहू ग्यारहवें घर में स्थित हों, केतु कुंडली के पांचवें घर में स्थित हों तथा बाकी के समस्त ग्रह कुंडली में राहू तथा केतु के बीच में स्थित हों अर्थात बाकी के समस्त ग्रह कुंडली के ग्यारहवें घर से कुंडली के पांचवें घर के बीच स्थित हों तो ऐसी कुंडली में विषधर कालसर्प योग बनता है जो जातक के लिए भिन्न प्रकार की समस्याएं तथा मुसीबतें लेकर आता है। किन्तु विषधर कालसर्प योग की प्रचलित परिभाषा में बताई गईं शर्तें किसी कुंडली में इस दोष की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए अपने आप में पूर्ण तथा पर्याप्त नहीं हैं तथा किसी कुंडली में बाकी सभी प्रकार के कालसर्प दोषों की तरह विषधर कालसर्प योग की उपस्थिति तय करने के लिए भी कुंडली में उपस्थित अन्य बहुत से महत्वपूर्ण तथ्यों का विस्तारपूर्वक अध्ययन करना अति आवश्यक है तथा कुंडली का भली प्रकार से निरीक्षण करने के पश्चात ही कुंडली में इस योग की उपस्थिति के बारे में निर्णय लेना चाहिए। विषधर कालसर्प योग के निर्धारण के लिए देखे जाने वाले महत्वपूर्ण तथ्यों में से अधिकतर तथ्यों का वर्णन मैने अनंत कालसर्प योग नामक लेख में किया है तथा इन तथ्यों के बारे में जानने के इच्छुक पाठक इस लेख को पढ़ कर इन तथ्यों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। कुंडली में वास्तविक रुप में उपस्थित होने पर विषधर कालसर्प योग जातक के लिए जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में समस्याएं पैदा कर सकता है तथा इनमें से कुछेक समस्याओं पर हम इस लेख में चर्चा करेंगे।

                             कुंडली में विषधर कालसर्प योग के प्रभाव के कारण जातक व्यवसायिक कारणों के चलते बहुत यात्राएं करता है जिससे उसकी शारीरिक तथा मानसिक शक्ति को हानि होती है। इस दोष के प्रभाव में आने वाले कुछ जातक तो अपने व्यवसायों के कारण यात्राएं ही करते रहते हैं तथा इन्हें अधिक देर तक किसी भी एक स्थान पर टिक कर रहने का अवसर प्राप्त नहीं हो पाता जिसके कारण ऐसे जातक अपने परिवार के साथ भी अधिक समय व्यतीत नहीं कर पाते। कुंडली में उपस्थित विषधर कालसर्प योग के प्रभाव के कारण कई जातक गैर कानूनी व्यवसायों में लिप्त हो जाते हैं तथा ऐसे ही कार्यों से धन कमाते हैं। सब प्रकार के कालसर्प योगों में से घातक काल सर्प योग तथा विषधर काल सर्प योग के प्रभाव में आने वाले जातकों के विभिन्न प्रकार के गैर कानूनी कार्यों में लिप्त होने की संभावना सबसे अधिक होती है। विषधर काल सर्प दोष के प्रभाव में आने वाले जातक मादक पदार्थों की तस्करी, गैर कानूनी जुए के अड्डे चलाने के कार्य, विदेशी मुद्रा की तस्करी तथा हवाला जैसे कार्यों तथा अन्य इसी प्रकार के गैर कानूनी कार्यों में लिप्त हो सकते हैं तथा कुंडली में इस दोष के बढ़ते बल के साथ ही इन जातकों का कार्यक्षेत्र तथा इन कार्यों से आने वाला धन भी बढ़ जाता है। इस योग के कुंडली में बहुत बलवान होने की स्थिति में जातक अंतर-राष्ट्रीय स्तर का तस्कर भी बन सकता है तथा ऐसे जातक के बहुत से गैर कानूनी कारोबार दुनिया के कई देशों में चलते हैं जिनके चलते जहां पर एक ओर ऐसे जातकों को बहुत सारा धन प्राप्त होता है वहीं दूसरी ओर इन जातकों की अंतर राष्ट्रीय स्तर पर बहुत बदनामी भी होती है तथा इस दोष के प्रभाव के कारण कई बार इन जातकों का अपने जीवन के बहुत से वर्ष कारावास में भी व्यतीत करने पड़ते हैं।

                           विषधर कालसर्प योग का किसी कुंडली में प्रभाव आम तौर पर जातक को जुआरी प्रवृति का बना देता है जिसके चलते जातक अपने जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में बहुत से काम बिना अधिक विचार किए भाग्य के भरोसे ही कर देता है। इस योग के प्रभाव में आने वाले जातकों में आम तौर पर रातों रात धनवान बनने की प्रवृति प्रबल होती है जिसके चलते धन कमाने के लिए ऐसे जातक जायज या नाजायज किसी भी प्रकार का कार्य करने में संकोच नहीं करते। विषधर काल सर्प योग के प्रभाव के कारण नाजायज काम करने वाले जातक अपने जीवन में कई बार बहुत सा धन कमा लेते हैं तथा कुछ मामलों में तो इस योग के प्रभाव के कारण जातक नाजायज कामों के माध्यम से अथवा किसी प्रकार के जुए के माध्यम से बहुत अमीर बन जाता है परन्तु अधिकतर मामलों में इस दोष के प्रभाव के कारण कमाया हुआ धन आम तौर पर जातक के पास स्थायी रुप से नहीं रह पाता तथा जातक को अपने जीवन में किसी समय इस सारे धन को गंवा देना पड़ता है तथा कई बार जातक बहुत भारी कर्ज के नीचे भी आ जाता है। विषधर काल सर्प योग से पीड़ित जातक की वित्तिय स्थिति आम तौर पर जातक की जुआरी प्रवृति के चलते डांवाडोल ही रहती है तथा ऐसा जातक अपने जीवन में कई बार तो बहुत धनवान हो जाता है जबकि कई बार ऐसा जातक बिल्कुल ही कंगाल हो जाता है। विषधर कालसर्प योग से पीड़ित जातकों को अपनी जुआरी प्रवृति को काबू में करने का प्रयास करना चाहिए तथा इन जातकों को अपने जीवन में किसी भी प्रकार का जुआ खेलने से बचना चाहिए क्योंकि इस दोष के प्रभाव में आने वाले अधिकतर जातकों का जुए के माध्यम से कमाया हुआ पैसा अंत में व्यर्थ ही चला जाता है।

                            कुंडली में विषधर कालसर्प योग के प्रभाव के कारण जातक को संतान पैदा करने में भी कठिनाई आती है तथा इस दोष से पीड़ित जातक को संतान का सुख आम तौर पर विवाह के बहुत देर बाद ही प्राप्त होता है। कुंडली में इस योग के प्रबल होने पर कई बार जातक को संतान का सुख बिल्कुल ही प्राप्त नहीं होता तथा जातक को सारी उम्र संतानहीन ही रहना पड़ता है। स्त्रियों की कुंडली में विषधर कालसर्प योग के प्रबल होने की स्थिति में उन्हें एक या एक से अधिक बार मरे हुए बच्चे पैदा हो सकते हैं तथा कई बार इन बच्चों के जन्म से पहले ही पेट में मर जाने के कारण इन स्त्रियों के स्वास्थय को भी गंभीर हानि हो सकती है। विषाधर कालसर्प योग जातक के वैवाहिक जीवन पर भी बुरा प्रभाव डाल सकता है जिसके चलते जातक को अपने वैवाहिक जीवन में कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इस योग के प्रभाव के कारण जातक को आम तौर पर अपने ससुराल पक्ष की ओर से कोई विशेष सुख अथवा सहयोग प्राप्त नहीं होता तथा इसके विपरीत कई बार जातक को अपने ससुराल पक्ष के कारण बहुत सी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। विषधर कालसर्प योग के प्रभाव में आने वाले जातक के ससुराल वाले कई बार जातक की पत्नि को जातक के विरुद्ध बहुत सारी उल्टी बातें सिखाते हैं जिनके चलते जातक और उसकी पत्नि में कई बार गंभीर झगड़े होते हैं तथा इस दोष के बहुत प्रबल होने की स्थिति में जातक का अपने ससुराल पक्ष के लोगों के षड़यत्रों के कारण अपनी पत्नि से लंबा अलगाव अथवा तलाक भी हो सकता है।

लेखक
हिमांशु शंगारी