पदम कालसर्प योग

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पदम कालसर्प योग की भारतीय ज्योतिष में प्रचलित परिभाषा के अनुसार किसी कुंडली में जब राहू पांचवे घर में स्थित हों, केतु कुंडली के ग्यारहवें घर में स्थित हों तथा बाकि के सारे ग्रह राहू और केतु के बीच में स्थित हों अर्थात बाकि के सारे ग्रह कुंडली के पांचवे घर से ग्यारहवें घर के बीच में स्थित हों तो ऐसी कुंडली में पदम कालसर्प योग का निर्माण हो जाता है जिसके कारण जातक को जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में समस्याओं तथा परेशानियों का सामना करना पड़ता है। किन्तु पदम कालसर्प योग की प्रचलित परिभाषा में बताईं गईं शर्तें किसी कुंडली में इस दोष की उपस्थिति को सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं तथा कुंडली में उपस्थित अन्य कई महत्वपूर्ण तथ्यों का ध्यानपूर्वक अध्ययन करने के पश्चात ही किसी कुंडली में इस दोष की उपस्थिति के बारे में निश्चय करना चाहिए। कुंडली में उपस्थित इन आवश्यक तथ्यों में से अधिकतर तथ्यों का वर्णन मैने अनंत कालसर्प योग नामक लेख में किया है तथा इन तथ्यों के बारे में जानने के इच्छुक पाठक इस लेख को पढ़ सकते हैं। आइए अब देखें कि किसी कुंडली में वास्तविक रूप में उपस्थित होने पर पदम कालसर्प योग नामक यह दोष कुंडली धारक के जीवन को किस प्रकार से प्रभावित करता है।

                         कुंडली में पदम कालसर्प योग के प्रभाव के कारण जातक को संतान पैदा करने में कई प्रकार की कठिनाईयों तथा परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इस दोष के प्रभाव के कारण जातक को संतान का सुख प्राप्त करने के लिए बहुत प्रतीक्षा करनी पड़ सकती है तथा संतान पैदा करने के लिए जातक, उसकी पत्नि या फिर दोनों को ही चिकित्सा की आवश्यकता पड़ सकती है तथा कई बार इस दोष के प्रभाव के कारण लंबी चिकित्सा एवम लंबी प्रतीक्षा के पश्चात ही जातक को संतान सुख प्राप्त हो पाता है। पदम काल सर्प दोष के प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों को संतान प्राप्ति के लिए अधिक प्रतीक्षा तो नहीं करनी पड़ती किन्तु ऐसे जातकों की संतानें आम तौर किसी शारीरिक अथवा मानसिक विकार के साथ पैदा होतीं हैं तथा यह विकार आम तौर पर सारी उम्र बना रहता है जिसके कारण जातक को अपनी संतान के स्वास्थय से संबंधित परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। कुछेक मामलों में जहां कुंडली में पदम कालसर्प योग बहुत बलवान हो तो जातक को सारा जीवन कोई संतान नहीं होती तथा उसे आजीवन संतानहीन ही रहना पड़ता है। पदम कालसर्प योग के प्रभाव के कारण जातक किसी ऐसी संतान का पिता भी बन सकता है जिसे समाज मान्यता नहीं देता। उदाहरण के तौर पर इस दोष के प्रभाव के कारण जातक की संतान किसी ऐसी औरत से पैदा हो सकती है जो जातक की पत्नि न होकर जातक की प्रेमिका हो सकती है तथा इस प्रकार से पैदा हुई संतान को समाज जातक की नाजायज संतान का दर्जा दे सकता है। इस प्रकार पदम काल सर्प दोष की कुंडली में उपस्थिति आम तौर पर जातक को संतान के पैदा होने से संबंधित किसी न किसी प्रकार की समस्या देती है। 

                       पदम कालसर्प योग जातक की शिक्षा पर भी विपरीत प्रभाव डालता है तथा विशेष रूप से उच्च शिक्षा पर, जिसके कारण इस दोष से पीड़ित बहुत से जातक उच्च शिक्षा प्राप्त करने से वंचित रह जाते हैं जिनके कारण अलग अलग कुंडलियों के हिसाब से अलग अलग हो सकते हैं। इस दोष के प्रभाव के कारण जातक को सामान्यतया अपनी उच्च शिक्षा की प्राप्ति के लिए बहुत प्रयत्न करने पड़ते हैं तथा ऐसे जातक की उच्च शिक्षा में कई प्रकार की बाधाएं एवम परेशानियां आती हैं तथा इस दोष से पीड़ित कुछेक जातक तो अपनी उच्च शिक्षा बड़ी उम्र में जाकर ही पूरी कर पाते हैं। पदम कालसर्प योग के प्रभाव के कारण जातक को अपनी उच्च शिक्षा बीच में ही छोड़नी पड़ सकती है तथा कई बार उसे यह शिक्षा जीवन में आगे जाकर दोबारा प्राप्त होती है जबकि कई बार तो जातक को यह शिक्षा बीच में ही छोड़ देने के पश्चात जीवन में दोबारा कभी भी प्राप्त नहीं होती। पदम कालसर्प दोष के प्रभाव के कारण कई बार जातक द्वारा प्राप्त की गई उच्च शिक्षा जीवन में उसके अधिक काम नहीं आ पाती तथा उसे अपनी शैक्षिक योग्यता से बिल्कुल ही भिन्न किसी व्यवसायिक क्षेत्र में काम करना पड़ सकता है जहां पर उसकी शिक्षा का कोई भी मूल्य उसे प्राप्त नहीं होता। पदम कालसर्प दोष जातक की कलात्मक तथा रचनात्मक क्षमता पर भी विपरीत प्रभाव डाल सकता है तथा इस दोष के कारण जातक का मन स्थिर नहीं हो पाता तथा जिसके कारण जातक अपनी मानसिक शक्ति को एकाग्रचित करके किसी कलात्मक तथा रचनात्मक कार्य में नहीं लगा पाता।

                                   इसके अतिरिक्त किसी कुंडली में पदम कालसर्प योग का प्रबल प्रभाव जातके के वैवाहिक जीवन पर भी बुरा प्रभाव डाल सकता है जिसके कारण जातक को अपने वैवाहिक जीवन में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। पदम कालसर्प दोष के कारण जातक के वैवाहिक जीवन में आने वालीं परेशानियां आम तौर पर धन की कमी के कारण पैदा होती हैं। उदाहरण के लिए जातक की पत्नि जातक का कमाया हुआ धन व्यर्थ के कामों में खराब कर सकती है जिसके चलते जातक तथा उसकी पत्नि के मध्य समय समय पर झगड़े हो सकते हैं तथा कमाए हुए धन को व्यर्थ में गंवाने के कारण जातक को धन की कमी का सामना भी करना पड़ सकता है।

लेखक
हिमांशु शंगारी