शंखपाल कालसर्प योग

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शंखपाल कालसर्प योग की भारतीय ज्योतिष में प्रचलित परिभाषा के अनुसार यह माना जाता है कि यदि किसी कुंडली में राहू चौथे घर में स्थित हों, केतु कुंडली के दसवें घर में स्थित हों तथा शेष सभी ग्रह राहू तथा केतु के बीच में आते हों अर्थात शेष सभी ग्रह कुंडली के चौथे घर से दसवें घर के बीच में स्थित हों तो ऐसी कुंडली में शंखपाल कालसर्प योग बन जाता है जो जातक के जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में तरह तरह की समस्याएं तथा मुसीबतें पैदा करता है। किन्तु शंखपाल कालसर्प योग की प्रचलित परिभाषा में बताईं गईं शर्तें किसी कुंडली में इस दोष का निर्माण करने के लिए अपने आप में पर्याप्त नहीं हैं तथा किसी कुंडली में शंखपाल कालसर्प योग की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए कुंडली में उपस्थित अन्य कई महत्वपूर्ण तथ्यों का अधययन करना भी अति आवश्यक है तथा इन सभी तथ्यों का भली भांति अध्ययन करने के पश्चात ही कुंडली में शंखपाल कालसर्प योग की उपस्थिति सुनिश्चित करनी चाहिए। इनमें से अधिकतर तथ्यों का वर्णन मैने अनंत कालसर्प योग नामक लेख में किया है तथा इन तथ्यों के बारे में जानने के लिए पाठक इस लेख को पढ़ सकते हैं। आइए अब देखें कि किसी कुंडली में वास्तविक रूप से उपस्थित होने पर शंखपाल कालसर्प योग जातक के जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में किस प्रकार की समस्याएं पैदा कर सकता है।

                           किसी कुंडली में स्थित शंखपाल कालसर्प योग जातक के बचपन तथा किशोर जीवन पर विपरीत प्रभाव डाल सकता है जिसके चलते इस दोष से पीड़ित जातक अपने बचपन में बुरी आदतों में पड़ सकता है अथवा बुरी संगत में पड़ सकता है। शंखपाल काल सर्प योग के प्रभाव में कुछ जातकों को बचपन में चोरी करने की आदत पड़ जाती है तथा ऐसे जातक आम तौर पर अपने माता पिता के धन में से धन चुराना शुरु कर देते हैं तथा कई बार पकड़े जाने के बाद भी यह जातक शंखपाल काल सर्प योग के प्रभाव के कारण धन की चोरी बंद नहीं करते। ऐसे जातक आम तौर पर पिता के धन की अपेक्षा माता का धन अधिक चुराते हैं। इस दोष के प्रभाव के कारण कुछ जातक बचपन अथवा किशोरावस्था में स्कूल से भागना शुरु कर देते हैं तथा अपना स्कूल का समय बुरी संगत में व्यतीत करते हैं। ऐसे जातक घर से पाठशाला के लिए निकलते तो हैं परन्तु पाठशाला जाने की बजाए कहीं और ही चले जाते हैं तथा समय होने पर घर वापिस पहुंच जाते हैं। शंखपाल काल सर्प योग के प्रभाव के कारण कुछ जातक बचपन तथा किशोरावस्था मे जुआ खेलने लग जाते हैं तथा कुछ जातक सिगरेट पीने लग जाते हैं जबकि इस दोष के बहुत बलवान होने पर कुछ जातक किशोरावस्था में नशा भी करना शुरु कर देते हैं। इस प्रकार किसी कुंडली में शंखपाल काल सर्प योग की उपस्थिति जातक के बचपन तथा किशोरावस्था पर बुरा प्रभाव डालती है जिसके चलते जातक बुरी संगत में पड़ सकता है तथा बुरी आदतें सीख सकता है।

                              कुंडली में उपस्थित शंखपाल कालसर्प योग जातक के व्यवसायिक जीवन पर विपरीत प्रभाव डालता है जिसके चलते जातक को अपने व्यवसायिक जीवन में समय समय पर विभिन्न प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इस दोष के प्रभाव के कारण जातक को अपने जीवन काल में कई बार अपना व्यवसाय बदलना पड़ता है तथा बहुत से जातकों को अपने व्यवसाय से अपनी क्षमता के अनुसार प्राप्ति नहीं होती। शंखपाल कालसर्प दोष से पीड़ित जातक को अपने व्यवसाय के कारण बार बार अपने रहने का स्थान बदलना पड़ सकता है तथा इस दोष के बलवान होने की स्थिति में तो कई बार जातक को अपने जीवनकाल में बहुत से शहर तथा कई बार देश भी बदलने पड़ सकते हैं। बार बार होने वाले बदलावों तथा स्थान परिवर्तनों के कारण जातक कहीं स्थिर नहीं हो पाता तथा जीवन में स्थिरता के अभाव के कारण जातक तनाव में रहता है। शंखपाल कालसर्प योग के प्रभाव के कारण जातक को अपने व्यवसाय में कई बार हानि भी उठानी पड़ सकती है जिसके कारण उसे जीवन में कई बार धन की कमी का सामना भी करना पड़ सकता है। कुंडली में इस दोष के प्रबल होने की स्थिति में जातक को अपने जीवन में कई बार लंबे समयों के लिए बिना किसी प्रकार के व्यवसाय के ही संतोष करना पड़ता है अथवा जातक को अपने अधिकतर जीवन में अपनी शिक्षा तथा क्षमता के अनुरूप व्यवसाय नहीं मिल पाता। शंखपाल कालसर्प योग के कुंडली में अति बलवान होने पर जातक को अपने जीवन में बहुत आयु तक व्यवसायिक स्थिरता नहीं मिल पाती तथा कुछेक जातकों को तो लंबी आयु तक कोई व्यवसाय ही नहीं मिल पाता जिसके चलते इन्हें अपने परिवार तथा मित्रों के भरोसे पर ही गुजारा करना पड़ता है।

                       शंखपाल कालसर्प योग जातक के वैवाहिक जीवन पर भी बुरा प्रभाव डाल सकता है जिसके चलते जातक का अपनी पत्नि के साथ समय समय पर झगड़ा अथवा मतभेद हो सकता है। इस दोष के प्रभाव के कारण पति पत्नि के मध्य होने वाले झगड़ों का कारण अधिकतर मामलों में पति अथवा पत्नि के रिश्तेदार होते हैं जो दोनों में से किसी एक या फिर दोनों के ही मन में एक दूसरे के लिए शंकाएं पैदा कर देते हैं जिनके चलते पति पत्नि एक दूसरे पर अविशवास करना शुरु कर देते हैं तथा यह अविश्वास मदभेदों तथा झगड़ों का कारण बनता है। शंखपाल कालसर्प योग जातक की मानसिक अवस्था पर भी विपरीत प्रभाव डाल सकता है जिसके चलते जातक को कई प्रकार के बुरे सपने आ सकते हैं जिनमें जातक अपने आप को बहुत विचित्र तथा मायावी स्थितियों पाता है तथा इन सपनों के कारण जातक के मानसिक विकास तथा सुकून पर भी विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। कुछेक मामलों में शंखपाल कालसर्प योग से पीड़ित जातक दूसरे लोकों से जुड़े दृष्य भी देखने शुरु कर देता है जो आम तौर पर उसे सपनों में ही दिखाई देते हैं किन्तु कई बार ऐसे दृष्य जातक को जागृत अवस्था में भी दिखाई देने शुरु हो जाते हैं जिसके कारण जातक का मानसिक संतुलन खराब हो सकता है। शंखपाल कालसर्प योग के किसी कुंडली में अति बलवान होने पर जातक के जन्म से कुछ समय पहले जातक की माता को भी बुरे सपने आने शुरु हो जाते हैं जो कि आने वाले बच्चे की कुंडली में किसी प्रबल दुर्योग का संकेत देते हैं।

लेखक
हिमांशु शंगारी