वासुकी कालसर्प योग

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वासुकी कालसर्प योग की वैदिक ज्योतिष में प्रचलित परिभाषा के अनुसार जब किसी कुंडली में राहू तीसरे घर में स्थित हों, केतु कुंडली के नौवें घर में स्थित हों तथा बाकि के सभी ग्रह राहू और केतु के बीच में स्थित हों अर्थात बाकि के सभी ग्रह कुंडली के तीसरे तथा नौवें घर के बीच में स्थित हों तो ऐसी कुंडली में वासुकी कालसर्प योग का निर्माण हो जाता है जो जातक के जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में समस्याएं पैदा कर सकता है। किन्तु वासुकी कालसर्प दोष की प्रचलित परिभाषा में बताईं गई शर्तें किसी कुंडली में इस दोष के निर्धारण के लिए पर्याप्त नहीं हैं तथा किसी कुंडली में वासुकी काल सर्प योग की उपस्थिति निश्चित करने के लिए कुंडली में उपस्थित और भी कई महत्वपूर्ण तथ्यों का ध्यानपूर्वक अध्ययन करना आवश्यक है तथा इन सभी तथ्यों का भली-भांति अध्ययन करने के पश्चात ही कुंडली में वासुकी कालसर्प योग की उपस्थिति का निर्णय लेना चाहिए। इस दोष के निर्धारण के लिए विचार करने योग्य महत्वपूर्ण तथ्यों में से अधिकतर तथ्यों का वर्णन मैने अनंत कालसर्प योगनामक लेख में किया है तथा इन तथ्यों के बारे में जानने के लिए पाठक इस लेख को पढ़ सकते हैं। आइए अब यह देखते हैं कि किसी कुंडली में वास्तविक रूप से उपस्थित होने पर वासुकी काल सर्प योग नाम का यह दोष जातक के लिए किस प्रकार की समस्याएं पैदा कर सकता है।

                         कुंडली में वासुकि काल सर्प योग के उपस्थित होने की स्थिति में जातक को अनेक प्रकार की मुसीबतों का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि किसी कुंडली विशेष में वासुकी कालसर्प योग की उपस्थिति उस कुंडली में पित्र दोष का भी निर्माण कर देती है तथा कुंडली धारक को एक ही समय इन दोनों दोषों का सामना करना पड़ता है। वासुकी कालसर्प दोष के निर्माण के लिए केतु का कुंडली के नौवें घर में स्थित होकर दोष बनाना आवश्यक है तथा केतु के किसी कुंडली के नौवें घर में स्थित होकर दोष बनाते ही सबसे पहले कुंडली में पित्र दोष का निर्माण हो जाता है क्योंकि वैदिक ज्योतिष के अनुसार कुंडली का नौवां घर पित्रों तथा पूर्वजों का घर माना जाता है तथा इस घर में किसी भी दोषकारी ग्रह के स्थित होने पर कुंडली में पित्र दोष का निर्माण हो जाता है जो जातक के जीवन में विभिन्न प्रकार की समस्याएं तथा मुसीबतें लाता है। किसी कुंडली में वासुकी कालसर्प योग तथा पित्र दोष के एक साथ उपस्थित होने पर कुंडली धारक की किस्मत को ग्रहण लग जाता है तथा ऐसे जातक के अधिकतर कार्य या तो कई प्रकार के विघ्नों का सामना करने के पश्चात बहुत देरी से होते हैं अथवा कई बार जातक के भरसक प्रयासों के पश्चात भी उसके कुछ महत्वपूर्ण कार्य हो ही नहीं पाते जिनमें आम तौर पर जातक की ओर से किसी प्रकार के प्रयास में कमी नहीं होती अपितु जातक की बुरी किस्मत ही इन कार्यों को सफल नहीं होने देती। इसका कारण यह है कि वैदिक ज्योतिष के अनुसार कुंडली का नौवां घर पित्रों तथा पूर्वजों के साथ-साथ जातक के भाग्य का भी सूचक होता है जिसके कारण बहुत से वैदिक ज्योतिषि कुंडली के नौवें घर को भाग्य स्थान के नाम से भी संबोधित करते है तथा कुंडली के इस घर में किसी दोषकारी ग्रह का प्रभाव जातक की किस्मत को ग्रहण लगा देता है जिसके कारण जातक को अपने जीवनकाल में अपनी बुरी किस्मत के चलते बहुत सारीं असफलताओं का सामना करना पड़ता है।

                                     वासुकी कालसर्प योग के दुष्प्रभाव के कारण जातक को अपने पैत्रिक परिवार के सदस्यों के कारण बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है तथा ऐसे जातक को अपने माता, पिता, भाई, बहनों तथा परिवार के अन्य कई सदस्यों के भरण पोषण का दायित्व निभाना पड़ सकता है। इस दोष के प्रभाव में आने वाले जातक का बहुत सारा धन अपने परिवार के सदस्यों के काम संवारने में लग जाता है तथा कई बार ऐसा जातक अपने जीवन का एक लंबा हिस्सा अपने परिवार वालों की सेवा करने में ही लगा देता है। वासुकी कालसर्प योग के प्रभाव के कारण जातक को अपने पैत्रिक परिवार के सदस्यों की बिमारियों के इलाज के लिए भी समय-समय पर धन व्यतीत करना पड़ता है जिसके कारण जातक को कई बार कर्ज भी लेना पड़ सकता है। वासुकी काल सर्प दोष के किसी कुंडली में बलवान होने पर जातक के रिश्तेदार उससे कई बार धन की मदद मांग लेते हैं तथा बाद में लौटा देने का वचन देने के बाद भी आम तौर पर जातक के ये रिश्तेदार उसका धन लौटा कर नहीं देते। इसके अतिरिक्त वासुकी कालसर्प योग के प्रभाव के कारण जातक को अपने रिश्तेदारों के कारण जीवन में कई बार बदनामी का सामना भी करना पड़ सकता है तथा जातक अपने रिश्तेदारों के कारण किसी गंभीर मुसीबत में भी फंस सकता है। इस प्रकार वासुकि काल सर्प योग से पीड़ित जातक को अपने पैत्रिक परिवार के सदस्यों के कारण कई प्रकार के कष्टों का सामना करना पड़ सकता है।

                                  किन्तु अपने रिश्तेदारों के कारण इतनी मुसीबतें तथा परेशानियां उठाने के बाद भी वासुकी काल सर्प योग से पीड़ित जातक को आम तौर पर अपने रिश्तेदारों की ओर से समय आने कोई विशेष सहयोग प्राप्त नहीं होता तथा जातक के कई रिश्तेदार अपना काम निकल जाने पर जातक से दूर हो जाते हैं तथा जातक से मिली सहायता की प्रशंसा करने के स्थान पर जातक की पीठ पीछे उसकी निंदा ही करते हैं। इस प्रकार जातक को अपने रिश्तेदारों की सहायता करते रहने के बावजूद भी उनसे सराहना नहीं मिलती अपितु कई बार निंदा ही मिलती है जिसका कारण जातक के पिछले जन्मों के बुरे कर्म होते हैं जिनके चलते जातक को अपने इस जीवन में अपने रिश्तेदारों का कर्ज विभिन्न प्रकार से चुकाना पड़ता है। वासुकि काल सर्प योग के प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों का बहुत सारा धन परिवार की परंपराओं का पालन करने में व्यतीत हो जाता है जबकि इस दोष के प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों का बहुत सारा धन परिवार की ओर से आवश्यक बताए गए धार्मिक अनुष्ठानों में तथा अन्य धार्मिक कार्यों में व्यतीत हो जाता है जिसके कारण इन जातकों को अपने जीवन में कई बार धन की भारी कमी का सामना भी करना पड़ता है। वासुकी कालसर्प योग के प्रभाव के कारण कुछ जातक अपने परिवार के निरंतर बढ़ रहे दायित्वों से परेशान होकर घर छोड़कर भी चले जाते हैं तथा ऐसे जातक आम तौर पर किसी एकांत स्थान या किसी आश्रम में जाकर मन की शांति की तलाश करते हैं। किन्तु वासुकि कालसर्प योग के प्रभाव के कारण इन जातकों को वनों तथा आश्रमों में रहकर भी मन की शांति प्राप्त नहीं होती तथा इस दोष का प्रभाव इन जातकों को पुन: अपने परिवार के पास लौट आने पर विवश कर देता है जहां आकर ये जातक फिर से अपने परिवार का कर्ज चुकाना शुरु कर देते हैं।

लेखक
हिमांशु शंगारी