कुलिक कालसर्प योग

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वैदिक ज्योतिष में प्रचलित परिभाषा के अनुसार जब राहू किसी कुंडली में दूसरे घर में स्थित हों तथा केतु कुंडली के आठवें घर में स्थित हों तथा शेष सारे ग्रह राहू और केतु के बीच में स्थित हों अर्थात शेष सारे ग्रह दूसरे घर से आठवें घर के बीच में स्थित हों तो ऐसी कुंडली में कुलिक कालसर्प योग बनता है जो जातक के जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में कई प्रकार की समस्याएं पैदा कर सकता है। किन्तु यहां पर यह बात ध्यान रखने योग्य है कि कुलिक कालसर्प योग की प्रचलित परिभाषा में दी गईं शर्तें किसी कुंडली में इस दोष का निर्धारण करने के लिए अपने आप में पूर्ण तथा सक्षम नहीं हैं तथा कुलिक कालसर्प योग के किसी कुंडली में उपस्थित होने के लिए कुंडली में उपस्थित और भी कई तथ्यों का ध्यानपूर्वक अध्ययन करना अति आवश्यक है जिसके पश्चात ही किसी कुंडली विशेष में इस दोष की उपस्थिति को निरधारित किया जा सकता है। इनमें से अधिकतर तथ्यों का वर्णन मैने अनंत कालसर्प योग नामक लेख में किया है तथा पाठक इस लेख को पढ़कर इन तथ्यों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। आइए अब कुलिक कालसर्प दोष के किसी कुंडली में उपस्थित होने की स्थिति में जातक के जीवन के विभिन्न क्षेत्रों पर इस दोष के दुष्प्रभावों के बारे में चर्चा करते हैं।

                            कुलिक कालसर्प दोष से पीड़ित अधिकतर जातकों को इस दोष के दुष्प्रभावों का सामना अपने बचपन से ही करना पड़ जाता है तथा इस दोष से पीड़ित जातक की प्राथमिक शिक्षा में इस दोष के चलते कई प्रकार की बाधाएं आ सकती हैं जिनके कारण कुलिक कालसर्प योग से पीड़ित जातक अपनी प्राथमिक शिक्षा को भली प्रकार से पूर्ण नहीं कर पाता तथा इस दोष के अति बलवान होने की स्थिति में कई बार तो जातक को प्राथमिक शिक्षा से वंचित भी रहना पड़ सकता है। उदाहरण के लिए कुलिक कालसर्प दोष से पीड़ित कई जातकों का शिक्षा प्राप्त करने में बिल्कुल भी मन नहीं लगता जिसके चलते ऐसे जातक किताबों तथा स्कूलों से दूर भागते हैं जबकि इस दोष से पीड़ित कुछ जातक अपने परिवार में धन के अभाव के चलते बहुत अच्छी शिक्षा प्राप्त नहीं कर पाते तथा कुछ जातक अपने बचपन में अलग अलग समय पर आने वाली बिमारियों के चलते भली प्रकार से शिक्षा प्राप्त नहीं कर पाते। इस प्रकार कुलिक कालसर्प योग से पीड़ित जातक की प्राथमिक शिक्षा में इस दोष के दुष्प्रभावों के चलते किसी न किसी प्रकार की बाधा आती है। कुलिक कालसर्प योग जातक की खाने पीने से संबंधित आदतें भी खराब कर देता है तथा इसके चलते जातक को कई प्रकार के हानिकारक पदार्थों का सेवन करने की आदत लग सकती है जिसके कारण जातक को अपने जीवन में आगे चलकर कई प्रकार की बिमारियों का सामना करना पड़ सकता है जिनके चलते जातक के स्वास्थय तथा धन दोनों की ही हानि होती है। इस दोष के प्रभाव के चलते जातक को सिगरेट, शराब तथा अन्य प्रकार के मादक पदार्थों की लत लग सकती है जो भविष्य में जाकर कई प्रकार की बीमारियों तथा परेशानियों का कारण बनतीं हैं तथा कुछेक मामलों में तो इन पदार्थों के सेवन के कारण लगने वाली बिमारियां जातक की मृत्यु का कारण भी बन सकती हैं।

                            कुंडली में कुलिक कालसर्प योग होने की स्थिति में जातक को अपने जीवनकाल में कई बार दुर्घटनाओं का सामना करना पड़ सकता है जिसके कारण जातक के शरीर के किसी भाग को भारी क्षति पहुंच सकती है अथवा जातक के शरीर का कोई अंग भंग भी हो सकता है। कुलिक कालसर्प योग के किसी कुंडली में अति बलवान होने की स्थिति में तथा कुंडली में अन्य किसी अच्छे योग के न होने की स्थिति में जातक की किसी दुर्घटना में मृत्यु भी हो सकती है। इसके अतिरिक्त कुंडली में उपस्थित कालसर्प योग जातक की आयु को भी कम करता है तथा इस दोष से पीड़ित जातक आम तौर पर सामान्य से कम आयु में ही मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं। यहां पर यह बात ध्यान देने योग्य है कि कुंडली में जातक की आयु को लंबा करने वाले किसी योग के उपस्थित होने की स्थिति में कुलिक कालसर्प योग के कारण जातक की कम आयु में मृत्यु होने का योग क्षीण हो जाता है तथा कुछ कुंडलियों में तो यह योग भंग भी हो जाता है हालांकि अधिकतर कुंडलियों में कुलिक कालसर्प योग की उपस्थिति के कारण जातक की आयु पर किसी न किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव अवश्य देखने में आता है। इसलिए कुलिक कालसर्प योग से पीड़ित जातकों को इस दोष के निवारण के लिए प्रयत्न अपने जीवनकाल में छोटी आयु से ही शुरु कर देने चाहिएं जिससे इस दोष के कारण उनकी आयु को होने वाली क्षति को कम किया जा सके।

                           किसी जातक की कुंडली में उपस्थित कुलिक कालसर्प योग जातक के विवाह तथा वैवाहिक जीवन से संबंधित समस्याएं भी पैदा कर सकता है। इस दोष से पीड़ित ज़ातक का विवाह देरी से हो सकता है तथा विवाह के पश्चात जातक के वैवाहिक जीवन में इस दोष के प्रभाव के कारण कई प्रकार की समस्याएं पैदा हो सकती हैं। कुलिक कालसर्प योग के किसी कुंडली में बलवान होने की स्थिति में कई बार जातक का विवाह छोटी आयु में ही हो जाता है तथा विवाह के पश्चात उसके वैवाहिक जीवन में विभिन्न प्रकार की मुसीबतें आतीं हैं जिनके चलते जातक के अपनी पत्नि के साथ संबंध खराब हो जाते हैं तथा कुछेक मामलों में तो इस दोष के कारण जातक का अपनी पत्नि के साथ लंबा अलगाव अथवा तलाक भी हो जाता है। कुलिक कालसर्प योग के कई मामलों में जातक का पहला विवाह होने के बाद शीघ्र ही भंग हो जाता है तथा कुछ समय के पश्चात ऐसे जातक का दूसरा विवाह हो जाता है जो आम तौर पर पहले विवाह की तुलना में अच्छा साबित होता है जबकि कुलिक कालसर्प योग के किसी कुंडली में बहुत बलवान होने की स्थिति में जातक के तीन या इससे भी अधिक विवाह हो सकते हैं तथा ऐसे जातक के विवाह आम तौर पर होने के बाद शीघ्र ही टूट हो जाते हैं।

लेखक
हिमांशु शंगारी