अनंत कालसर्प योग

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अनंत कालसर्प योग की वैदिक ज्योतिष में प्रचलित परिभाषा के अनुसार यह माना जाता है कि जब किसी कुंडली में राहू पहले घर में स्थित हों तथा केतु सातवें घर में स्थित हों तथा शेष सभी ग्रह राहू से केतु के बीच में स्थित हों अर्थात शेष सभी ग्रह पहले घर से सातवें घर में स्थित हों तो ऐसी कुंडली में अनंत कालसर्प योग बनता है जो जातक के जीवन के कई क्षेत्रों में समस्याएं पैदा करता है। किन्तु अनंत कालसर्प योग की प्रचलित परिभाषा में बताईं गईं शर्तें किसी कुंडली में इस योग की उपस्थिति को निश्चित करने में अपने आप में पूर्ण तथा सक्षम नहीं हैं तथा किसी कुंडली में अनंत कालसर्प योग की उपस्थिति सुनिश्चित करने से पूर्व कुंडली में उपस्थित और भी कई तथ्यों का ध्यानपूर्वक अध्ययन करना अति आवश्यक है तथा सभी तथ्यों का ध्यानपूर्वक अध्ययन करने के पश्चात ही किसी कुंडली में इस दोष के बनने तथा इससे होने वाली समस्याओं के बारे में निर्णय लेना चाहिए। किसी कुंडली में अनंत कालसर्प योग अथवा अनंत कालसर्प दोष बनाने के लिए राहू तथा केतु दोनों का ही उस कुंडली में नकारत्मक होना आवश्यक है क्योंकि राहू अथवा केतु दोनों में से किसी एक के भी सकारात्मक होने की स्थिति में कुंडली में यह दोष नहीं बनता। नकारात्मक होने के साथ-साथ राहू तथा केतु दोनों का ही कुंडली में सक्रिय रूप से दोषकारी होना भी आवश्यक है क्योंकि किसी ग्रह के केवल नकारात्मक हो जाने से वह ग्रह कुंडली में कोई दोष नहीं बना देता तथा दोष बनाने के लिए किसी भी ग्रह का सक्रिय होना आवश्यक है।

                                        इसके पश्चात राहू तथा केतु की किसी कुंडली में राशि तथा नक्षत्र विशेष में स्थिति का भी अध्ययन किया जाता है तथा अनंत कालसर्प योग के किसी कुंडली में उपस्थित होने की स्थिति में इसके बल का भी अध्ययन किया जाता है तथा इसके अतिरिक्त राहू तथा केतु पर कुंडली में उपस्थित दूसरे शुभ तथा अशुभ ग्रहों का प्रभाव भी देखा जाता है। इन सभी तथ्यों का ध्यानपूर्वक अध्ययन करने के पश्चात ही किसी कुंडली में अनंत कालसर्प योग की उपस्थिति के बारे में सही निर्णय लिया जाना चाहिए तथा केवल राहू तथा केतु की कुंडली के क्रमश: पहले तथा सातवें घर में उपस्थिति तथा शेष सभी ग्रहों की राहू तथा केतु के बीच में उपस्थिति के आधार पर ही अनंत कालसर्प योग की किसी कुंडली में उपस्थिति का निर्णय नहीं लिया जा सकता। अनंत कालसर्प योग के किसी कुंडली में उपस्थिति होने पर भी इस दोष का उस कुंडली में बल तथा इस दोष के दुष्प्रभावों के प्रकट होने का समय का अध्ययन करना आवश्यक है जिससे जातक को इस दोष से होने वाली हानि तथा उस हानि के सही समय का पता चल सके। आइए अब इस दोष के किसी कुंडली में उपस्थित होने की हालत में इस दोष के कारण कुंडली धारक के जीवन में आने वाली समस्याओं के बारे में विचार करते हैं।

                               अनंत कालसर्प योग के किसी कुंडली में उपस्थित होने पर जातक को विवाह तथा वैवाहिक जीवन से संबंधित कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे जातक का विवाह बहुत देरी से हो सकता है तथा इस दोष के अति बलवान होने की स्थिति में जातक को सारा जीवन बिना शादी के भी निकालना पड़ सकता है। अनंत कालसर्प दोष जातक के वैवाहिक जीवन में भी विभिन्न प्रकार की समस्याएं पैदा कर सकता है तथा इस दोष के दुष्प्रभाव के कारण जातक को अपने वैवाहिक जीवन में अपनी पत्नि के साथ वैचारिक मत-भेदों, झगड़ों तथा अलगावों का सामना करना पड़ सकता है तथा इस दोष के बलवान होने की स्थिति में जातक का विवाह भंग भी हो सकता है। किसी कुंडली में अनंत कालसर्प योग के अति बलवान होने की स्थिति में तथा कुंडली में अन्य दोषों के उपस्थित होने की स्थिति में जातक की पत्नि की मृत्यु भी हो सकती है। अनंत कालसर्प दोष जातक के व्यवसायिक जीवन पर भी बुरा असर डालता है जिसके कारण जातक को व्यवसायिक स्थिरता तथा सफलता के लिए बहुत देर तक संघर्ष करना पड़ सकता है तथा अपने जीवन के दूसरे भाग में ही ऐसे जातक को व्यवसायिक स्थिरता प्राप्त होती है। अनंत कालसर्प दोष जातक के व्यवसायिक जीवन में विभिन्न प्रकार की समस्याएं पैदा कर सकता है तथा इस दोष के किसी कुंडली में अति बलवान होने पर कई बार जातक को अपने जीवन का एक लंबा समय बिना किसी व्यवसाय के ही व्यतीत करना पड़ता है।

                           कुंडली में उपस्थित अनंत कालसर्प योग जातक के स्वास्थय पर भी बुरा प्रभाव डाल सकता है जिसके कारण जातक को अपने जीवनकाल में विभिन्न प्रकार की बिमारियों का सामना करना पड़ सकता है तथा किन्हीं विशेष परिस्थितियों में इस दोष के दुष्प्रभाव के कारण जातक मानसिक रूप से रोगी भी बन सकता है। अनंत कालसर्प योग के दुष्प्रभाव के कारण बिमारियों का सामना करने वाले जातकों का बहुत सारा धन इन बिमारियों के इलाज में लग जाता है जिसके कारण इन जातकों को समय-समय पर धन के अभाव का सामना भी करना पड़ता है। अनंत कालसर्प दोष की किसी कुंडली में उपस्थिति जातक को मानसिक रुप से भी बहुत परेशान कर सकती है तथा ऐसा जातक अपने अधिकतर जीवनकाल में किसी न किसी समस्या के चलते मानसिक रूप से परेशान ही रहता है तथा कई बार इन परेशानियों के बहुत अधिक बढ़ जाने पर जातक किसी मानसिक रोग से पीड़ित भी हो जाता है जिसके कारण उसे बहुत सा समय किसी ऐसे स्थान पर व्यतीत करना पड़ सकता है जहां पर मानसिक रुप से विकलांग लोगों को रखा जाता है।

लेखक
हिमांशु शंगारी