कुंडली मिलान तथा शुभ ग्रह

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संबंधित लेख : कुंडली मिलान

पिछले लेख में हमने कुंडली मिलान के समय प्रस्तुत दोनों कुंडलियों में से किसी कुंडली के विवाह तथा वैवाहिक सुख दर्शाने वाले घरों में वैदिक ज्योतिष के अनुसार स्वभाविक रुप से अशुभ तथा क्रूर माने जाने वाले ग्रहों शनि, मंगल, राहु तथा केतु में से किसी के स्थित हो जाने के साथ जुड़ी भ्रांतियों के बारे में चर्चा की थी तथा इसी चर्चा को आगे बढ़ाते हुए इस लेख में हम किसी कुंडली विशेष के विवाह तथा वैवाहिक सुख को दर्शाने वाले घरों में वैदिक ज्योतिष के अनुसार स्वभाविक रूप से शुभ माने जाने वाले ग्रहों के स्थित होने के साथ जुड़ी भ्रांतियों के बारे में चर्चा करेंगें। भारतीय वैदिक ज्योतिष में कार्यशील ज्योतिषियों का एक वर्ग यह मानता है कि जिस प्रकार किसी कुंडली विशेष के वैवाहिक सुख दर्शाने वाले घरों में वैदिक ज्योतिष की प्रचलित धारणाओं के अनुसार अशुभ माने जाने वाले ग्रहों के स्थित हो जाने से जातक के वैवाहिक जीवन में विभिन्न प्रकार कीं विपत्तियां आती हैं, उसी प्रकार किसी कुंडली के वैवाहिक सुख दर्शाने वाले घरों में वैदिक ज्योतिष की प्रचलित धारणाओं के अनुसार शुभ माने जाने वाले ग्रहों के स्थित हो जाने से जातक को अपने वैवाहिक जीवन में विभिन्न प्रकार के सुख प्राप्त होते हैं।

               इस मत के चलते वैदिक ज्योतिषियों का एक वर्ग यह मानता है कि वैदिक ज्योतिष में स्वभाविक रूप से शुभ माने जाने वाले ग्रहों गुरु तथा शुक्र में से किसी एक के अथवा दोनों के ही किसी कुंडली विशेष के वैवाहिक सुख दर्शाने वाले घरों में से किसी घर में स्थित हो जाने पर जातक का वैवाहिक जीवन अति सुखपूर्वक व्यतीत होता है। इस धारणा में विश्वास रखने वाले ज्योतिषि तथा ज्योतिष प्रेमी इस धारणा को इतना प्रबल मानते हैं कि किसी कुंडली विशेष में गुरू अथवा शुक्र के वैवाहिक सुख दर्शाने वाले किसी घर में स्थित हो जाने पर कुंडली में उपस्थित कई दोषों की भी अनदेखी कर देते हैं क्योंकि इन ज्योतिषियों के अनुसार गुरू अथवा शुक्र में से किसी भी ग्रह का कुंडली के वैवाहिक सुख से संबंधित किसी घर में स्थित हो जाना अपने आप में जातक के वैवाहिक जीवन को सफल बनाने के लिए पूर्ण रूप से सक्षम है तथा कुंडली में यदि वैवाहिक जीवन को खराब करने वाले कोई एक-दो दोष बनते भी हों तो भी जातक के वैवाहिक जीवन पर कोई विशेष बुरा असर नहीं पड़ता।

                              हालांकि ज्योतिषियों के एक वर्ग विशेष का यह मत सुनने में बहुत अच्छा लगता है परन्तु व्यवहारिक रूप में यह धारणा बहुत सी कुंडलियों में असत्य साबित होती है तथा कई बार तो गुरू अथवा शुक्र की किसी कुंडली विशेष में ऐसी स्थिति विशेष के परिणाम प्रचलित मत से बिल्कुल विपरीत होते हैं। इसी कारण कुंडली मिलान में अशुभ ग्रहों की स्थिति के साथ जुड़ी धारणा की तरह यह धारणा भी अपनी प्रचलित परिभाषा की अनुसार सदा सत्य नहीं होती तथा ज्योतिषियों के एक वर्ग विशेष का यह मत अधूरा तथा अव्यवहारिक है और इसे व्यवहारिक तथा पूर्ण होने के लिए संशोधन की आवश्यकता है। उदाहरण के लिए, किसी कुंडली में गुरु अथवा शुक्र के सातवें घर में स्थित हो जाने पर बहुत से ज्योतिषि यह मानते हैं कि ऐसे जातक का वैवाहिक जीवन अति सुखमय होगा तथा उसके वैवाहिक जीवन में किसी भी प्रकार का कष्ट नहीं आएगा। किन्तु ज्योतिषियों के एक वर्ग विशेष का यह मत बहुत सी कुंडलियों में असत्य साबित होता है तथा ऐसी कुंडलियों में गुरू अथवा शुक्र की यह स्थिति विशेष जातक के वैवाहिक जीवन में विभिन्न प्रकार के कष्ट तथा विपत्तियां लेकर आती है।

                                  मैने अपने वर्षों के ज्योतिष कार्यकाल में ऐसीं कई कुंडलियां देखीं हैं जिनमें गुरू अथवा शुक्र के कुंडली के सातवें घर में स्थित होने के बावजूद जातकों को अपने वैवाहिक जीवन में विभिन्न प्रकार के कष्टों का सामना करना पड़ा जिनमें एक या एक से अधिक शादियों का बुरे तरीके से टूट जाना, बहुत अधिक लड़ाई-झगड़ा तथा कोर्ट-कचहरी में मुकद्दमों का सामना करना भी शामिल है और ऐसे बहुत से मामलों में जातक की यह दुर्दशा गुरू अथवा शुक्र के कुंडली में सातवें घर में स्थित हो जाने के कारण ही थी। इसका सीधा और साफ कारण यह था कि ऐसे सभी जातकों की कुंडलियों में सातवें घर में स्थित गुरू अथवा शुक्र नकारात्मक तरीके से काम कर रहे थे तथा कुंडली के सातवें घर में स्थित हो कर जातक के वैवाहिक जीवन में कष्ट लाने वाले योग बना रहे थे जिसके कारण ऐसे जातकों को अपने वैवाहिक जीवन में विभिन्न प्रकार की मुसीबतों का सामना करना पड़ा। ऐसे ही एक जातक की कुंडली की मैं आपके साथ यहां पर चर्चा करूंगा जिससे स्थिति को साफ-साफ समझने में सहायता मिलेगी।

                             इस जातक की कुंडली देखने के पश्चात मैने इस जातक से सबसे पहला प्रश्न यह किया था, “क्या आपकी शादी हो गई है”। जातक का जवाब हां में था और उसने बताया कि उसकी शादी छ: महीने पहले हुई है। और मेरा अगला प्रश्न था, “क्या आपकी शादी अभी तक ठीक-ठाक चल रही है या टूट गई है क्योंकि आपकी कुंडली के अनुसार इस समय आपके वैवाहिक जीवन में अनेक प्रकार की मुसीबतें आने के योग हैं”। इस पर जातक ने बताया कि उसकी शादी के बाद से उसका जीवन बहुत कष्टमय बीत रहा है तथा उसकी पत्नि ने उसपर तथा उसके परिवार के अन्य सदस्यों पर दहेज उत्पीड़न के मामले को लेकर पुलिस केस दर्ज करवा दिया है। यह जातक मेरे पास आने से पहले 3-4 ज्योतिषियों को अपनी कुंडली दिखा चुका था तथा उनमें से अधिकतर ज्योतिषियों नें इस जातक की कुंडली के आठवें घर में स्थित शनि महाराज को इस सारी मुसीबत का कारण बताया था तथा उसके लिए कई प्रकार के उपाय करवाये थे जिनसे इस जातक को तनिक भी राहत नहीं मिली थी। इस जातक ने मुझसे अपने वैवाहिक जीवन में चल रहीं भारी विपत्तियों का कारण बताने को कहा क्योंकि इस जातक के अनुसार इसने जितने भी ज्योतिषियों को अपनी कुंडली दिखाई थी, उनमें से केवल मैने ही उसे बिना पूछे और एकदम से उसके वैवाहिक जीवन में चल रही परेशानियों के बारे में बताया था। इसलिए इस जातक का यह मानना था कि मुझे उसकी परेशानियों का सही कारण भी अवश्य पता होगा।

                            और जब मैने इस जातक को बताया कि उसकी परेशानियों का कारण कुंडली के आठवें घर में विराजमान शनि न होकर कुंडली के सातवें घर में बैठे गुरु हैं तो यह जातक एक्दम से हैरान रह गया तथा इसने मुझे बताया कि उसने अपने जीवन में शादी से पहले और शादी के बाद जितने भी ज्योतिषियों को अपनी कुंडली दिखाई है, उनमें से अधिकतर ज्योतिषियों ने उसकी कुंडली में सातवें घर में स्थित गुरू को उसके वैवाहिक जीवन के लिए बहुत शुभ बताया था तथा यह भी कहा था कि गुरू की इस स्थिति के कारण उसे अपने वैवाहिक जीवन में बहुत सुख मिलेगा जबकि हुआ इससे एकदम विपरीत। इसका कारण यह था कि इस जातक की कुंडली में सातवें घर में स्थित गुरु नकारात्मक रुप से काम रहे थे और इस जातक के वैवाहिक जीवन को खराब करने वाला योग बना रहे थे जिसके कारण यह जातक अपने वैवाहिक जीवन में विभिन्न प्रकार की मुसीबतों का सामना कर रहा था। तत्पश्चात मैने इस जातक को कुछ रत्न और अन्य कुछ उपाय बताए तथा इश्वर की कृपा से अब इस जातक का अपनी पत्नि के साथ सहमतिपूर्वक तलाक हो चुका है और अब इसका दूसरा विवाह भी हो चुका है जो कि वैदिक ज्योतिष के कुछ उपायों के चलते तथा इश्वर की कृपा के चलते अब ठीक ढंग से चल रहा है।

                         इसलिए कुंडली मिलान के समय किसी भी कुंडली के किसी विशेष घर में स्थित किसी ग्रह का वैदिक ज्योतिष की प्रचलित धारणा के अनुसार स्वभाविक रुप से शुभ या अशुभ होना बहुत अधिक महत्व नहीं रखता बल्कि उस ग्रह का उस कुंडली विशेष में शुभ या अशुभ रूप से काम करना ही सबसे महत्वपूर्ण होता है जिसका ध्यानपूर्वक अध्ययन करने के पश्चात ही इस ग्रह का जातक के वैवाहिक जीवन में शुभ या अशुभ फल बताया जा सकता है।

लेखक
हिमांशु शंगारी