कुंडली मिलान और मांगलिक दोष

ThreeMonstersCover
Book Your Consultation at AstrologerPanditji.com
Buy This Book in India!
Buy This Book in USA!
Buy This Book in UK and Europe!

हमारा टी वी कार्यक्रम कर्म कुण्डली और ज्योतिष YouTube पर देखने के लिए यहां क्लिक कीजिए

Read this Page in English   

संबंधित लेख : कुंडली मिलान

भारतवर्ष में जब विवाह के लिए कुंडली मिलान किया जाता है तो भारतीय वैदिक ज्योतिष के अनुसार निश्चित रूप से ही मांगलिक दोष को बहुत अधिक महत्व दिया जाता है तथा भारत में अधिकतर लोग एवम ज्योतिषियों के मत के अनुसार मांगलिक दोष को वैवाहिक जीवन में बहुत सारी बाधाएं तथा परेशानियां लाने का कारक माना जाता है। बहुत सारे ज्योतिषि ऐसा मानते हैं कि किसी व्यक्ति की कुंडली में मांगलिक दोष होने की स्थिति में ऐसे कुंडली धारक का विवाह बहुत देरी से हो सकता है अथवा कुंडली धारक के वैवाहिक जीवन में अनेक प्रकार की मुसीबतें आ सकतीं हैं जिनमें कुंडली धारक का अपने पति या पत्नि से तलाक तथा वैधव्य भी शामिल है। इस दोष के कारण पैदा होने वाली मुसीबतों के बारे में चर्चा करने से पहले, आईए देखें कि मांगलिक दोष की परिभाषा क्या है।

                  भारतीय वैदिक ज्योतिष में यह माना जाता है कि किसी भी कुंडली में मंगल अगर 1,2,4,7,8 अथवा 12 नंबर घर में स्थित हो जाते हैं तो ऐसी कुंडली में मांगलिक दोष बन जाता है जिसके कारण कुंडली धारक को उपर बताई गईं समस्याओं का सामना करना पडता है। मंगल की कुंडली के उपर बताए गए घरों में स्थिति देखने के लिए कुंडली के लग्न भाव को पहला घर माना जाता है तथा लग्न भाव में आने वाली राशि के बाद वाली राशियों को क्रम से दूसरे, तीसरे… तथा बारहवें घर में लिखा जाता है। मांगलिक दोष की भारतीय ज्योतिष में प्रचलित इस परिभाषा के अनुसार दुनिया में लगभग 50% लोगों की कुंडली में मांगलिक दोष बनता है क्योंकि कुंडली में केवल बारह घर होते हैं तथा इन बारह घरों में से मंगल के उपर बताए गए 6 घरों में स्थित होने की संभावना लगभग 50% ही रहती है। इस प्रकार से दुनिया के लगभग 50% लोगों की कुंडलियों में मांगलिक दोष बनता है जिसके कारण उनके वैवाहिक जीवन में उपर बताईं गईं समस्याएं आ सकतीं हैं जबकि वास्तविकता में दुनिया में इतने सारे लोगों के वैवाहिक जीवन में तलाक या पति-पत्नि के मर जाने कीं घटनाएं देखने में नहीं आतीं। इस तथ्य का सीधा मतलब है कि मांगलिक दोष की भारतीय वैदिक ज्योतिष में प्रचलित परिभाषा अपने आप में ठीक तथा पूर्ण नहीं है तथा इस परिभाषा में संशोधन की आवश्यकता है। इन संशोधनों का विस्तारपूर्वक वर्णन जानने के लिए मांगलिक दोष नामक लेख पढ़ें। इस लेख में हम केवल मांगलिक दोष के वास्तव में किसी कुंडली में उपस्थित होने से पैदा होने वाली स्थितियों के बारे में ही चर्चा करेंगें।   

                                        आइए अब मांगलिक दोष के साथ जुडीं कुछ भयावह भ्रांतियों के बारे में चर्चा करते हैं। बहुत सारे ज्योतिषियों का यह मानना है कि यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में मांगलिक दोष बनता हो तो ऐसे व्यक्ति को केवल उसी व्यक्ति के साथ विवाह करना चाहिए जिसकी अपनी कुंडली में भी मांगलिक दोष बनता हो अन्यथा कुंडली धारक के वैवाहिक जीवन में अनेक प्रकार की विपत्तियां आतीं हैं तथा कुंडली धारक के पति अथवा पत्नि की मृत्यु भी हो सकती है। मेरे अनुभव तथा मत के अनुसार यह धारणा ठीक नहीं है तथा एक मांगलिक का विवाह किसी ऐसे व्यक्ति के साथ भी सफल हो सकता है जो मांगलिक न हो। यहां पर या जान लेना आवश्यक है कि जिस व्यक्ति की कुंडली में मांगलिक दोष बनता है, उसे भारतीय ज्योतिष के अनुसार मांगलिक कहा जाता है। कुंडली मिलान के समय किसी एक कुंडली धारक का मांगलिक होना अपने आप में शादी को पूरी तरह से खराब करने के लिए अधिकतर मामलों में सक्षम नहीं होता क्योंकि दो लोगों के वैवाहिक जीवन में आने वाली परेशानियों अथवा मुश्किलों का सही आकलन किसी एक की कुंडली से नहीं किया जा सकता तथा इसके लिए दोनों लोगों की कुंडलियों का अध्ययन करना अति आवश्यक है। उदाहरण के लिए यदि कुंडली मिलान के लिए आई दो कुंडलियों में से एक कुंडली में मांगलिक दोष है जो वैवाहिक जीवन में बहुत सारी मुश्किलें बताता है तथा दूसरी कुंडली में एक या एक से अधिक ऐसे शुभ योग हैं जो कुंडली धारक के वैवाहिक जीवन में बहुत खुशी को दर्शाते हैं तो इस स्थिति में एक कुंडली का मांगलिक दोष इस विवाह को बहुत खराब नहीं कर सकता क्योंकि दूसरी कुंडली में वैवाहिक जीवन से संबंधित बहुत शुभ योग हैं जो पहली कुंडली के मांगलिक दोष के असर को बहुत सीमा तक कम कर देंगे। इस लिए कुंडली मिलान के लिए प्रस्तुत किसी एक कुंडली में मांगलिक दोष के होने से विवाह का खराब हो जाना निश्चित नहीं किया जा सकता तथा दोनों कुंडलियों का ध्यानपूर्वक अध्ययन करना आवश्यक है।

                                  आइए अब मांगलिक दोष से जुड़ी एक और भ्रांति के बारे में चर्चा करते हैं। कई भारतीय वैदिक ज्योतिषियों का यह मत है कि एक मांगलिक की शादी दूसरे मांगलिक से करने पर मांगलिक दोष का प्रभाव दोनों कुंडलियों में समाप्त हो जाता है तथा ऐसे कुंडली धारकों का वैवाहिक जीवन सुखमय रहता है। मेरे मत में यह धारणा केवल एक भांति है तथा मैने अपने वर्षों के ज्योतिष अनुभव में इस धारणा को सत्य होते नहीं देखा और वास्तव में इसका विपरीत ही सच होते देखा है। यदि किसी मांगलिक का विवाह किसी दूसरे मांगलिक के साथ कर दिया जाए तो एक कुंडली का मांगलिक दोष जिन समस्याओं को बताता है, दूसरी कुंडली का मांगलिक दोष भी वैसी ही समस्याओं को दर्शाने के कारण पहली कुंडली के द्वारा बताई जाने वाली समस्याओं की पुष्टि कर देगा जिसके चलते इन दो कुंडली धारकों का पारस्परिक वैवाहिक जीवन बहुत सी मुसीबतों में घिर सकता है तथा ऐसी स्थिति में मांगलिक दोष के साथ जुड़ीं बहुत सी भयावय बातों में से कुछ बातें सच हो सकती हैं। मैने ऐसी कई कुंडलियों का अध्ययन किया है जिनमें पति-पत्नि दोनों की कुंडलियों में मांगलिक दोष उपस्थित था तथा इनकी शादियां बहुत मुश्किल समय का सामना कर रहीं थीं तथा इनमें से कुछेक जोड़ों ने तो पुलिस अथवा कोर्ट में तलाक तथा अन्य तरह के केस भी दर्ज करवा रखे थे और ऐसी लगभग सभी कुंडलियों में इन समस्याओं का मुख्य कारण पति-पत्नि दोनों की कुंडलियों में मांगलिक दोष का उपस्थित होना ही था।

                               इसलिए मेरे मत के अनुसार एक मांगलिक की शादी दूसरे मांगलिक के साथ नहीं करनी चाहिए तथा एक मांगलिक का विवाह किसी ऐसे कुंडली धारक से ही करना चाहिए जिसकी कुंडली में मांगलिक दोष बिल्कुल भी न हो क्योंकि दो दोषपूर्ण कुंडलियों के मेल का परिणाम भी दोषपूर्ण तथा समस्याएं पैदा करने वाला ही होगा, न कि मंगलमय तथा शुभ। इसलिए मांगलिक दोष से जुड़ीं इन भ्रांतियों को सही ढंग से समझने के पश्चात ही कुंडली मिलान करना चाहिए तथा दोनों कुंडलियों में उपस्थित सभी तथ्यों का ध्यानपूर्वक अध्ययन करने के पश्चात ही कुंडलियों की पारस्परिक अनुकूलता अथवा प्रतिकूलता का निर्णय करना चाहिए।

लेखक
हिमांशु शंगारी