ज्योतिष में केतु का महत्त्व

Important Yogas in Vedic Astrology
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                                                          भारतीय वैदिक ज्योतिष में केतु को आध्यात्मिकता से जुड़ा ग्रह माना जाता है तथा इसका प्रबल प्रभाव जातक को आध्यात्मिक क्षेत्र में बहुत बड़ीं उपलब्धियां प्राप्त करवा सकता है। हालांकि कोई जातक गुरू के प्रभाव के कारण भी आध्यात्मिक क्षेत्र में उपलब्धियां प्राप्त कर सकता है किन्तु आध्यात्मिक क्षेत्र में होने के बावजूद भी गुरू तथा केतु के प्रभाव वाले जातकों में सामान्यतया बहुत अंतर होता है। गुरू के प्रभाव वाले जातक आम तौर पर अपनी आध्यात्मिक उन्नति की ओर बढ़ने के साथ-साथ दुनियावी रिश्तों तथा जिम्मेदारियों का पालन करने में भी प्रबल विश्वास रखते हैं जबकि केतु के प्रभाव वाले जातक आम तौर पर आध्यात्म के सामने दुनियादारी तथा रिश्तों-नातों को तुच्छ मानते हैं तथा अपनी दुनियावी जिम्मेदारियां और रिश्ते छोड़ कर केवल आध्यात्म की तरफ ही ध्यान देते हैं।

                                                          आध्यात्मिक क्षेत्र में उपलब्धियां प्राप्त कर लेने के पश्चात भी गुरू के प्रभाव वाले लोग आम तौर पर जन कल्याण का मार्ग चुनते हैं तथा लोगों के उद्धार के लिए प्रयासरत हो जाते हैं जबकि केतु के प्रभाव वाले जातक आम तौर पर बहुत सारी आध्यात्मिक उपलब्धियां प्राप्त हो जाने के बावजूद भी दुनियादारी से दूर रहकर अपनी आध्यात्मिक उन्नति की ओर ही बढ़ते रहना पसंद करते हैं। इस प्रकार से यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि केतु के प्रभाव वाले जातक आध्यात्मिक क्षेत्र की ओर दुनियादारी से बुरी तरह मोहभंग हो जाने पर ही जाते हैं जबकि गुरू के प्रभाव वाले जातक दुनियादारी तथा आध्यात्म, दोनों में तालमेल बैठा कर दोनों को एक साथ चलाने में सक्षम होते हैं।

                                                             केतु भी राहु की भांति ही एक छाया ग्रह हैं तथा मनुष्य के शरीर में केतु मुख्य रूप से अग्नि तत्व का प्रतिनिधित्व करते हैं। ज्योतिष की गणनाओं के लिए केतु को ज्योतिषियों का एक वर्ग तटस्थ अथवा नपुंसक ग्रह मानता है जबकि ज्योतिषियों का एक दूसरा वर्ग इन्हें नर ग्रह मानता है। केतु स्वभाव से मंगल की भांति ही एक क्रूर ग्रह हैं तथा मंगल के प्रतिनिधित्व में आने वाले कई क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व केतु भी करते हैं। इन क्षेत्रों के अतिरिक्त केतु जिन क्षेत्रों तथा लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं उनमें आध्यात्म तथा आध्यात्मिक रुप से विकसित लोग, परा शक्तियों के क्षेत्र तथा इनकी जानकारी रखने वाले लोग, दवाएं बनाने वाले लोग तथा दवाओं की बिक्री करने वाले लोग, अनुसंधान के क्षेत्र में काम करने वाले लोग, मानवीय इतिहास पर खोज करने वाले लोग, अनाथालय तथा इनके लिए काम करने वाले लोग और संस्थाएं, वृद्ध आश्रम तथा इनके लिए काम करने वाली संस्थाएं, धार्मिक संस्थाएं तथा इनके लिए काम करने वाले लोग, पादरी, जासूस, इतिहासकार, पुरातत्त्ववेत्ता, भूविज्ञानी, गणितज्ञ तथा अन्य कई क्षेत्र, संस्थाएं और व्यक्ति आते हैं। इसके अतिरिक्त केतु नवजात शिशुओं तथा विशेष रूप से नर शिशुओं, कम उम्र के नर बच्चों, चेलों अथवा शिष्यों, कुत्तों, मुकद्दमेबाजी तथा मुकद्दमों, यात्राओं, वृद्ध लोगों, मानसिक रूप से विक्षिप्त लोगों तथा किसी बाहरी बाधा से पीड़ित लोगों के भी कारक माने जाते हैं। 

                                                            कुंडली में केतु के स्थिति विशेष अथवा किसी बुरे ग्रह की दृष्टि के कारण बलहीन होने पर जातक मानसिक रोगों तथा बाहरी बाधाओं से पीड़ित हो सकता है। इसके अतिरिक्त जातक के शरीर का कोई अंग किसी दुर्घटना अथवा लड़ाई में भंग भी हो सकता है तथा जातक को अपने जीवन में कई बार शल्य चिकित्सा करवानी पड़ सकती है जिसके कारण उसके शरीर की बार-बार चीर-फाड़ हो सकती है। कुंडली में केतु पर किसी बुरे ग्रह का विशेष प्रभाव जातक को कानों तथा पैरों के दर्द अथवा इन अंगों से संबंधित बिमारियों, शरीर पर तेज़ धार हथियार से हमला होने जैसी घटनाओं, मानसिक विक्षिप्तता तथा अतयंत मानसिक पीड़ा से भी पीड़ित कर सकता है। केतु पर किसी बुरे ग्रह का विशेष प्रभाव जातक को जीवन भर शहर से शहर और देश से देश भटकने पर बाध्य कर सकता है। ऐसे जातक अपने जीवन में अधिक समय तक एक स्थान पर टिक कर नहीं रह पाते तथा एक स्थान से दूसरे स्थान पर भटकते ही रहते हैं।

लेखक
हिमांशु शंगारी