कुंडली का नौवां घर

Important Yogas in Vedic Astrology
Book Your Consultation at AstrologerPanditji.com
Buy This Book in India!
Buy This Book in USA!
Buy This Book in UK and Europe!

हमारा टी वी कार्यक्रम कर्म कुण्डली और ज्योतिष YouTube पर देखने के लिए यहां क्लिक कीजिए

Click Here to Read this Page in English

                                                         कुंडली के नौवें घर को भारतीय वैदिक ज्योतिष में धर्म भाव अथवा धर्म स्थान के नाम से जाना जाता है तथा कुंडली का यह घर मुख्य तौर पर कुंडली धारक के पूर्व जन्मों में संचित अच्छे या बुरे कर्मों के इसे जन्म में मिलने वाले फलों के बारे में बताता है। इसी कारण कुंडली के नौवें घर को भाग्य स्थान भी कहा जाता है क्योंकि कर्मफल के सिद्धांत के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति का भाग्य उसके पूर्व जन्मों में संचित किए गए पुण्य तथा पाप कर्मों से ही निश्चित होता है। इस प्रकार कुंडली का यह घर अपने आप में अति महत्त्वपूर्ण है क्योंकि किसी भी व्यक्ति के जीवन में उसका भाग्य बहुत महत्त्व रखता है।

                                                    कुंडली का नौवां घर कुंडली धारक के पित्रों के साथ भी संबंधित होता है तथा इस घर से कुंडली धारक को अपने पित्रों से प्राप्त हुए अच्छे या बुरे कर्मफलों के बारे में भी पता चलता है। कुंडली के नौवें घर के पित्रों के साथ संबंधित होने के कारण इस घर पर किसी भी बुरे ग्रह का प्रभाव कुंडली में पितृ दोष का निर्माण कर देता है जिसके कारण कुंडली धारक को अपने जीवन के कई क्षेत्रों में बार-बार विभिन्न प्रकार की समस्याओं, विपत्तियों तथा परेशानियों का सामना करना पड़ता है जबकि कुंडली के नौवें घर पर एक या एक से अधिक शुभ ग्रहों का प्रभाव होने पर कुंडली धारक को अपने पूर्वजों के अच्छे कर्मों का फल उनके आशीर्वाद स्वरुप प्राप्त होता है, जिसके कारण उसे अपने जीवन के कई क्षेत्रों में सफलताएं तथा खुशियां प्राप्त होतीं हैं।

                                                 कुंडली का नौवां घर कुंडली धारक की धार्मिक प्रवृत्तियों के बारे में भी बताता है तथा उसकी धार्मिक कार्यों को करने की रुचि एवम तीर्थ स्थानों की यात्राओं के बारे मे भी कुंडली के नौवें घर से पता चलता है। नौवें घर पर किन्हीं विशेष शुभ ग्रहों का प्रभाव कुंडली धारक को बहुत धार्मिक बना देता है तथा इस घर पर शुभ गुरू, चन्द्र अथवा सूर्य का प्रभाव विशेष रूप से बहुत अच्छा माना जाता है जिसके फलस्वरूप कुंडली धारक के द्वारा अपने जीवन काल में बहुत से शुभ कार्य किए जाते हैं, जिनके शुभ फल कुंडली धारक की आने वाली पीढ़ियों को भी प्राप्त होते हैं। कुंडली का यह घर कुंडली धारक की आध्यात्मिक प्रगति के साथ भी सीधे रूप से जुड़ा होता है तथा कुंडली के इस घर से कुंडली धारक की आध्यत्मिक उन्नति का पता चल सकता है। कुंडली का नौवां घर विदेशों में भ्रमण तथा स्थायी रुप से स्थापित होने के बारे में भी बताता है।

लेखक
हिमांशु शंगारी