कुंडली का आठवां घर

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                                                          कुंडली के आठवें घर को भारतीय वैदिक ज्योतिष में रंध्र अथवा मृत्यु भाव कहा जाता है तथा अपने नाम के अनुसार ही कुंडली का यह घर मुख्य तौर पर कुंडली धारक की आयु के बारे में बताता है। क्योंकि आयु किसी भी व्यक्ति के जीवन का एक अति महत्त्वपूर्ण विषय होती है, इसलिए कुंडली का यह घर अपने आप में बहुत महत्त्वपूर्ण होता है तथा किसी भी कुंडली का अध्ययन करते समय उस कुंडली के आठवें घर को ध्यानपूर्वक देखना अति आवश्यक होता है। किसी कुंडली में आठवें घर तथा लग्न भाव अर्थात पहले घर के बलवान होने पर या इन दोनों घरों के एक या एक से अधिक अच्छे ग्रहों के प्रभाव में होने पर कुंडली धारक की आयु सामान्य या फिर सामान्य से भी अधिक होती है जबकि कुंडली में आठवें घर के बलहीन होने से अथवा इस घर पर एक या एक से अधिक बुरे ग्रहों का प्रभाव होने से कुंडली धारक की आयु पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।

                                                        कुंडली के आठवें घर से कुंडली धारक के वैवाहिक जीवन के कुछ क्षेत्रों के बारे में भी पता चलता है जिनमे मुख्य रुप से कुंडली धारक का अपने पति या पत्नी के साथ शारीरिक तालमेल तथा संभोग़ से प्राप्त होने वाला सुख शामिल होता है। आठवें घर से कुंडली धारक की शारीरिक इच्छाओं की सीमाओं के बारे में भी पता चलता है। किसी कुंडली में आठवें घर पर किन्हीं विशेष बुरे ग्रहों का प्रभाव कुंडली धारक को आवश्यकता से अधिक कामुकता प्रदान कर सकता है जिसे शांत करने के लिए कुंडली धारक परस्त्रीगामी बन सकता है तथा अपनी कामुकता को शांत करने के लिए समय-समय पर देह-व्यापार में संलिप्त स्त्रियों के पास भी जा सकता है जिससे कुंडली धारक का बहुत सा धन ऐसे कामों में खर्च हो सकता है तथा उसे कोई गुप्त रोग भी हो सकता है। 

                                                       कुंडली का आठवां घर वसीयत में मिलने वाली जायदाद के बारे में, अचानक प्राप्त हो जाने वाले धन के बारे में, किसी की मृत्यु के कारण प्राप्त होने वाले धन के बारे में तथा किसी भी प्रकार से आसानी से प्राप्त हो जाने वाले धन के बारे में भी बताता है। कुंडली के इस घर का संबंध परा शक्तियों से भी होता है तथा किन्हीं विशेष ग्रहों का इस घर पर प्रभाव कुंडली धारक को परा शक्तियों का ज्ञाता बना सकता है। कुंडली के आठवें घर का संबंध समाधि की अवस्था से भी होता है। कुंडली के इस घर का संबंध अचानक आने वालीं समस्याओं, रुकावटों तथा परेशानियों के साथ भी होता है।

                                                      कुंडली का आठवां घर शरीर के अंगों में मुख्य रुप से गुदा तथा मल त्यागने के अंगों को दर्शाता है तथा कुंडली के इस घर पर किन्हीं विशेष बुरे ग्रहों का प्रभाव कुंडली धारक को बवासीर तथा गुदा से संबंधित अन्य बिमारियों से पीड़ित कर सकता है।

लेखक
हिमांशु शंगारी