कुंडली का सातवां घर

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                                                         कुंडली के सातवें घर को भारतीय वैदिक ज्योतिष में युवती भाव कहा जाता है तथा कुंडली के इस घर से मुख्य तौर पर कुंडली धारक के विवाह और वैवाहिक जीवन के बारे में पता चलता है। कुंडली के इस घर से कुंडली धारक के वैवाहिक जीवन से जुड़े सबसे महत्त्वपूर्ण विषयों के बारे में पता चलता है, जैसे कि विवाह होने के लिए उचित समय, पति या पत्नी के साथ वैवाहिक जीवन का निर्वाह, वैवाहिक जीवन में पति या पत्नी से मिलने वाले सुख या दुख, लडाई-झगड़े, अलगाव, तलाक तथा पति या पत्नी को गंभीर शारीरिक कष्ट अथवा पति या पत्नी की मृत्यु के योग। इस प्रकार कुंडली धारक के विवाह तथा वैवाहिक जीवन से जुड़े अधिकतर प्रश्नों के उत्तर जानने के लिए कुंडली के इस घर का ध्यानपूर्वक अध्ययन करना अति आवश्यक है। कुंडली में सातवें घर के बलवान होने से तथा एक या एक से अधिक शुभ ग्रहों के प्रभाव में होने से कुंडली धारक का वैवाहिक जीवन आम तौर पर अच्छा या बहुत अच्छा होता है तथा उसे अपने पति या पत्नी की ओर से अपने जीवन में बहुत सहयोग, समर्थन तथा खुशी प्राप्त होती है जबकि कुंडली में सातवें घर के बलहीन होने से अथवा एक या एक से अधिक बुरे ग्रहों के प्रभाव में होने से कुंडली धारक के वैवाहिक जीवन में तरह-तरह की परेशानियां आ सकती हैं जिनमें पति या पत्नी के साथ बार-बार झगड़े से लेकर तलाक या फिर पति या पत्नी की मृत्यु भी हो सकती है।

                                                    विवाह के अतिरिक्त बहुत लंबी अवधि तक चलने वाले प्रेम संबंधों के बारे में तथा व्यवसाय में किसी के साथ सांझेदारी के बारे में भी कुंडली के इस घर से पता चलता है। कुंडली के सातवें घर से कुंडली धारक के विदेश में स्थायी रुप से स्थापित होने के बारे में भी पता चलता है, विशेष तौर पर जब यह विवाह के आधार पर विदेश में स्थापित होने से जुड़ा हुआ मामला हो।

                                                    कुंडली का सातवां घर शरीर के अंगों में मुख्य तौर पर जननांगों को दर्शाता है तथा किसी कुंडली में इस घर पर किन्हीं विशेष बुरे ग्रहों का प्रभाव कुंडली धारक को जननांगों से संबंधित रोगों से पीड़ित कर सकता है जिनमें गुप्त रोग भी शामिल हो सकते हैं। इस लिए कुंडली के इस घर का अध्ययन बहुत ध्यानपूर्वक करना चाहिए। 

लेखक
हिमांशु शंगारी