रत्नों की पहचान कैसे करें

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अपने लिए उपयुक्त रत्न जान लेने के बाद जब आप उस रत्न को खरीदने के लिए किसी जौहरी की दुकान पर जाते हैं तो आप को उस रत्न की भांति-भांति के मूल्यों में उपलब्ध इतनीं किस्में दिखाई जाती हैं कि आप के लिए यह निर्णय लेना कठिन हो जाता है कि एक ही रत्न की इतनीं किस्मों में से आप को कौन सा रत्न लेना चाहिए। रत्न के मूल्य के हिसाब से उसकी गुणवत्ता कैसे देखी जाए। कैसे पता चले कि जौहरी द्वारा आपको अच्छी गुणवत्ता का बताया जाने वाला कोई रत्न वास्तव में अपना सही प्रभाव देने में सक्षम होगा भी या नहीं। आइए इस लेख में आज इसी विषय पर चर्चा करते हैं कि कैसे आप रत्नों की अधिक जानकारी न होने के बावज़ूद भी अपने लिए एक अच्छा रत्न चुन सकते हैं।

                                                          रत्नों के मूल्य भिन्न-भिन्न स्थानों के आधार पर तथा अपनी उपलब्ध गुणवत्ता के आधार पर अलग-अलग होते हैं तथा इनके बारे में कोई सटीक मापदंड नहीं दिया जा सकता। उदाहरण के लिए 1 ग्राम वज़न का माणिक्य जिसे हम 5 कैरेट या लगभग सवा आठ रत्ती भी कह सकते हैं, 300 रुपये से लेकर 3 लाख रुपये तक में भी उपलब्ध हो सकता है। अपनी गुणवत्ता तथा कुछ अन्य तथ्यों के आधार पर इस रत्न के मूल्य में 1000 गुणा तक का अंतर हो सकता है इसलिए इस चरचा में हम रत्नों के मूल्यों की बजाय उनकी गुणवत्ता परखने के कुछ साधारण लेकिन प्रभावी पक्षों पर ही विचार करेंगे।

                                                           किसी भी रत्न को परखने के सबसे पहले मापदंड उस रत्न का रंग और चमक होते हैं। उदाहरण के लिए यदि आपको पीला पुखराज खरीदना है तो जौहरी द्वारा दिखाए गए अनेक पीले पुखराजों में से गहरा पीला और चमकदार लगने वाला पीला पुखराज हल्के पीले या कम चमक वाले पीले पुख़राजों की तुलना में अपेक्षाकृत अधिक अच्छा होने की संभावना होगी। यहां पर यह बात ध्यान देने योग्य है कि यदि आपको किसी भी प्रकार से यह लगता है कि आपको दिखाए गए अनेक पीले पुखराजों में से कुछेक वास्तव में पीले लग ही नहीं रहे हैं तो जौहरी के आपको इनकी गुणवत्ता के बारे में आश्वस्त करने के बावजूद भी इनमें से किसी को न खरीदें क्योंकि यदि कोई पुखराज पीला ही नहीं है तो वह पीला पुखराज भी नहीं है। इसी प्रकार अगर कोई पन्ना हरा ही नहीं है तो वह पन्ना भी नहीं है। तो सबसे पहले अपने रत्न के सही रंग के बारे में जानें और उसके बाद यह सुनिश्चित करें कि आप उसी रंग का रत्न खरीद रहे हैं।

                                                           इसके बाद रत्न को उसकी स्वच्छता तथा पारदर्शिता के लिए परखा जाता है। यह परख किसी रत्न की वास्तविक गुणवत्ता की जांच करने का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। किन्त्तु यहां से आगे बढ़ने से पहले यह जान लें कि नवरत्नों में से मोती और लाल मूंगे को इस तरीके से नही परखा जाता क्योंकि ये दोनो रत्न अपारदर्शी होते हैं। बाकि के सात रत्नों को इस परीक्षण से परखा जा सकता है। इस परिक्षण को सफलतापूर्वक करने के लिए समुचित मात्रा में प्रकाश की उपस्थिति अति आवश्यक है। इसलिए रत्नों की खरीद या तो दिन के समय पर्याप्त प्रकाश होने पर करें या फिर ऐसी दुकान का चयन करें जहां पर रात के समय भी पर्याप्त मात्रा में प्रकाश उपल्ब्ध करवाने का प्रबंध हो। इस परिक्षण के लिए रत्न को उसके किनारों से अपने हाथ की उंगलियों से पकड़ें तथा उसे ऐसी दिशा में घुमाएं जिससे कि रत्न की पृष्ठभूमि में अर्थात रत्न के पीछे अधिक से अधिक प्रकाश उपलब्ध हो सके। इसके बाद अपनी उंगलियों की सहायता से रत्न को धीरे-धीर घुमाना शुरु कीजिए और साथ ही साथ यह परखना शुरु कीजिए की आप किस हद तक उस रत्न के आर-पार देख पाते हैं अथवा आप किस हद तक उस रत्न की उपरी सतह को भेद कर उसके भीतर तक देख पाते हैं। यदि आप रत्न के आर-पार या उसके भीतर बहुत हद तक देख पाते हैं तो वह रत्न गुणवत्ता के हिसाब से बहुत अच्छा है तथा अपने प्रभाव देने में बहुत हद तक सक्षम होगा।

                                                          किन्तु यदि आप इस रत्न के आर-पार बिल्कुल भी नही देख पाते तथा इसके अंदर देख पाने की स्थिति में आपको इसके अंदर की अशुद्धता बादलों, लकीरों अथवा अनेक काले बिंदुओं के रूप में दिखाई देती है तो यह रत्न अपने प्रभाव देने में सही प्रकार से सक्षम नहीं है। जितनी अधिक अशुद्धताएं इस रत्न के अंदर उपस्थित होंगीं, उतना ही यह रत्न कम पारदर्शी होगा तथा उतना ही यह रत्न कम प्रभावशाली होगा। सबसे अधिक अशुद्धता वाले रत्नों के मामले में तो आप केवल उनकी उपरी सतह को ही देख पाएंगे तथा ये रत्न लगभग अपारदर्शी होंगे। पृष्ठभूमि में पर्याप्त प्रकाश होने के बावजूद भी आप इनकी उपरी सतह से आगे कुछ नहीं देख पायेंगे। ये रत्न सबसे निम्न कोटि के होते हैं तथा अपना प्रभाव बहुत ही कम मात्रा में प्रदान करने में ही सक्षम होते हैं। इसलिए जितना जो रत्न जितना अधिक अशुद्धताओं से रहित तथा स्वच्छ होगा, उतना ही अधिक प्रभाव देने में सक्षम होगा।

                                                         मोती तथा लाल मूंगे के मामले में इनकी मुख्य परख इनके रंग तथा चमक से की जाती है। इसके अतिरिक्त इनकी परख करने का एक और मापदंड इनकी ठोसता की परख होता है। उदाहरण के लिए अगर हम एक साधारण गुणवत्ता का मोती लें तथा एक उत्तम गुणवत्ता का मोती लें, तो अपनी ठोसता के चलते उत्तम कोटि का 2 ग्राम का मोती आकार में साधारण कोटि के लगभग 1 ग्राम के मोती के बराबर दिखाई देगा, यानि कि अपनी ठोसता के गुण के चलते यह मोती एक जैसे वज़न लेने पर आकार में निम्न कोटि के मोती की तुलना में लगभग आधा ही प्रतीत होगा।

                                                        उपर दिए गए इन मापदंडों की सहायता से भले ही आप एक जौहरी न बन पायें किन्तु अपने लिए उचित दाम में अच्छी गुणवत्ता का रत्न खरीदने में सफल अवश्य हो सकते हैं।

लेखक
हिमांशु शंगारी