रेवती नक्षत्र यंत्र

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नवग्रहों के यंत्रों के प्रयोग के साथ साथ वैदिक ज्योतिष 27 नक्षत्रों के यंत्रों के प्रयोग का परामर्श भी देता है। इन यंत्रों के विधिवत प्रयोग से प्रत्येक जातक अपने जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में लाभ प्राप्त कर सकता है जिसके कारण नक्षत्रों के यंत्र भी वैदिक ज्योतिष का अचूक तथा कारगार उपाय सिद्ध हो सकते हैं। वर्तमान समय में हालांकि नक्षत्रों के यंत्रों के प्रयोग का चलन अधिक नहीं है किन्तु 27 नक्षत्रों के यंत्रों का प्रयोग जातक को उसी प्रकार से लाभ दे सकता है जिस प्रकार नवग्रहों के यंत्रों का प्रयोग। 27 लेखों की इस श्रंखला के माध्यम से हम अश्विनी से लेकर रेवती तक वैदिक ज्योतिष में महत्वपूर्ण माने जाने वाले 27 नक्षत्रों के यंत्रों के बारे में चर्चा करेंगें। वैदिक ज्योतिष मुख्य रूप से रेवती नक्षत्र यंत्र के प्रयोग का परामर्श किसी कुंडली में नकारात्मक अर्थात अशुभ रूप से काम कर रहे रेवती नक्षत्र की नकारात्मकता को कम करने के लिये देता है किन्तु इसी के साथ साथ वैदिक ज्योतिष किसी कुंडली में सकारात्मक अर्थात शुभ रूप से कार्य कर रहे रेवती नक्षत्र से और अधिक लाभ प्राप्त करने के लिये भी इस यंत्र के प्रयोग का सुझाव देता है। रेवती नक्षत्र यंत्र का विधिवत प्रयोग करने से जातक को उसकी कुंडली में रेवती नक्षत्र द्वारा प्रदर्शित सामान्य तथा विशिष्ट विशेषताओं से संबंधित लाभ प्राप्त हो सकते हैं जिसके चलते विभिन्न प्रकार के जातक विधिवत बनाये गये रेवती यंत्र के प्रयोग के माध्यम से अनेकानेक प्रकार के लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

           यहां पर यह बात ध्यान देने योग्य है कि रेवती नक्षत्र यंत्र को स्थापित करने से प्राप्त होने वाले लाभ किसी जातक को पूर्ण रूप से तभी प्राप्त हो सकते हैं जब जातक द्वारा स्थापित किया जाने वाला रेवती नक्षत्र यंत्र शुद्धिकरण, प्राण प्रतिष्ठा तथा उर्जा संग्रह की प्रक्रियाओं के माध्यम से विधिवत बनाया गया हो तथा विधिवत न बनाए गए रेवती नक्षत्र यंत्र को स्थापित करना कोई विशेष लाभ प्रदान करने में सक्षम नहीं होता। शुद्धिकरण के पश्चात रेवती नक्षत्र यंत्र को रेवती नक्षत्र के वेद मंत्रो की सहायता से एक विशेष विधि के माध्यम से उर्जा प्रदान की जाती है जो रेवती नक्षत्र की शुभ उर्जा के रूप में इस यंत्र में संग्रहित हो जाती है। किसी भी रेवती नक्षत्र यंत्र की वास्तविक शक्ति इस यंत्र को रेवती नक्षत्र वेद मंत्रो द्वारा प्रदान की गई शक्ति के अनुपात में ही होती है तथा इस प्रकार जितने अधिक वेद मंत्रों की शक्ति के साथ किसी रेवती नक्षत्र यंत्र को उर्जा प्रदान की गई हो, उतना ही वह रेवती नक्षत्र यंत्र शक्तिशाली होगा। विभिन्न प्रकार के जातकों की कुंडली के आधार पर तथा उनके द्वारा इच्छित फलों के आधार पर रेवती नक्षत्र यंत्र को उर्जा प्रदान करने वाले वेद मंत्रों की संख्या विभिन्न जातकों के लिए भिन्न भिन्न हो सकती है तथा सामान्यतया यह संख्या 5100 से लेकर 125,000 रेवती नक्षत्र वेद मंत्र के जाप तक होती है जिसके कारण देखने में एक से ही लगने वाले विभिन्न रेवती नक्षत्र यंत्रों की शक्ति तथा मूल्य में बहुत अंतर हो सकता है।

            किसी भी रेवती नक्षत्र यंत्र को अपने जातक को लाभ प्रदान करने के लिए कम से कम 5100 रेवती नक्षत्र वेद मंत्रों की सहायता से उर्जा प्रदान की जानी चाहिए तथा इससे कम मंत्रों द्वारा बनाए गए रेवती नक्षत्र यंत्र सामान्यतया कोई विशेष फल प्रदान करने में सक्षम नहीं होते तथा बिना उर्जा के संग्रह वाला रेवती नक्षत्र यंत्र धातु के एक टुकड़े के समान ही होता है जिसे 50 रूपये के मूल्य में प्राप्त किया जा सकता है। यहां पर यह बात ध्यान देने योग्य है कि रेवती नक्षत्र यंत्र को विधिवत बनाने की प्रक्रिया में इस यंत्र को उर्जा प्रदान करने वाला चरण सबसे अधिक महत्वपूर्ण है तथा यदि उर्जा संग्रहित करने की इस प्रक्रिया को यदि विधिवत तथा उचित प्रकार से न किया जाए अर्थात यदि किसी रेवती नक्षत्र यंत्र को उर्जा प्रदान करने के लिए रेवती नक्षत्र मंत्रों का जाप किया ही न जाए अथवा यह जाप 100 या 200 रेवती नक्षत्र वेद मंत्रों का हो तो ऐसा रेवती नक्षत्र यंत्र किसी जातक को या तो कोई विशेष फल प्रदान करने में सक्षम नही होगा या फिर ऐसा रेवती नक्षत्र यंत्र कोई भी फल प्रदान नहीं करेगा। इसलिए किसी भी रेवती नक्षत्र यंत्र के भली प्रकार से कार्य करने तथा जातक को लाभ प्रदान करने के लिए इस यंत्र को विधिवत बनाया जाना अति आवश्यक है।

           मेरे संज्ञान मे यह भी आया है कि बहुत से पंडित ऐसी धारणा रखते हैं कि बहुत से रेवती नक्षत्र यंत्रों को एक साथ रखकर जैसे कि 10 अथवा 100 रेवती नक्षत्र यंत्रों को एक साथ रखकर इन सभी रेवती नक्षत्र यंत्रों के लिए संयुक्त रूप से केवल एक ही बार 11,000 रेवती नक्षत्र वेद मंत्रों का जाप करने से इन सभी यंत्रों में उर्जा का संग्रह हो जाएगा तथा बहुत से पंडित तो इसी प्रकार से रेवती नक्षत्र यंत्रों तथा अन्य यंत्रों को बनाते भी हैं। किन्तु यह धारणा प्रभावशाली नहीं है तथा इस प्रक्रिया के माध्यम से अनेकों रेवती नक्षत्र यंत्रों को एक साथ बनाना इन रेवती नक्षत्र यंत्रों को खरीदने वाले जातकों के साथ धोखा तथा अन्याय भी है क्योंकि किसी भी रेवती नक्षत्र यंत्र को उचित रूप से उर्जा प्रदान करने के लिए इस यंत्र को किसी जातक विशेष के लिए उसके नाम से संकल्पित करके अकेले ही बनाना अति आवश्यक है। यह एक लंबी प्रक्रिया है जिसके अनुसार केवल एक रेवती नक्षत्र यंत्र को उर्जा प्रदान करने में 2 से 7 दिन तक का समय लग सकता है जिसके चलते बहुत से रेवती नक्षत्र यंत्र विक्रेता तथा पंडित इस प्रक्रिया की अपेक्षा कर देते हैं तथा एक ही साथ सैंकड़ों रेवती नक्षत्र यंत्रों को बिना किसी व्यक्ति विशेष के लिए संकल्पित किए, उर्जा प्रदान करने की चेष्टा करते हैं।

           किन्तु एक ऐसे रेवती नक्षत्र यंत्र की, जिसे किसी व्यक्ति विशेष के लिए संकल्पित करके अकेले ही यंत्र को उर्जा प्रदान की गई हो, किसी ऐसे रेवती नक्षत्र यंत्र के साथ बिल्कुल भी तुलना नहीं की जा सकती जिसे सैंकड़ों अन्य रेवती नक्षत्र यंत्रों के साथ बिना किसी विशेष संकल्प के उर्जा प्रदान करने की चेष्टा की गई हो क्योंकि इनमें से प्रथम श्रेणी का रेवती नक्षत्र यंत्र विधिवत बनाया गया तथा उत्तम फल प्रदान करने में सक्षम है जबकि दूसरे यंत्र को उचित विधि से नहीं बनाया गया है तथा बहुत से अन्य रेवती नक्षत्र यंत्रो के साथ होने के कारण इस यंत्र के हिस्से में संभवतया केवल 100 या इससे भी कम रेवती नक्षत्र मंत्रों की उर्जा आई होगी जिसके चलते ऐसा यंत्र किसी भी जातक को कोई विशेष फल देने में सक्षम नहीं होता। उर्जा प्रदान करने के अतिरिक्त प्रत्येक रेवती नक्षत्र यंत्र को विशिष्ट वैदिक विधियों के माध्यम से शुद्धिकरण, किसी व्यक्ति विशेष को ही अपने शुभ फल प्रदान करने की क्षमता प्रदान करने वाली प्रक्रिया से भी निकाला जाता है तथा अंत में इन विधियों के द्वारा बनाए गए रेवती नक्षत्र यंत्र को विशिष्ट वैदिक विधियों के माध्यम से सक्रिय कर दिया जाता है जिससे यह यंत्र अपने फल देने में सक्षम हो जाता है। इसलिए अपने लिए रेवती नक्षत्र यंत्र स्थापित करने से पहले सदा यह सुनिश्चित करें कि आपके द्वारा स्थापित किया जाने वाला रेवती नक्षत्र यंत्र उपरोक्त सभी प्रक्रियों में से निकलने के बाद विधिवत केवल आपके लिए ही बनाया गया है।

          विधिवत बनाया गया रेवती नक्षत्र यंत्र प्राप्त करने के पश्चात आपको इसे अपने ज्योतिषी के परामर्श के अनुसार अपने घर में पूजा के स्थान अथवा अपने बटुए अथवा अपने गले में स्थापित करना होता है। उत्तम फलों की प्राप्ति के लिए रेवती नक्षत्र यंत्र को बुधवार वाले दिन स्थापित करना चाहिए तथा घर में स्थापित करने की स्थिति में इसे पूजा के स्थान में स्थापित करना चाहिए। इसके अतिरिक्त आप अपने रेवती नक्षत्र यंत्र को बुधवार के दिन ही अपने ज्योतिष के परामर्श अनुसार अपने बटुए में, अथवा अपने गले में भी स्थापित कर सकते हैं। रेवती नक्षत्र यंत्र की स्थापना के दिन नहाने के पश्चात अपने यंत्र को सामने रखकर 11 या 21 बार रेवती नक्षत्र के वेद मंत्र या मूल मंत्र का जाप करें तथा तत्पश्चात अपने रेवती नक्षत्र यंत्र पर थोड़े से गंगाजल अथवा कच्चे दूध के छींटे दें, रेवती नक्षत्र के देवता पूषा देव से इस यंत्र के माध्यम से अधिक से अधिक शुभ फल प्रदान करने की प्रार्थना करें तथा तत्पश्चात इस यंत्र को इसके लिए निश्चित किये गये स्थान पर स्थापित कर दें। आपका रेवती नक्षत्र यंत्र अब स्थापित हो चुका है तथा इस यंत्र से निरंतर शुभ फल प्राप्त करते रहने के लिए आपको इस यंत्र की नियमित रूप से पूजा करनी होती है। प्रतिदिन स्नान करने के पश्चात अपने रेवती नक्षत्र यंत्र की स्थापना वाले स्थान पर जाएं तथा इस यंत्र को नमन करके 11 या 21 रेवती नक्षत्र वेद मंत्रों या मूल मंत्रों के उच्चारण के पश्चात अपने इच्छित फल इस यंत्र से मांगें। यदि आपने अपने रेवती नक्षत्र यंत्र को अपने बटुए अथवा गले में धारण किया है तो स्नान के बाद इसे अपने हाथ में लें तथा उपरोक्त विधि से इसका पूजन करें तथा अपना इच्छित फल इससे मांगें। अपने पास स्थापित किए गये रेवती नक्षत्र यंत्र की नियमित रूप से पूजा करने से आपके और आपके रेवती नक्षत्र यंत्र के मध्य एक शक्तिशाली संबंध स्थापित हो जाता है जिसके कारण यह यंत्र आपको अधिक से अधिक लाभ प्रदान करने के लिए प्रेरित होता है।

लेखक
हिमांशु शंगारी