उच्च का बृहस्पति 01

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संबंधित लेख :  उच्च का बृहस्पति 02 , कुंडली में उच्च के ग्रह

वैदिक ज्योतिष के अनुसार कर्क राशि में स्थित होने पर बृहस्पति को उच्च का बृहस्पति कहा जाता है जिसका साधारण शब्दों में अर्थ यह होता है कि कर्क राशि में स्थित होने पर बृहस्पति अन्य सभी राशियों की तुलना में सबसे बलवान हो जाते हैं। कुछ वैदिक ज्योतिषी यह मानते हैं कि कुंडली में उच्च का बृहस्पति सदा शुभ फलदायी होता है जो सत्य नहीं है क्योंकि कुंडली में बृहस्पति का उच्च होना केवल उसके बल को दर्शाता है तथा उसके शुभ या अशुभ स्वभाव को नहीं जिसके चलते किसी कुंडली में उच्च का बृहस्पति शुभ अथवा अशुभ दोनों प्रकार के फल ही प्रदान कर सकता है जिसका निर्णय उस कुंडली में बृहस्पति के शुभ अशुभ स्वभाव को देखकर ही लिया जा सकता है। आज के इस लेख में हम कुंडली के विभिन्न 12 घरों में स्थित होने पर उच्च के बृहस्पति द्वारा प्रदान किये जाने वाले कुछ संभावित शुभ तथा अशुभ फलों के बारे में विचार करेंगे।

कुंडली के पहले घर में उच्च का गुरु : किसी कुंडली के पहले घर में स्थित उच्च का बृहस्पति शुभ होने की स्थिति में जातक को आर्थिक पक्ष से शुभ फल प्रदान कर सकता है तथा इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों को अपने पिता अथवा दादा के माध्यम से धन संपत्ति की प्राप्ति हो सकती है। कुंडली के पहले घर में स्थित शुभ उच्च का गुरु जातक को नाम, प्रसिद्धि तथा प्रतिष्ठा आदि भी प्रदान कर सकता है तथा इस प्रकार का शुभ प्रभाव कुछ जातकों को अच्छा अथवा बहुत अच्छा आध्यात्मिक विकास भी प्रदान कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातक आध्यात्मिक रूप से बहुत विकसित हो सकते हैं तथा आलौकिक जगत के साथ संबंध भी स्थापित कर सकते हैं। वहीं दूसरी ओर कुंडली के पहले घर में स्थित बृहस्पति अशुभ होने की स्थिति में जातक के वैवाहिक जीवन में अनेक प्रकार की समस्याएं पैदा कर सकता है तथा जातक के वैवाहिक जीवन को बहुत कष्टमय बना सकता है। इस प्रकार के अशुभ प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों का एक विवाह टूट भी सकता है तथा इस प्रभाव के कुंडली में बहुत प्रबल होने पर ऐसा अशुभ उच्च का गुरु जातक के एक से अधिक विवाह भी तोड़ सकता है। कुंडली के पहले घर में स्थित अशुभ उच्च का गुरु जातक को किसी गंभीर शारीरिक अथवा मानसिक रोग से पीड़ित भी कर सकता है तथा कई बार तो इस प्रकार के अशुभ प्रभाव के कुंडली में बहुत प्रबल होने पर ऐसा जातक जन्म लेते ही किसी गंभीर तथा कष्टप्रद रोग से पीड़ित होता है।

कुंडली के दूसरे घर में उच्च का गुरु : किसी कुंडली के दूसरे घर में स्थित उच्च का बृहस्पति शुभ होने की स्थिति में जातक को धनी अथवा बहुत धनी बना सकता है तथा ऐसे जातक अपने जीवन में समय समय पर धन की प्राप्ति करते रहते हैं। कुंडली के दूसरे घर में स्थित शुभ उच्च के गुरु के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातकों को अपने जीवन में धन कमाने के लिए बहुत अधिक परिश्रम नहीं करना पड़ता तथा इन जातकों के पास धन सहज ही आना शुरु हो जाता है जिससे इनका जीवन सुविधायुक्त तथा ऐश्वर्यपूर्ण हो जाता है। इस प्रकार के शुभ उच्च के बृहस्पति के प्रभाव में आने वाले जातकों का वैवाहिक जीवन भी सुखमय होता है तथा इनमें से कुछ जातकों को धनी अथवा बहुत धनी पत्नी प्राप्त होती है जबकि कुछ अन्य जातकों को बहुत संस्कारी तथा सुशील पत्नी प्राप्त होती है। वहीं दूसरी ओर कुंडली के दूसरे घर में स्थित उच्च के गुरु के अशुभ होने की स्थिति में जातक के वैवाहिक जीवन में अनेक प्रकार की समस्याएं पैदा हो सकतीं हैं तथा इस प्रकार के कुछ जातकों का विवाह किसी ऐसी स्त्री से हो सकता है जो स्वभाव से बहुत शंकालु अर्थात शक्की हो तथा जो छोटी से छोटी बात को लेकर भी जातक पर संदेह करके उसे परेशान कर सकती हो। कुंडली के दूसरे घर में स्थित अशुभ उच्च का गुरू जातक को अनेक प्रकार के रोगों से पीड़ित भी कर सकता है तथा इनमें से कुछ जातकों को लंबे समय तक चलने वाला अथवा जीवन भर चलने वाला तथा कष्ट देने वाला कोई रोग भी लग सकता है जो इन जातकों को बहुत लंबे समय तक कष्ट देने के पश्चात अंत में इनके प्राण भी ले सकता है।

कुंडली के तीसरे घर में उच्च का गुरु : किसी कुंडली के तीसरे घर में स्थित उच्च का बृहस्पति शुभ होने की स्थिति में जातक को आर्थिक लाभ प्रदान कर सकता है तथा इस प्रकार के जातक सामान्यतया अपने परिश्रम तथा प्रयास से ही धन अर्जित करते हैं। कुंडली के तीसरे घर में स्थित शुभ उच्च का गुरु जातक को विदेशी भूमि पर भी ले जा सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातक विदेशों में स्थायी रूप से स्थापित हो सकते हैं जबकि इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले कुछ अन्य जातक विदेशों में काम के प्रयोजन से जाते रहते हैं। कुंडली में इस प्रकार का शुभ उच्च का बृहस्पति जातक को रचनात्मकता भी प्रदान कर सकता है जिसके चलते ऐसे जातक रचनात्मक कार्यक्षेत्रों में सफल हो पाते हैं। वहीं दूसरी ओर कुंडली के तीसरे घर में स्थित उच्च के गुरु का गुरु अशुभ होने की स्थिति में जातक को उसके मित्रों, सहयोगियों तथा भाईयों के कारण आर्थिक हानि, मान हानि तथा अन्य कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है तथा इस प्रकार के अशुभ उच्च के गुरु के प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों के भाई अथवा मित्र इनके साथ कोई बहुत बड़ा छल या विश्वासघात भी कर सकते हैं। कुंडली के तीसरे घर में स्थित अशुभ उच्च के बृहस्पति के कारण जातक को अपने व्यवसाय के माध्यम से समय समय पर धन हानि का सामना भी करना पड़ सकता है तथा इस प्रकार के अशुभ उच्च गुरु का प्रभाव कुंडली में बहुत प्रबल होने पर जातक को किसी प्रकार की दुर्घटना अथवा हिंसा के चलते भारी शारीरिक क्षति उठानी पड़ सकती है तथा कुछ स्थितियों में ऐसे जातक की किसी दुर्घटना अथवा हिंसा में मृत्यु भी हो सकती है।

कुंडली के चौथे घर में उच्च का गुरु : किसी कुंडली के चौथे घर में स्थित उच्च का बृहस्पति शुभ होने की स्थिति में जातक को सुख, सुविधा तथा ऐश्वर्यपूर्ण जीवन प्रदान कर सकता है तथा इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले बहुत से जातक धनी तथा समृद्ध परिवारों में जन्म लेते हैं जिसके चलते ऐसे जातक अपने बाल्यकाल से ही अनेक प्रकार की सुख सुविधाओं का भोग करना शुरु कर देते हैं तथा ऐसे जातकों के लिए जीवन भर धन की प्राप्ति सहज रहती है जिससे इन्हें सुविधापूर्वक जीवन जीने में सहायता प्राप्त होती है। कुंडली के चौथे घर में स्थित शुभ उच्च का गुरु जातक का संबंध विदेशों के साथ भी स्थापित कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के प्रभाव में आने वाले कुछ जातक ऐसे व्यवसायों से जुड़ जाते हैं जिनकी आय विदेशों से प्राप्त होती है। वहीं दूसरी ओर कुंडली के चौथे घर में स्थित उच्च के गुरु के अशुभ होने की स्थिति में जातक को अपने विवाह तथा वैवाहिक जीवन में अनेक प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है तथा इस प्रकार के अशुभ उच्च के बृहस्पति का प्रभाव कुंडली में प्रबल होने पर जातक के एक अथवा एक स भी अधिक विवाह टूट भी सकते हैं। कुंडली के चौथे घर में स्थित अशुभ उच्च का गुरु जातक को उसकी संपत्ति तथा विशेषतया अचल संपत्ति से संबंधित समस्याएं भी दे सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातकों की संपत्ति किसी विवाद, झगड़े अथवा कोर्ट केस में भी फंस सकती है। कुंडली में इस प्रकार का अशुभ उच्च का गुरु जातक को अनेक प्रकार के रोगों से पीड़ित भी कर सकता है तथा इस प्रकार के अशुभ प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों को गंभीर मानसिक रोग भी लग सकते हैं।

कुंडली के पांचवें घर में उच्च का गुरु : किसी कुंडली के पांचवें घर में स्थित उच्च का बृहस्पति शुभ होने की स्थिति में जातक को बहुत अच्छी शिक्षा तथा रचनात्मक विशेषताएं प्रदान कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले जातक अपनी उच्च शिक्षा तथा रचनात्मक विशेषताओं के कारण अपने व्यवसायिक क्षेत्रों में सफल अथवा बहुत सफल हो सकते हैं। कुंडली के पांचवें घर में स्थित शुभ उच्च का गुरु जातक को आर्थिक रूप से बहुत समृद्ध बना सकता है तथा इस प्रकार का शुभ प्रभाव जातक को आध्यात्मिक तथा धार्मिक रूप से बहुत विकसित भी बना सकता है जिसके चलते इस प्रकार के शुभ उच्च गुरु के प्रभाव में आने वाले कुछ जातक आध्यात्म से जुड़े क्षेत्रों में भी कार्यरत पाये जा सकते हैं। कुंडली में स्थित इस प्रकार का शुभ उच्च का बृहस्पति जातक को स्वस्थ, भाग्यशाली तथा योग्य संतान भी प्रदान कर सकता है तथा ऐसी संतान जातक को बहुत सुख प्रदान करने वाली और आज्ञाकारी होती है। वहीं दूसरी ओर कुंडली के पांचवें घर में स्थित उच्च के गुरु के अशुभ होने की स्थिति में जातक के प्रेम जीवन में अनेक प्रकार की समस्याएं पैदा कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के अशुभ प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों के प्रेम संबंध अनेक बार टूट सकते हैं जिसके कारण इन्हें बहुत पीड़ा उठानी पड़ सकती है तथा ऐसे कुछ अन्य जातकों को अपने प्रेमी अथवा प्रेमिका के कारण आर्थिक हानि अथवा मान हानि का सामना करना पड़ सकता है। कुंडली के पांचवें घर में स्थिति अशुभ उच्च का बृहस्पति जातक की शिक्षा में भी रुकावटें डाल सकता है तथा इस प्रकार का अशुभ प्रभाव जातक के मन में असमय वैराग भी उत्पन्न कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के अशुभ प्रभाव में आने वाले कुछ जातक अपनी पारीवारिक समस्याओं से तंग आकर अपनी पत्नी तथा बच्चों को छोड़कर किसी जंगल अथवा आश्रम आदि का रास्ता भी पकड़ सकते हैं।

कुंडली के छठे घर में उच्च का गुरु : किसी कुंडली के छठे घर में स्थित उच्च का बृहस्पति शुभ होने की स्थिति में जातक को व्यवसायिक सफलता प्रदान कर सकता है तथा इस प्रकार के शुभ गुरु के प्रभाव में आने वाले कुछ जातक अपने व्यवसायिक क्षेत्रों में बहुत अधिक सफलता प्राप्त कर पाते हैं। इस प्रकार के शुभ उच्च के बृहस्पति का प्रभाव जातक को बहुत धन तथा सुख सुविधा आदि भी प्रदान कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातक बहुत धनी होते हैं तथा सुविधाओं से भरपूर जीवन व्यतीत करते हैं। कुंडली के छठे घर में स्थित शुभ उच्च का गुरु जातक को कलात्मक तथा रचनात्मक विशेषताएं भी प्रदान कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले कुछ जातक सिने जगत के अभिनेता, गायक, संगीतकार, गीतकार आदि के रूप में सफल हो सकते हैं। वहीं दूसरी ओर कुंडली के छठे घर में स्थित उच्च का गुरु अशुभ होने की स्थिति में जातक को गंभीर आर्थिक समस्याओं से पीड़ित कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के अशुभ प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों को अपने जीवन में बहुत लंबे समय के लिए अथवा जीवन भर आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। कुंडली के छठे घर में स्थित अशुभ उच्च का बृहस्पति जातक को विभिन्न प्रकार के रोगों से भी पीड़ित कर सकता है तथा ऐसे रोग जातक को बहुत लंबे समय के लिए कष्ट दे सकते हैं तथा कुछ स्थितियों में इस प्रकार के अशुभ उच्च के गुरु के प्रबल प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों को कोई प्राण घातक रोग भी लग सकता है जो इन जातकों को लंबे समय तक कष्ट देने के पश्चात इनकी मृत्यु का कारण भी बन सकता है। कुंडली में स्थित इस प्रकार का अशुभ उच्च का गुरु जातक को विभिन्न प्रकार के झगड़ों, विवादों तथा कोर्ट केसों के माध्यम से भी पीड़ित कर सकता है तथा इस प्रकार के कुछ जातकों को किसी झगड़े आदि के चलते कारावास में समय भी बिताना पड़ सकता है।

लेखक
हिमांशु शंगारी