श्री सरस्वती यंत्र

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मां सरस्वती को विद्या, शिक्षा, ज्ञान, कला, संगीत आदि की देवी के रूप में मान्यता प्राप्त है तथा अनेक वैदिक ज्योतिषी यह मानते हैं कि मां सरस्वती की कृपा के बिना किसी भी प्रकार की कला अथवा विद्या की प्राप्ति नहीं हो सकती जिसके चलते वैदिक ज्योतिष हजारों सालों से श्री सरस्वती मंत्र का प्रयोग मां सरस्वती का आशिर्वाद प्राप्त करने के लिए तथा अनेक प्रकार के लाभ प्राप्त करने के लिए करता रहा है तथा आज भी अनेक जातक श्री सरस्वती मंत्र के विधिवत प्रयोग से अनेक प्रकार की मनोकामनाएं सिद्ध करते हैं। श्री सरस्वती मंत्र के साथ की जाने वाली मां सरस्वती की पूजा के साथ साथ बहुत से वैदिक ज्योतिषी श्री सरस्वती यंत्र के प्रयोग का परामर्श भी देते हैं तथा ये वैदिक ज्योतिषी यह मानते हैं कि इस यंत्र के माध्यम से भी मां सरस्वती के साथ प्रगाढ़ संबंध स्थापित करके उनकी कृपा प्राप्त की जा सकती है। अनेक वैदिक ज्योतिषी यह मानते हैं कि श्री सरस्वती यंत्र के विधिवत प्रयोग के साथ कुछ अन्य विशेष प्रकार के उपाय करने से अनेक जातकों के विभिन्न प्रकार के दोषों एवं कष्टों का निवारण हो सकता है तथा उन्हें अपने जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में अनेक प्रकार के शुभ फल तथा लाभ प्राप्त हो सकते हैं। वैदिक ज्योतिषी श्री सरस्वती यंत्र के प्रयोग का परामर्श शिक्षा से संबंधित शुभ फल प्राप्त करने के लिए, ज्ञान, विद्या, कला, संगीत, गायन, वाणी कौशल तथा अन्य बहुत सी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए देते हैं तथा इस यत्र को विधिवत स्थापित करने वाले तथा इसकी विधिवत पूजा करने वाले अनेक जातक अपने जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में अनेक प्रकार के लाभ प्राप्त कर पाने में सफल होते हैं।

    यहां पर यह बात ध्यान देने योग्य है कि श्री सरस्वती यंत्र को स्थापित करने से प्राप्त होने वाले लाभ किसी जातक को पूर्ण रूप से तभी प्राप्त हो सकते हैं जब जातक द्वारा स्थापित किया जाने वाला श्री सरस्वती यंत्र शुद्धिकरण, प्राण प्रतिष्ठा तथा उर्जा संग्रह की प्रक्रियाओं के माध्यम से विधिवत बनाया गया हो तथा विधिवत न बनाए गए श्री सरस्वती यंत्र को स्थापित करना कोई विशेष लाभ प्रदान करने में सक्षम नहीं होता। शुद्धिकरण के पश्चात श्री सरस्वती यंत्र को श्री सरस्वती मंत्रो की सहायता से एक विशेष विधि के माध्यम से उर्जा प्रदान की जाती है जो मां सरस्वती की शुभ उर्जा के रूप में इस यंत्र में संग्रहित हो जाती है। किसी भी श्री सरस्वती यंत्र की वास्तविक सरस्वती इस यंत्र को श्री सरस्वती मंत्रो द्वारा प्रदान की गई शक्ति के अनुपात में ही होती है तथा इस प्रकार जितने अधिक मंत्रों की शक्ति के साथ किसी श्री सरस्वती यंत्र को उर्जा प्रदान की गई हो, उतना ही वह श्री सरस्वती यंत्र शक्तिशाली होगा। विभिन्न प्रकार के जातकों की कुंडली के आधार पर तथा उनके द्वारा इच्छित फलों के आधार पर श्री सरस्वती यंत्र को उर्जा प्रदान करने वाले मंत्रों की संख्या विभिन्न जातकों के लिए भिन्न भिन्न हो सकती है तथा सामान्यतया यह संख्या 11,000 से लेकर 125,000 श्री सरस्वती मंत्र के जाप तक होती है जिसके कारण देखने में एक से ही लगने वाले विभिन्न श्री सरस्वती यंत्रों की शक्ति तथा मूल्य में बहुत अंतर हो सकता है।

    किसी भी श्री सरस्वती यंत्र को अपने जातक को लाभ प्रदान करने के लिए कम से कम 11,000 श्री सरस्वती मंत्रों की सहायता से उर्जा प्रदान की जानी चाहिए तथा इससे कम मंत्रों द्वारा बनाए गए श्री सरस्वती यंत्र सामान्यतया कोई विशेष फल प्रदान करने में सक्षम नहीं होते तथा बिना उर्जा के संग्रह वाला श्री सरस्वती यंत्र धातु के एक टुकड़े के समान ही होता है जिसे 50 रूपये के मूल्य में प्राप्त किया जा सकता है। यहां पर यह बात ध्यान देने योग्य है कि श्री सरस्वती यंत्र को विधिवत बनाने की प्रक्रिया में इस यंत्र को उर्जा प्रदान करने वाला चरण सबसे अधिक महत्वपूर्ण है तथा यदि उर्जा संग्रहित करने की इस प्रक्रिया को यदि विधिवत तथा उचित प्रकार से न किया जाए अर्थात यदि किसी श्री सरस्वती यंत्र को उर्जा प्रदान करने के लिए श्री सरस्वती मंत्रों का जाप किया ही न जाए अथवा यह जाप 100 या 200 श्री सरस्वती मंत्रों का हो तो ऐसा श्री सरस्वती यंत्र किसी जातक को या तो कोई विशेष फल प्रदान करने में सक्षम नही होगा या फिर ऐसा श्री सरस्वती यंत्र कोई भी फल प्रदान नहीं करेगा। इसलिए किसी भी श्री सरस्वती यंत्र के भली प्रकार से कार्य करने तथा जातक को लाभ प्रदान करने के लिए इस यंत्र को विधिवत बनाया जाना अति आवश्यक है।

       मेरे संज्ञान मे यह भी आया है कि बहुत से पंडित ऐसी धारणा रखते हैं कि बहुत से श्री सरस्वती यंत्रों को एक साथ रखकर जैसे कि 10 अथवा 100 श्री सरस्वती यंत्रों को एक साथ रखकर इन सभी श्री सरस्वती यंत्रों के लिए संयुक्त रूप से केवल एक ही बार 11,000 श्री सरस्वती मंत्रों का जाप करने से इन सभी यंत्रों में उर्जा का संग्रह हो जाएगा तथा बहुत से पंडित तो इसी प्रकार से श्री सरस्वती यंत्रों तथा अन्य यंत्रों को बनाते भी हैं। किन्तु यह धारणा प्रभावशाली नहीं है तथा इस प्रक्रिया के माध्यम से अनेकों श्री सरस्वती यंत्रों को एक साथ बनाना इन श्री सरस्वती यंत्रों को खरीदने वाले जातकों के साथ धोखा तथा अन्याय भी है क्योंकि किसी भी श्री सरस्वती यंत्र को उचित रूप से उर्जा प्रदान करने के लिए इस यंत्र को किसी जातक विशेष के लिए उसके नाम से संकल्पित करके अकेले ही बनाना अति आवश्यक है। यह एक लंबी प्रक्रिया है जिसके अनुसार केवल एक श्री सरस्वती यंत्र को उर्जा प्रदान करने में 2 से 7 दिन तक का समय लग सकता है जिसके चलते बहुत से श्री सरस्वती यंत्र विक्रेता तथा पंडित इस प्रक्रिया की अपेक्षा कर देते हैं तथा एक ही साथ सैंकड़ों श्री सरस्वती यंत्रों को बिना किसी व्यक्ति विशेष के लिए संकल्पित किए, उर्जा प्रदान करने की चेष्टा करते हैं।

     किन्तु एक ऐसे श्री सरस्वती यंत्र की, जिसे किसी व्यक्ति विशेष के लिए संकल्पित करके अकेले ही यंत्र को उर्जा प्रदान की गई हो, किसी ऐसे श्री सरस्वती यंत्र के साथ बिल्कुल भी तुलना नहीं की जा सकती जिसे सैंकड़ों अन्य श्री सरस्वती यंत्रों के साथ बिना किसी विशेष संकल्प के उर्जा प्रदान करने की चेष्टा की गई हो क्योंकि इनमें से प्रथम श्रेणी का श्री सरस्वती यंत्र विधिवत बनाया गया तथा उत्तम फल प्रदान करने में सक्षम है जबकि दूसरे यंत्र को उचित विधि से नहीं बनाया गया है तथा बहुत से अन्य श्री सरस्वती यंत्रो के साथ होने के कारण इस यंत्र के हिस्से में संभवतया केवल 100 या इससे भी कम श्री सरस्वती मंत्रों की उर्जा आई होगी जिसके चलते ऐसा यंत्र किसी भी जातक को कोई विशेष फल देने में सक्षम नहीं होता। उर्जा प्रदान करने के अतिरिक्त प्रत्येक श्री सरस्वती यंत्र को विशिष्ट वैदिक विधियों के माध्यम से शुद्धिकरण, किसी व्यक्ति विशेष को ही अपने शुभ फल प्रदान करने की क्षमता प्रदान करने वाली प्रक्रिया से भी निकाला जाता है तथा अंत में इन विधियों के द्वारा बनाए गए श्री सरस्वती यंत्र को विशिष्ट वैदिक विधियों के माध्यम से सक्रिय कर दिया जाता है जिससे यह यंत्र अपने फल देने में सक्षम हो जाता है। इसलिए अपने लिए श्री सरस्वती यंत्र स्थापित करने से पहले सदा यह सुनिश्चित करें कि आपके द्वारा स्थापित किया जाने वाला श्री सरस्वती यंत्र उपरोक्त सभी प्रक्रियों में से निकलने के बाद विधिवत केवल आपके लिए ही बनाया गया है।

                            विधिवत बनाया गया श्री सरस्वती यंत्र प्राप्त करने के पश्चात आपको इसे अपने ज्योतिषि के परामर्श के अनुसार अपने घर में पूजा के स्थान अथवा अपने बटुए अथवा अपने गले में स्थापित करना होता है। उत्तम फलों की प्राप्ति के लिए श्री सरस्वती यंत्र को बुधवार वाले दिन स्थापित करना चाहिए तथा घर में स्थापित करने की स्थिति में इसे पूजा के स्थान में स्थापित करना चाहिए। इसके अतिरिक्त आप अपने श्री सरस्वती यंत्र को बुधवार के दिन ही अपने ज्योतिष के परामर्श अनुसार अपने बटुए में, अथवा अपने गले में भी स्थापित कर सकते हैं। श्री सरस्वती यंत्र की स्थापना के दिन नहाने के पश्चात अपने यंत्र को सामने रखकर 11 या 21 बार श्री सरस्वती मंत्र का जाप करें तथा तत्पश्चात अपने श्री सरस्वती यंत्र पर थोड़े से गंगाजल अथवा कच्चे दूध के छींटे दें, मां सरस्वती से इस यंत्र के माध्यम से अधिक से अधिक शुभ फल प्रदान करने की प्रार्थना करें तथा तत्पश्चात इस यंत्र को इसके लिए निश्चित किये गये स्थान पर स्थापित कर दें। आपका श्री सरस्वती यंत्र अब स्थापित हो चुका है तथा इस यंत्र से निरंतर शुभ फल प्राप्त करते रहने के लिए आपको इस यंत्र की नियमित रूप से पूजा करनी होती है। प्रतिदिन स्नान करने के पश्चात अपने श्री सरस्वती यंत्र की स्थापना वाले स्थान पर जाएं तथा इस यंत्र को नमन करके 11 या 21 श्री सरस्वती बीज मंत्रों के उच्चारण के पश्चात अपने इच्छित फल इस यंत्र से मांगें। यदि आपने अपने श्री सरस्वती यंत्र को अपने बटुए अथवा गले में धारण किया है तो स्नान के बाद इसे अपने हाथ में लें तथा उपरोक्त विधि से इसका पूजन करें तथा अपना इच्छित फल इससे मांगें। अपने पास स्थापित किए गये श्री सरस्वती यंत्र की नियमित रूप से पूजा करने से आपके और आपके श्री सरस्वती यंत्र के मध्य एक सरस्वतीशाली संबंध स्थापित हो जाता है जिसके कारण यह यंत्र आपको अधिक से अधिक लाभ प्रदान करने के लिए प्रेरित होता है।

लेखक
हिमांशु शंगारी