पितृ दोष के अशुभ फल 02

ThreeMonstersCover
Book Your Consultation at AstrologerPanditji.com
Buy This Book in India!
Buy This Book in USA!
Buy This Book in UK and Europe!

Read this Page in English

संबंधित लेख : पितृ दोष संग्रह

इससे पिछले लेख में हमने कुंडली के पहले घर से लेकर कुंडली के चौथे घर में बनने वाले पितृ दोष के अशुभ फलों के बारे में चर्चा की थी। इस लेख में हम कुंडली के पांचवें घर से लेकर कुंडली आठवें घर में बनने वाले पितृ दोष के अशुभ फलों के बारे में चर्चा करेंगे।

कुंडली के पांचवें घर का पितृ दोष : कुंडली के पांचवें घर में बनने वाला पितृ दोष जातक को संतान पैदा करने से संबंधित समस्याओं से पीड़ित कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के पितृ दोष से पीड़ित जातकों को संतान सुख प्राप्त करने के लिए बहुत लंबे समय तक प्रतीक्षा करनी पड़ सकती है तथा इनमें से कुछ जातकों को लंबी चिकित्सा या उपचार के पश्चात ही संतान प्राप्त हो पाती है। इस प्रकार के पितृ दोष के प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों को सारा जीवन संतान प्राप्त नहीं हो पाती जबकि ऐसे कुछ अन्य जातक ऐसी संतान को जन्म दे सकते हैं जो शारीरिक अथवा मानसिक रूप से विकलांग हो। स्त्रियों की कुंडलियों में इस प्रकार का पितृ दोष संतान पैदा करने से संबंधित और भी गंभीर समस्याएं पैदा कर सकता है जिसके चलते कुंडली के पांचवे घर के पितृ दोष के अशुभ प्रभाव में आने वालीं कुछ स्त्रियों को संतान प्राप्ति के लिए लंबे समय तक चिकित्सा या उपचार करवाना पड़ सकता है तथा इनमें से कुछ स्त्रियों का बच्चा गर्भ में ही मर सकता है जबकि कुछ अन्य स्त्रियों का बच्चा जन्म लेते ही मर सकता है। किसी स्त्री की कुंडली में इस दोष का प्रभाव बहुत प्रबल होने पर बच्चे को जन्म देते समय ऐसी स्त्री अथवा उसके बच्चे अथवा दोनों की ही मृत्यु हो सकती है। ऐसा विशेषतया तब देखने को मिल सकता है जब ऐसा पितृ दोष कुंडली के पांचवें घर में अशुभ सूर्य के साथ अशुभ राहु, केतु अथवा शनि के स्थित होने से बनता हो। कुंडली के पांचवें घर का पितृ दोष जातक की शिक्षा तथा विशेषतया उच्च शिक्षा में भी रुकावटें डाल सकता है या फिर ऐसी उच्च शिक्षा जातक के कोई विशेष काम नहीं आ पाती जिसके कारण इस दोष से पीड़ित कुछ जातकों की उच्च शिक्षा किसी न किसी कारणवश अपूर्ण अर्थात अधूरी ही रह जाती है जबकि कुछ अन्य जातकों को पूरी उच्च शिक्षा प्राप्त होने के पश्चात भी ऐसी शिक्षा उनके व्यवसाय में कुछ विशेष काम नहीं आ पाती तथा इन जातकों को ऐसे व्यवसायिक क्षेत्रों में काम करना पड़ता है जो इनकी शैक्षिक योग्यता से बहुत भिन्न अथवा एकदम ही विपरीत हों। कुंडली के पांचवें घर का पितृ दोष जातक को आर्थिक समस्याओं, पारिवारिक समस्याओं तथा अन्य कई प्रकार की समस्याओं से भी पीड़ित कर सकता है।

कुंडली के छठे घर का पितृ दोष : कुंडली के छठे घर में बनने वाला पितृ दोष जातक को विभिन्न प्रकार के रोगों से पीड़ित कर सकता है जिसके कारण ऐसे जातक को अपने जीवन में इन रोगों के कारण बहुत शारीरिक तथा मानसिक यातना सहन करनी पड़ सकती है तथा इन रोगों के उपचार में जातक का बहुत अधिक धन भी व्यय हो सकता है जिससे जातक की आर्थिक स्थिति पर भी विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। किसी कुंडली के छठे घर में सूर्य तथा अशुभ राहु, केतु अथवा शनि के स्थित होने से बनने वाला पितृ दोष जातक को कैंसर आदि जैसे गंभीर तथा प्राण घातक रोगों से पीड़ित कर सकता है जिसके चलते ऐसे जातक का अधिकतर जीवन कष्टमय ही होता है तथा ऐसे रोग लंबे समय तक जातक को पीड़ा पहुंचाने के पश्चात उसके प्राण भी ले लेते हैं। कुंडली के छठे घर का पितृ दोष जातक को पुलिस अथवा न्यायालय के माध्यम से आने वालीं समस्याओं से भी पीड़ित कर सकता है जिसके चलते इस दोष से पीड़ित जातकों को न्यायालय के निर्णय के कारण आर्थिक हानि उठानी पड़ सकती है अथवा लंबे समय के लिए कारावास में भी रहना पड़ सकता है। कुछ स्थितियों में इस प्रकार के पितृ दोष से पीड़ित जातकों को बिना किसी अपराध के भी हानि उठानी पड़ सकती है अथवा कारावास जाना पड़ सकता है जबकि कुछ अन्य स्थितियों में ऐसे जातकों को किसी अवैध कार्य में संलग्न होने के कारण कारावास जाना पड़ सकता है क्योंकि इस प्रकार के पितृ दोष से पीड़ित जातकों के अपराधी बनने की संभावना भी रहती है। कुंडली के छठे घर का पितृ दोष जातक की आर्थिक स्थिति पर भी बहुत अशुभ प्रभाव डाल सकता है जिसके कारण ऐसे जातकों की आर्थिक स्थिति शोचनीय अथवा बहुत शोचनीय रहती है तथा इन जातकों को जीवन में अनेक बार आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है तथा दूसरों से धन लेकर निर्वाह करना पड़ सकता है। इसके अतिरिक्त कुंडली के छठे घर का पितृ दोष जातक को संतान पैदा करने संबंधी समस्याओं से भी पीड़ित कर सकता है जिसके चलते जातक को संतान तथा विशेषतया नर संतान बहुत देर से प्राप्त होती है अथवा उसकी संतान किसी न किसी प्रकार के शारीरिक अथवा मानसिक रोग से पीड़ित हो सकती है।

कुंडली के सातवें घर का पितृ दोष : कुंडली के सातवें घर में बनने वाला पितृ दोष जातक के वैवाहिक जीवन को बहुत कष्टमय बना सकता है तथा इस दोष के प्रभाव में आने वाले जातकों को अपने वैवाहिक जीवन में तर्क वितर्क, अशांति, झगड़े, हिंसा, अलगाव तथा तलाक जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है तथा यह सारी समस्याएं उस स्थिति में और भी गंभीर हो सकती हैं जब ऐसा पितृ दोष कुंडली के सातवें घर में सूर्य तथा अशुभ मंगल के स्थित होने से बन रहा हो क्योंकि कुंडली के सातवें घर में स्थित ऐसा अशुभ मंगल कुंडली में मांगलिक दोष भी बना सकता है जिसके कारण मांगलिक दोष तथा पितृ दोष के संयुक्त प्रभाव में आने वाले जातक को अपने वैवाहिक जीवन में अनेक प्रकार के कष्ट उठाने पड़ सकते हैं। कुछ स्थितियों में तो इस प्रकार के पितृ दोष तथा मांगलिक दोष का संयुक्त प्रभाव गंभीर शारीरिक हिंसा को जन्म दे सकता है जिसके चलते क्रोध में आने के कारण शुरु हुई हिंसा के चलते जातक अपनी पत्नि को गंभीर रूप से घायल कर सकता है अथवा उसकी हत्या भी कर सकता है जबकि इस प्रकार के पितृ दोष से पीड़ित कुछ अन्य जातकों के एक से अधिक विवाह भंग हो सकते हैं अथवा इनकी पत्नियां किसी रोग या दुर्घटना के कारण मर सकतीं हैं। इस प्रकार के पितृ दोष तथा मांगलिक दोष का संयुक्त प्रभाव जातक के वैवाहिक जीवन को बहुत कष्टमय अथवा नर्क समान बना सकता है। कुंडली के सातवें घर का पितृ दोष जातक के व्यवसायिक क्षेत्र पर भी अशुभ प्रभाव डाल सकता है जिसके चलते ऐसे जातकों को अपने व्यवसाय में बार बार हानि उठानी पड़ सकती है तथा इनमें से कुछ जातकों को अपने व्यवसायिक क्षेत्र से जुड़ी किसी समस्या के कारण अपयश अथवा बदनामी और किसी मुकद्दमें का सामना भी करना पड़ सकता है। कुंडली के सातवें घर में बनने वाले पितृ दोष के अशुभ प्रभाव के कारण जातक को किसी प्रकार का गुप्त रोग भी हो सकता है तथा इस दोष के बहुत प्रबल होने की स्थिति में ऐसा गुप्त रोग जातक के लिए जानलेवा भी सिद्ध हो सकता है इसलिए इस प्रकार के जातकों को शारीरिक संबंध बनाते समय बहुत सावधानी का प्रयोग करना चाहिए। इसके अतिरिक्त कुंडली के सातवें घर का पितृ दोष जातक को संतान पैदा करने संबंधी समस्याओं से भी पीड़ित कर सकता है जिसके चलते जातक को संतान तथा विशेषतया नर संतान बहुत देर से प्राप्त होती है अथवा उसकी संतान किसी न किसी प्रकार के शारीरिक अथवा मानसिक रोग से पीड़ित हो सकती है।

कुंडली के आठवें घर का पितृ दोष : कुंडली के आठवें घर में बनने वाला पितृ दोष जातक की आयु पर अशुभ प्रभाव डाल सकता है जिसके कारण इस दोष के प्रभाव में आने वाले जातक सामान्य से कम आयु में ही मृत्यु को प्राप्त हो सकते हैं तथा कुंडली में इस दोष के प्रबल होने की स्थिति में ऐसे जातक कम अथवा युवा आयु में ही किसी दुर्घटना अथवा रोग के कारण अथवा किसी शत्रु द्वारा किये गए आक्रमण के कारण मृत्यु को प्राप्त हो सकते हैं। कुंडली के आठवें घर में स्थित सूर्य तथा अशुभ केतु या मंगल के कारण बनने वाले पितृ दोष के अशुभ प्रभाव के कारण जातक की किसी दुर्घटना में अथवा किसी प्रकार की शल्य चिकित्सा के चलते मृत्यु हो सकती है। इसलिए इस प्रकार के पितृ दोष से पीड़ित जातकों को अपनी आयु तथा स्वास्थ्य को लेकर सदा सावधान रहना चाहिए। कुंडली के आठवें घर का पितृ दोष जातक के वैवाहिक जीवन के लिए भी बहुत अशुभ होता है और इस दोष के प्रभाव में आने वाले अधिकतर जातकों को वैवाहिक जीवन का सुख प्राप्त नहीं हो पाता तथा यह स्थिति तब और भी गंभीर हो जाती है जब कुंडली के आठवें घर में सूर्य तथा अशुभ मंगल की उपस्थिति के कारण इस प्रकार का पितृ दोष बनता हो क्योंकि इस स्थिति में कुंडली के आठवें घर में स्थित अशुभ मंगल इस घर में मांगलिक दोष भी बना सकता है जिसके कारण ऐसे मांगलिक दोष तथा पितृ दोष का संयुक्त प्रभाव जातक के वैवाहिक जीवन तथा उसके सुख को पूरी तरह से नष्ट कर सकता है। इस प्रकार के संयुक्त दोष से पीड़ित कुछ जातकों के एक से अधिक विवाह बहुत कष्टों के बाद टूट सकते हैं जबकि ऐसे कुछ अन्य जातकों का विवाह शारीरिक अथवा मानसिक रूप से विकलांग किसी स्त्री के साथ हो सकता है तथा इस दोष के कुंडली में बहुत प्रबल होने की स्थिति में जातक की स्त्री योजना बना कर जातक की हत्या कर सकती है। इसके अतिरिक्त कुंडली के आठवें घर का पितृ दोष जातक को संतान पैदा करने संबंधी समस्याओं से भी पीड़ित कर सकता है जिसके चलते जातक को संतान तथा विशेषतया नर संतान बहुत देर से प्राप्त होती है अथवा उसकी संतान किसी न किसी प्रकार के शारीरिक अथवा मानसिक रोग से पीड़ित हो सकती है।

लेखक
हिमांशु शंगारी