रूचक योग

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रूचक योग को वैदिक ज्योतिष के अनुसार किसी कुंडली में बनने वाले बहुत शुभ योगों में से एक माना जाता है तथा यह योग पंचमहापुरुष योग में से एक है। पंच महापुरुष योग में आने वाले शेष चार योग हंस योग, माल्वय योग, भद्र योग एवम शश योग हैं। वैदिक ज्योतिष में रूचक योग की प्रचलित परिभाषा के अनुसार मंगल यदि किसी कुंडली में लग्न से अथवा चन्द्रमा से केन्द्र के घरों में स्थित हों अर्थात मंगल यदि किसी कुंडली में लग्न अथवा चन्द्रमा से 1, 4, 7 अथवा 10वें घर में मेष, वृश्चिक अथवा मकर राशि में स्थित हों तो ऐसी कुंडली में रूचक योग बनता है जिसका शुभ प्रभाव जातक को शारीरिक बल तथा स्वास्थ्य, पराक्रम, साहस, प्रबल मानसिक क्षमता, समयानुसार उचित तथा तीव्र निर्णय लेने की क्षमता आदि प्रदान कर सकता है तथा अपनी इन विशेषताओं के चलते रूचक योग के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातक ऐसे व्यवसायिक क्षेत्रों में सफल तथा प्रतिष्ठित देखे जा सकते हैं जिनमें सफलता प्राप्त करने के लिए उपर बताईं गईं विशेषताओं की आवश्यकता हो जैसे कि पुलिस बल, सैन्य बल, खेल प्रतिस्पर्धाएं जैसे क्रिकेट, फुटबाल, टैनिस तथा कुश्ती इत्यादि। रूचक योग के प्रबल प्रभाव में आने वाले पुरुष जातक अपने पराक्रम, साहस तथा कार्यकुशलता के चलते अपने व्यवसायिक क्षेत्रों में बहुत धन तथा प्रसिद्धि प्राप्त करते हैं तथा इस योग के प्रबल प्रभाव में आने वालीं स्त्रियों में भी पुरुषों जैसे गुण पाये जाते हैं तथा ऐसीं स्त्रियां भी पुरुषों के द्वारा किये जाने वाले साहस के कार्य करके धन तथा ख्याति अर्जित करतीं हैं।

              रूचक योग की प्रचलित परिभाषा का यदि ध्यानपूर्वक अध्ययन करें तो यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि लगभग हर 12वीं कुंडली में रूचक योग का निर्माण होता है। कुंडली में 12 घर तथा 12 राशियां होती हैं तथा इनमें से किसी भी एक घर में मंगल के स्थित होने की संभावना 12 में से 1 रहेगी तथा इसी प्रकार 12 राशियों में से भी किसी एक राशि में मंगल के स्थित होने की संभावना 12 में से एक ही रहेगी। इस प्रकार 12 राशियों तथा बारह घरों के संयोग से किसी कुंडली में मंगल के किसी एक विशेष राशि में ही किसी एक विशेष घर में स्थित होने का संयोग 144 में से एक कुंडलियों में बनता है जैसे कि लगभग प्रत्येक 144वीं कुंडली में मंगल दसवें घर में मकर राशि में स्थित होते हैं। रूचक योग के निर्माण पर ध्यान दें तो यह देख सकते हैं कि कुंडली के दसवें घर में मंगल तीन राशियों मेष, वृश्चिक तथा मकर में स्थित होने पर रूचक योग बनाते हैं। इसी प्रकार मंगल के किसी कुंडली के चौथे, सातवें अथवा पहले घर में भी रूचक योग का निर्माण करने की संभावना 144 में से 3 ही रहेगी तथा इन सभी संभावनाओं का योग 12 आता है जो कुल संभावनाओं अर्थात 144 का 12वां भाग है जिसका अर्थ यह हुआ कि रूचक योग की प्रचलित परिभाषा के अनुसार लगभग हर 12वीं कुंडली में इस योग का निर्माण होता है।

              रूचक योग वैदिक ज्योतिष में वर्णित एक अति शुभ तथा दुर्लभ योग है तथा इसके द्वारा प्रदान किए जाने वाले शुभ फल प्रत्येक 12वें व्यक्ति में देखने को नहीं मिलते जिसके कारण यह कहा जा सकता है कि केवल मंगल की कुंडली के किसी घर तथा किसी राशि विशेष के आधार पर ही इस योग के निर्माण का निर्णय नहीं किया जा सकता तथा किसी कुंडली में रूचक योग के निर्माण के कुछ अन्य नियम भी होने चाहिएं। किसी भी अन्य शुभ योग के निर्माण के भांति ही रूचक योग के निर्माण के लिए भी यह अति आवश्यक है कि कुंडली में मंगल शुभ हों क्योंकि कुंडली में मंगल के अशुभ होने से मंगल के उपर बताए गए विशेष घरों तथा राशियों में स्थित होने पर भी रूचक योग नहीं बनेगा अपितु इस स्थिति में मंगल कुंडली में किसी गंभीर दोष का निर्माण कर सकते हैं। कुंडली के जिन चार घरों में शुभ मंगल के किसी राशि विशेष में स्थित होने से रूचक योग बनता है, उनमें से तीन घरों 1, 4 तथा 7 में अशुभ मंगल के स्थित होने से मांगलिक दोष भी बन सकता है जो अपनी स्थिति के आधार पर जातक को विभिन्न प्रकार के अशुभ फल दे सकता है। यहां पर यह बात भी ध्यान देने योग्य है कि मेंष, वृश्चिक अथवा मकर में स्थित होने से मंगल को अतिरिक्त बल प्राप्त होता है तथा इस स्थिति में इतने बलशाली मंगल के अशुभ होने के कारण बनने वाला मांगलिक दोष भी सामान्यतया बहुत बलशाली होता है जिसके कारण इस प्रकार के बलवान मांगलिक दोष के प्रभाव में आने वाले जातक को अपने जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में बहुत हानि उठानी पड़ सकती है।

          इस प्रकार किसी कुंडली में रूचक योग बनने अथवा मांगलिक दोष बनने के बीच का अंतर मुख्यतया कुंडली में मंगल का शुभ अथवा अशुभ होना ही होता है जिसके कारण रूचक योग बनाने के लिए मंगल का कुंडली में शुभ होना अति आवश्यक है क्योंकि अशुभ मंगल कुंडली में रूचक योग के स्थान पर मांगलिक दोष बना सकता है। कुंडली में मंगल के शुभ होने के पश्चात यह भी देखना चाहिए कि कुंडली में मंगल को कौन से शुभ अथवा अशुभ ग्रह प्रभावित कर रहे हैं क्योंकि किसी कुंडली में शुभ मंगल पर अशुभ ग्रहों का प्रभाव मंगल द्वारा बनाए जाने वाले रूचक योग के शुभ फलों को कम कर सकता है तथा किसी कुंडली में शुभ मंगल पर दो या दो से अधिक अशुभ ग्रहों का प्रबल प्रभाव कुंडली में बनने वाले रूचक योग को प्रभावहीन भी बना सकता है। इसके विपरीत किसी कुंडली में शुभ मंगल पर शुभ ग्रहों का प्रभाव कुंडली में बनने वाले रूचक योग के शुभ फलों को और भी बढ़ा सकता है जिससे जातक को प्राप्त होने वाले शुभ फलों में बहुत वृद्धि हो जाएगी।

          इसके अतिरिक्त कुंडली में बनने वाले अन्य शुभ अशुभ योगों अथवा दोषों का भी भली भांति अध्ययन करना चाहिए क्योंकि कुंडली में बनने वाले पित्र दोष, मांगलिक दोष तथा काल सर्प दोष जैसे दोष रूचक योग के प्रभाव को कम कर सकते हैं जबकि कुंडली में बनने वाले अन्य शुभ योग इस योग के प्रभाव को और अधिक बढ़ा सकते हैं। इसलिए किसी कुंडली में रूचक योग के निर्माण तथा इसके शुभ फलों का निर्णय करने से पहले इस योग के निर्माण तथा फलादेश से संबंधित सभी नियमों का उचित रूप से अध्ययन कर लेना चाहिए। कुंडली के पहले घर में बनने वाला रूचक योग जातक को शारीरिक बल, स्वास्थय, पराक्रम, व्यवासायिक सफलता, सुखी वैवाहिक जीवन आदि जैसे शुभ फल प्रदान कर सकता है। कुंडली के चौथे घर में बनने वाला रूचक योग जातक को संपत्ति, वैवाहिक सुख, वाहन, घर तथा वयवसायिक सफलता जैसे शुभ फल प्रदान कर सकता है। सातवें घर का रूचक योग जातक को वैवाहिक सुख, व्यवसायिक सफलता तथा प्रतिष्ठा और प्रभुत्व वाला कोई पद प्रदान कर सकता है। दसवें घर का रूचक योग जातक को उसके व्यवसायिक क्षेत्र में बहुत अच्छे परिणाम दे सकता है तथा इस योग के प्रभाव में आने वाले जातक अपने समय के बहुत प्रसिद्ध सेनानायक, योद्धा, पुलिस अधिकारी तथा रक्षा विभाग से जुड़े अन्य अधिकारी हो सकते हैं।

लेखक
हिमांशु शंगारी