आठवें घर में मांगलिक दोष

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किसी कुंडली के आठवें घर में अशुभ तथा दोषकारी मंगल के स्थित हो जाने से कुंडली में मांगलिक दोष का निर्माण हो जाता है जो जातक के वैवाहिक जीवन में तथा जीवन के अन्य कई क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार की समस्याएं पैदा कर सकता है। यहां पर यह बात ध्यान देने योग्य है कि किसी कुंडली के आठवें घर में मांगलिक दोष बनाने के लिए मंगल का केवल आठवें घर में स्थित होना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि आठवें घर में स्थित मंगल का अशुभ तथा दोषकारी होना भी आवश्यक है। आठवें घर में स्थित मंगल के अशुभ तथा दोषकारी न होने की स्थिति में कुंडली में मांगलिक दोष का निर्माण नहीं होता तथा इसके विपरीत आठवें घर में शुभ तथा योगकारी मंगल के स्थित होने से कुंडली में मांगलिक योग का निर्माण हो जाता है जिसके कारण जातक को अपने वैवाहिक जीवन में अनेक प्रकार के शुभ फलों की प्राप्ति हो सकती है। मांगलिक दोष के निर्माण के लिए आवश्यक नियमों तथा स्थितियों को जानने के लिए पाठक मांगलिक दोष नामक लेख पढ़ सकते हैं। इस लेख में हम चर्चा करेंगें कि किसी कुंडली में वास्तविक रूप से आठवें घर में मांगलिक दोष बन जाने से जातक को किन प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

                कुंडली के सातवें घर में बनने वाले मांगलिक दोष की भांति ही कुंडली के आठवें घर में बनने वाला मांगलिक दोष भी जातक के वैवाहिक जीवन को बहुत कष्टमय बना सकता है तथा इसीलिए आठवें घर के मांगलिक दोष को भी वैदिक ज्योतिष के अनुसार बहुत भयंकर माना जाता है। आठवें घर का मांगलिक दोष कुंडली के आठवें घर की भांति ही अपने आप में विचित्र तथा रहस्यमयी होता है तथा इसी कारण इस प्रकार का मांगलिक दोष जातक के विवाह तथा वैवाहिक जीवन से संबंधित बहुत सी विचित्र समस्याओं को जन्म दे सकता है। इस प्रकार के मांगलिक दोष के प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों का विवाह देरी से होता है, कुछेक का विवाह बहुत देरी से होता है तथा कुछ अन्य जातकों का विवाह तो इस दोष के प्रबल प्रभाव में होने के कारण हो ही नहीं पाता। इस प्रकार के मांगलिक दोष के अशुभ प्रभाव के कारण जातक का विवाह किसी प्रकार के धोखे में भी हो सकता है। उदाहरण के लिए इस प्रकार के मांगलिक दोष से पीड़ित कुछ जातकों का विवाह किसी ऐसी स्त्री से हो सकता है जो किसी गंभीर रोग अथवा प्राणघातक रोग से पीड़ित हो जिसके बारे में वह स्त्री तथा उसके माता पिता पहले से ही जानते हों किन्तु इस रोग के बारे में जातक को बिना बताए ही ऐसी स्त्री का विवाह जातक के साथ कर दिया जाता है तथा जातक को अपने साथ होने वाले इस धोखे का विवाह के पश्चात ही पता चल पाता है। कई बार ऐसे जातक की पत्नि को स्वयं भी अपने भीतर छिपे किसी प्राणघातक रोग का विवाह से पूर्व पता नहीं होता तथा ऐसे रोग के बारे में जातक तथा उसकी पत्नि को विवाह के पश्चात ही पता चल पाता है।

                 इस प्रकार के मांगलिक दोष के प्रभाव में आने वाला जातक विवाह के पश्चात अन्य स्त्रियों के साथ प्रेम संबंध अथवा शारीरिक संबंध बना सकता है जिसका जातक की पत्नि को अधिकतर ऐसे मामलों में पता चल जाता है जिसके कारण जातक के वैवाहिक जीवन में बहुत उथल पुथल होती है तथा कई बार जातक के इन प्रेम संबंधो के कारण जातक की पत्नि जातक को छोड़ कर भी चली जाती है अथवा जातक की पत्नि जातक से तलाक भी ले लेती है। इसके अतिरिक्त आठवें घर के मांगलिक दोष के प्रभाव में आने वाला जातक अपनी पत्नि के किसी अन्य पुरुष के साथ चलने वाले प्रेम संबंध के आधार पर भी अपनी पत्नि से तलाक ले सकता है अथवा ऐसा जातक अपनी पत्नि के किसी गंभीर रोग से पीड़ित होने की स्थिति में भी उससे तलाक ले सकता है विशेषतया तब जब जातक को यह पता हो कि उसकी पत्नि को इस गंभीर रोग के बारे में विवाह से पहले भी पता था किन्तु फिर भी उसकी पत्नि ने यह सच्चाई उससे छिपा कर धोखे से जातक के साथ विवाह कर लिया। आठवें घर के मागंलिक दोष के अशुभ प्रभाव में आने वाले बहुत से जातकों का विवाह किसी न किसी प्रकार के धोखे से ही होता है जिसका बाद में इन्हें पता चल जाने से विवाह टूटने की संभावनाएं बहुत बढ़ जातीं हैं। उदाहरण के लिए, आठवें घर के मांगलिक दोष से पीड़ित कुछ जातकों का विवाह किसी ऐसे व्यक्ति के साथ हो सकता है जो किसी प्रकार के अवैध कार्यों में लिप्त हो तथा जिसका पता जातक को केवल विवाह के पश्चात ही चल पाये अथवा ऐसे कुछ जातकों का विवाह किसी ऐसे व्यक्ति से हो सकता है जिसका पहले भी विवाह हो चुका हो तथा जिसके बारे में जातक को बताया न गया हो तथा जातक को विवाह के पश्चात ही इस बारे में पता चल पाये जिसके कारण ऐसे विवाह के टूट जाने की संभावनाएं बन जातीं हैं। इसलिए इस प्रकार के दोष के प्रभाव में आने वाले जातकों को विवाह करते समय सावधानी का प्रयोग करना चाहिए तथा विधिवत कुंडली मिलान करवाना चाहिए क्योंकि इनके साथ विवाह में किसी प्रकार का धोखा होने की संभावना बनी रहती है।

               सातवें घर के मांगलिक दोष की भांति ही आठवें घर का मांगलिक दोष भी वैध्वय के सबसे अधिक मामलों का जन्मदाता कहलाता है तथा इस प्रकार के मांगलिक दोष से पीड़ित कुछ जातकों की पत्नियों की किसी रोग अथवा दुर्घटना के चलते मृत्यु हो सकती है। आठवें घर के मांगलिक दोष के अशुभ प्रभाव के कारण जातक का बहुत सा धन विवाह के पश्चात स्थापित होने वाले प्रेम संबंधो अथवा शारीरिक संबंधो के कारण खर्च हो सकता है जिसके कारण जातक को अपने जीवन में कई बार आर्थिक संकट का सामना भी करना पड़ सकता है। इस प्रकार सबसे पहले कुंडली के आठवें घर में बनने वाले मांगलिक दोष के बनने या न बनने का निर्णय कुंडली के सम्पूर्ण अध्ययन के पश्चात लेना चाहिए तथा तत्पश्चात इस दोष के कारण जातक के वैवाहिक जीवन में तथा उसके जीवन के अन्य क्षेत्रों में इस दोष के कारण होने वाले दुष्प्रभावों के बारे में निर्णय लेना चाहिए। कुंडली के आठवें घर मे बनने वाले मांगलिक दोष का निवारण वैदिक ज्योतिष में उपलब्ध विभिन्न प्रकार के उपायों की सहायता से किया जा सकता है जिनमें रत्न, मंत्र, यंत्र तथा कुछ विशेष प्रकार के दान इत्यादि का प्रयोग सम्मिलित है।

लेखक
हिमांशु शंगारी