सातवें घर में मांगलिक दोष

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किसी कुंडली के सातवें घर में अशुभ तथा दोषकारी मंगल के स्थित हो जाने से कुंडली में मांगलिक दोष का निर्माण हो जाता है जो जातक के वैवाहिक जीवन में तथा जीवन के अन्य कई क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार की समस्याएं पैदा कर सकता है। यहां पर यह बात ध्यान देने योग्य है कि किसी कुंडली के सातवें घर में मांगलिक दोष बनाने के लिए मंगल का केवल सातवें घर में स्थित होना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि सातवें घर में स्थित मंगल का अशुभ तथा दोषकारी होना भी आवश्यक है। सातवें घर में स्थित मंगल के अशुभ तथा दोषकारी न होने की स्थिति में कुंडली में मांगलिक दोष का निर्माण नहीं होता तथा इसके विपरीत सातवें घर में शुभ तथा योगकारी मंगल के स्थित होने से कुंडली में मांगलिक योग का निर्माण हो जाता है जिसके कारण जातक को अपने वैवाहिक जीवन में अनेक प्रकार के शुभ फलों की प्राप्ति हो सकती है। मांगलिक दोष के निर्माण के लिए आवश्यक नियमों तथा स्थितियों को जानने के लिए पाठक मांगलिक दोष नामक लेख पढ़ सकते हैं। इस लेख में हम चर्चा करेंगें कि किसी कुंडली में वास्तविक रूप से सातवें घर में मांगलिक दोष बन जाने से जातक को किन प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

                 सातवें घर का मांगलिक दोष विवाह तथा वैवाहिक जीवन के लिए निश्चय ही बहुत भयावह है तथा इसी कारण अधिकतर वैदिक ज्योतिषी इस प्रकार के मांगलिक दोष के किसी कुंडली में उपस्थित होने पर जातक के लिए चिंतित हो जाते हैं। सातवें घर का मांगलिक दोष सामान्यता केवल अपने बल पर ही जातक का विवाह कष्टमय बनाने के लिए अथवा अलगाव तथा तलाक करवाने में सक्षम होता है तथा इसे ऐसा करने के लिए कुंडली में बनने वाले किसी और दोष की आवश्यकता नहीं होती तथा इस प्रकार का मांगलिक दोष किसी कुंडली में प्रबल होने पर जातक का एकाध तलाक तो हो ही जाता है। इससे भी अधिक चिंता का विषय यह है कि जातक का तलाक करवा देना ही इस प्रकार के मांगलिक दोष का सबसे भयंकर दुष्परिणाम नहीं है तथा यह दोष जातक को इससे भी अधिक मुश्किल स्थितियों में डाल सकता है। इस प्रकार के मांगलिक दोष के प्रभाव के कारण होने वाले अधिकतर तलाक बहुत खराब, गंभीर तथा मुश्किल स्थितियों में से निकलने के बाद ही निश्चित हो पाते हैं तथा इस दोष से पीड़ित जातक को तलाक निश्चित होने से पहले अपने विवाह में बहुत पीड़ा, गाली गलौच, लड़ाई झगडे, हिंसा, पुलिस अथवा कोर्ट केस, जेल तथा बदनामी आदि का सामना भी करना पड़ सकता है तथा वर वधू दोनों के परिवारों में सामान्यतया इस दोष के दुष्प्रभाव के चलते बहुत शत्रुता हो जाती है जिसके कारण कभी कभी तो दोनों परिवारों के बीच में हिंसा भी हो जाती है।

               इसीलिए मेरे विचार में सातवें घर में बनने वाला मांगलिक दोष किसी भी अन्य घर में बनने वाले मांगलिक दोष की तुलना में अधिक कष्टप्रद है क्योंकि इस दोष के अशुभ प्रभाव में आने वाले जातक को इतनी अधिक मुसीबतों का इतने अधिक लंबे समय के लिए सामना करना पड़ सकता है कि इस दोष के प्रबल प्रभाव में आने वाले कई जातक तो विवाह जैसी संस्था में अपना विश्वास ही खो देते हैं तथा ऐसे जातक सामान्यतया एक बार तलाक होने के पश्चात बहुत समय तक पुनर्विवाह का विचार तक नहीं करते जिसका कारण इनके पिछ्ले विवाह के भयंकर अनुभव होते हैं तथा इस दोष के किसी कुंडली में बहुत प्रबल होने की स्थिति में तो कई बार जातक एक विवाह टूट जाने के पश्चात दूसरा विवाह ही नहीं करता। और हालांकि कुंडली के सातवें घर में बनने वाले मांगलिक दोष के बारे में बहुत कुछ बुरा लिखा जा चुका है किंतु यह दोष जातक के साथ इससे भी कहीं अधिक बुरा करने की क्षमता भी रखता है।

               किसी कुंडली में इस प्रकार के मांगलिक दोष के बहुत प्रबल होने पर तथा कुंडली में विवाह का सुख नष्ट करने वाले कुछ अन्य दोषों के उपस्थित होने पर जातक की एक या एक से अधिक पत्नियां किसी रोग या दुर्घटना आदि के चलते मर भी सकती हैं जिसके चलते जातक को वैध्वय का सामना करना पड़ सकता है। इससे भी अधिक बुरी स्थिति तब देखने को मिलती है जब सातवें घर के मांगलिक दोष के साथ कुंडली में कुछ विशेष प्रकार के अशुभ दोष उपस्थित हों जिनके संयुक्त प्रभाव के कारण जातक क्रोध में आकर अपनी पत्नि पर आक्रमण करके उसे गंभीर रूप से घायल कर सकता है अथवा ऐसा जातक अपनी पत्नि की हत्या भी कर सकता है। ऐसी हत्या सामान्यतया योजना बना कर की गई हत्या नहीं होती बल्कि पत्नि के साथ गंभीर वाद विवाद होने के बाद अचानक ही बहुत क्रोध चढ़ जाने के कारण होती है जिसके लिए जातक को बाद में पछतावा भी होता है। यहां पर इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि पत्नि की हत्या जैसे भयंकर कार्य केवल इस प्रकार के मांगलिक दोष के अपने प्रभाव के कारण अधिकतर संभव नहीं होता तथा इसके लिए कुंडली में कुछ और विशेष प्रकार के अशुभ दोषों की उपस्थिति भी आवश्यक है। किन्तु फिर भी सातवें घर का मांगलिक दोष केवल अपने बल पर किसी विवाह को बहुत कष्टकारी बनाने में तथा बहुत कष्टों तथा मुसीबतों के बाद तलाक करवा देने में सक्षम होता है जिसके कारण इस प्रकार के मांगलिक दोष को बहुत गंभीर माना जाता है।

              कुंडली के सातवें घर में बनने वाले मांगलिक दोष के अशुभ प्रभाव के कारण जातक को अपने व्यवसाय के माध्यम से भी हानि उठानी पड़ सकती है विशेषतया उस व्यवसाय के माध्यम से जिसमें जातक के अतिरिक्त अन्य सांझेदार भी शामिल हैं। इस प्रकार के मांगलिक दोष के बहुत प्रबल होने की स्थिति मे कई बार जातक को अपने व्यवसाय में शामिल सांझेदारों के किसी अवैध अथवा अनैतिक कार्य के चलते सामाजिक बदनामी का सामना भी करना पड़ सकता है। सातवें घर के मांगलिक दोष के कारण जातक को अथवा जातक की पत्नि को रोग अथवा रोगों का सामना भी करना पड़ सकता है। इस प्रकार सबसे पहले कुंडली के सातवें घर में बनने वाले मांगलिक दोष के बनने या न बनने का निर्णय कुंडली के सम्पूर्ण अध्ययन के पश्चात लेना चाहिए तथा तत्पश्चात इस दोष के कारण जातक के वैवाहिक जीवन में तथा उसके जीवन के अन्य क्षेत्रों में इस दोष के कारण होने वाले दुष्प्रभावों के बारे में निर्णय लेना चाहिए। कुंडली के सातवें घर मे बनने वाले मांगलिक दोष का निवारण वैदिक ज्योतिष में उपलब्ध विभिन्न प्रकार के उपायों की सहायता से किया जा सकता है जिनमें रत्न, मंत्र, यंत्र तथा कुछ विशेष प्रकार के दान इत्यादि का प्रयोग सम्मिलित है।

लेखक
हिमांशु शंगारी