दूसरे घर में मांगलिक दोष

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किसी कुंडली के दूसरे घर में अशुभ तथा दोषकारी मंगल के स्थित हो जाने से कुंडली में मांगलिक दोष का निर्माण हो जाता है जो जातक के वैवाहिक जीवन में तथा जीवन के अन्य कई क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार की समस्याएं पैदा कर सकता है। यहां पर यह बात ध्यान देने योग्य है कि किसी कुंडली के दूसरे घर में मांगलिक दोष बनाने के लिए मंगल का केवल दूसरे घर में स्थित होना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि दूसरे घर में स्थित मंगल का अशुभ तथा दोषकारी होना भी आवश्यक है। दूसरे घर में स्थित मंगल के अशुभ तथा दोषकारी न होने की स्थिति में कुंडली में मांगलिक दोष का निर्माण नहीं होता तथा इसके विपरीत दूसरे घर में शुभ तथा योगकारी मंगल के स्थित होने से कुंडली में मांगलिक योग का निर्माण हो जाता है जिसके कारण जातक को अपने वैवाहिक जीवन में अनेक प्रकार के शुभ फलों की प्राप्ति हो सकती है। मांगलिक दोष के निर्माण के लिए आवश्यक नियमों तथा स्थितियों को जानने के लिए पाठक मांगलिक दोष नामक लेख पढ़ सकते हैं। इस लेख में हम चर्चा करेंगें कि किसी कुंडली में वास्तविक रूप से दूसरे घर में मांगलिक दोष बन जाने से जातक को किन प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

                 कुंडली के दूसरे घर में बनने वाला मांगलिक दोष जातक के वैवाहिक जीवन में अनेक प्रकार की समस्याएं पैदा कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के मांगलिक दोष से पीड़ित जातक को अपने विवाह तथा वैवाहिक जीवन से संबंधित विभिन्न प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। दूसरे घर का मांगलिक दोष जातक के वैवाहिक जीवन को बहुत कष्टमय बना सकता है तथा इस दोष से पीड़ित जातक के एक अथवा एक से अधिक विवाह असफल अथवा भंग हो सकते हैं। इस प्रकार का मांगलिक दोष बहुत से मामलों में जातक का विवाह होने में कोई विशेष विघ्न नहीं उपस्थित करता बल्कि कई बार तो इस दोष के प्रभाव के कारण ही जातक का विवाह सामान्य से भी कम आयु में हो जाता है तथा इस प्रकार का मांगलिक दोष सामान्यतया विवाह के पश्चात ही अपने विवाह संबंधी दुष्परिणाम दिखाने शुरू करता है। दूसरे घर के मांगलिक दोष के अशुभ प्रभाव में आने वाले जातकों का वैवाहिक जीवन सामान्यतया विवाह के बाद शीघ्र ही समस्याओं से घिर जाता है तथा ऐसे जातकों के आम तौर पर अपनी पत्नि के साथ गंभीर वैचारिक मतभेद हो जाते हैं जिनके चलते पति पत्नि में तर्क वितर्क तथा लड़ाई झगड़े की स्थिति पैदा हो जाती है जो दिन प्रतिदिन गंभीर ही होती जाती है जिसके चलते ऐसे बहुत से जातकों का अपनी पत्नि से तलाक हो जाता है तथा ऐसा तलाक भी सामान्यतया बहुत कष्टकारी अनुभवों में से निकलने के पश्चात हो पाता है।

                    स्त्रियों की कुंडली में इस प्रकार का मांगलिक दोष होने से विवाह के पश्चात उनके अपने ससुराल पक्ष के साथ संबंध अच्छे नहीं बन पाते जो कि मुख्य रूप से इसी दोष के अशुभ प्रभाव के कारण होता है तथा ससुराल पक्ष से खराब अथवा बहुत खराब संबंधों के चलते इन स्त्री जातकों के वैवाहिक जीवन में बहुत कठिनाईयां आतीं हैं तथा ऐसी कुछ स्त्रियों का तो इसी कारणवश विवाह भी टूट जाता है जिसमें मुख्यतया उनके पति की अपेक्षा उनके ससुराल के अन्य लोगों की अधिक भूमिका होती है। इस प्रकार के मांगलिक दोष से पीड़ित स्त्रियों को सामान्यतया अपने ससुराल में कोई विशेष सम्मान नहीं मिल पाता तथा इसके विपरीत शादी के बाद किसी न किसी प्रकार की स्थितियों अथवा गलतफहमियों के चलते इनका ससुराल पक्ष इन्हें निंदा की दृष्टि से देखना शुरु कर देता है तथा इनके ससुराल वाले इनके लिए विभिन्न प्रकार की समस्याएं पैदा करनीं शुरु कर देते हैं। इन स्त्रियों की ओर से अपनी ससुराल के साथ संबंध मधुर बनाने के भरसक प्रयास करने के पश्चात भी सामान्यतया इनके संबंध अपने ससुराल के साथ बिगड़ते ही जाते हैं। इसलिए इस प्रकार के मांगलिक दोष से पीड़ित स्त्रियां आम तौर पर ऐसे व्यक्ति के साथ विवाह करके अपेक्षाकृत अधिक प्रसन्न रहतीं हैं जो अपने माता पिता के साथ न रहकर अकेला रहता हो अर्थात ऐसी स्त्रियों को ससुराल में रहना ही न पड़े।

                 दूसरे घर का मांगलिक दोष सामान्यतया विवाह के पश्चात शीघ्र ही समस्याएं पैदा करनी शुरु कर देता है तथा इस प्रकार के मांगलिक दोष से पीड़ित अनेक जातकों का विवाह के दो वर्षों के भीतर ही तलाक हो जाता है। इस प्रकार टूटने वाले विवाह में आम तौर पर वर अथवा वधू के माता पिता भी नकारात्मकता भूमिका ही निभाते हैं तथा उनकी ओर से भी इस विवाह को बचाने का कोई विशेष प्रयास नहीं किया जाता अपितु कुछ मामलों में तो वर वधू के माता पिता ही उन्हें तलाक लेने के लिए प्रेरित कर देते हैं। दूसरे घर का मांगलिक दोष जातक को संतान पैदा करने संबंधित समस्या से भी पीड़ित कर सकता है तथा इस दोष के प्रबल प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों को संतान सुख प्राप्त करने के लिए लंबी प्रतीक्षा करनी पड़ सकती है तथा इनमें से कुछ जातकों अथवा उनकी पत्नियों को किसी प्रकार की मैडिकल चिकित्सा की सहायता भी लेनी पड़ सकती है। इस प्रकार के मांगलिक दोष से पीड़ित स्त्री जातकों को अपने प्रजनन अंगों अथवा उनकी कार्यप्रणाली से संबंधित रोगों अथवा समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है जिसके चलते इनको मासिक धर्म से संबंधित तथा संतान पैदा करने से संबंधित समस्याएं हो सकतीं हैं जिनका निवारण लंबे उपचार के बाद ही संभव हो पाता है।

                  दूसरे घर के मांगलिक दोष के अशुभ प्रभाव में आने वाले जातक के सामान्यतया दो विवाह होते हैं तथा इस दोष का कुंडली में प्रबल प्रभाव होने पर ऐसे जातक के तीन या इससे भी अधिक विवाह हो सकते हैं। ऐसे जातक के विवाह आम तौर पर होने के बाद जल्दी ही पत्नि के साथ गंभीर मतभेदों के चलते टूट जाते हैं। इस प्रकार के मांगलिक दोष के प्रभाव में आने वाले बहुत से जातक आम तौर पर प्रेम विवाह करते हैं तथा इनमें से कुछ जातक विवाह के पश्चात भी अन्य स्त्रियों से प्रेम संबंध अथवा शारीरिक संबंध रखते हैं जो इन जातकों का विवाह टूटने का कारण भी बन सकते हैं। इस प्रकार के मांगलिक दोष का अशुभ प्रभाव जातक की आर्थिक स्थिति पर भी होता है जिसके चलते इस दोष से पीड़ित बहुत से जातकों की आर्थिक स्थिति अस्थिर तथा चिंताजनक बनी रहती है जिससे इन जातकों को अपने जीवन में कई बार आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है जिसका कारण आम तौर पर इन जातकों की धन को व्यर्थ ही खर्च करते रहने की आदत होती है। इस प्रकार के मांगलिक दोष से पीड़ित जातकों को बहुत बार अपने माता, पिता, भाई, बहन, मित्रों तथा अन्य संबंधियों की के उपर भी बहुत धन खर्च करना पड़ता है जिसके कारण भी इन्हें समय समय पर धन की तंगी का सामना करना पड़ सकता है।

                 इस प्रकार सबसे पहले कुंडली के दूसरे घर में बनने वाले मांगलिक दोष के बनने या न बनने का निर्णय कुंडली के सम्पूर्ण अध्ययन के पश्चात लेना चाहिए तथा तत्पश्चात इस दोष के कारण जातक के वैवाहिक जीवन में तथा उसके जीवन के अन्य क्षेत्रों में इस दोष के कारण होने वाले दुष्प्रभावों के बारे में निर्णय लेना चाहिए। कुंडली के दूसरे घर मे बनने वाले मांगलिक दोष का निवारण वैदिक ज्योतिष में उपलब्ध विभिन्न प्रकार के उपायों की सहायता से किया जा सकता है जिनमें रत्न, मंत्र, यंत्र तथा कुछ विशेष प्रकार के दान इत्यादि का प्रयोग सम्मिलित है।

लेखक
हिमांशु शंगारी