पहले घर में मांगलिक दोष

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किसी कुंडली के पहले घर अर्थात लग्न में अशुभ तथा दोषकारी मंगल के स्थित हो जाने से कुंडली में मांगलिक दोष का निर्माण हो जाता है जो जातक के वैवाहिक जीवन में तथा जीवन के अन्य कई क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार की समस्याएं पैदा कर सकता है। यहां पर यह बात ध्यान देने योग्य है कि किसी कुंडली के पहले घर में मांगलिक दोष बनाने के लिए मंगल का केवल पहले घर में स्थित होना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि पहले घर में स्थित मंगल का अशुभ तथा दोषकारी होना भी आवश्यक है। पहले घर में स्थित मंगल के अशुभ तथा दोषकारी न होने की स्थिति में कुंडली में मांगलिक दोष का निर्माण नहीं होता तथा इसके विपरीत पहले घर में शुभ तथा योगकारी मंगल के स्थित होने से कुंडली में मांगलिक योग का निर्माण हो जाता है जिसके कारण जातक को अपने वैवाहिक जीवन में अनेक प्रकार के शुभ फलों की प्राप्ति हो सकती है। मांगलिक दोष के निर्माण के लिए आवश्यक नियमों तथा स्थितियों को जानने के लिए पाठक मांगलिक दोष नामक लेख पढ़ सकते हैं। इस लेख में हम चर्चा करेंगें कि किसी कुंडली में वास्तविक रूप से पहले घर में मांगलिक दोष बन जाने से जातक को किन प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

               पहले घर में बनने वाला मांगलिक दोष जातक के स्वास्थ्य पर, उसके मान सम्मान पर, उसके व्यवसायिक क्षेत्र पर तथा अन्य कई क्षेत्रों पर विपरीत प्रभाव डाल सकता है। पहला घर अथवा लग्न किसी भी कुंडली का सबसे अधिक महत्वपूर्ण घर होता है तथा इस घर में किसी भी अशुभ ग्रह की स्थिति के कारण दोष बन जाने से जातक को अपने जीवन के अनेक क्षेत्रों में समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है तथा इसीलिए पहले घर में बनने वाला मांगलिक दोष बहुत विनाशकारी सिद्ध हो सकता है। किसी भी घर में बनने वाला मांगलिक दोष मुख्य रूप से उस घर की विशेषताओं पर विपरीत प्रभाव डालता है। पहले घर अथवा लग्न में स्थित मांगलिक दोष अन्य किसी भी घर में स्थित मांगलिक दोष की अपेक्षा जातक को कहीं अधिक हानि पहुंचा सकता है हालांकि पहले घर में स्थित मांगलिक दोष जातक के वैवाहिक जीवन को दूसरे कुछ घरों में बनने वाले मांगलिक दोष की तुलना में कम हानि पहुंचाता है। लग्न में बनने वाले मांगलिक दोष का पहला लक्ष्य जातक का स्वास्थ्य, व्यवसाय तथा मान सम्मान होते हैं जबकि विवाह तथा वैवाहिक जीवन का सुख इस प्रकार के मांगलिक दोष का दूसरा लक्ष्य होते हैं। लग्न में बनने वाले मांगलिक दोष से पीड़ित जातक को अपने वैवाहिक जीवन में विभिन्न प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है जो उसकी कुंडली में इस दोष के बल तथा अन्य शुभ अशुभ ग्रहों की स्थिति तथा कार्यशैली पर निर्भर करता है। पहले घर में बनने वाला मांगलिक दोष सामान्यतया जातक के विवाह में देरी का कारण नहीं बनता तथा इस प्रकार के मांगलिक दोष से पीड़ित बहुत से जातक समय पर ही विवाह कर लेते हैं। इसके अतिरिक्त पहले घर में बनने वाला मांगलिक दोष सामान्यतया अपने बल पर ही विवाह विच्छेद अथवा तलाक तथा वैध्वय जैसीं स्थितियां तब तक पैदा नहीं करता जब तक इस प्रकार के मांगलिक दोष को कुंडली में उपस्थित किसी अन्य दोष का सहयोग प्राप्त न हो जाए।

               इसलिए कुंडली के पहले घर में बनने वाले मांगलिक दोष से पीड़ित बहुत से जातकों को अपने वैवाहिक जीवन में तलाक अथवा वैध्वय जैसी भयावह समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ता हालांकि इन जातकों का वैवाहिक जीवन चिन्तामयी तथा कष्टकारक सिद्ध हो सकता है। पहले घर मे बनने वाले मांगलिक दोष से पीड़ित जातकों को अपने जीवन के अन्य कई क्षेत्रों मे इस दोष के दुष्प्रभाव के कारण हानि उठानी पड़ सकती है। इस प्रकार के मांगलिक दोष से पीड़ित जातक को स्वास्थ्य से संबंधित समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है, वैवाहिक जीवन में तर्क वितर्क के चलते अशांति, व्यवसायिक कारणों से अथवा पत्नि से झगड़ा होने के कारण लंबे समय तक पत्नि से अलग रहना इत्यादि जैसी स्थितियों का सामना करना पड़ सकता है हालांकि इस दोष के प्रभाव के कारण होने वाला अलगाव सामान्यतया तलाक में परिवर्तित नहीं होता तथा पति पत्नि के मध्य पैदा हुए मतभेद सुलझ जाते हैं किन्तु फिर भी यह दोष वैवाहिक जीवन में समय समय पर समस्याएं तथा अशांति उत्पन्न करने में सक्षम होता है।

               पहले घर का मांगलिक दोष जातक की पत्नि के स्वास्थ्य से संबंधित समस्याओं को भी दर्शाता है हालांकि इन समस्याओं के बारे में पूर्ण जानकारी जातक की पत्नि की जन्म कुंडली से ही प्राप्त की जा सकती है किन्तु फिर भी इस प्रकार का मांगलिक दोष जातक की पत्नि के स्वास्थ्य से संबंधित समस्याओं की ओर संकेत करता है जिसके चलते ऐसे जातक का विवाह किसी ऐसी स्त्री के साथ हो सकता है जिसका स्वास्थ्य पूरी तरह से ठीक न रहता हो अथवा जातक की पत्नि को विवाह के पश्चात कोई रोग हो सकता है जिसके कारण जातक अपने वैवाहिक जीवन का आनंद भली प्रकार से नहीं ले पाता। पहले घर में बनने वाले मांगलिक दोष का जातक की आर्थिक स्थिति तथा उसकी आयु पर भी विपरीत प्रभाव पड़ सकता है जिसके चलते ऐसे जातक की आर्थिक स्थिति डांवाडोल बनी रहती है जो कभी अच्छी तथा कभी चिंताजनक हो जाती है तथा ऐसे जातक की आयु भी सामान्य आयु की तुलना में कम हो सकती है तथा हालांकि पहले घर में बनने वाला मांगलिक दोष केवल अपने बल पर जातक की आयु को बहुत कम कर सकने में सक्षम नहीं होता किन्तु फिर भी इस प्रकार का मांगलिक दोष जातक की आयु में कुछ कमी अवश्य कर सकता है।

           इस प्रकार सबसे पहले कुंडली के पहले घर में बनने वाले मांगलिक दोष के बनने या न बनने का निर्णय कुंडली के सम्पूर्ण अध्ययन के पश्चात लेना चाहिए तथा तत्पश्चात इस दोष के कारण जातक के वैवाहिक जीवन में तथा उसके जीवन के अन्य क्षेत्रों में इस दोष के कारण होने वाले दुष्प्रभावों के बारे में निर्णय लेना चाहिए। कुंडली के पहले घर मे बनने वाले मांगलिक दोष का निवारण वैदिक ज्योतिष में उपलब्ध विभिन्न प्रकार के उपायों की सहायता से किया जा सकता है जिनमें रत्न, मंत्र, यंत्र तथा कुछ विशेष प्रकार के दान इत्यादि का प्रयोग सम्मिलित है।

लेखक
हिमांशु शंगारी