कालसर्प दोष निवारण यंत्र

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ज्योतिष में प्रचलित किसी कुंडली में बनने वाले दोषों में से कालसर्प दोष सबसे भयावह दोषों में से एक है तथा किसी कुंडली में प्रबल कालसर्प योग के बनने से जातक को उसके जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में हानि उठानी पड़ सकती है। इस दोष की प्रचंडता के चलते अनेक ज्योतिषी इस दोष के निवारण के लिए किये जा सकने वाले उपायों पर निरंतर शोध करते रहते हैं। कालसर्प दोष निवारण यंत्र का प्रयोग भी इस दोष के निवारण के लिए अथवा इस दोष से होने वाली क्षति को कम करने के लिए किया जाता है तथा इस यंत्र का प्रयोग कालसर्प योग के प्रभाव को कम करने के लिए बहुत से जातकों के लिए लाभदायक सिद्ध हो रहा है जिसके चलते इस यंत्र का प्रयोग अधिक से अधिक ज्योतिषी करने लगे हैं। कालसर्प योग निवारण यंत्र तथा कालसर्प दोष निवारण यंत्र एक ही यंत्र के दो नाम हैं जिसका प्रयोग अनेक वैदिक ज्योतिषी किसी कुंडली में उपस्थित कालसर्प दोष के प्रभाव को कम करने के लिए करते हैं तथा वैदिक ज्योतिष में उपलब्ध अन्य उपायों जैसे कि रत्न तथा मंत्र इत्यादि के साथ संयुक्त रूप से इस यंत्र का प्रयोग करने पर कालसर्प योग से पीड़ित जातक को इस दोष के प्रभाव से बहुत सीमा तक छुटकारा प्राप्त हो सकता है। कुछ स्थितियों में इस यंत्र का प्रयोग कालसर्प दोष के दुष्प्रभाव को कम करने के साथ साथ जातक को शुभ फल प्रदान करने में भी सक्षम होता है विशेषतया उस स्थिति में जब जातक इस यंत्र को विधिवत स्थापित करके अपने नियम, अनुशासन तथा निष्ठा के चलते इस यंत्र के साथ शक्तिशाली संबंध स्थापित करने में सफल हो जाता है जिससे इस यंत्र में निवास करने वाले नाग देवता जातक से प्रसन्न होकर उसे शुभ फल भी प्रदान कर सकते हैं।

               किन्तु यहां पर यह बात ध्यान रखने योग्य है कि किसी भी जातक को कालसर्प दोष निवारण यंत्र से प्राप्त होने वाले लाभ तभी मिल सकते हैं जब जातक द्वारा स्थापित किया जाने वाला कालसर्प योग निवारण यंत्र सम्पूर्ण विधि के साथ बनाया गया हो जिसमें इस यंत्र के शुद्धिकरण तथा प्राण प्रतिष्ठा जैसे अति महत्वपूर्ण चरण सम्मिलित हैं। प्राण प्रतिष्ठा करवाए बिना ही किसी भी कालसर्प दोष निवारण यंत्र को स्थापित कर लेना कोई विशेष लाभ प्रदान नहीं करता अथवा बिल्कुल ही लाभ प्रदान नहीं करता। इसलिए कालसर्प योग निवारण यंत्र को स्थापित करने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि आपका यंत्र विधिवित बनाया गया तथा प्राण प्रतिष्ठित है। कालसर्प दोष निवारण यंत्र को बनाने की विधि तकनीकी तथा लंबा समय लेने वाली है जिसे केवल इस विशेष वैदिक पद्धति का ज्ञान रखने वाले कुछ पंडित ही पूर्ण कर सकते हैं। इस यंत्र को बनाने के विधि में उपयोग होने वालीं महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं के बारे में जानने के लिए सूर्य यंत्र नामक लेख पढ़ें जिसमे सूर्य यंत्र को बनाने की संम्पूर्ण विधि का वर्णन किया गया है। कालसर्प योग निवारण यंत्र को बनाने की विधि भी बहुत सीमा तक सूर्य यंत्र को बनाने की विधि से मिलती जुलती है तथा कुछ दोनों यंत्रो को बनाने की प्रक्रिया में केवल कुछ विशेष बदलाव हैं जैसे कि कालसर्प दोष निवारण यंत्र को उर्जा प्रदान करने के लिए कालसर्प योग निवारण मंत्र का प्रयोग किया जाता है तथा सूर्य यंत्र को उर्जा प्रदान करने के लिए सूर्य मंत्र का प्रयोग किया जाता है।

                विधिवत बनाया गया कालसर्प दोष निवारण यंत्र प्राप्त करने के पश्चात आपको इसे अपने ज्योतिषी के परामर्श के अनुसार अपने घर में पूजा के स्थान अथवा अपने बटुए अथवा अपने गले में स्थापित करना होता है। उत्तम फलों की प्राप्ति के लिए कालसर्प योग निवारण यंत्र को अपने ज्योतिषी द्वारा बताए गए दिन स्थापित करना चाहिए तथा घर में स्थापित करने की स्थिति में इसे पूजा के स्थान में स्थापित करना चाहिए। इसके अतिरिक्त आप अपने कालसर्प दोष निवारण यंत्र को अपने ज्योतिषी द्वारा बताए गए दिन ही अपने ज्योतिष के परामर्श अनुसार अपने बटुए में, अथवा अपने गले में भी स्थापित कर सकते हैं। कालसर्प योग निवारण यंत्र की स्थापना के दिन नहाने के पश्चात अपने यंत्र को सामने रखकर 11 या 21 बार कालसर्प दोष निवारण के बीज मंत्र का जाप करें तथा तत्पश्चात अपने कालसर्प योग निवारण यंत्र पर थोड़े से गंगाजल अथवा कच्चे दूध के छींटे दें, कालसर्प दोष निवारण महाराज से इस यंत्र के माध्यम से अधिक से अधिक शुभ फल प्रदान करने की प्रार्थना करें तथा तत्पश्चात इस यंत्र को इसके लिए निश्चित किये गये स्थान पर स्थापित कर दें। आपका कालसर्प योग निवारण यंत्र अब स्थापित हो चुका है तथा इस यंत्र से निरंतर शुभ फल प्राप्त करते रहने के लिए आपको इस यंत्र की नियमित रूप से पूजा करनी होती है। प्रतिदिन स्नान करने के पश्चात अपने कालसर्प दोष निवारण यंत्र की स्थापना वाले स्थान पर जाएं तथा इस यंत्र को नमन करके 11 या 21 कालसर्प योग निवारण बीज मंत्रों के उच्चारण के पश्चात अपने इच्छित फल इस यंत्र से मांगें। यदि आपने अपने कालसर्प दोष निवारण यंत्र को अपने बटुए अथवा गले में धारण किया है तो स्नान के बाद इसे अपने हाथ में लें तथा उपरोक्त विधि से इसका पूजन करें तथा अपना इच्छित फल इससे मांगें। अपने पास स्थापित किए गये कालसर्प योग निवारण यंत्र की नियमित रूप से पूजा करने से आपके और आपके कालसर्प दोष निवारण यंत्र के मध्य एक शक्तिशाली संबंध स्थापित हो जाता है जिसके कारण यह यंत्र आपको अधिक से अधिक लाभ प्रदान करने के लिए प्रेरित होता है।

लेखक
हिमांशु शंगारी