मंगल यंत्र

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मंगल यंत्र का प्रयोग अधिकतर ज्योतिषी किसी जातक की कुंडली में अशुभ रूप से कार्य कर रहे मंगल की अशुभता को कम करने के लिए अथवा मंगल द्वारा किसी कुंडली में बनाए जाने वाले दोष के निवारण के लिए करते हैं। इसके अतिरिक्त मंगल यंत्र का प्रयोग किसी कुंडली में शुभ अथवा सकारात्मक रूप से कार्य कर रहे मंगल को अतिरिक्त बल प्रदान करने के लिए भी किया जाता है जिससे कुंडली में शुभ मंगल की शक्ति बढ़ने से जातक को अतिरिक्त लाभ प्राप्त होते हैं हालांकि किसी कुंडली में शुभ रूप से कार्य कर रहे मंगल को अतिरिक्त बल प्रदान करके इससे लाभ प्राप्त करने के लिए मंगल के रत्न लाल मूंगे को धारण करना मंगल यंत्र के प्रयोग की तुलना में अच्छा उपाय है किन्तु लाल मूंगे का प्रयोग केवल मंगल के कुंडली में शुभ होने की स्थिति में ही किया जाना चाहिए तथा मंगल के कुंडली में अशुभ होने की स्थिति में जातक को लाल मूंगा नहीं धारण करना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से कुंडली में अशुभ रूप से काम कर रहे मंगल को अतिरिक्त बल प्राप्त हो जाएगा जिसके चलते ऐसा मंगल जातक को और भी अधिक हानि पहुंचा सकता है। इस लिए किसी कुंडली में मंगल के नकारात्मक अथवा अशुभ होने पर मंगल का रत्न धारण नहीं करना चाहिए अपितु इस स्थिति में मंगल के यंत्र का प्रयोग एक अच्छा उपाय है।

                 मंगल यंत्र का प्रयोग किसी कुंडली में अशुभ मंगल द्वारा बनाए जाने वाले दोषों को कम करने के लिए अथवा उनके निवारण के लिए किया जा सकता है। अशुभ मंगल द्वारा किसी कुंडली में बनाए जाने वाले दोषों में वैदिक ज्योतिष के अनुसार सबसे अनिष्टकारी दोष मांगलिक दोष को माना जाता है तथा इस दोष का निर्माण किसी कुंडली में अशुभ मंगल के पहले, दूसरे, चौथे, सातवें, आठवे अथवा बारहवें घर में स्थित हो जाने से होता है तथा इस दोष के दुष्प्रभाव के कारण जातक के वैवाहिक जीवन में कई प्रकार के कष्ट तथा बाधाएं आ सकतीं हैं। मांगलिक दोष के निवारण के लिए मंगल के रत्न लाल मूंगे का प्रयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि जातक के लाल मूंगा धारण करने से उसकी कुंडली में मांगलिक दोष का प्रकोप और बढ़ जाता है जिससे उसे और भी अधिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए किसी कुंडली में बनने वाले मांगलिक दोष के निवारण के लिए मंगल के मंत्र तथा यंत्र की सहायता ही मुख्य रूप से ली जाती है तथा इनकी सहायता से किसी कुंडली विशेष में मांगलिक दोष के कारण आने वालीं समस्याओं तथा बाधाओं को भी बहुत सीमा तक कम किया जा सकता है जिससे जातक अपेक्षाकृत अच्छा वैवाहिक जीवन व्यतीत करने में सक्षम हो जाता है।

                मांगलिक दोष तथा कुंडली में मंगल के द्वारा बनाए जाने वाले किसी अन्य दोष के निवारण के अतिरिक्त मंगल यंत्र का प्रयोग मंगल ग्रह की सामान्य तथा विशिष्ट विशेषताओं क साथ जुड़े लाभ प्राप्त करने के लिए भी किया जा सकता है। मंगल यंत्र के शुभ प्रभाव से जातक के शरीर में बल तथा पराक्रम की वृद्धि होती है तथा जातक मानसिक रूप से भी अधिक सक्षम हो जाता है जिसके कारण ऐसा जातक अनेक प्रकार के कार्यों को पहले की अपेक्षा अधिक सहजता तथा कुशलता से करने में सक्षम हो जाता है। मंगल यंत्र का शुभ प्रभाव जातक के अपने भाईयों तथा मित्रों के साथ संबंध सुधारने में भी सहायता कर सकता है जिसके चलते इस यंत्र के शुभ प्रभाव में आने वाला जातक अपने भाईयों तथा मित्रों की सहायता से जीवन में उन्नति कर सकता है क्योंकि इस यंत्र के शुभ प्रभाव के कारण जातक को हितकारी एवम समर्पित मित्र प्राप्त हो सकते हैं जो जातक को उसके जीवन के कई क्षेत्रों में उन्नति करने में सहायता कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त मंगल यंत्र का प्रयोग जादू टोने इत्यादि को दूर करने के लिए भी किया जाता है क्योंकि बहुत से ज्योतिषी यह मानते हैं मंगल यंत्र पर सदा ही मंगल ग्रह के इष्ट भगवान हनुमान की कृपा रहती है जिसके चलते भगवान हनुमान की अपार शक्ति से यह यंत्र अनेक प्रकार के जादू टोनों को दूर करने में भी समर्थ होता है। इसके अतिरिक्त मंगल यंत्र का शुभ प्रभाव जातक को उसकी कुंडली में मंगल ग्रह द्वारा प्रदर्शित की जाने वालीं विशिष्ट विशेषताओं से संबंधित लाभ भी प्रदान कर सकता है। उदाहरण के लिए यदि किसी जातक का मान, प्रतिष्ठा, प्रभुत्व तथा ख्याति उसकी कुंडली के अनुसार मंगल ग्रह की विशेषताओं की परिधि में आती है तो मंगल यंत्र के शुभ प्रभाव से ऐसा जातक ऐसे कार्य कर सकता है जिससे उसे सम्मान, प्रतिष्ठा, प्रभुत्व तथा ख्याति प्राप्त हो।

                   इस प्रकार मंगल यंत्र का प्रयोग विभिन्न जातकों को उनकी कुंडली में मंगल की स्थिति के आधार पर भिन्न भिन्न प्रकार के शुभ फल प्रदान कर सकता है। किन्तु यहां पर यह बात ध्यान रखने योग्य है कि किसी भी जातक को मंगल यंत्र से प्राप्त होने वाले लाभ तभी मिल सकते हैं जब जातक द्वारा स्थापित किया जाने वाला मंगल यंत्र सम्पूर्ण विधि के साथ बनाया गया हो जिसमें इस यंत्र के शुद्धिकरण तथा प्राण प्रतिष्ठा जैसे अति महत्वपूर्ण चरण सम्मिलित हैं। प्राण प्रतिष्ठा करवाए बिना ही किसी भी मंगल यंत्र को स्थापित कर लेना कोई विशेष लाभ प्रदान नहीं करता अथवा बिल्कुल ही लाभ प्रदान नहीं करता। इसलिए मंगल यंत्र को स्थापित करने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि आपका मंगल यंत्र विधिवित बनाया गया तथा प्राण प्रतिष्ठित है। मंगल यंत्र को बनाने की विधि तकनीकी तथा लंबा समय लेने वाली है जिसे केवल इस विशेष वैदिक पद्धति का ज्ञान रखने वाले कुछ पंडित ही पूर्ण कर सकते हैं। इस यंत्र को बनाने के विधि में उपयोग होने वालीं महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं के बारे में जानने के लिए सूर्य यंत्र नामक लेख पढ़ें जिसमे सूर्य यंत्र को बनाने की संम्पूर्ण विधि का वर्णन किया गया है। मंगल यंत्र को बनाने की विधि भी बहुत सीमा तक सूर्य यंत्र को बनाने की विधि से मिलती जुलती है तथा कुछ दोनों यंत्रो को बनाने की प्रक्रिया में केवल कुछ विशेष बदलाव हैं जैसे कि मंगल यंत्र को उर्जा प्रदान करने के लिए मंगल मंत्र का प्रयोग किया जाता है तथा सूर्य यंत्र को उर्जा प्रदान करने के लिए सूर्य मंत्र का प्रयोग किया जाता है।

                 विधिवत बनाया गया मंगल यंत्र प्राप्त करने के पश्चात आपको इसे अपने ज्योतिषि के परामर्श के अनुसार अपने घर में पूजा के स्थान अथवा अपने बटुए अथवा अपने गले में स्थापित करना होता है। उत्तम फलों की प्राप्ति के लिए मंगल यंत्र को मंगलवार वाले दिन स्थापित करना चाहिए तथा घर में स्थापित करने की स्थिति में इसे पूजा के स्थान में स्थापित करना चाहिए। इसके अतिरिक्त आप अपने मंगल यंत्र को मंगलवार के दिन ही अपने ज्योतिष के परामर्श अनुसार अपने बटुए में, अथवा अपने गले में भी स्थापित कर सकते हैं। मंगल यंत्र की स्थापना के दिन नहाने के पश्चात अपने यंत्र को सामने रखकर 11 या 21 बार मंगल के बीज मंत्र का जाप करें तथा तत्पश्चात अपने मंगल यंत्र पर थोड़े से गंगाजल अथवा कच्चे दूध के छींटे दें, मंगल महाराज से इस यंत्र के माध्यम से अधिक से अधिक शुभ फल प्रदान करने की प्रार्थना करें तथा तत्पश्चात इस यंत्र को इसके लिए निश्चित किये गये स्थान पर स्थापित कर दें। आपका मंगल यंत्र अब स्थापित हो चुका है तथा इस यंत्र से निरंतर शुभ फल प्राप्त करते रहने के लिए आपको इस यंत्र की नियमित रूप से पूजा करनी होती है। प्रतिदिन स्नान करने के पश्चात अपने मंगल यंत्र की स्थापना वाले स्थान पर जाएं तथा इस यंत्र को नमन करके 11 या 21 मंगल बीज मंत्रों के उच्चारण के पश्चात अपने इच्छित फल इस यंत्र से मांगें। यदि आपने अपने मंगल यंत्र को अपने बटुए अथवा गले में धारण किया है तो स्नान के बाद इसे अपने हाथ में लें तथा उपरोक्त विधि से इसका पूजन करें तथा अपना इच्छित फल इससे मांगें। अपने पास स्थापित किए गये मंगल यंत्र की नियमित रूप से पूजा करने से आपके और आपके मंगल यंत्र के मध्य एक शक्तिशाली संबंध स्थापित हो जाता है जिसके कारण यह यंत्र आपको अधिक से अधिक लाभ प्रदान करने के लिए प्रेरित होता है।

लेखक
हिमांशु शंगारी