शुक्र यंत्र

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शुक्र यंत्र का प्रयोग अधिकतर ज्योतिषी किसी जातक की कुंडली में अशुभ रूप से कार्य कर रहे शुक्र की अशुभता को कम करने के लिए अथवा शुक्र द्वारा किसी कुंडली में बनाए जाने वाले दोष के निवारण के लिए करते हैं। इसके अतिरिक्त शुक्र यंत्र का प्रयोग किसी कुंडली में शुभ अथवा सकारात्मक रूप से कार्य कर रहे शुक्र को अतिरिक्त बल प्रदान करने के लिए भी किया जाता है जिससे कुंडली में शुभ शुक्र की शक्ति बढ़ने से जातक को अतिरिक्त लाभ प्राप्त होते हैं हालांकि किसी कुंडली में शुभ रूप से कार्य कर रहे शुक्र को अतिरिक्त बल प्रदान करके इससे लाभ प्राप्त करने के लिए शुक्र के रत्न श्वेत पुखराज को धारण करना शुक्र यंत्र के प्रयोग की तुलना में अच्छा उपाय है किन्तु श्वेत पुखराज का प्रयोग केवल शुक्र के कुंडली में शुभ होने की स्थिति में ही किया जाना चाहिए तथा शुक्र के कुंडली में अशुभ होने की स्थिति में जातक को श्वेत पुखराज नहीं धारण करना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से कुंडली में अशुभ रूप से काम कर रहे शुक्र को अतिरिक्त बल प्राप्त हो जाएगा जिसके चलते ऐसा शुक्र जातक को और भी अधिक हानि पहुंचा सकता है। इस लिए किसी कुंडली में शुक्र के नकारात्मक अथवा अशुभ होने पर शुक्र का रत्न धारण नहीं करना चाहिए अपितु इस स्थिति में शुक्र के यंत्र का प्रयोग एक अच्छा उपाय है।

           किसी कुंडली में शुक्र के अशुभ फलों को कम करने के अतिरिक्त शुक्र यंत्र जातक को शुक्र की सामान्य तथा विशिष्ट विशेषताओं से संबंधित शुभ फल भी प्रदान कर सकता है। शुक्र की सामान्य विशेषताओं के बारे में चर्चा करें तो शुक्र यंत्र का प्रयोग किसी जातक को अनेक प्रकार कीं सुख सुविधाएं तथा ऐश्वर्य प्राप्त करने में सहायता कर सकता है। शुक्र यंत्र के शुभ प्रभाव में आने वाले जातक को नए वस्त्रों, वाहनों, इत्र इत्यादि, सुंदर स्त्री अथवा स्त्रियों की संगति, मनोरंजन करने के अनेकानेक साधनों तथा अन्य कई प्रकार के शुभ फल प्राप्त हो सकते हैं। शुक्र यंत्र का शुभ प्रभाव जातक को एक सुखी तथा संपन्न जीवन जीने में सहायता करता है तथा इस यंत्र के शुभ प्रभाव में आने वाले जातक के लिए सुखी जीवन जीने के लिए उपयोग होने वाले साधन इस यंत्र के शुभ प्रभाव के कारण सुलभ होने शुरु हो जाते हैं। प्रेम संबंधों के क्षेत्र में शुक्र यंत्र का प्रयोग विशेष रूप से लाभदायक सिद्ध हो सकता है क्योंकि प्रेम संबंध शुक्र की सामान्य विशेषताओं की परिधि में ही आते हैं जिसके चलते शुक्र यंत्र के शुभ प्रभाव में आने वाले जातक में स्त्रियों को आकर्षित करने की क्षमता बढ़ सकती है तथा ऐसे जातक को सुंदर तथा आकर्षक प्रेमिका का साथ प्राप्त हो सकता है। शुक्र यंत्र का प्रभाव जातक को एक से अधिक सुंदर स्त्रियों का साथ भी प्रदान कर सकता है तथा इस प्रकार के प्रभाव में आने वाला जातक आम तौर पर कई स्त्रियों के साथ प्रेम संबंध रख सकता है तथा ऐसे प्रेम संबंध मुख्य रूप से शारीरिक सुख की कामना से ही बनाए गये होते हैं। इसका कारण यह है कि शुक्र यंत्र का प्रभाव जातक के आभामंडल में से ऐसी उर्जा तरंगों को प्रसारित कर सकता है जिनके प्रभाव से शारीरिक सुख की कामना रखने वाली स्त्रियां जातक की ओर आकर्षित हो जातीं हैं। शुक्र यंत्र का प्रयोग उन स्त्रियों को भी लाभ प्रदान कर सकता है जिनके प्रजनन अंगों में कोई न कोई अनियमितता होने के कारण उनका मासिक रक्तस्राव ठीक प्रकार से अथवा ठीक समय पर नहीं हो पाता तथा जिसके कारण इन स्त्रियों को प्रजनन करने में कठिनाई आ सकती है। ऐसी स्थितियों में शुक्र यंत्र का प्रयोग विशेष फलदायी सिद्ध हो सकता है।

               इसके अतिरिक्त शुक्र यंत्र का प्रयोग किसी जातक को उसकी कुंडली में शुक्र द्वारा प्रदर्शित विशिष्ट विशेषताओं से संबंधित शुभ फल भी प्रदान कर सकता है। उदाहरण के लिए यदि किसी जातक की कुंडली में व्यवसाय तथा व्यापार शुक्र की विशिष्ट विशेषताओं की परिधि में आता है तो शुक्र यंत्र का शुभ प्रभाव ऐसे जातक को व्यवसाय तथा व्यापार से संबंधित अनेक प्रकार के शुभ फल प्रदान कर सकता है जिसके चलते ऐसा जातक अपने व्यसाय के माध्यम से होने वाले लाभ से एक सुखी तथा संपन्न जीवन व्यतीत कर सकता है। इस प्रकार शुक्र यंत्र का प्रयोग विभिन्न जातकों को उनकी कुंडली में शुक्र की स्थिति के आधार पर भिन्न भिन्न प्रकार के शुभ फल प्रदान कर सकता है। किन्तु यहां पर यह बात ध्यान रखने योग्य है कि किसी भी जातक को शुक्र यंत्र से प्राप्त होने वाले लाभ तभी मिल सकते हैं जब जातक द्वारा स्थापित किया जाने वाला शुक्र यंत्र सम्पूर्ण विधि के साथ बनाया गया हो जिसमें इस यंत्र के शुद्धिकरण तथा प्राण प्रतिष्ठा जैसे अति महत्वपूर्ण चरण सम्मिलित हैं। प्राण प्रतिष्ठा करवाए बिना ही किसी भी शुक्र यंत्र को स्थापित कर लेना कोई विशेष लाभ प्रदान नहीं करता अथवा बिल्कुल ही लाभ प्रदान नहीं करता। इसलिए शुक्र यंत्र को स्थापित करने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि आपका शुक्र यंत्र विधिवित बनाया गया तथा प्राण प्रतिष्ठित है। शुक्र यंत्र को बनाने की विधि तकनीकी तथा लंबा समय लेने वाली है जिसे केवल इस विशेष वैदिक पद्धति का ज्ञान रखने वाले कुछ पंडित ही पूर्ण कर सकते हैं। इस यंत्र को बनाने के विधि में उपयोग होने वालीं महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं के बारे में जानने के लिए सूर्य यंत्र नामक लेख पढ़ें जिसमे सूर्य यंत्र को बनाने की संम्पूर्ण विधि का वर्णन किया गया है। शुक्र यंत्र को बनाने की विधि भी बहुत सीमा तक सूर्य यंत्र को बनाने की विधि से मिलती जुलती है तथा कुछ दोनों यंत्रो को बनाने की प्रक्रिया में केवल कुछ विशेष बदलाव हैं जैसे कि शुक्र यंत्र को उर्जा प्रदान करने के लिए शुक्र मंत्र का प्रयोग किया जाता है तथा सूर्य यंत्र को उर्जा प्रदान करने के लिए सूर्य मंत्र का प्रयोग किया जाता है।

             विधिवत बनाया गया शुक्र यंत्र प्राप्त करने के पश्चात आपको इसे अपने ज्योतिषि के परामर्श के अनुसार अपने घर में पूजा के स्थान अथवा अपने बटुए अथवा अपने गले में स्थापित करना होता है। उत्तम फलों की प्राप्ति के लिए शुक्र यंत्र को शुक्रवार वाले दिन स्थापित करना चाहिए तथा घर में स्थापित करने की स्थिति में इसे पूजा के स्थान में स्थापित करना चाहिए। इसके अतिरिक्त आप अपने शुक्र यंत्र को शुक्रवार के दिन ही अपने ज्योतिष के परामर्श अनुसार अपने बटुए में, अथवा अपने गले में भी स्थापित कर सकते हैं। शुक्र यंत्र की स्थापना के दिन नहाने के पश्चात अपने यंत्र को सामने रखकर 11 या 21 बार शुक्र के बीज मंत्र का जाप करें तथा तत्पश्चात अपने शुक्र यंत्र पर थोड़े से गंगाजल अथवा कच्चे दूध के छींटे दें, शुक्र महाराज से इस यंत्र के माध्यम से अधिक से अधिक शुभ फल प्रदान करने की प्रार्थना करें तथा तत्पश्चात इस यंत्र को इसके लिए निश्चित किये गये स्थान पर स्थापित कर दें। आपका शुक्र यंत्र अब स्थापित हो चुका है तथा इस यंत्र से निरंतर शुभ फल प्राप्त करते रहने के लिए आपको इस यंत्र की नियमित रूप से पूजा करनी होती है। प्रतिदिन स्नान करने के पश्चात अपने शुक्र यंत्र की स्थापना वाले स्थान पर जाएं तथा इस यंत्र को नमन करके 11 या 21 शुक्र बीज मंत्रों के उच्चारण के पश्चात अपने इच्छित फल इस यंत्र से मांगें। यदि आपने अपने शुक्र यंत्र को अपने बटुए अथवा गले में धारण किया है तो स्नान के बाद इसे अपने हाथ में लें तथा उपरोक्त विधि से इसका पूजन करें तथा अपना इच्छित फल इससे मांगें। अपने पास स्थापित किए गये शुक्र यंत्र की नियमित रूप से पूजा करने से आपके और आपके शुक्र यंत्र के मध्य एक शक्तिशाली संबंध स्थापित हो जाता है जिसके कारण यह यंत्र आपको अधिक से अधिक लाभ प्रदान करने के लिए प्रेरित होता है।

लेखक
हिमांशु शंगारी