चंद्र यंत्र

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चंद्र यंत्र का प्रयोग वैदिक ज्योतिष में सामान्यतया किसी कुंडली में अशुभ रूप से काम कर रहे चन्द्रमा के अशुभ फलों को कम करने के लिए अथवा चन्द्रमा द्वारा किसी कुंडली में बनाए जा रहे किसी दोष का निवारण करने के लिए किया जाता है। चंद्र यंत्र का प्रयोग किसी कुंडली में शुभ रूप से काम कर रहे चन्द्रमा के शुभ फल बढ़ाने के लिए भी किया जा सकता है हालांकि इस स्थिति में चन्द्रमा के रत्न मोती को धारण करना अपेक्षाकृत अच्छा उपाय है। चन्द्रमा के रत्न को धारण करना उस स्थिति में एक अच्छा उपाय है जब रत्न धारक की कुंडली में चन्द्रमा एक शुभ ग्रह के रूप में कार्य कर रहे हों जिससे चन्द्रमा का रत्न धारण करके चन्द्रमा को अतिरिक्त बल प्रदान किया जा सकता है किन्तु चन्द्रमा के किसी कुंडली में अशुभ रूप से कार्य करने पर जातक को चन्द्रमा का रत्न मोती धारण नहीं करना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से कुंडली में अशुभ रूप से कार्य कर रहे चन्द्रमा को अतिरिक्त बल प्राप्त होता है जिससे वह जातको को और अधिक हानि पहुंचा सकता है। इस स्थिति में चन्द्रमा के अशुभ फलों को कम करने के लिए चन्द्र यंत्र का प्रयोग ज्योतिष के अनुसार एक अच्छा उपाय सिद्ध हो सकता है क्योंकि चन्द्र यंत्र के प्रयोग से जातक कुंडली में अशुभ रूप से काम कर रहे चन्द्रमा के अशुभ फलों को कम भी कर सकता है तथा चन्द्रमा की सामान्य तथा विशिष्ट विशेषताओं से जुड़े लाभ भी प्राप्त कर सकता है।

                 चन्द्र यंत्र का प्रयोग किसी जातक को धन कमाने से संबंधित अच्छे फल भी दे सकता है तथा कुछ जातकों को यह यंत्र अचानक होने वाले धन लाभ जैसे फल भी प्रदान कर सकता है। चन्द्र यंत्र अपने जातक को अनेक प्रकार की सुख सुविधाएं भी प्रदान कर सकता है तथा यह यंत्र जातक को कलात्मकता तथा मानसिक शांति प्रदान करने में भी सक्षम होता है। इन वस्तुओं के अतिरिक्त चन्द्र यंत्र जातक को उसकी जन्म कुंडली के आधार पर चन्द्रमा द्वारा विशिष्ट रूप से ग्रहण की गई विशेषताओं से संबंधित शुभ फल भी प्रदान कर सकता है। उदाहरण के लिए यदि किसी जातक की कुंडली में चन्द्रमा उसके प्रेम संबंधों को विशिष्ट रूप से प्रदर्शित करते हैं तो चन्द्र यंत्र का प्रयोग ऐसे जातक को उसके प्रेम संबंधों से जुड़े हुए शुभ फल जैसे कि किसी बहुत सुंदर तथा अच्छे स्वभाव वाले प्रेमी का प्राप्त होना इत्यादि प्रदान कर सकता है। इस प्रकार चंद्र यंत्र विभिन्न जातकों को उनकी जन्म कुंडली के अनुसार भिन्न भिन्न प्रकार के फल प्रदान कर सकता है।

                   नवग्रहों में से चन्द्रमा को वैदिक ज्योतिष के अनुसार एक अति महत्वपूर्ण ग्रह माना जाता है तथा किसी कुंडली में चन्द्रमा पर अशुभ ग्रहों के प्रभाव के कारण मातृ दोष का निर्माण हो सकता है अथवा चन्द्रमा के किसी जन्म कुंडली में ज्येष्ठ तथा मूल जैसे नक्षत्रों में स्थापित होने पर कुंडली में गंड मूल दोष का निर्माण भी हो सकता है तथा इन दोषों के कारण जातक को भिन्न भिन्न प्रकार के कष्ट उठाने पड़ सकते हैं। चन्द्र यंत्र का प्रयोग इन सभी प्रकार के दोषों के निवारण के लिए किया जा सकता है जिससे इन दोषों से पीड़ित जातक को उसके कष्टों से छुटकारा मिल सके। किन्तु यहां पर यह बात ध्यान रखने योग्य है कि किसी भी जातक को चन्द्र यंत्र से प्राप्त होने वाले लाभ तभी मिल सकते हैं जब जातक द्वारा स्थापित किया जाने वाला चन्द्र यंत्र सम्पूर्ण विधि के साथ बनाया गया हो जिसमें इस यंत्र के शुद्धिकरण तथा प्राण प्रतिष्ठा जैसे अति महत्वपूर्ण चरण सम्मिलित हैं। प्राण प्रतिष्ठा करवाए बिना ही किसी भी चन्द्र यंत्र को स्थापित कर लेना कोई विशेष लाभ प्रदान नहीं करता अथवा बिल्कुल ही लाभ प्रदान नहीं करता। इसलिए चन्द्र यंत्र को स्थापित करने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि आपका चन्द्र यंत्र विधिवित बनाया गया तथा प्राण प्रतिष्ठित है। चन्द्र यंत्र को बनाने की विधि तकनीकी तथा लंबा समय लेने वाली है जिसे केवल इस विशेष वैदिक पद्धति का ज्ञान रखने वाले कुछ पंडित ही पूर्ण कर सकते हैं। इस यंत्र को बनाने के विधि में उपयोग होने वालीं महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं के बारे में जानने के लिए सूर्य यंत्र नामक लेख पढ़ें जिसमे सूर्य यंत्र को बनाने की संम्पूर्ण विधि का वर्णन किया गया है। चन्द्र यंत्र को बनाने की विधि भी बहुत सीमा तक सूर्य यंत्र को बनाने की विधि से मिलती जुलती है तथा कुछ दोनों यंत्रो को बनाने की प्रक्रिया में केवल कुछ विशेष बदलाव हैं जैसे कि चंद्र यंत्र को उर्जा प्रदान करने के लिए चंद्र मंत्र का प्रयोग किया जाता है तथा सूर्य यंत्र को उर्जा प्रदान करने के लिए सूर्य मंत्र का प्रयोग किया जाता है।

                   विधिवत बनाया गया चन्द्र यंत्र प्राप्त करने के पश्चात आपको इसे अपने ज्योतिषि के परामर्श के अनुसार अपने घर में पूजा के स्थान अथवा अपने बटुए अथवा अपने गले में स्थापित करना होता है। उत्तम फलों की प्राप्ति के लिए चन्द्र यंत्र को सोमवार वाले दिन स्थापित करना चाहिए तथा घर में स्थापित करने की स्थिति में इसे पूजा के स्थान में स्थापित करना चाहिए। इसके अतिरिक्त आप अपने चन्द्र यंत्र को सोमवार के दिन ही अपने ज्योतिष के परामर्श अनुसार अपने बटुए में, अथवा अपने गले में भी स्थापित कर सकते हैं। चन्द्र यंत्र की स्थापना के दिन नहाने के पश्चात अपने यंत्र को सामने रखकर 11 या 21 बार चन्द्र के बीज मंत्र का जाप करें तथा तत्पश्चात अपने चन्द्र यंत्र पर थोड़े से गंगाजल अथवा कच्चे दूध के छींटे दें, चन्द्र महाराज से इस यंत्र के माध्यम से अधिक से अधिक शुभ फल प्रदान करने की प्रार्थना करें तथा तत्पश्चात इस यंत्र को इसके लिए निश्चित किये गये स्थान पर स्थापित कर दें। आपका चन्द्र यंत्र अब स्थापित हो चुका है तथा इस यंत्र से निरंतर शुभ फल प्राप्त करते रहने के लिए आपको इस यंत्र की नियमित रूप से पूजा करनी होती है। प्रतिदिन स्नान करने के पश्चात अपने चन्द्र यंत्र की स्थापना वाले स्थान पर जाएं तथा इस यंत्र को नमन करके 11 या 21 चन्द्र बीज मंत्रों के उच्चारण के पश्चात अपने इच्छित फल इस यंत्र से मांगें। यदि आपने अपने चन्द्र यंत्र को अपने बटुए अथवा गले में धारण किया है तो स्नान के बाद इसे अपने हाथ में लें तथा उपरोक्त विधि से इसका पूजन करें तथा अपना इच्छित फल इससे मांगें। अपने पास स्थापित किए गये चन्द्र यंत्र की नियमित रूप से पूजा करने से आपके और आपके चन्द्र यंत्र के मध्य एक शक्तिशाली संबंध स्थापित हो जाता है जिसके कारण यह यंत्र आपको अधिक से अधिक लाभ प्रदान करने के लिए प्रेरित होता है।

लेखक
हिमांशु शंगारी