नवग्रह रत्न पैंडंट

Gemstones : Magic or Science
Book Your Consultation at AstrologerPanditji.com
Buy This Book in India!
Buy This Book in USA!
Buy This Book in UK and Europe!

हमारा टी वी कार्यक्रम कर्म कुण्डली और ज्योतिष YouTube पर देखने के लिए यहां क्लिक कीजिए

Read this Page in English

संबंधित लेख : रत्न ज्योतिष

जन साधारण में रत्न धारण करने का प्रचलन दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है जिसका कारण है कि अधिक से अधिक ज्योतिषी कुंडली में उपस्थित कालसर्प दोष, मांगलिक दोष तथा पित्र दोष जैसे दोषों के निवारण के लिए तथा बुधआदित्य योग एवं गजकेसरी योग जैसे योगों के शुभ प्रभाव को बढ़ाने के लिए रत्न धारण करने का परामर्श देने लग गए हैं। जैसे जैसे रत्न धारण करने का प्रचलन बढ़ रहा है वैसे वैसे ही रत्न धारण करने संबंधी भिन्न भिन्न धारणाएं विभिन्न ज्योतिषियों के द्वारा परखी जा रही हैं जिसके चलते किसी एक ही व्यक्ति को उसकी कुंडली के आधार पर विभिन्न ज्योतिषी भिन्न भिन्न प्रकार के रत्न धारण करने का सुझाव दे रहे हैं जिसके कारण रत्न धारण करने वाले व्यक्ति के मन में कई बार दुविधा उत्पन्न हो जाती है कि रत्न धारण करने के लिए किस ज्योतिषी का सुझाव माना जाए। इनमें से ज्योतिषियों का एक वर्ग अपने पास आने वाले जातकों को नवग्रह रत्न पैंडंट धारण करने का सुझाव भी दे रहा है जिसके पीछे इन ज्योतिषियों की यह धारणा है कि नवग्रह रत्न पैंडंट धारण करने से जातक के शुभ तथा अशुभ सभी ग्रह अच्छा फल देने लग जाएंगे। पिछले कुछ समय में मेरे बहुत से पाठक तथा ग्राहक नवग्रह रत्न पैंडंट के विषय में मुझसे प्रश्न कर रहे हैं जिसके कारण आज के इस लेख में हम इसी विषय में विस्तार से चर्चा करेंगें।

                      नवग्रह रत्न पैंडंट के बारे में चर्चा करने से पूर्व आइए पहले नवग्रहों से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों के बारे में जान लेते हैं। जैसा कि हम पिछले लेखों में चर्चा कर चुके हैं कि प्रत्येक व्यक्ति के शरीर के अंदर उर्जा के केंद्र होते हैं तथा किसी व्यक्ति विशेष के जन्म के समय नवग्रहों में से सभी ग्रह अपनी अपनी तत्कालीन शक्ति तथा स्वभाव के अनुसार उस व्यक्ति के शरीर में उपस्थित इन उर्जा केंद्रों में अपनी अपनी शुभ, अशुभ अथवा मिश्रित स्वभाव की उर्जा को दर्ज करते हैं तथा उस उर्जा का संग्रह करते हैं। नवग्रहों द्वारा किसी व्यक्ति के जन्म के समय उसके शरीर में सग्रहित इन उर्जाओं के शुभ अशुभ स्वभाव तथा बल के कारण ही व्यक्ति के भाग्य का निर्माण होता है क्योंकि भिन्न भिन्न उर्जा केंद्रों में संग्रहित नवग्रहों की ये उर्जाएं अपने अपने बल तथा स्वभाव के अनुसार दूसरे उर्जा केंद्रों में स्थित उर्जाओं के साथ प्रतिक्रिया करतीं हैं जिसके फलस्वरूप व्यक्ति के आभामंडल का निर्माण होता है जो उसके भाग्य का सूचक होता है। कोई विशेष रत्न धारण करने पर वह रत्न धारक के शरीर में अपने विशिष्ट ग्रह की उर्जा को बढ़ा देता है जिसके कारण व्यक्ति के आभामंडल में कई प्रकार के परिवर्तन आ सकते हैं जो इस बात पर निभर्र करेंगे कि जिस ग्रह की उर्जा को बढ़ाया गया है वह ग्रह तथा उस ग्रह की उर्जा उस व्यक्ति के लिए शुभ है अथवा अशुभ। शुभ ग्रहों की उर्जा बढ़ने पर जातक का आभामंडल शुभता की ओर बढ़ने लगता है जबकि अशुभ ग्रहों की उर्जा बढ़ने पर जातक का आभामंडल अशुभता की ओर बढ़ने लगता है।

                     नवग्रह रत्न पैंडंट का सुझाव देने वाले ज्योतिषी यह मानते हैं कि यह पैंडंट धारक के शरीर में नवग्रहों की उर्जा को शुभ प्रकार से नियंत्रित कर लेगा जिसके फलस्वरूप धारक का आभामंडल शुभता की ओर अग्रसर हो जाएगा जो कि वास्तविकता से बहुत परे है। किसी व्यक्ति के नवग्रह रत्न पैंडंट धारण करने पर उस पैंडंट में उपस्थित नवग्रहों के रत्न अपने अपने विशिष्ट ग्रह की उर्जा को धारक के शरीर में स्थानांतरित करना शुरु कर देते हैं जिसके कारण धारक के शरीर में उपस्थित शुभ तथा अशुभ दोनो प्रकार की उर्जाएं ही बढ़ना शुरु कर देतीं हैं जिसके कारण इन उर्जाओं की एक दूसरे के साथ होने वाली क्रियाएं एवं प्रतिक्रियाएं भी बलवान हो जाती हैं जिसके कारण स्वभाव से परस्पर विरोधी उर्जाओं के बढ़ने और टकराने के कारण कई बार विस्फोट की स्थिति भी पैदा हो जाती है। उदाहण के लिए यदि गुरू तथा शनि किसी व्यक्ति की कुंडली में शुभ रूप से काम कर रहे हैं तथा सूर्य और चन्द्र इसी कुंडली में अशुभ रूप से काम कर रहे हैं तो नवग्रह रत्न पैंडंट धारण करने पर जातक के शरीर में शुभ गुरू तथा शनि के साथ साथ अशुभ सूर्य तथा चन्द्रमा की उर्जा भी बढ़ जाएगी तथा इन परस्पर विरोधी उर्जाओं के आपस में टकराने से व्यक्ति के शरीर में उर्जा का संतुलन बिगड़ सकता है जिसका इस व्यक्ति के आभामंडल पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। इसी प्रकार यदि किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में अशुभ ग्रहों की संख्या शुभ ग्रहों की संख्या से अधिक है तो इस व्यक्ति के नवग्रह रत्न पैंडंट धारण करने पर इस पैंडंट में जड़ित रत्नों द्वारा स्थानांतरित की गई अतिरिक्त उर्जा जातक के शरीर और आभामंडल में उर्जा का संतुलन नकारात्मकता अथवा अशुभता की ओर मोड़ देगी क्योंकि यह नवग्रह पैंडंट शुभ से अधिक अशुभ ग्रहों की उर्जा को जातक के शरीर में स्थानांतरित करेगा जिसके कारण व्यक्ति के शरीर में अशुभ उर्जा शुभ उर्जा की तुलना में अधिक हो जाएगी जिसका विपरीत प्रभाव जातक के आभामंडल तथा उसके भाग्य पर पड़ेगा।

                    इस प्रकार नवग्रह रत्न पैंडंट अधिकतर जातकों के लिए लाभप्रद नहीं है बल्कि अधिकतर मामलों में इसका प्रयोग हानिप्रद हो सकता है। नवग्रह रत्न पैंडंट का उपयोग केवल आध्यात्मिक रूप से विकसित कुछ विशेष जातकों के लिए ही लाभप्रद सिद्ध हो सकता है क्योंकि ऐसे जातक शुभ तथा अशुभ दोनों प्रकार की उर्जाओं को ही अपनी आध्यात्मिक शक्ति के कारण नियंत्रित करने में सक्षम होते हैं तथा ऐसे जातक नकारात्मक उर्जा से भी सकारात्मक कार्य करवा लेने की क्षमता रखते हैं। किन्तु एक साधारण व्यक्ति में इतनी आध्यात्मिक शक्ति नहीं होती जिसके चलते वह अपने शरीर में बढ़ने वाली नकारात्मक अथवा अशुभ उर्जा को नियंत्रित करके उसका उपयोग सकारात्मक ढंग से कर सके। इस लिए जन साधारण को नवग्रह रत्न पैंडंट का उपयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि अधिकतर मामलों में ऐसे प्रयोग के परिणाम नकारात्मक ही सिद्ध होते हैं तथा कुछ मामलों में तो जातक को नवग्रह पैंडंट धारण करने पर बहुत अधिक हानि तथा गंभीर परिणाम भी झेलने पड़ सकते हैं। रत्नों से अधिक से अधिक लाभ लेने के लिए केवल उन्हीं ग्रहों के रत्न धारण करने चाहिएं जो कुंडली के अनुसार सकारात्मक अथवा शुभ रूप से कार्य कर रहे हों क्योंकि ऐसे रत्न धारण करने से धारक के शरीर में शुभ उर्जा की मात्रा बढ़ जाती है जिसके कारण जातक का उर्जा संतुलन तथा आभामंडल दोनो ही शुभता की दिशा में चलना शुरू कर देते हैं। इसलिए नवग्रह रत्न पैंडंट का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए तथा प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जन्म कुंडली के आधार पर केवल कुछ विशिष्ट ग्रहों के रत्न ही धारण करने चाहिएं।

लेखक
हिमांशु शंगारी