Category Archives: Planetary Concepts

अस्त ग्रह

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                                                                एक अच्छे ज्योतिषि के लिए किसी भी व्यक्ति की जन्म कुंडली का अध्ययन करते समय अस्त ग्रहों का गहन अध्ययन करना अति आवश्यक है। किसी भी कुंडली में पाये जाने वाले अस्त Combust Planetsग्रहों का अपना एक विशेष महत्व होता है तथा इन्हें भली भांति समझ लेना एक अच्छे ज्योतिषि के लिए अति आवश्यक होता है। अस्त ग्रहों का अध्ययन किए बिना कुंडली धारक के विषय में की गईं कई भविष्यवाणियां गलत हो सकती हैं, इसलिए इनकी ओर विशेष ध्यान देना चाहिए। आइए देखते हैं कि एक ग्रह को अस्त ग्रह कब कहा जाता है तथा अस्त होने से किसी ग्रह विशेष की कार्यप्रणाली में क्या अंतर आ जाता है।

आकाश मंडल में कोई भी ग्रह जब सूर्य से एक निश्चित दूरी के अंदर आ जाता है तो सूर्य के तेज से वह ग्रह अपनी आभा तथा शक्ति खोने लगता है जिसके कारण वह आकाश मंडल में दिखाई देना बंद हो जाता है तथा इस ग्रह को अस्त ग्रह का नाम दिया जाता है। प्रत्येक ग्रह की सूर्य से यह समीपता डिग्रियों में मापी जाती है तथा इस मापदंड के अनुसार प्रत्येक ग्रह सूर्य से निम्नलिखित दूरी के अंदर आने पर अस्त हो जाता है :

चन्द्रमा सूर्य के दोनों ओर 12 डिग्री या इससे अधिक समीप आने पर अस्त माने जाते हैं।

गुरू सूर्य के दोनों ओर 11 डिग्री या इससे अधिक समीप आने पर अस्त माने जाते हैं।

शुक्र सूर्य के दोनों ओर 10 डिग्री या इससे अधिक समीप आने पर अस्त माने जाते हैं। किन्तु यदि शुक्र अपनी सामान्य गति की बनिस्पत वक्र गति से चल रहे हों तो वह सूर्य के दोनों ओर 8 डिग्री या इससे अधिक समीप आने पर अस्त माने जाते हैं।

बुध सूर्य के दोनों ओर 14 डिग्री या इससे अधिक समीप आने पर अस्त माने जाते हैं। किन्तु यदि बुध अपनी सामान्य गति की बनिस्पत वक्र गति से चल रहे हों तो वह सूर्य के दोनों ओर 12 डिग्री या इससे अधिक समीप आने पर अस्त माने जाते हैं।

शनि सूर्य के दोनों ओर 15 डिग्री या इससे अधिक समीप आने पर अस्त माने जाते हैं।

राहु-केतु छाया ग्रह होने के कारण कभी भी अस्त नहीं होते।

                                किसी भी ग्रह के अस्त हो जाने की स्थिति में उसके बल में कमी आ जाती है तथा वह किसी कुंडली में सुचारू रुप से कार्य करने में सक्षम नहीं रह जाता। किसी भी अस्त ग्रह की बलहीनता का सही अनुमान लगाने के लिए उस ग्रह का किसी कुंडली में स्थिति के कारण बल, सूर्य का उसी कुंडली विशेष में बल तथा अस्त ग्रह की सूर्य से दूरी देखना आवश्यक होता है। तत्पश्चात ही उस ग्रह की कार्य क्षमता के बारे में सही जानकारी प्राप्त हो सकती है। उदाहरण के लिए किसी कुंडली में  चन्द्रमा सूर्य से 11 डिग्री दूर होने पर भी अस्त कहलाएंगे तथा 1 डिग्री दूर होने पर भी अस्त ही कहलाएंगे, किन्तु पहली स्थिति में कुंडली में चन्द्रमा का बल दूसरी स्थिति के मुकाबले अधिक होगा क्योंकि जितना ही कोई ग्रह सूर्य के पास आ जाता है, उतना ही उसका बल क्षीण होता जाता है। इसलिए अस्त ग्रहों का अध्ययन बहुत ध्यानपूर्वक करना चाहिए जिससे कि उनके किसी कुंडली विशेष में सही बल का पता चल सके।

                               अस्त ग्रहों को सुचारू रूप से चलने के लिए अतिरिक्त बल की आवश्यकता होती है तथा कुंडली में किसी अस्त ग्रह का स्वभाव देखने के बाद ही यह निर्णय किया जाता है कि उस अस्त ग्रह को अतिरिक्त बल कैसे प्रदान किया जा सकता है। यदि किसी कुंडली में कोई ग्रह  अस्त होने के साथ साथ स्वभाव से शुभ फलदायी है तो उसे अतिरिक्त बल प्रदान करने का सबसे आसान तथा प्रभावशाली उपाय है, कुंडली धारक को उस ग्रह विशेष का रत्न धारण करवा देना। रत्न का वज़न अस्त ग्रह की बलहीनता का सही अनुमान लगाने के बाद ही तय किया जाना चाहिए। इस प्रकार उस अस्त ग्रह को अतिरिक्त बल मिल जाता है जिससे वह अपना कार्य सुचारू रूप से करने में सक्षम हो जाता है। 

                               किन्तु यदि किसी कुंडली में कोई ग्रह अस्त होने के साथ साथ अशुभ फलदायी है तो ऐसे ग्रह को उसके रत्न के द्वारा अतिरिक्त बल नही दिया जाता क्योंकि किसी ग्रह के अशुभ होने की स्थिति में उसके रत्न का प्रयोग सर्वथा वर्जित है, भले ही वह ग्रह कितना भी बलहीन हो। ऐसी स्थिति में किसी भी अस्त ग्रह को बल देने का सबसे बढ़िया तथा प्रभावशाली उपाय उस ग्रह का मंत्र होता है। ऐसी स्थिति में उस ग्रह के मंत्र का निरंतर जाप करने से या उस ग्रह के मंत्र से पूजा करवाने से ग्रह को अतिरिक्त बल तो मिलता ही है, साथ ही साथ उसका स्वभाव भी अशुभ से शुभ की ओर बदलना शुरू हो जाता है। मेरे विचार से किसी कुंडली में किसी अस्त तथा अशुभ फलदायी ग्रह के लिए सर्वप्रथम उसके बीज मंत्र अथवा वेद मंत्र के 125,000 मंत्रों के जाप से पूजा करवानी चाहिए तथा उसके पश्चात नियमित रूप से उसी मंत्र का जाप करना चाहिए जिसके जाप के द्वारा ग्रह की पूजा करवायी गई थी। नवग्रहों में से प्रत्येक ग्रह के मूल मंत्र, बीज मंत्र तथा वेद मंत्र जानने के लिए नवग्रहों के मंत्र नामक लेख पढ़ें।

लेखक
हिमांशु शंगारी

वक्री ग्रह

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                                                               लगभग हर दूसरे व्यक्ति की जन्म कुंडली में एक या इससे अधिक वक्री ग्रह पाये जाते हैं तथा ज्योतिष में रूचि रखने वाले अधिकतर लोगों के मन में यह जिज्ञासा बनी रहती है कि उनकी Retrograde Planetsकुंडली में वक्री बताए जाने वाले इस ग्रह का क्या मतलब हो सकता है। वक्री ग्रहों को लेकर भिन्न-भिन्न ज्योतिषियों तथा पंडितों के भिन्न-भिन्न मत हैं तथा आज हम वक्री ग्रहों के बारे में ही चर्चा करेंगे। सबसे पहले यह जान लें कि वक्री ग्रह की परिभाषा क्या है।

                                                             कोई भी ग्रह विशेष जब अपनी सामान्य दिशा की बजाए उल्टी दिशा यानि विपरीत दिशा में चलना शुरू कर देता है तो ऐसे ग्रह की इस गति को वक्र गति कहा जाता है तथा वक्र गति से चलने वाले ऐसे ग्रह विशेष को वक्री ग्रह कहा जाता है। उदाहरण के लिए शनि यदि अपनी सामान्य गति से कन्या राशि में भ्रमण कर रहे हैं तो इसका अर्थ यह होता है कि शनि कन्या से तुला राशि की तरफ जा रहे हैं, किन्तु वक्री होने की स्थिति में शनि उल्टी दिशा में चलना शुरू कर देते हैं अर्थात शनि कन्या से तुला राशि की ओर न चलते हुए कन्या राशि से सिंह राशि की ओर चलना शुरू कर देते हैं और जैसे ही शनि का वक्र दिशा में चलने का यह समय काल समाप्त हो जाता है, वे पुन: अपनी सामान्य गति और दिशा में कन्या राशि से तुला राशि की तरफ चलना शुरू कर देते हैं। वक्र दिशा में चलने वाले अर्थात वक्री होने वाले बाकि के सभी ग्रह भी इसी तरह का व्यवहार करते हैं। 

                                                            वक्री ग्रहों की परिभाषा जान लेने के पश्चात आइए अब देखें कि दुनिया भर के ज्योतिषि वक्री ग्रहों के बारे में मुख्य रूप से क्या धारणाएं रखते हैं। सबसे पहले चर्चा करते हैं ज्योतिषियों के उस वर्ग विशेष की जो यह धारणा रखता है कि वक्री ग्रह किसी भी कुंडली में सदा अशुभ फल ही प्रदान करते हैं क्योंकि वक्री ग्रह उल्टी दिशा में चलते हैं इसलिए उनके फल अशुभ ही होंगे। ज्योतिषियों का एक दूसरा वर्ग मानता है कि वक्री ग्रह किसी कुंडली विशेष में अपने कुदरती स्वभाव से विपरीत आचरण करते हैं अर्थात अगर कोई ग्रह किसी कुंडली में सामान्य रूप से शुभ फल दे रहा है तो वक्री होने की स्थिति में वह अशुभ फल देना शुरू कर देता है। इसी प्रकार अगर कोई ग्रह किसी कुंडली में सामान्य रूप से अशुभ फल दे रहा है तो वक्री होने की स्थिति में वह शुभ फल देना शुरू कर देता है। ईस धारणा के मूल में यह विश्वास है कि क्योंकि वक्री ग्रह उल्टी दिशा में चलने लगता है इसलिए उसका शुभ या अशुभ प्रभाव भी सामान्य से उल्टा हो जाता है। 

                                                         ज्योतिषियों का एक और वर्ग यह मानता है कि अगर कोई ग्रह अपनी उच्च की राशि में स्थित होने पर वक्री हो जाता है तो उसके फल अशुभ हो जाते हैं तथा यदि कोई ग्रह अपनी नीच की राशि में वक्री हो जाता है तो उसके फल शुभ हो जाते हैं। इसके पश्चात ज्योतिषियों का एक और वर्ग है जो यह धारणा रखता है कि वक्री ग्रहों के प्रभाव बिल्कुल सामान्य गति से चलने वाले ग्रहों की तरह ही होते हैं तथा उनमें कुछ भी अंतर नहीं आता। ज्योतिषियों के इस वर्ग का यह मानना है कि प्रत्येक ग्रह केवल सामान्य दिशा में ही भ्रमण करता है तथा कोई भी ग्रह सामान्य से उल्टी दिशा में भ्रमण करने में सक्षम नहीं होता। इतने सारे मतों और धारणाओं पर चर्चा करने के पश्चात आइए अब देखें कि मेरी धारणा तथा अनुभव के अनुसार किसी ग्रह के वक्री होने की स्थिति में उसके व्यवहार में क्या बदलाव आते हैं।

                                                                सबसे पहले तो यह जान लें कि किसी भी वक्री ग्रह का व्यवहार उसके सामान्य होने की स्थिति से अलग होता है तथा वक्री और सामान्य ग्रहों को एक जैसा नही मानना चाहिए। किन्तु यहां पर यह जान लेना भी आवश्यक है कि अधिकतर मामलों में किसी ग्रह के वक्री होने से कुंडली में उसके शुभ या अशुभ होने की स्थिति में कोई फर्क नही पड़ता अर्थात सामान्य स्थिति में किसी कुंडली में शुभ फल प्रदान करने वाला ग्रह वक्री होने की स्थिति में भी शुभ फल ही प्रदान करेगा तथा सामान्य स्थिति में किसी कुंडली में अशुभ फल प्रदान करने वाला ग्रह वक्री होने की स्थिति में भी अशुभ फल ही प्रदान करेगा। अधिकतर मामलों में ग्रह के वक्री होने की स्थिति में उसके स्वभाव में कोई फर्क नहीं आता किन्तु उसके व्यवहार में कुछ बदलाव अवश्य आ जाते हैं। वक्री होने की स्थिति में किसी ग्रह विशेष के व्यवहार में आने वाले इन बदलावों के बारे में जानने से पहले यह जान लें कि नवग्रहों में सूर्य तथा चन्द्र सदा सामान्य दिशा में ही चलते हैं तथा यह दोनों ग्रह कभी भी वक्री नहीं होते। इनके अतिरिक्त राहु-केतु सदा उल्टी दिशा में ही चलते हैं अर्थात हमेशा ही वक्री रहते हैं। इसलिए सूर्य-चन्द्र तथा राहु-केतु के फल तथा व्यवहार सदा सामान्य ही रहते हैं तथा इनमें कोई अंतर नहीं आता। आइए अब देखें कि बाकी के पांच ग्रहों के स्वभाव और व्यवहार में उनके वक्री होने की स्थिति में क्या अंतर आते हैं। 

गुरू : वक्री होने पर गुरू के शुभ या अशुभ फल देने के स्वभाव में कोई अंतर नहीं आता अर्थात किसी कुंडली विशेष में सामान्य रूप से शुभ फल देने वाले गुरू वक्री होने की स्थिति में भी उस कुंडली में शुभ फल ही प्रदान करेंगे तथा किसी कुंडली विशेष में सामान्य रूप से अशुभ फल देने वाले गुरू वक्री होने की स्थिति में भी उस कुंडली में अशुभ फल ही प्रदान करेंगे किन्तु वक्री होने से गुरू के व्यवहार में कुछ बदलाव अवश्य आ जाते हैं। वक्री होने की स्थिति में गुरू कई बार पर शुभ या अशुभ फल देने में देरी कर देते हैं। वक्री होने की स्थिति में गुरू बहुत बार कुंडली धारक को दूसरों को बिना मांगी सलाह या उपदेश देने की आदत प्रदान कर देते हैं। ऐसे लोगों को बहुत बार अपने ज्ञान का इस्तेमाल करने की सही दिशा का पता नहीं लगता तथा इसी आदत के चलते ऐसे लोग कई बार अपने आस पास के लोगों को व्यर्थ में ही उपदेश देना शुरू कर देते हैं। इन बदलावों के अतिरिक्त आम तौर पर वक्री गुरू अपने सामान्य स्वभाव की तरह ही आचरण करते हैं। 

शुक्र : वक्री होने पर शुक्र के शुभ या अशुभ फल देने के स्वभाव में कोई अंतर नहीं आता अर्थात किसी कुंडली विशेष में सामान्य रूप से शुभ फल देने वाले शुक्र वक्री होने की स्थिति में भी उस कुंडली में शुभ फल ही प्रदान करेंगे तथा किसी कुंडली विशेष में सामान्य रूप से अशुभ फल देने वाले शुक्र वक्री होने की स्थिति में भी उस कुंडली में अशुभ फल ही प्रदान करेंगे किन्तु वक्री होने से शुक्र के व्यवहार में कुछ बदलाव अवश्य आ जाते हैं। वक्री शुक्र आम तौर पर कुंडली धारक को सामान्य से अधिक संवेदनशील बना देते हैं तथा ऐसे लोग विशेष रूप से अपने प्रेम संबंधों तथा अपने जीवन साथी को लेकर बहुत भावुक, तथा अधिकार जताने वाले होते हैं। पुरुषों की जन्म कुंडली में स्थित वक्री शुक्र जहां उन्हें अति भावुक तथा संवेदनशील बनाने में सक्षम होता है वही पर महिलाओं की जन्म कुंडली में स्थित वक्री शुक्र उन्हें आक्रमकता प्रदान करता है। ऐसी महिलाएं आम तौर पर अपने प्रेमी या जीवन साथी पर अपना नियंत्रण रखती हैं तथा संबंध टूट जाने की स्थिति में आसानी से अपने प्रेमी या जीवन साथी का पीछा नहीं छोड़तीं और कई बार बदला लेने पर भी उतारु हो जाती हैं। इन बदलावों के अतिरिक्त आम तौर पर वक्री शुक्र अपने सामान्य स्वभाव की तरह ही आचरण करते हैं।

मंगल : वक्री होने पर मंगल के शुभ या अशुभ फल देने के स्वभाव में कोई अंतर नहीं आता अर्थात किसी कुंडली विशेष में सामान्य रूप से शुभ फल देने वाले मंगल वक्री होने की स्थिति में भी उस कुंडली में शुभ फल ही प्रदान करेंगे तथा किसी कुंडली विशेष में सामान्य रूप से अशुभ फल देने वाले मंगल वक्री होने की स्थिति में भी उस कुंडली में अशुभ फल ही प्रदान करेंगे किन्तु वक्री होने से मंगल के व्यवहार में कुछ बदलाव अवश्य आ जाते हैं। वक्री मंगल आम तौर पर कुंडली धारक को सामान्य से अधिक शारीरिक तथा मानसिक उर्जा प्रदान कर देते हैं जिसका सही दिशा में उपयोग करने में आम तौर पर कुंडली धारक सक्षम नहीं हो पाते तथा इसलिए वे इस अतिरिक्त उर्जा को लेकर परेशान रहते हैं और कई बार यह उर्जा उनके अचानक ही प्रकट हो जाने वाले गुस्से अथवा चिढ़चिढ़ेपन के रूप में देखने के रूप में बाहर निकलती है। इस उर्जा के कारण ऐसे लोग अपने जीवन में कई बार अचानक ही बड़े अप्रत्याशित निर्णय ले लेते हैं जिससे इनके स्वभाव के बारे में कोई ठोस धारणा बना पाना कठिन हो जाता है। महिलाओं की जन्म कुंडली में स्थित वक्री मंगल आम तौर पर उन्हें पुरुषों के गुण प्रदान कर देता है तथा ऐसी महिलाएं पुरुषों के कार्य क्षेत्रों में काम करने तथा पुरुषों को सफलता पूर्वक नियत्रित करने में सक्षम होती हैं। इन बदलावों के अतिरिक्त आम तौर पर वक्री मंगल अपने सामान्य स्वभाव की तरह ही आचरण करते हैं।

बुध : वक्री होने पर बुध के शुभ या अशुभ फल देने के स्वभाव में कोई अंतर नहीं आता अर्थात किसी कुंडली विशेष में सामान्य रूप से शुभ फल देने वाले बुध वक्री होने की स्थिति में भी उस कुंडली में शुभ फल ही प्रदान करेंगे तथा किसी कुंडली विशेष में सामान्य रूप से अशुभ फल देने वाले बुध वक्री होने की स्थिति में भी उस कुंडली में अशुभ फल ही प्रदान करेंगे किन्तु वक्री होने से बुध के व्यवहार में कुछ बदलाव अवश्य आ जाते हैं। वक्री बुध आम तौर पर कुंडली धारक की बातचीत करने की क्षमता तथा निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित कर देते हैं। ऐसे लोग आम तौर पर या तो सामान्य से अधिक बोलने वाले होते हैं या फिर बिल्कुल ही कम बोलने वाले। कई बार ऐसे लोग बहुत कुछ बोलना चाह कर भी कुछ बोल नहीं पाते तथा कई बार कुछ न बोलने वाली स्थिति में भी बहुत कुच्छ बोल जाते हैं। ऐसे लोग वक्री बुध के प्रभाव में आकर जीवन मे अनेक बार बड़े अप्रत्याशित तथा अटपटे से लगने वाले निर्णय ले लेते हैं जो परिस्थितियों के हिसाब से लिए जाने वाले निर्णय के एकदम विपरीत हो सकते हैं तथा जिनके लिए कई बार ऐसे लोग बाद में पछतावा भी करते हैं किन्तु वक्री बुध के प्रभाव में आकर ये लोग अपने जीवन में ऐसे निर्णय लेते ही रहते हैं। इन बदलावों के अतिरिक्त आम तौर पर वक्री बुध अपने सामान्य स्वभाव की तरह ही आचरण करते हैं।

शनि : चलिए अब देखें कि वक्री होने की स्थिति में शनि महाराज के स्वभाव तथा व्यवहार में क्या बदलाव आ जाते हैं। समस्त ग्रहों में से शनि ही एकमात्र ऐसे ग्रह हैं जो वक्री होने की स्थिति में कुंडली धारक को कुछ न कुछ अशुभ फल अवश्य प्रदान करते हैं फिर चाहे किसी कुंडली में उनका स्वभाव कितना ही शुभ फल देने वाला क्यों न हो। किन्तु वक्री होने की स्थिति में शनि के स्वभाव में एक नकारात्मकता अवश्य आ जाती है जो कुंडली धारक के लिए कुछ समस्याओं से लेकर बहुत भारी विपत्तियां तक लाने में सक्षम होती है। यदि शनि किसी कुंडली में सामान्य रूप से शुभ फलदायी होकर वक्री हैं तो कुंडली धारक को अपेकक्षाकृत कम नुकसान पहुंचाते हैं तथा ऐसी स्थिति में कुंडली में इनका स्वभाव मिश्रित हो जाता है जो कुंडली धारक को कभी लाभ तो कभी हानि देता है। किन्तु यदि शनि किसी कुंडली में सामान्य रूप से अशुभ फलदायी होकर वक्री हैं तो कुंडली धारक को अपेकक्षाकृत बहुत अधिक नुकसान पहुंचाते हैं। किसी कुंडली में शनि सबसे अधिक नुकसान तब पहुंचाते हैं जब वे तुला राशि में स्थित हो, सामान्य रूप से अशुभ फलदायी हों तथा इसके साथ ही वक्री भी हों। तुला राशि में स्थित होकर शनि को अतिरक्त बल प्राप्त होता है तथा अशुभ होने की स्थिति में शनि वैसे ही इस अतिरिक्त बल के चलते सामान्य से अधिक हानि करने में सक्षम होते हैं किन्तु ऐसी स्थिति में वक्री होने से उनकी नकारात्मकता में और भी वृद्धि हो जाती है तथा इस स्थिति में कुंडली धारक को दूसरे ग्रहों की स्थिति को ध्यान में रखते हुए बहुत भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ सकता है।

लेखक
हिमांशु शंगारी

नीच का केतु 02

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संबंधित लेख : नीच का केतु 01 , कुंडली में नीच के ग्रह

पिछले लेख में हमने नीच के केतु के कुंडली के पहले घर से लेकर कुंडली के छठे घर तक स्थित होने से जातक को मिलने वाले संभावित शुभ अशुभ फलों के बारे में चर्चा की थी तथा इस लेख में हम नीच के केतु के कुंडली के सातवें घर से लेकर कुंडली के बारहवें घर तक स्थित होने से जातक को मिलने वाले संभावित शुभ अशुभ फलों के बारे में चर्चा करेंगे।

कुंडली के सातवें घर में नीच का केतु : किसी कुंडली के सातवें घर में स्थित नीच का केतु शुभ होने की स्थिति में जातक को व्यवसायिक सफलता प्रदान कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले जातक अनेक प्रकार के व्यवसायिक क्षेत्रों में सफलता प्राप्त कर सकते हैं तथा इनमें से कुछ जातक पुलिस अधिकारी, सैन्य अधिकारी, किसी अन्य प्रकार के सुरक्षा बल में काम करने वाले जातक, चिकित्सक, वकील, जज आदि भी हो सकते हैं।  इस प्रकार के मांगलिक योग के शुभ प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों का विवाह धनी परिवार की स्त्रियों के साथ अथवा धनी स्त्रियों के साथ हो सकता है तथा ऐसे जातकों की पत्नियां इन जातकों की आर्थिक स्थिति को बहुत स्थिरता प्रदान कर सकतीं हैं। कुंडली के सातवें घर में स्थित शुभ नीच का केतु जातक को विदेशों में भी ले जा सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातक व्यवसायिक कारणों के चलते लंबे समय के लिये अथवा स्थायी रूप से विदेशों में बस सकते हैं। वहीं दूसरी ओर, कुंडली के सातवें घर में स्थित नीच का केतु अशुभ होने की स्थिति में जातक के वैवाहिक जीवन को कष्टमय बना सकता है तथा इस प्रकार के अशुभ प्रभाव में आने वाले जातक का वैवाहिक जीवन विशेष रूप से जातक की मानसिक शांति के लिए बहुत कष्टकारी हो सकता है तथा ऐसे कुछ जातकों को वैवाहिक जीवन में अतयंत मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ सकती है और इस प्रकार के कुछ जातकों का विवाह टूट भी सकता है। कुंडली के सातवें घर में स्थित अशुभ नीच का केतु जातक को व्यवसायिक क्षेत्र से संबंधित समस्याएं भी प्रदान कर सकता है तथा इस प्रकार के कुछ जातकों को व्यवसाय के माध्यम से धन हानि के साथ साथ मान हानि का सामना भी करना पड़ सकता है। कुंडली के सातवें घर में स्थित अशुभ नीच का केतु कुंडली में अनंत काल सर्प योग का निर्माण भी कर सकता है जिसके अशुभ प्रभाव में आने वाले जातकों के जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में अनेक प्रकार की समस्याएं पैदा हो सकतीं है। अनंत कालसर्प दोष और इसके दुष्प्रभावों के बारे में जानने के लिए अनंत कालसर्प योग लेख पढ़ें।

कुंडली के आठवें घर में नीच का केतु : किसी कुंडली के आठवें घर में स्थित नीच का केतु शुभ होने की स्थिति में जातक को व्यवसायिक सफलता के साथ साथ किसी सरकारी विभाग में प्रतिष्ठा तथा प्रभुत्व का कोई पद भी प्रदान कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले कुछ जातक विभिन्न सरकारी विभागों में किसी उच्च अथवा महत्वपूर्ण पद की प्राप्ति कर सकते हैं। कुंडली के आठवें घर में स्थित शुभ नीच केतु के प्रभाव में आने वाले कुछ जातक आध्यात्म तथा परा विज्ञान से जुड़े क्षेत्रों में भी विकसित हो सकते हैं तथा इनमें से कुछ जातक ऐसे ही किसी क्षेत्र में उपलब्धियां प्राप्त करके इस क्षेत्र को अपना व्यवसायिक क्षेत्र भी बना सकते हैं। वहीं दूसरी ओर, कुंडली के आठवें घर में स्थित नीच का केतु अशुभ होने की स्थिति में जातक के विवाह तथा वैवाहिक जीवन को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है विशेषतया तब जब इस प्रकार का अशुभ केतु कुंडली के आठवें घर में मांगलिक दोष बनाता हो। इस प्रकार के मांगलिक दोष के प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों का विवाह बहुत देर से हो सकता है जबकि इस प्रकार के कुछ अन्य जातकों का वैवाहिक जीवन बहुत अशांत रहता है तथा इन जातकों के एक अथवा एक से अधिक विवाह टूट भी सकते हैं। कुंडली के आठवें घर में स्थित अशुभ नीच का केतु जातक की आयु पर भी विपरीत प्रभाव डाल सकता है जिसके चलते इस प्रकार के अशुभ प्रभाव में आने वाले जातकों की आयु सामान्य से कम रहती है तथा इनमें से कुछ जातक किसी दुर्घटना अथवा गंभीर रोग के कारण कम आयु में ही मृत्यु को प्राप्त हो सकते हैं। कुंडली के आठवें घर में स्थित अशुभ नीच का केतु कुंडली में कुलिक काल सर्प योग का निर्माण भी कर सकता है जिसके अशुभ प्रभाव में आने वाले जातकों के जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में अनेक प्रकार की समस्याएं पैदा हो सकतीं है। कुलिक कालसर्प दोष और इसके दुष्प्रभावों के बारे में जानने के लिए कुलिक कालसर्प योग लेख पढ़ें।

कुंडली के नौवें घर में नीच का केतु : किसी कुंडली के नौवें घर में स्थित नीच का केतु शुभ होने की स्थिति में जातक को व्यवसायिक सफलता, धन तथा समृद्धि प्रदान कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले जातक अपने व्यवसाय के माध्यम से बहुत धन तथा समृद्धि अर्जित कर सकते हैं। इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों को उत्तराधिकार के माध्यम से भी धन तथा संपत्ति की प्राप्ति हो सकती है। कुंडली के नौवें घर में स्थित शुभ नीच का केतु जातक को विदेशों में भी ले जा सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातक स्थायी रूप से विदेश में ही बस सकते हैं जबकि इस प्रकार के कुछ अन्य जातक अपने व्यवसाय के संबंध में विदेशों में जाते रहते हैं। वहीं दूसरी ओर, कुंडली के नौवें घर में स्थित नीच का केतु अशुभ होने की स्थिति में जातक के जीवन के अनेक क्षेत्रों में समस्याएं पैदा कर सकता है तथा यह समस्यायें उस स्थिति में और भी गंभीर हो सकतीं है जब इस प्रकार का अशुभ नीच केतु कुंडली के नौवें घर में स्थित होकर कुंडली में पितृ दोष बनाता हो। इस प्रकार के पितृ दोष के प्रभाव में आने वाले जातकों का व्यवसाय सामान्यतया स्थिर तथा सफल नहीं रह पाता तथा इन जातकों को जीवन में अनेक बार अपना व्यवसाय बदलना पड़ सकता है। कुंडली के नौवें घर में स्थित अशुभ नीच का केतु जातक को स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं तथा रोग भी प्रदान कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के अशुभ प्रभाव में आने वाले कुछ जातक विभिन्न प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं तथा रोगों से पीड़ित हो सकते हैं। कुंडली के नौवें घर में स्थित अशुभ नीच का केतु कुंडली में वासुकी काल सर्प योग का निर्माण भी कर सकता है जिसके अशुभ प्रभाव में आने वाले जातकों के जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में अनेक प्रकार की समस्याएं पैदा हो सकतीं है। वासुकी कालसर्प दोष और इसके दुष्प्रभावों के बारे में जानने के लिए वासुकी कालसर्प योग लेख पढ़ें।

कुंडली के दसवें घर में नीच का केतु : किसी कुंडली के दसवें घर में स्थित नीच का केतु शुभ होने की स्थिति में जातक के व्यवसाय पर शुभ अथवा बहुत शुभ प्रभाव डाल सकता है जिसके चलते इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले जातक विभिन्न प्रकार के व्यवसायिक क्षेत्रों में सफलता प्राप्त कर सकते हैं। कुंडली के दसवें घर में स्थित शुभ नीच के केतु के प्रभाव में आने वाले कुछ जातक अपने व्यवसाय के माध्यम से सफलता के साथ साथ नाम, यश तथा प्रसिद्धि भी प्राप्त कर सकते हैं। कुंडली के दसवें घर में स्थित शुभ नीच का केतु जातक को किसी सरकारी अथवा निजि संस्था में प्रभुत्व तथा प्रतिष्ठा का कोई पद भी दिलवा सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातक विभिन्न सरकारी विभागों में अधिकारी पद प्राप्त कर सकते हैं जबकि इस प्रकार के कुछ अन्य जातक राजनीति के माध्यम से सरकार में मंत्री पद आदि भी प्राप्त कर सकते हैं। वहीं दूसरी ओर, कुंडली के दसवें घर में स्थित नीच का केतु अशुभ होने की स्थिति में जातक के व्यवसायिक क्षेत्र में अनेक प्रकार की समस्याएं पैदा कर सकता है जिनके चलते इस प्रकार के कुछ जातकों का व्यवसाय अस्थिर रहता है तथा ऐसे जातक अपनी योग्यता अनुसार सफलता प्राप्त नहीं कर पाते जबकि इस प्रकार के कुछ अन्य जातकों को व्यवसाय के माध्यम से मान हानि का सामना करना पड़ सकता है। कुंडली के दसवें घर में स्थित अशुभ नीच का केतु जातक की आर्थिक स्थिति पर भी विपरीत प्रभाव डाल सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातकों को जीवन में समय समय पर धन की कमी का सामना करना पड़ सकता है तथा इनमें से कुछ जातकों को गंभीर आर्थिक संकट का सामना भी करना पड़ सकता है। कुंडली के दसवें घर में स्थित अशुभ नीच का केतु कुंडली में शंखपाल काल सर्प योग का निर्माण भी कर सकता है जिसके अशुभ प्रभाव में आने वाले जातकों के जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में अनेक प्रकार की समस्याएं पैदा हो सकतीं है। शंखपाल कालसर्प दोष और इसके दुष्प्रभावों के बारे में जानने के लिए शंखपाल कालसर्प योग लेख पढ़ें।

कुंडली के ग्यारहवें घर में नीच का केतु : किसी कुंडली के ग्यारहवें घर में स्थित नीच का केतु शुभ होने की स्थिति में जातक को परिश्रम करने का स्वभाव तथा निरंतर प्रयत्न करते रहने की विशेषता प्रदान कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले जातक अपनी इन विशेषताओं के चलते विभिन्न प्रकार के व्यवसायिक क्षेत्रों में सफलता प्राप्त कर सकते हैं। कुंडली के ग्यारहवें घर में स्थित शुभ नीच का केतु जातक को आध्यात्म तथा परा विज्ञान से संबंधित क्षेत्रों में रूचि तथा विकास भी प्रदान कर सकता है और इस प्रकार के कुछ जातक ऐसे ही किसी क्षेत्र में विकसित होकर इसे अपना व्यवसायिक क्षेत्र भी बना सकते हैं जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातक ज्योतिषी, वास्तु शास्त्री, अंक शास्त्री, हस्त रेखा विशेषज्ञ आदि भी बन सकते हैं। वहीं दूसरी ओर, कुंडली के ग्यारहवें घर में स्थित नीच का केतु अशुभ होने की स्थिति में जातक की आर्थिक स्थिति और व्यवसायिक क्षेत्र को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के अशुभ प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों को अपने व्यवसाय के माध्यम से धन हानि का सामना करना पड़ सकता है अथवा लंबे समय के लिये व्यवसायहीन रहना पड़ सकता है जिससे इन जातकों की आर्थिक स्थिति चिंताजनक बन सकती है तथा इन जातकों को समय समय पर धन की कमी का सामना करना पड़ सकता है। कुंडली के ग्यारहवें घर मे स्थित अशुभ नीच का केतु जातक के स्वास्थ्य पर भी विपरीत प्रभाव डाल सकता है जिसके कारण इस प्रकार के कुछ जातक विभिन्न प्रकार के रोगों से पीड़ित हो सकते हैं तथा इनमें से कुछ जातकों को गंभीर तथा बहुत कष्ट देने वाले रोग भी लग सकते हैं। कुंडली के ग्यारहवें घर में स्थित अशुभ नीच का केतु कुंडली में पदम काल सर्प योग का निर्माण भी कर सकता है जिसके अशुभ प्रभाव में आने वाले जातकों के जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में अनेक प्रकार की समस्याएं पैदा हो सकतीं है। पदम कालसर्प दोष और इसके दुष्प्रभावों के बारे में जानने के लिए पदम कालसर्प योग लेख पढ़ें।

कुंडली के बारहवें घर में नीच का केतु : किसी कुंडली के बारहवें घर में स्थित नीच का केतु शुभ होने की स्थिति में जातक का संबंध विदेशों के साथ स्थापित कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले अनेक जातक व्यवसाय के संबध में स्थायी रूप से विदेशों में ही बस जाते हैं तथा इनमें से कुछ जातक विदेशी भूमि पर एक अथवा एक से अधिक स्थायी आवास अर्थात घर बनाने में भी सफल होते हैं। कुंडली के बारहवें घर में स्थित शुभ नीच का केतु जातक को आध्यात्म तथा परा विज्ञान से संबंधित क्षेत्रों में रूचि तथा विकास भी प्रदान कर सकता है और इस प्रकार के कुछ जातक ऐसे ही किसी क्षेत्र में विकसित होकर इसे अपना व्यवसायिक क्षेत्र भी बना सकते हैं जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातक ज्योतिषी, वास्तु शास्त्री, अंक शास्त्री, हस्त रेखा विशेषज्ञ आदि भी बन सकते हैं। वहीं दूसरी ओर, कुंडली के बारहवें घर में स्थित नीच का केतु अशुभ होने की स्थिति में जातक को आर्थिक समस्याओं से पीड़ित कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के अनेक जातक अपने जीवन में अधिकतर समय पर्याप्त मात्रा में धन नहीं कमा पाते तथा इन जातकों को समय समय पर धन की कमी का सामना करना पड़ सकता है। कुंडली के बारहवें घर में स्थित अशुभ नीच का केतु जातक के वैवाहिक जीवन को तहस नहस कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के अशुभ प्रभाव में आने वाले जातकों के सामान्यतया अपनी पत्नियों के साथ गंभीर वैचारिक मतभेद रहते हैं तथा इनमें से कुछ जातकों को विभिन्न कारणों के चलते अपने पत्नियों से लंबे समय के लिए दूर भी रहना पड़ सकता है और इस प्रकार के कुछ अन्य जातकों का विवाह टूट भी सकता है। कुंडली के छठे घर में स्थित अशुभ नीच का केतु कुंडली में महापदम काल सर्प योग का निर्माण भी कर सकता है जिसके अशुभ प्रभाव में आने वाले जातकों के जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में अनेक प्रकार की समस्याएं पैदा हो सकतीं है। महापदम कालसर्प दोष और इसके दुष्प्रभावों के बारे में जानने के लिए महापदम कालसर्प योग लेख पढ़ें।

               इस प्रकार कुंडली के प्रत्येक घर में स्थित नीच का केतु कुंडली में शुभ होने की स्थिति में जातक को शुभ फल तथा अशुभ होने की स्थिति में जातक को अशुभ फल प्रदान कर सकता है। इसलिए किसी कुंडली के किसी घर में केवल नीच के केतु के स्थित होने से ही यह निर्णय नहीं ले लेना चाहिए कि ऐसा नीच का केतु जातक को सदा अशुभ फल ही देगा तथा कुंडली में ऐसे नीच के केतु के फलों का निर्णय करने से पूर्व कुंडली में केतु के शुभ अथवा अशुभ स्वभाव का भली भांति निरीक्षण कर लेना चाहिए तथा तत्पश्चात ही कुंडली में उपस्थित नीच के केतु के शुभ अथवा अशुभ फलों का निर्णय करना चाहिए।

लेखक
हिमांशु शंगारी

नीच का केतु 01

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संबंधित लेख : नीच का केतु 02 , कुंडली में नीच के ग्रह

वैदिक ज्योतिष के अनुसार वृष राशि में स्थित होने पर केतु को नीच का केतु कहा जाता है जिसका साधारण शब्दों में अर्थ यह होता है कि वृष राशि में स्थित होने पर केतु अन्य सभी राशियों की तुलना में सबसे बलहीन हो जाते हैं। कुछ वैदिक ज्योतिषी यह मानते हैं कि कुंडली में नीच का केतु सदा अशुभ फलदायी होता है जो सत्य नहीं है क्योंकि कुंडली में केतु का नीच होना केवल उसके बल को दर्शाता है तथा उसके शुभ या अशुभ स्वभाव को नहीं जिसके चलते किसी कुंडली में नीच का केतु शुभ अथवा अशुभ दोनों प्रकार के फल ही प्रदान कर सकता है जिसका निर्णय उस कुंडली में केतु के शुभ अशुभ स्वभाव को देखकर ही लिया जा सकता है। आज के इस लेख में हम कुंडली के विभिन्न 12 घरों में स्थित होने पर नीच के केतु द्वारा प्रदान किये जाने वाले कुछ संभावित शुभ तथा अशुभ फलों के बारे में विचार करेंगे।

कुंडली के पहले घर में नीच का केतु : किसी कुंडली के पहले घर अर्थात लग्न में स्थित नीच का केतु शुभ होने की स्थिति में जातक को उसके जीवन के अनेक क्षेत्रों से संबंधित शुभ फल प्रदान कर सकता है तथा इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले जातक सामान्यतया व्यवसायिक रूप से सफल देखे जाते हैं। इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले अधिकतर जातक अपने व्यवसायिक क्षेत्रों में अपने प्रयासों तथा विशेषताओं के कारण ही सफलता प्राप्त करते हैं। कुंडली के पहले घर में स्थित शुभ नीच का केतु जातक को किसी सरकारी विभाग में प्रतिष्ठा तथा प्रभुत्व का पद भी दिलवा सकता है तथा इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले कुछ जातक आध्यात्मिक क्षेत्रों में विकास प्राप्त करके इनमें से किसी क्षेत्र में कार्यरत भी हो सकते हैं। वहीं दूसरी ओर, कुंडली के पहले घर में स्थित नीच का केतु अशुभ होने की स्थिति में जातक के व्यवसायिक क्षेत्र पर बुरा प्रभाव डाल सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातकों का व्यवसाय देर से अथवा बहुत देर से ही स्थापित हो पाता है तथा इनमें से कुछ जातकों को अपने जीवन में समय समय पर व्यवसाहीन भी रहना पड़ सकता है। कुंडली के पहले घर में स्थित अशुभ नीच का केतु जातक के वैवाहिक जीवन में अनेक प्रकार की समस्याएं पैदा कर सकता है तथा इस प्रकार के अशुभ केतु के प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों को गंभीर शारीरिक अथवा मानसिक रोग भी लग सकते हैं। कुंडली के पहले घर में स्थित अशुभ नीच का केतु कुंडली में तक्षक काल सर्प योग का निर्माण भी कर सकता है जिसके अशुभ प्रभाव में आने वाले जातकों के जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में अनेक प्रकार की समस्याएं पैदा हो सकतीं है। तक्षक कालसर्प दोष और इसके दुष्प्रभावों के बारे में जानने के लिए तक्षक कालसर्प योग लेख पढ़ें।

कुंडली के दूसरे घर में नीच का केतु : किसी कुंडली के दूसरे घर में स्थित नीच का केतु शुभ होने की स्थिति में जातक को धन, संपत्ति तथा आर्थिक समृद्धि प्रदान कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले कुछ जातक धनी अथवा बहुत धनी हो सकते हैं तथा ऐसे जातक सामान्यतया अपने प्रयास और मित्रों के सहयोग से धन कमाते हैं। कुंडली के दूसरे घर में स्थित शुभ नीच का केतु जातक को पराक्रम, शौर्य तथा युद्ध कौशल भी प्रदान कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातक पुलिस अधिकारी, सैन्य अधिकारी अथवा रक्षा विभाग से जुड़े कोई अन्य अधिकारी बन सकते हैं।  वहीं दूसरी ओर, कुंडली के दूसरे घर में स्थित नीच का केतु अशुभ होने की स्थिति में जातक को गंभीर आर्थिक समस्याओं से पीड़ित कर सकता है जिसके कारण इस प्रकार के अशुभ प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों को अपने जीवन में समय समय पर आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ सकता है तथा अपना जीवन निर्वाह चलाने के लिए धन का ॠण भी लेना पड़ सकता है। कुंडली के दूसरे घर में स्थित अशुभ नीच का केतु जातक के विवा तथा वैवाहिक जीवन को विपरीत रूप से प्रभावित कर सकता है जिसके कारण जातक के विवाह और वैवाहिक जीवन में अनेक प्रकार की समस्याएं पैदा हो सकतीं है और परिणामस्वरूप इस प्रकार के कुछ जातकों का विवाह देर से अथवा बहुत देर से हो सकता है जबकि इस प्रकार के कुछ अन्य जातकों के एक अथवा एक से अधिक विवाह टूट सकते हैं। कुंडली के दूसरे घर में स्थित अशुभ नीच का केतु कुंडली में कारकोटक काल सर्प योग का निर्माण भी कर सकता है जिसके अशुभ प्रभाव में आने वाले जातकों के जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में अनेक प्रकार की समस्याएं पैदा हो सकतीं है। कारकोटक कालसर्प दोष और इसके दुष्प्रभावों के बारे में जानने के लिए कारकोटक कालसर्प योग लेख पढ़ें।

कुंडली के तीसरे घर में नीच का केतु : किसी कुंडली के तीसरे घर में स्थित नीच का केतु शुभ होने की स्थिति में जातक को व्यवसायिक सफलता के लिए आवश्यक विशेषताएं प्रदान कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले अनेक जातक विभिन्न प्रकार के व्यवसायिक क्षेत्रों में सफलता प्राप्त कर सकते हैं। कुंडली के तीसरे घर में स्थित शुभ नीच का केतु जातक को पराक्रम, शौर्य तथा युद्ध कौशल भी प्रदान कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातक पुलिस अधिकारी, सैन्य अधिकारी अथवा रक्षा विभाग से जुड़े कोई अन्य अधिकारी बन सकते हैं तथा इनमें से कुछ जातक अपने समय के जाने माने अपराध विशेषज्ञ, योद्धा अथवा युद्ध विशेषज्ञ भी बन सकते हैं। कुंडली के तीसरे घर मे स्थित शुभ नीच का केतु जातक का संबंध विदेशों के साथ भी जोड़ सकता है। वही दूसरी ओर, कुंडली के तीसरे घर में स्थित नीच का केतु अशुभ होने की स्थिति में जातक के व्यवसायिक क्षेत्र पर दुष्प्रभाव डाल सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातकों को अपने व्यवसाय के माध्यम से असफलता तथा धन हानि का सामना करना पड़ सकता है तथा इनमें से कुछ जातकों को जीवन में अनेक बार अपना व्यवसाय बदलना भी पड़ सकता है। कुंडली के तीसरे घर में स्थित अशुभ नीच का केतु जातक के वैवाहिक जीवन को भी विपरीत रुप से प्रभावित कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के अशुभ प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों का विवाह देर से हो सकता है जबकि इस प्रकार के कुछ अन्य जातकों के गंभीर समस्याओं के चलते एक अथवा एक से अधिक विवाह टूट सकते हैं। कुंडली के तीसरे घर में स्थित अशुभ नीच का केतु कुंडली में शंखचूड़ काल सर्प योग का निर्माण भी कर सकता है जिसके अशुभ प्रभाव में आने वाले जातकों के जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में अनेक प्रकार की समस्याएं पैदा हो सकतीं है। शंखचूड़ कालसर्प दोष और इसके दुष्प्रभावों के बारे में जानने के लिए शंखचूड़ कालसर्प योग लेख पढ़ें।

कुंडली के चौथे घर में नीच का केतु : किसी कुंडली के चौथे घर में स्थित नीच का केतु शुभ होने की स्थिति में जातक को आध्यात्मिक विकास भी प्रदान कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातक आध्यात्म तथा परा विज्ञान से संबंधित क्षेत्रों में रुचि रखने वाले तथा इन क्षेत्रों में शोध करने वाले होते हैं तथा इनमें से कुछ जातक ऐसे ही किसी क्षेत्र को स्थायी रूप से अपना व्यवसायिक क्षेत्र भी बना सकते हैं जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातक ज्योतिषी, अंक शास्त्री, वास्तु शास्त्री, फेंग शुई विशेषज्ञ, हस्त रेखा विशेषज्ञ, जादूगर, तांत्रिक, मांत्रिक, जादू टोना करने वाले, काला जादू करने वाले, आत्माओं के साथ संपर्क स्थापित करने वाले माध्यम आदि भी बन सकते हैं। कुंडली के चौथे घर में स्थित शुभ नीच का केतु जातक के व्यवसायिक क्षेत्र पर भी सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है जिसके चलते इस प्रकार के अनेक जातक व्यवसायिक रूप से सफल और स्थिर रहते हैं और इस प्रकार के जातकों को सामान्यतया कठिन शारीरिक श्रम वाला काम नहीं करना पड़ता। वहीं दूसरी ओर, कुंडली के चौथे घर में स्थित नीच का केतु अशुभ होने की स्थिति में जातक के विवाह तथा वैवाहिक जीवन पर दुष्प्रभाव डाल सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातकों के वैवाहिक जीवन में अनेक प्रकार की समस्याएं आ सकतीं हैं तथा इस प्रकार के कुछ जातकों को अपने वैवाहिक जीवन में शारीरिक हिंसा का सामना भी करना पड़ सकता है। कुंडली के चौथे घर में स्थित अशुभ नीच का केतु जातक के व्यवसाय को भी विपरीत रूप से प्रभावित कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातकों का व्यवसाय स्थिर नहीं रह पाता तथा इन जातकों को जीवन में बार बार अपना व्यवसाय बदलना पड़ सकता है। कुंडली के चौथे घर में स्थित अशुभ नीच का केतु जातक को दुर्घटनाओं तथा रोगों के माध्यम से भी कष्ट दे सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातक विभिन्न प्रकार के रोगों से पीड़ित हो सकते हैं जबकि इस प्रकार के कुछ अन्य जातकों को किसी दुर्घटना के माध्यम से भारी शारीरिक क्षति उठानी पड़ सकती है। कुंडली के चौथे घर में स्थित अशुभ नीच का केतु कुंडली में घातक काल सर्प योग का निर्माण भी कर सकता है जिसके अशुभ प्रभाव में आने वाले जातकों के जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में अनेक प्रकार की समस्याएं पैदा हो सकतीं है। घातक कालसर्प दोष और इसके दुष्प्रभावों के बारे में जानने के लिए घातक कालसर्प योग लेख पढ़ें।

कुंडली के पांचवें घर में नीच का केतु : किसी कुंडली के पांचवें घर में स्थित नीच का केतु शुभ होने की स्थिति में जातक को शिक्षा से संबंधित शुभ परिणाम दे सकता है जिसके चलते इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले अनेक जातक अच्छी अथवा बहुत अच्छी शिक्षा प्राप्त कर पाते हैं तथा इनमें से कुछ जातक उच्च शिक्षा प्राप्त करके अपनी शिक्षा के आधार पर व्यवसायिक सफलता तथा धन की प्राप्ति भी कर सकते हैं। कुंडली के पांचवें घर में स्थित शुभ नीच का केतु जातक को आर्थिक समृद्धि तथा सुखी पारीवारिक जीवन भी प्रदान कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के जातक सामान्यतया आर्थिक रूप से समृद्ध और पारीवारिक रूप से सुखी रहते हैं। वहीं दूसरी ओर, कुंडली के पांचवें घर में स्थित नीच का केतु अशुभ होने की स्थिति में जातक के आर्थिक पक्ष को विपरीत रूप से प्रभावित कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातकों को अपने जीवन में समय समय पर धन की कमी का सामना करना पड़ सकता है तथा इनमें से कुछ जातकों को अपनी शिक्षा और योग्यता की तुलना में कम अथवा बहुत कम धन प्रदान करने वाले किसी व्यवसाय को करना पड़ सकता है। कुंडली के पांचवें घर में स्थित अशुभ नीच का केतु जातक को संतान जन्म से संबंधित समस्याएं भी दे सकता है जिसके चलते इस प्रकार के अशुभ प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों को संतान का सुख देर से अथवा बहुत देर से प्राप्त हो सकता है। कुंडली के पांचवें घर में स्थित अशुभ नीच का केतु कुंडली में विषधर काल सर्प योग का निर्माण भी कर सकता है जिसके अशुभ प्रभाव में आने वाले जातकों के जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में अनेक प्रकार की समस्याएं पैदा हो सकतीं है। विषधर कालसर्प दोष और इसके दुष्प्रभावों के बारे में जानने के लिए विषधर कालसर्प योग लेख पढ़ें।

कुंडली के छठे घर में नीच का केतु : किसी कुंडली के छठे घर में स्थित नीच का केतु शुभ होने की स्थिति में जातक को व्यवसायिक सफलता प्रदान कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले जातक अनेक प्रकार के व्यवसायिक क्षेत्रों में सफलता प्राप्त कर सकते हैं तथा इनमें से कुछ जातक पुलिस अधिकारी, सैन्य अधिकारी, किसी अन्य प्रकार के सुरक्षा बल में काम करने वाले जातक, चिकित्सक, वकील, जज आदि भी हो सकते हैं। कुंडली के छठे घर में स्थित शुभ नीच के केतु के प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों को जीवन में समय समय पर अपने भाई बहनों के माध्यम से, किसी न्यायालय के निर्णय के माध्यम से अथवा किसी झगड़े के माध्यम से धन लाभ प्राप्त हो सकता है। वहीं दूसरी ओर कुंडली के छठे घर में स्थित नीच का केतु अशुभ होने की स्थिति में जातक को व्यवसायिक क्षेत्र से संबंधित चिंताएं प्रदान कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातकों को अपने आप को व्यवसायिक रूप से स्थापित करने लिए बहुत संघर्ष तथा लंबी प्रतीक्षा करनी पड़ सकती है जबकि इस प्रकार के कुछ अन्य जातक विभिन्न प्रकार के अवैध कार्यों में संल्गन हो सकते हैं जिसके कारण इनमें से कुछ जातकों को मानहानि तथा कारावास का सामना करना पड़ सकता है जबकि इस प्रकार के कुछ अन्य जातकों को आपराधिक गतिविधियों में संल्गन होने के कारण किसी प्रकार की शारीरिक क्षति का सामना भी करना पड़ सकता है। कुंडली के छठे घर में स्थित अशुभ नीच का केतु जातक को विभिन्न प्रकार के रोगों से पीड़ित भी कर सकता है तथा इस प्रकार के अशुभ प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों को लंबे समय तक चलने वाले अथवा स्थायी, बहुत कष्ट देने वाले तथा प्राण घातक रोग भी लग सकते हैं। कुंडली के छठे घर में स्थित अशुभ नीच का केतु कुंडली में शेषनाग काल सर्प योग का निर्माण भी कर सकता है जिसके अशुभ प्रभाव में आने वाले जातकों के जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में अनेक प्रकार की समस्याएं पैदा हो सकतीं है। शेषनाग कालसर्प दोष और इसके दुष्प्रभावों के बारे में जानने के लिए शेषनाग कालसर्प योग लेख पढ़ें।

लेखक
हिमांशु शंगारी

नीच का राहु 02

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संबंधित लेख : नीच का राहु 01 , कुंडली में नीच के ग्रह

पिछले लेख में हमने नीच के राहु के कुंडली के पहले घर से लेकर कुंडली के छठे घर तक स्थित होने से जातक को मिलने वाले संभावित शुभ अशुभ फलों के बारे में चर्चा की थी तथा इस लेख में हम नीच के राहु के कुंडली के सातवें घर से लेकर कुंडली के बारहवें घर तक स्थित होने से जातक को मिलने वाले संभावित शुभ अशुभ फलों के बारे में चर्चा करेंगे।

कुंडली के सातवें घर में नीच का राहु : किसी कुंडली के सातवें घर में स्थित नीच का राहु शुभ होने की स्थिति में जातक के वैवाहिक जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है जिसके चलते इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले जातकों का वैवाहिक जीवन सामान्यतया सुखी रहता है तथा इस प्रकार के कुछ जातकों का आर्थिक स्तर और व्यवसायिक सफलता भी विवाह के पश्चात बढ़ जाती है। कुंडली के सातवें घर में स्थित शुभ नीच राहु के प्रभाव में आने वाले कुछ जातक विवाह के आधार पर विदेशों में भी जाकर बस सकते हैं तथा इनमें से कुछ जातकों का विवाह किसी विदेशी पुरुष या महिला के साथ भी हो सकता है। कुंडली में इस प्रकार के शुभ नीच राहु का प्रभाव जातक को व्यवसायिक सफलता भी प्रदान कर सकता है। वहीं दूसरी ओर, कुंडली के सातवें घर में स्थित नीच का राहु अशुभ होने की स्थिति में जातक के विवाह तथा वैवाहिक जीवन में अनेक प्रकार की समस्याएं पैदा कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातकों का विवाह देर से हो सकता है जबकि इस प्रकार के कुछ अन्य जातकों को विभिन्न कारणों के चलते अपनी पत्नियों से लंबे समय के लिए दूर रहना पड़ सकता है। कुंडली के सातवें घर में स्थित अशुभ नीच के राहु के प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों को व्यवसाय के माध्यम से धन हानि का सामना करना पड़ सकता है तथा इनमें से कुछ जातकों को अपने व्यवसायिक क्षेत्र से जुड़े किसी प्रकरण के कारण अपयश तथा मानहानि का सामना भी करना पड़ सकता है। कुंडली के सातवें घर में स्थित अशुभ नीच का राहु कुंडली में तक्षक काल सर्प योग का निर्माण भी कर सकता है जिसके अशुभ प्रभाव में आने वाले जातकों के जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में अनेक प्रकार की समस्याएं पैदा हो सकतीं है। तक्षक कालसर्प दोष और इसके दुष्प्रभावों के बारे में जानने के लिए तक्षक कालसर्प योग लेख पढ़ें।

कुंडली के आठवें घर में नीच का राहु : किसी कुंडली के आठवें घर में स्थित नीच का राहु शुभ होने की स्थिति में जातक को व्यवसायिक सफलता तथा आर्थिक लाभ प्रदान कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले जातक विभिन्न प्रकार के व्यवसायिक क्षेत्रों में सफलता प्राप्त कर सकते हैं तथा ऐसे जातक अपने व्यवसाय के माध्यम से निरंतर धन लाभ प्राप्त करते रहते हैं। कुंडली के आठवें घर में स्थित शुभ नीच राहु का प्रभाव जातक को आध्यात्मिक विकास भी प्रदान कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातक आध्यात्म तथा परा विज्ञान से संबंधित क्षेत्रों में रुचि रखने वाले तथा इन क्षेत्रों में शोध करने वाले होते हैं तथा इनमें से कुछ जातक ऐसे ही किसी क्षेत्र को स्थायी रूप से अपना व्यवसायिक क्षेत्र भी बना सकते हैं जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातक ज्योतिषी, अंक शास्त्री, वास्तु शास्त्री, फेंग शुई विशेषज्ञ, हस्त रेखा विशेषज्ञ, जादूगर, तांत्रिक, मांत्रिक, जादू टोना करने वाले, काला जादू करने वाले, आत्माओं के साथ संपर्क स्थापित करने वाले माध्यम आदि भी बन सकते हैं। वहीं दूसरी ओर, कुंडली के आठवें घर में स्थित नीच का राहु अशुभ होने की स्थिति में जातक के विवाह तथा वैवाहिक जीवन पर बुरा प्रभाव डाल सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातकों का विवाह देर से अथवा बहुत देर से हो सकता है जबकि इस प्रकार के कुछ अन्य जातकों के वैवाहिक जीवन में गंभीर समस्याएं पैदा हो सकतीं हैं जिनके चलते ऐसे जातकों के एक अथवा एक से अधिक विवाह टूट भी सकते हैं तथा इनमें से कुछ जातकों की पत्नियों की मृत्यु भी हो सकती है। कुंडली के आठवें घर में अशुभ नीच का राहु जातक को किसी गंभीर रोग अथवा रोगों से पीड़ित भी कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातकों को लंबे समय तक चलने वाला कोई रोग हो सकता है जो इन जातकों को समय समय पर बहुत कष्ट देता रहता है तथा कुछ स्थितियों में ऐसे किसी रोग के कारण जातक की अपेक्षाकृत कम आयु में मृत्यु भी हो सकती है। कुंडली के आठवें घर में स्थित अशुभ नीच का राहु कुंडली में कारकोटक काल सर्प योग का निर्माण भी कर सकता है जिसके अशुभ प्रभाव में आने वाले जातकों के जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में अनेक प्रकार की समस्याएं पैदा हो सकतीं है। कारकोटक कालसर्प दोष और इसके दुष्प्रभावों के बारे में जानने के लिए कारकोटक कालसर्प योग लेख पढ़ें।

कुंडली के नौवें घर में नीच का राहु : किसी कुंडली के नौवें घर में स्थित नीच का राहु शुभ होने की स्थिति में जातक के व्यवसाय पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है जिसके चलते इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले जातक विभिन्न प्रकार के व्यवसायिक क्षेत्रों के माध्यम से सफलता प्राप्त कर सकते हैं। कुंडली के नौवें घर में स्थित शुभ नीच का राहु जातक को आध्यात्म तथा परा विज्ञान के क्षेत्रों में विकसित भी कर सकता है और इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों को किसी आध्यात्मिक अथवा धार्मिक संस्था में लाभ, प्रतिष्ठा और प्रभुत्व का कोई पद भी प्राप्त हो सकता है। कुंडली के इस घर में स्थित शुभ नीच का राहु जातक को व्यवसाय के आधार पर स्थायी रूप से विदेश में भी स्थापित कर सकता है। वहीं दूसरी ओर, कुंडली के नौवें घर में स्थित नीच का राहु अशुभ होने की स्थिति में जातक के व्यवसायिक क्षेत्र में गंभीर समस्याएं पैदा कर सकता है तथा ये समस्यायें उस स्थिति में और भी गंभीर हो सकतीं हैं जब कुंडली के नौवें घर में स्थिति ऐसा अशुभ नीच का राहु कुंडली में पितृ दोष बनाता हो। इस प्रकार के पितृ दोष के प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों को लंबे समय के लिए व्यवसायहीन रहना पड़ सकता है तथा इस प्रकार के कुछ जातकों को अपने आप को व्यवसायिक रूप से स्थापित करने के लिए बहुत लंबी प्रतीक्षा करनी पड़ सकती है। कुंडली के नौवें घर में स्थित अशुभ नीच के राहु के प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों को अपने व्यवसाय के माध्यम से धन हानि का सामना करना पड़ सकता है जबकि इस प्रकार के कुछ अन्य जातकों को किसी गंभीर आरोप के चलते अपयश और मानहानि का सामना करना पड़ सकता है तथा व्यवसाय से हाथ भी धोना पड़ सकता है। कुंडली के नौवें घर में स्थित अशुभ नीच का राहु कुंडली में शंखचूड़ काल सर्प योग का निर्माण भी कर सकता है जिसके अशुभ प्रभाव में आने वाले जातकों के जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में अनेक प्रकार की समस्याएं पैदा हो सकतीं है। शंखचूड़ कालसर्प दोष और इसके दुष्प्रभावों के बारे में जानने के लिए शंखचूड़ कालसर्प योग लेख पढ़ें।

कुंडली के दसवें घर में नीच का राहु : किसी कुंडली के दसवें घर में स्थित नीच का राहु शुभ होने की स्थिति में जातक के व्यवसाय को सकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातक विभिन्न प्रकार के व्यवसायिक क्षेत्रों में कार्यरत होकर इनमें सफलता प्राप्त करते हैं तथा इनमें से कुछ जातक अपने व्यवसाय के माध्यम से धन के साथ साथ प्रतिष्ठा, प्रभुत्व तथा प्रसिद्धि भी अर्जित कर सकते हैं। इस प्रकार के शुभ नीच राहु के प्रभाव में आने वाले कुछ जातक पुलिस अधिकारी, सैन्य अधिकारी, वकील, जज, इंजीनियर, बैंक अधिकारी, कंप्यूटर प्रोग्रामर आदि भी बन सकते हैं। कुंडली के दसवें घर में स्थित शुभ नीच का राहु जातक को किसी सरकारी विभाग में लाभ, प्रभुत्व तथा प्रतिष्ठा का कोई पद भी प्रदान कर सकता है तथा इस प्रकार के कुछ जातक सरकार में मंत्री पद भी प्राप्त कर सकते हैं। वहीं दूसरी ओर, कुंडली के दसवें घर में स्थित नीच के राहु के अशुभ होने की स्थिति में जातक के व्यवसायिक क्षेत्र को बुरी प्रकार से प्रभावित कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के अशुभ प्रभाव में आने वाले जातकों को अपने व्यवसायिक क्षेत्रों में समस्याओं, रुकावटों, बाधाओं, असफलताओं आदि का सामना करन पड़ सकता है। इस प्रकार के अशुभ नीच राहु के प्रबल प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों को व्यवसाय के माध्यम से धन हानि का सामना करना पड़ सकता है जबकि इस प्रकार के कुछ अन्य जातकों को अपने जीवन में लंबे समय तक व्यवसायहीन रहना पड़ सकता है। कुंडली के दसवें घर में स्थित अशुभ नीच का राहु जातक आपरधिक प्रवृति भी प्रदान कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के अशुभ प्रभाव में आने वाले कुछ जातक विभिन्न प्रकार के अवैध कार्यों में संल्गन हो सकते हैं तथा इनमें से कुछ जातक कुख्यात अपराधी भी बन सकते हैं। कुंडली के दसवें घर में स्थित अशुभ नीच का राहु कुंडली में घातक काल सर्प योग का निर्माण भी कर सकता है जिसके अशुभ प्रभाव में आने वाले जातकों के जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में अनेक प्रकार की समस्याएं पैदा हो सकतीं है। घातक कालसर्प दोष और इसके दुष्प्रभावों के बारे में जानने के लिए घातक कालसर्प योग लेख पढ़ें।

कुंडली के ग्यारहवें घर में नीच का राहु : किसी कुंडली के ग्यारहवें घर में स्थित नीच का राहु शुभ होने की स्थिति में जातक को धन तथा व्यवसायिक सफलता के साथ अन्य अनेक प्रकार के शुभ फल प्रदान कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले जातक विभिन्न प्रकार के व्यवसायिक क्षेत्रों में सफलता प्राप्त करते हैं तथा इस सफलता के साथ साथ यश, प्रतिष्ठा तथा प्रसिद्धि भी अर्जित कर सकते हैं। कुंडली में इस प्रकार के शुभ नीच राहु के प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों को व्यवसाय के अतिरिक्त अन्य माध्यमों से भी धन की प्राप्ति हो सकती है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातक लाटरी, शेयर बाजार आदि के माध्यम से भी धन लाभ प्राप्त कर सकते हैं। वहीं दूसरी ओर, कुंडली के ग्यारहवें घर में स्थित नीच का राहु अशुभ होने की स्थिति में जातक की आर्थिक स्थिति को विपरीत रूप से प्रभावित कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातकों को समय समय पर व्यवसाय में हानि तथा अवांछित खर्चों के कारण धन की तंगी का सामना करना पड़ सकता है। कुंडली के ग्यारहवें घर में स्थित अशुभ नीच का राहु जातक के वैवाहिक जीवन में भी समस्याएं पैदा कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातकों का वैवाहिक जीवन दुखी अथवा बहुत दुखी रह सकता है तथा इनमें से कुछ जातकों का विवाह टूट भी सकता है। इस प्रकार के कुछ जातकों की पत्नियां इन जातकों के साथ छल कर सकतीं हैं तथा किसी अन्य वयक्ति के साथ शारीरिक संबंध स्थापित कर सकतीं हैं जिसका भेद खुल जाने पर जातक को मानसिक पीड़ा तथा सामाजिक बदनामी का सामना भी करना पड़ सकता है। कुंडली के ग्यारहवें घर में स्थित अशुभ नीच का राहु कुंडली में विषधर काल सर्प योग का निर्माण भी कर सकता है जिसके अशुभ प्रभाव में आने वाले जातकों के जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में अनेक प्रकार की समस्याएं पैदा हो सकतीं है। विषधर कालसर्प दोष और इसके दुष्प्रभावों के बारे में जानने के लिए विषधर कालसर्प योग लेख पढ़ें।

कुंडली के बारहवें घर में नीच का राहु : किसी कुंडली के बारहवें घर में स्थित नीच का राहु शुभ होने की स्थिति में जातक का संबंध विदेश के साथ स्थापित कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले कुछ जातक अपने व्यवसाय के आधार पर स्थायी रूप से विदेशों में बस जाते हैं जबकि इस प्रकार के कुछ अन्य जातक लंबे समय तक विदेशों में रहते हैं। कुंडली के बारहवें घर मे शुभ नीच राहु का प्रभाव जातक को आध्यात्मिक विकास भी प्रदान कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातक आध्यात्म तथा परा विज्ञान से संबंधित क्षेत्रों में रुचि रखने वाले तथा इन क्षेत्रों में शोध करने वाले होते हैं तथा इनमें से कुछ जातक ऐसे ही किसी क्षेत्र को स्थायी रूप से अपना व्यवसायिक क्षेत्र भी बना सकते हैं। वहीं दूसरी ओर, कुंडली के बारहवें घर में स्थित नीच का राहु अशुभ होने की स्थिति में जातक के विवाह तथा वैवाहिक जीवन पर बुरा प्रभाव डाल सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातकों का विवाह देर से अथवा बहुत देर से हो सकता है जबकि इस प्रकार के कुछ अन्य जातकों के वैवाहिक जीवन में गंभीर समस्याएं आ सकतीं हैं जिनके कारण कई बार ऐसे कुछ जातकों का विवाह टूट भी सकता है। कुंडली के बारहवें घर में स्थित अशुभ नीच का राहु जातक को आर्थिक समस्याओं से भी पीड़ित कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातकों को अपने जीवन में समय समय पर धन की कमी का सामना करना पड़ सकता है तथा इनमें से कुछ जातकों को गंभीर आर्थिक समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है। कुंडली के बारहवें घर में स्थित अशुभ नीच का राहु कुंडली में शेषनाग काल सर्प योग का निर्माण भी कर सकता है जिसके अशुभ प्रभाव में आने वाले जातकों के जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में अनेक प्रकार की समस्याएं पैदा हो सकतीं है। शेषनाग कालसर्प दोष और इसके दुष्प्रभावों के बारे में जानने के लिए शेषनाग कालसर्प योग लेख पढ़ें।

                इस प्रकार कुंडली के प्रत्येक घर में स्थित नीच का राहु कुंडली में शुभ होने की स्थिति में जातक को शुभ फल तथा अशुभ होने की स्थिति में जातक को अशुभ फल प्रदान कर सकता है। इसलिए किसी कुंडली के किसी घर में केवल नीच के राहु के स्थित होने से ही यह निर्णय नहीं ले लेना चाहिए कि ऐसा नीच का राहु जातक को सदा अशुभ फल ही देगा तथा कुंडली में ऐसे नीच के राहु के फलों का निर्णय करने से पूर्व कुंडली में राहु के शुभ अथवा अशुभ स्वभाव का भली भांति निरीक्षण कर लेना चाहिए तथा तत्पश्चात ही कुंडली में उपस्थित नीच के राहु के शुभ अथवा अशुभ फलों का निर्णय करना चाहिए।

लेखक
हिमांशु शंगारी

नीच का राहु 01

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वैदिक ज्योतिष के अनुसार वृश्चिक राशि में स्थित होने पर राहु को नीच का राहु कहा जाता है जिसका साधारण शब्दों में अर्थ यह होता है कि वृश्चिक राशि में स्थित होने पर राहु अन्य सभी राशियों की तुलना में सबसे बलहीन हो जाते हैं। कुछ वैदिक ज्योतिषी यह मानते हैं कि कुंडली में नीच का राहु सदा अशुभ फलदायी होता है जो सत्य नहीं है क्योंकि कुंडली में राहु का नीच होना केवल उसके बल को दर्शाता है तथा उसके शुभ या अशुभ स्वभाव को नहीं जिसके चलते किसी कुंडली में नीच का राहु शुभ अथवा अशुभ दोनों प्रकार के फल ही प्रदान कर सकता है जिसका निर्णय उस कुंडली में राहु के शुभ अशुभ स्वभाव को देखकर ही लिया जा सकता है। आज के इस लेख में हम कुंडली के विभिन्न 12 घरों में स्थित होने पर नीच के राहु द्वारा प्रदान किये जाने वाले कुछ संभावित शुभ तथा अशुभ फलों के बारे में विचार करेंगे।

कुंडली के पहले घर में नीच का राहु : किसी कुंडली के पहले घर में स्थित नीच का राहु शुभ होने की स्थिति में जातक को बुद्धिमता, चतुराई, विशलेषण करने की क्षमता, वाक कुशलता, शीघ्रता से निर्णय लेने की क्षमता तथा ऐसी अन्य कई विशेषताएं प्रदान कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले कुछ जातक समाज में अपना विशेष योगदान प्रदान करते हैं तथा समाज में अपना विशेष स्थान और प्रतिष्ठा प्राप्त करने में सफल होते हैं। इस प्रकार के जातकों को किसी न किसी प्रकार की खोज, अनुसंधान आदि करते रहने की प्रवृति होती है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातक वैज्ञानिक, अनुसंधानकर्ता, अन्वेषक, ज्योतिषी, खोजकर्ता आदि भी बन सकते हैं। कुंडली के पहले घर अर्थात लग्न में स्थित शुभ नीच का राहु जातक को विदेशों में भी ले जा सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातक विदेश में जाकर ही स्थायी रूप से वहीं बस सकते हैं। वहीं दूसरी ओर, कुंडली के पहले घर में स्थित नीच का राहु अशुभ होने की स्थिति में जातक को किसी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या या रोग से पीड़ित कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के अशुभ प्रभाव में आने वाले कुछ जातक विभिन्न प्रकार के रोगों से पीड़ित हो सकते हैं। कुंडली के पहले घर में स्थित अशुभ नीच का राहु जातक के भीतर अवैध तथा अनैतिक कार्यों के प्रति आकर्षण भी पैदा कर सकता है जिसके कारण इस प्रकार के कुछ जातक अपराधी भी बन सकते हैं। कुंडली के पहले घर में स्थित अशुभ नीच का राहु कुंडली में अनंत काल सर्प योग का निर्माण भी कर सकता है जिसके अशुभ प्रभाव में आने वाले जातकों के जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में अनेक प्रकार की समस्याएं पैदा हो सकतीं है। अनंत कालसर्प दोष और इसके दुष्प्रभावों के बारे में जानने के लिए अनंत कालसर्प योग लेख पढ़ें।

कुंडली के दूसरे घर में नीच का राहु : किसी कुंडली के दूसरे घर में स्थित नीच का राहु शुभ होने की स्थिति में जातक को आर्थिक लाभ प्रदान कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले जातकों की आर्थिक स्थिति अच्छी रहती है तथा इनमें से कुछ जातक विभिन्न प्रकार के व्यवसायिक क्षेत्रों के माध्यम से बहुत धन कमा सकते हैं। इस प्रकार के कुछ जातकों को अपने जीवन में अनेक बार अप्रत्याशित रूप से ही धन की प्राप्ति हो सकती है। कुंडली के दूसरे घर में स्थित शुभ नीच का राहु जातक को आध्यात्म तथा परा विज्ञान के क्षेत्रों में रूचि एवं विकास प्रदान कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातक विभिन्न प्रकार के आध्यात्मिक तथा परा वैज्ञानिक क्षेत्रों में उपलब्धियां प्राप्त कर सकते हैं तथा इनमें से कुछ जातक ऐसे ही किसी क्षेत्र को अपना व्यवसायिक क्षेत्र भी बना सकते हैं। वहीं दूसरी ओर, कुंडली के दूसरे घर में स्थित नीच का राहु अशुभ होने की स्थिति में जातक के वैवाहिक जीवन पर दुष्प्रभाव डाल सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातकों का वैवाहिक जीवन सामान्य नहीं रह पाता तथा इन जातकों को अपने वैवाहिक जीवन में अनेक प्रकार की समस्याओं तथा कष्टों का सामना करना पड़ सकता है तथा इनमें से कुछ जातकों का विवाह टूट भी सकता है। इस प्रकार के अशुभ प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों को मादक पदार्थों के सेवन की लत भी लग सकती है जिसके चलते ऐसे जातकों को स्वास्थ्य, धन तथा मान हानि का सामना करना पड़ सकता है। कुंडली के दूसरे घर में स्थित अशुभ नीच का राहु जातक की आर्थिक स्थिति को भी बलहीन बना सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातकों को अपने जीवन में समय समय पर धन की कमी का सामना करना पड़ सकता है। इस प्रकार के अशुभ नीच राहु का प्रभाव जातक को संतान के जन्म से संबंधित समस्याओं से भी पीड़ित कर सकता है। कुंडली के दूसरे घर में स्थित अशुभ नीच का राहु कुंडली में कुलिक काल सर्प योग का निर्माण भी कर सकता है जिसके अशुभ प्रभाव में आने वाले जातकों के जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में अनेक प्रकार की समस्याएं पैदा हो सकतीं है। कुलिक कालसर्प दोष और इसके दुष्प्रभावों के बारे में जानने के लिए कुलिक कालसर्प योग लेख पढ़ें।

कुंडली के तीसरे घर में नीच का राहु : किसी कुंडली के तीसरे घर में स्थित नीच का राहु शुभ होने की स्थिति में जातक को व्यवसायिक सफलता प्रदान कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले जातक विभिन्न प्रकार के व्यवसायिक क्षेत्रों में सफलता प्राप्त कर सकते हैं तथा इनमें से कुछ जातक पुलिस अधिकारी, सैन्य अधिकारी, बैंक अधिकारी तथा अन्य वित्तिय संस्थाओं में कार्यरत अधिकारी, प्रशिक्षक, पत्रकार, टैलीविजन रिपोर्टर, चिकित्सक, सुनार, रत्नों का व्यापार करने वाले, ज्योतिषी, हस्त रेखा विशेषज्ञ आदि भी बन सकते हैं। कुंडली के तीसरे घर में स्थित शुभ नीच का राहु जातक का संबंध विदेशों के साथ भी स्थापित कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातक अपने व्यवसाय के संबंध में विदेशों में जाते रहते हैं हालांकि इस प्रकार के अधिकतर जातक स्थायी रूप से विदेशों में स्थापित नहीं होते। वही दूसरी ओर, कुंडली के तीसरे घर में स्थित नीच का राहु अशुभ होने की स्थिति में जातक के व्यवसाय पर दुष्प्रभाव डाल सकता है जिसके चलते इस प्रकार के अशुभ प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों को अपने आप को व्यवसायिक रूप से स्थापित करने के लिए लंबा संघर्ष तथा लंबी प्रतीक्षा करनी पड़ सकती है जबकि इस प्रकार के कुछ अन्य जातकों को व्यवसाय के माध्यम से धन हानि और मान हानि का सामना करना पड़ सकता है। कुंडली के तीसरे घर में स्थित अशुभ नीच का राहु जातक के अपने भाई बहनों के साथ संबंध भी बिगाड़ सकता है तथा इस प्रकार के अशुभ प्रभाव में आने वाले कुछ जातक विभिन्न प्रकार की शारीरिक समस्याओं और रोगों से पीड़ित भी हो सकते हैं। कुंडली के तीसरे घर में स्थित अशुभ नीच का राहु कुंडली में वासुकी काल सर्प योग का निर्माण भी कर सकता है जिसके अशुभ प्रभाव में आने वाले जातकों के जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में अनेक प्रकार की समस्याएं पैदा हो सकतीं है। वासुकी कालसर्प दोष और इसके दुष्प्रभावों के बारे में जानने के लिए वासुकी कालसर्प योग लेख पढ़ें।

कुंडली के चौथे घर में नीच का राहु : किसी कुंडली के चौथे घर में स्थित नीच का राहु शुभ होने की स्थिति में जातक को धन, संपत्ति, सुविधाएं, ऐश्वर्य तथा वैभव प्रदान कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले अनेक जातक अपने जीवन में बहुत धन अर्जित कर पाते हैं तथा ऐसे जातकों का जीवन सुख सुविधापूर्वक व्यतीत होता है और इन्हें अच्छे आवास और अच्छे वाहनों का सुख भी प्राप्त होता है। कुंडली के चौथे घर में स्थित शुभ नीच का राहु जातक को आध्यात्मिक विकास भी प्रदान कर सकता है तथा इस प्रकार के शुभ राहु के प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों को किसी सरकारी विभाग में प्रभुत्व और प्रतिष्ठा का कोई पद भी प्राप्त हो सकता है। वहीं दूसरी ओर, कुंडली के चौथे घर में स्थित नीच का राहु अशुभ होने की स्थिति में जातक के विवाह तथा वैवाहिक जीवन पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातकों का विवाह बहुत देर से हो सकता है जबकि इस प्रकार के कुछ अन्य जातकों को विभिन्न कारणों के चलते अपनी पत्नियों से बहुत लंबे समय के लिए दूर रहना पड़ सकता है और इनमें से कुछ जातकों का विवाह लंबे अलगाव के पश्चात टूट भी सकता है। कुंडली के चौथे घर में स्थित अशुभ नीच का राहु जातक के व्यवसाय को भी विपरीत रूप से प्रभावित कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के अशुभ प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों का व्यवसाय स्थिर नहीं रह पाता तथा ऐसे जातकों को विभिन्न कारणों के चलते अपना व्यवसाय बार बार बदलना पड़ सकता है जिसके कारण ऐसे जातक व्यवसायिक रूप से अच्छी तरह स्थापित नहीं हो पाते तथा इनमें से कुछ जातकों को जीवन में समय समय पर व्यवसायहीन भी रहना पड़ सकता है। कुंडली के चौथे घर में स्थित अशुभ नीच का राहु कुंडली में शंखपाल काल सर्प योग का निर्माण भी कर सकता है जिसके अशुभ प्रभाव में आने वाले जातकों के जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में अनेक प्रकार की समस्याएं पैदा हो सकतीं है। शंखपाल कालसर्प दोष और इसके दुष्प्रभावों के बारे में जानने के लिए शंखपाल कालसर्प योग लेख पढ़ें।

कुंडली के पांचवें घर में नीच का राहु : किसी कुंडली के पांचवें घर में स्थित नीच का राहु शुभ होने की स्थिति में जातक को कलात्मक तथा रचनात्मक विशेषताएं प्रदान कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले जातक विभिन्न प्रकार के कलात्मक तथा रचनात्मक क्षेत्रों में सफलता प्राप्त कर सकते हैं। कुंडली के पांचवें घर में स्थित शुभ नीच का राहु जातक को आध्यात्म तथा परा विज्ञान के क्षेत्रों में विकास भी प्रदान कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातक ऐसे ही किसी क्षेत्र में उपलब्धियां प्राप्त करके ऐसे क्षेत्र को अपना व्यवसायिक क्षेत्र भी बना सकते हैं। इस प्रकार के कुछ जातक ज्योतिषी, वास्तु विशेषज्ञ, हस्त रेखा शास्त्री, आध्यत्मिक गुरु, अंक शास्त्री आदि भी बन सकते हैं। वहीं दूसरी ओर, कुंडली के पांचवें घर में स्थित नीच का राहु अशुभ होने की स्थिति में जातक की शिक्षा में विभिन्न प्रकार के विघ्न तथा समस्याएं उत्पन्न कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातक विभिन्न कारणों के चलते अपनी शिक्षा पूरी नहीं कर पाते जबकि इस प्रकार के कुछ अन्य जातक बहुत समस्याओं के पश्चात ही अपनी शिक्षा पूरी कर पाते हैं। इस प्रकार के कुछ जातकों को उच्च शिक्षा प्राप्त होने के पश्चात भी अनेक बार ऐसी शिक्षा इनके किसी विशेष काम नहीं आ पाती तथा ऐसे जातकों को अपनी शैक्षिक योग्यता से बिल्कुल ही भिन्न कोई व्यवसाय करना पड़ सकता है। कुंडली के पांचवें घर में स्थित अशुभ नीच का राहु जातक को संतान जन्म से संबंधित समस्याएं भी दे सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातकों को संतान का सुख देर से अथवा बहुत देर से प्राप्त हो सकता है तथा इनमें से कुछ जातकों को संतान का सुख प्राप्त करने के लिए लंबा उपचार भी करवाना पड़ सकता है। कुंडली के पांचवें घर में स्थित अशुभ नीच का राहु कुंडली में पदम काल सर्प योग का निर्माण भी कर सकता है जिसके अशुभ प्रभाव में आने वाले जातकों के जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में अनेक प्रकार की समस्याएं पैदा हो सकतीं है। पदम कालसर्प दोष और इसके दुष्प्रभावों के बारे में जानने के लिए पदम कालसर्प योग लेख पढ़ें।

कुंडली के छठे घर में नीच का राहु : किसी कुंडली के छठे घर में स्थित नीच का राहु शुभ होने की स्थिति में जातक को व्यवसायिक सफलता प्रदान कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले जातक विभिन्न प्रकार के व्यवसायिक क्षेत्रों के माध्यम से सफलता प्राप्त कर सकते हैं तथा इनमें से कुछ जातक चिकित्सक, वकील, जज, इंजीनियर, ज्योतिषी, कंप्यूटर प्रोग्रामर आदि भी बन सकते हैं। कुंडली के छठे घर में स्थित शुभ नीच का राहु जातक का संबंध विदेशों के साथ भी जोड़ सकता है जिसके चलते इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले अनेक जातक स्थायी रूप से विदेशों में ही जाकर बस जाते हैं तथा वहां जाकर धन एवं सफलता अर्जित करते हैं। वही दूसरी ओर, कुंडली के छठे घर में स्थित नीच का राहु अशुभ होने की स्थिति में जातक को विभिन्न प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं तथा रोग प्रदान कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातक किसी न किसी रोग से पीड़ित हो सकते हैं तथा इनमें से कुछ जातकों को गंभीर, कष्टप्रद, लंबे समय तक चलने वाले अथवा स्थायी रोग भी लग सकते हैं जो इन जातकों को समय समय पर बहुत कष्ट दे सकते हैं तथा इनमें से कुछ जातकों की ऐसे ही किसी रोग के कारण मृत्यु भी हो सकती है। कुंडली के छठे घर में स्थित अशुभ नीच का राहु जातक को अवैध कार्यों तथा आपराधिक गतिविधियों मे संल्गन होने के लिए भी प्रेरित कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के अशुभ प्रभाव में आने वाले कुछ जातक अपराधी बन सकते हैं तथा इनमें से कुछ जातक राष्ट्रीय अथवा अंतरराष्ट्रीय स्तर के अपराधी भी बन सकते हैं और ऐसे जातकों को लंबे समय के लिए कारावास भी जाना पड़ सकता है। कुंडली के छठे घर में स्थित अशुभ नीच का राहु कुंडली में महापदम काल सर्प योग का निर्माण भी कर सकता है जिसके अशुभ प्रभाव में आने वाले जातकों के जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में अनेक प्रकार की समस्याएं पैदा हो सकतीं है। महापदम कालसर्प दोष और इसके दुष्प्रभावों के बारे में जानने के लिए महापदम कालसर्प योग लेख पढ़ें।

लेखक
हिमांशु शंगारी

नीच का शनि 02

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पिछले लेख में हमने नीच के शनि के कुंडली के पहले घर से लेकर कुंडली के छठे घर तक स्थित होने से जातक को मिलने वाले संभावित शुभ अशुभ फलों के बारे में चर्चा की थी तथा इस लेख में हम नीच के शनि के कुंडली के सातवें घर से लेकर कुंडली के बारहवें घर तक स्थित होने से जातक को मिलने वाले संभावित शुभ अशुभ फलों के बारे में चर्चा करेंगे।

कुंडली के सातवें घर में नीच का शनि : किसी कुंडली के सातवें घर में स्थित नीच का शनि शुभ होने की स्थिति में जातक के वैवाहिक जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है जिसके चलते इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले जातकों का वैवाहिक जीवन सामान्यतया सुखी रहता है तथा इस प्रकार के कुछ जातकों का आर्थिक स्तर और व्यवसायिक सफलता भी विवाह के पश्चात बढ़ जाती है। कुंडली में इस प्रकार के शुभ नीच शनि का प्रभाव जातक को व्यवसायिक सफलता भी प्रदान कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले जातक विभिन्न प्रकार के व्यवसायिक क्षेत्रों में सफल देखे जा सकते हैं तथा इस प्रकार के कुछ जातक राजनीति के माध्यम से सरकार में प्रभुत्व तथा प्रतिष्ठा का कोई पद भी प्राप्त कर सकते हैं क्योंकि इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले अनेक जातक जन सामान्य से संपर्क बनाने में तथा उन्हें प्रभावित करने में कुशल होते हैं। वहीं दूसरी ओर, कुंडली के सातवें घर में स्थित नीच का शनि अशुभ होने की स्थिति में जातक के विवाह तथा वैवाहिक जीवन में अनेक प्रकार की समस्याएं पैदा कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातकों का विवाह देर से हो सकता है जबकि इस प्रकार के कुछ अन्य जातकों को विभिन्न कारणों के चलते अपनी पत्नियों से लंबे समय के लिए दूर रहना पड़ सकता है। कुंडली के सातवें घर में स्थित अशुभ नीच का शनि जातक को आर्थिक समस्याओं से भी पीड़ित कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातकों को समय समय पर आर्थिक तंग का सामना करना पड़ सकता है तथा इनमें से कुछ जातकों को किसी निंदनीय प्रकरण अथवा घोटाले में फंस जाने के कारण भारी अपयश का सामना भी करना पड़ सकता है।

कुंडली के आठवें घर में नीच का शनि : किसी कुंडली के आठवें घर में स्थित नीच का शनि शुभ होने की स्थिति में जातक को व्यवसायिक सफलता तथा आर्थिक लाभ प्रदान कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले जातक विभिन्न प्रकार के व्यवसायिक क्षेत्रों में सफलता प्राप्त कर सकते हैं तथा ऐसे जातक अपने व्यवसाय के माध्यम से निरंतर धन लाभ प्राप्त करते रहते हैं। कुंडली के आठवें घर में स्थित शुभ नीच शनि का प्रभाव जातक को आध्यात्मिक विकास भी प्रदान कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातक आध्यात्म तथा परा विज्ञान से संबंधित क्षेत्रों में रुचि रखने वाले तथा इन क्षेत्रों में शोध करने वाले होते हैं तथा इनमें से कुछ जातक ऐसे ही किसी क्षेत्र को स्थायी रूप से अपना व्यवसायिक क्षेत्र भी बना सकते हैं जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातक ज्योतिषी, अंक शास्त्री, वास्तु शास्त्री, फेंग शुई विशेषज्ञ, हस्त रेखा विशेषज्ञ, जादूगर, तांत्रिक, मांत्रिक, जादू टोना करने वाले, काला जादू करने वाले, आत्माओं के साथ संपर्क स्थापित करने वाले माध्यम आदि भी बन सकते हैं। वहीं दूसरी ओर, कुंडली के आठवें घर में स्थित नीच का शनि अशुभ होने की स्थिति में जातक के विवाह तथा वैवाहिक जीवन पर बुरा प्रभाव डाल सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातकों का विवाह देर से अथवा बहुत देर से हो सकता है जबकि इस प्रकार के कुछ अन्य जातकों के वैवाहिक जीवन में गंभीर समस्याएं पैदा हो सकतीं हैं जिनके चलते ऐसे जातकों के एक अथवा एक से अधिक विवाह टूट भी सकते हैं तथा इनमें से कुछ जातकों की पत्नियों की मृत्यु भी हो सकती है। कुंडली के आठवें घर में अशुभ नीच का शनि जातक को किसी गंभीर रोग अथवा रोगों से पीड़ित भी कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातकों को लंबे समय तक चलने वाला कोई रोग हो सकता है जो इन जातकों को समय समय पर बहुत कष्ट देता रहता है तथा कुछ स्थितियों में ऐसे किसी रोग के कारण जातक की अपेक्षाकृत कम आयु में मृत्यु भी हो सकती है।

कुंडली के नौवें घर में नीच का शनि : किसी कुंडली के नौवें घर में स्थित नीच का शनि शुभ होने की स्थिति में जातक को व्यवसायिक सफलता प्रदान कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले जातक विभिन्न प्रकार के व्यवसायिक क्षेत्रों में सफल देखे जा सकते हैं। कुंडली में शुभ नीच शनि का इस प्रकार का प्रभाव जातक को किसी सरकारी विभाग में प्रभुत्व तथा प्रतिष्ठा का कोई पद भी दिलवा सकता है तथा इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले कुछ जातक राजनीति के माध्यम से भी सरकार में प्रभुत्व का कोई पद प्राप्त कर सकते हैं। कुंडली के नौवें घर में स्थित शुभ नीच का शनि जातक को उसकी व्यवसायिक सफलता के माध्यम से नाम, यश तथा प्रसिद्धि भी प्रदान कर सकता है। वहीं दूसरी ओर, कुंडली के नौवें घर में स्थित नीच का शनि अशुभ होने की स्थिति में जातक के वैवाहिक जीवन को विपरीत रूप से प्रभावित कर सकता है तथा जातक के वैवाहिक जीवन में आने वाले ये समस्याएं उस स्थिति में और भी गंभीर हो सकतीं हैं जब कुंडली के नौवें घर में स्थित अशुभ नीच का शनि कुंडली में पितृ दोष बनाता हो। इस प्रकार के पितृ दोष के प्रभाव में आने वाले जातकों के वैवाहिक जीवन में अनेक प्रकार के संकट तथा परेशानियां आ सकतीं हैं तथा इनमें से कुछ जातकों के एक अथवा एक से भी अधिक विवाह टूट भी सकते हैं। कुंडली के नौवें घर मे स्थित अशुभ नीच के शनि का प्रभाव जातक के व्यवसायिक क्षेत्र में भी समस्याएं पैदा कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के अशुभ प्रभाव में आने वाले अनेक जातकों को अपने व्यवसाय में असफलताओं, बाधाओं, रुकावटों आदि का सामना करना पड़ सकता है। कुंडली में अशुभ नीच शनि का इस प्रकार का प्रभाव जातक के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डाल सकता है जिसके चलते इस प्रकार के अशुभ प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों को विभिन्न प्रकार के रोग भी लग सकते हैं।

कुंडली के दसवें घर में नीच का शनि : किसी कुंडली के दसवें घर में स्थित नीच का शनि शुभ होने की स्थिति में जातक के व्यवसाय को सकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातक विभिन्न प्रकार के व्यवसायिक क्षेत्रों में कार्यरत होकर इनमें सफलता प्राप्त करते हैं तथा इनमें से कुछ जातक अपने व्यवसाय के माध्यम से धन के साथ साथ प्रतिष्ठा, प्रभुत्व तथा प्रसिद्धि भी अर्जित कर सकते हैं। इस प्रकार के शुभ नीच शनि के प्रभाव में आने वाले कुछ जातक पुलिस अधिकारी, सैन्य अधिकारी, वकील, जज, इंजीनियर, बैंक अधिकारी, कंप्यूटर प्रोग्रामर, दंत चिकित्सक, शल्य चिकित्सक, व्यापारी, प्रबंधकीय व्यवसायी, शिक्षक, प्रवाचक आदि भी बन सकते हैं। कुंडली के दसवें घर में स्थित शुभ नीच का शनि जातक को किसी सरकारी विभाग में लाभ, प्रभुत्व तथा प्रतिष्ठा का कोई पद भी प्रदान कर सकता है तथा इस प्रकार के कुछ जातक सरकार में मंत्री पद भी प्राप्त कर सकते हैं। वहीं दूसरी ओर, कुंडली के दसवें घर में स्थित नीच के शनि के अशुभ होने की स्थिति में जातक के व्यवसायिक क्षेत्र को बुरी प्रकार से प्रभावित कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के अशुभ प्रभाव में आने वाले जातकों को अपने व्यवसायिक क्षेत्रों में समस्याओं, रुकावटों, बाधाओं, असफलताओं आदि का सामना करन पड़ सकता है। इस प्रकार के अशुभ नीच शनि के प्रबल प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों को व्यवसाय के माध्यम से धन हानि का सामना करना पड़ सकता है जबकि इस प्रकार के कुछ अन्य जातकों को अपने जीवन में लंबे समय तक व्यवसायहीन रहना पड़ सकता है। कुंडली के दसवें घर में स्थित अशुभ नीच का शनि जातक को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं तथा रोगों से भी पीड़ित कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातक विभिन्न प्रकार के शारीरिक तथा मानसिक रोगों से पीड़ित हो सकते हैं।

कुंडली के ग्यारहवें घर में नीच का शनि : किसी कुंडली के ग्यारहवें घर में स्थित नीच का शनि शुभ होने की स्थिति में जातक को धन तथा व्यवसायिक सफलता के साथ अन्य अनेक प्रकार के शुभ फल प्रदान कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले जातक विभिन्न प्रकार के व्यवसायिक क्षेत्रों में सफलता प्राप्त करते हैं तथा इस सफलता के साथ साथ यश, प्रतिष्ठा तथा प्रसिद्धि भी अर्जित कर सकते हैं। इस प्रकार के शुभ नीच शनि के प्रभाव में आने वाले कुछ जातक वकील, जज, इंजीनियर, व्यापारी, प्रबंधकीय व्यवसायी, ज्योतिषी, अंक शास्त्री, वास्तु शास्त्री, फेंग शुई विशेषज्ञ, हस्त रेखा विशेषज्ञ, जादूगर, आत्माओं के साथ संपर्क स्थापित करने वाले माध्यम आदि भी बन सकते हैं। वहीं दूसरी ओर, कुंडली के ग्यारहवें घर में स्थित नीच का शनि अशुभ होने की स्थिति में जातक को व्यवसाय के माध्यम से अथवा लाटरी, जुआ या शेयर बाजार आदि के माध्यम से धन हानि दे सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातकों को समय समय पर इन क्षेत्रों के माध्यम से धन हानि का सामना करना पड़ सकता है जिससे इनकी आर्थिक स्थिति बलहीन हो सकती है। कुंडली के ग्यारहवें घर में स्थित अशुभ नीच का शनि जातक को स्वार्थी, कपटी आदि भी बना सकता है जिसके चलते इस प्रकार के अशुभ प्रभाव में आने वाले कुछ जातक अपना स्वार्थ सिद्ध करने के लिए किसी को भी धोखा देने के लिए तत्पर रहते हैं जिसके कारण इन जातकों की सामाजिक छवि बुरी बन जाती है तथा इन्हें अपने जीवन में अनेक बार अपने स्वार्थी स्वभाव के चलते अच्छे मित्रों तथा संबंधियों से हाथ धोना पड़ सकता है।

कुंडली के बारहवें घर में नीच का शनि : किसी कुंडली के बारहवें घर में स्थित नीच का शनि शुभ होने की स्थिति में जातक का संबंध विदेश के साथ स्थापित कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले कुछ जातक अपने व्यवसाय के आधार पर स्थायी रूप से विदेशों में बस जाते हैं जबकि इस प्रकार के कुछ अन्य जातक लंबे समय तक विदेशों में रहते हैं। कुंडली के बारहवें घर मे शुभ नीच शनि का प्रभाव जातक को आध्यात्मिक विकास भी प्रदान कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातक आध्यात्म तथा परा विज्ञान से संबंधित क्षेत्रों में रुचि रखने वाले तथा इन क्षेत्रों में शोध करने वाले होते हैं तथा इनमें से कुछ जातक ऐसे ही किसी क्षेत्र को स्थायी रूप से अपना व्यवसायिक क्षेत्र भी बना सकते हैं। इस प्रकार के कुछ जातक ज्योतिषी, अंक शास्त्री, वास्तु शास्त्री, फेंग शुई विशेषज्ञ, हस्त रेखा विशेषज्ञ, जादूगर, तांत्रिक, मांत्रिक, जादू टोना करने वाले, काला जादू करने वाले, आत्माओं के साथ संपर्क स्थापित करने वाले माध्यम आदि भी बन सकते हैं। वहीं दूसरी ओर, कुंडली के बारहवें घर में स्थित नीच का शनि अशुभ होने की स्थिति में जातक के विवाह तथा वैवाहिक जीवन पर बुरा प्रभाव डाल सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातकों का विवाह देर से अथवा बहुत देर से हो सकता है जबकि इस प्रकार के कुछ अन्य जातकों के वैवाहिक जीवन में गंभीर समस्याएं आ सकतीं हैं जिनके कारण कई बार ऐसे कुछ जातकों का विवाह टूट भी सकता है। कुंडली के बारहवें घर में स्थित अशुभ नीच का शनि जातक को आर्थिक समस्याओं से भी पीड़ित कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातकों को अपने जीवन में समय समय पर धन की कमी का सामना करना पड़ सकता है तथा इनमें से कुछ जातकों को गंभीर आर्थिक समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है। कुंडली के बारहवें घर में स्थित अशुभ नीच का शनि जातक को विभिन्न प्रकार के रोगों से पीड़ित भी कर सकता है।

           इस प्रकार कुंडली के प्रत्येक घर में स्थित नीच का शनि कुंडली में शुभ होने की स्थिति में जातक को शुभ फल तथा अशुभ होने की स्थिति में जातक को अशुभ फल प्रदान कर सकता है। इसलिए किसी कुंडली के किसी घर में केवल नीच के शनि के स्थित होने से ही यह निर्णय नहीं ले लेना चाहिए कि ऐसा नीच का शनि जातक को सदा अशुभ फल ही देगा तथा कुंडली में ऐसे नीच के शनि के फलों का निर्णय करने से पूर्व कुंडली में शनि के शुभ अथवा अशुभ स्वभाव का भली भांति निरीक्षण कर लेना चाहिए तथा तत्पश्चात ही कुंडली में उपस्थित नीच के शनि के शुभ अथवा अशुभ फलों का निर्णय करना चाहिए।

लेखक
हिमांशु शंगारी

नीच का शनि 01

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संबंधित लेख : नीच का शनि 02 , कुंडली में नीच के ग्रह

वैदिक ज्योतिष के अनुसार मेष राशि में स्थित होने पर शनि को नीच का शनि कहा जाता है जिसका साधारण शब्दों में अर्थ यह होता है कि मेष राशि में स्थित होने पर शनि अन्य सभी राशियों की तुलना में सबसे बलहीन हो जाते हैं। कुछ वैदिक ज्योतिषी यह मानते हैं कि कुंडली में नीच का शनि सदा अशुभ फलदायी होता है जो सत्य नहीं है क्योंकि कुंडली में शनि का नीच होना केवल उसके बल को दर्शाता है तथा उसके शुभ या अशुभ स्वभाव को नहीं जिसके चलते किसी कुंडली में नीच का शनि शुभ अथवा अशुभ दोनों प्रकार के फल ही प्रदान कर सकता है जिसका निर्णय उस कुंडली में शनि के शुभ अशुभ स्वभाव को देखकर ही लिया जा सकता है। आज के इस लेख में हम कुंडली के विभिन्न 12 घरों में स्थित होने पर नीच के शनि द्वारा प्रदान किये जाने वाले कुछ संभावित शुभ तथा अशुभ फलों के बारे में विचार करेंगे।

कुंडली के पहले घर में नीच का शनि : किसी कुंडली के पहले घर में स्थित नीच का शनि शुभ होने की स्थिति में जातक के व्यवसाय पर शुभ प्रभाव डाल सकता है जिसके चलते इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले अनेक जातक विभिन्न प्रकार के व्यवसायिक क्षेत्रों में सफलता प्राप्त कर सकते हैं। इस प्रकार के शुभ नीच शनि का प्रभाव जातक की आर्थिक स्थिति को भी अच्छा बना सकता है तथा इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले अनेक जातक सुविधा और साधन संपन्न जीवन व्यतीत करते हैं। कुंडली के पहले घर अर्थात लग्न में स्थित शुभ नीच के शनि के प्रभाव में आने वाले जातक जन संपर्क के कार्यों में कुशल तथा लोगों को प्रभावित करने में सक्षम होते हैं जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातक राजनीति के माध्यम से सरकार में मंत्री पद अथवा प्रतिष्ठा और प्रभुत्व वाला कोई अन्य पद प्राप्त कर सकते हैं। वहीं दूसरी ओर, कुंडली के पहले घर में स्थित नीच का शनि अशुभ होने की स्थिति में जातक के विवाह तथा वैवाहिक जीवन पर दुष्प्रभाव डाल सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातकों का विवाह देर से अथवा बहुत देर से हो सकता है जबकि इस प्रकार के कुछ अन्य जातकों के वैवाहिक जीवन में विभिन्न प्रकार की समस्याएं आ सकतीं हैं तथा इनमें से कुछ जातकों को अपनी पत्नियों से लंबे समय के लिए दूर रहना पड़ सकता है जबकि इस प्रकार के कुछ अन्य जातकों का विवाह टूट भी सकता है। कुंडली के पहले घर में स्थित नीच का शनि अशुभ होने की स्थिति में जातक के व्यवसाय पर दुष्प्रभाव डाल सकता है जिसके चलते इस प्रकार के अशुभ प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों को अपने आप को व्यवसायिक रूप से स्थापित करने के लिए लंबा संघर्ष तथा लंबी प्रतीक्षा करनी पड़ सकती है जबकि इस प्रकार के कुछ अन्य जातकों को व्यवसाय के माध्यम से धन हानि और मान हानि का सामना करना पड़ सकता है।

कुंडली के दूसरे घर में नीच का शनि : किसी कुंडली के दूसरे घर में स्थित नीच का शनि शुभ होने की स्थिति में जातक को आर्थिक लाभ प्रदान कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले जातकों की आर्थिक स्थिति अच्छी रहती है तथा इनमें से कुछ जातक विभिन्न प्रकार के व्यवसायिक क्षेत्रों के माध्यम से बहुत धन कमा सकते हैं। कुंडली में शुभ नीच शनि का इस प्रकार का प्रभाव जातक को विदेशों में भी ले जा सकता है जिसके चलते इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले कुछ जातक विभिन्न प्रकार के देशों में जाकर स्थायी रूप से स्थापित हो सकते हैं तथा वहां जाकर बहुत धन कमा सकते हैं। वहीं दूसरी ओर, कुंडली के दूसरे घर में स्थित नीच का शनि अशुभ होने की स्थिति में जातक के वैवाहिक जीवन में गंभीर समस्याएं पैदा कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातकों का वैवाहिक जीवन विभिन्न कारणों तथा मतभेदों के चलते समस्याओं तथा चिंताओं से घिरा रहता है तथा इनमें से कुछ जातकों का विवाह टूट भी सकता है। कुंडली में इस प्रकार के अशुभ नीच शनि का प्रभाव जातक की आर्थिक स्थिति पर भी बहुत बुरा प्रभाव डाल सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातकों को जीवन में समय समय पर आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ सकता है। कुंडली के दूसरे घर में स्थित अशुभ नीच शनि का प्रभाव जातक को मादक पदार्थों के सेवन की लत भी लगा सकता है जिसके कारण जातक को समय समय पर धन हानि, स्वास्थ्य हानि तथा मानहानि का सामना भी करना पड़ सकता है।

कुंडली के तीसरे घर में नीच का शनि : किसी कुंडली के तीसरे घर में स्थित नीच का शनि शुभ होने की स्थिति में जातक को व्यवसायिक सफलता प्रदान कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले जातक विभिन्न प्रकार के व्यवसायिक क्षेत्रों में सफल देखे जा सकते हैं। कुंडली में शुभ नीच शनि का इस प्रकार का प्रभाव जातक को किसी सरकारी विभाग में प्रभुत्व तथा प्रतिष्ठा का कोई पद भी दिलवा सकता है तथा इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले कुछ जातक राजनीति के माध्यम से भी सरकार में प्रभुत्व का कोई पद प्राप्त कर सकते हैं। कुंडली के तीसरे घर में स्थित शुभ नीच का शनि जातक का संबंध विदेशों के साथ भी स्थापित कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातक अपने व्यवसाय के संबंध में विदेशों में जाते रहते हैं हालांकि इस प्रकार के अधिकतर जातक स्थायी रूप से विदेशों में स्थापित नहीं होते। वही दूसरी ओर, कुंडली के तीसरे घर में स्थित नीच का शनि अशुभ होने की स्थिति में जातक के व्यवसाय पर दुष्प्रभाव डाल सकता है जिसके चलते इस प्रकार के अशुभ प्रभाव में आने वाले अनेक जातकों को अपने व्यवसाय में असफलताओं, बाधाओं, रुकावटों आदि का सामना करना पड़ सकता है जबकि इस प्रकार के कुछ अन्य जातकों को व्यवसाय के माध्यम से धन हानि और मान हानि का सामना करना पड़ सकता है। कुंडली के तीसरे घर में स्थित अशुभ नीच का शनि जातक के अपने भाई बहनों के साथ संबंध भी बिगाड़ सकता है तथा इस प्रकार के अशुभ प्रभाव में आने वाले कुछ जातक विभिन्न प्रकार की शारीरिक समस्याओं और रोगों से पीड़ित भी हो सकते हैं।

कुंडली के चौथे घर में नीच का शनि : किसी कुंडली के चौथे घर में स्थित नीच का शनि शुभ होने की स्थिति में जातक को धन, संपत्ति, सुविधाएं, ऐश्वर्य तथा वैभव प्रदान कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले अनेक जातक अपने जीवन में बहुत धन अर्जित कर पाते हैं तथा ऐसे जातकों का जीवन सुख सुविधापूर्वक व्यतीत होता है और इन्हें अच्छे आवास और अच्छे वाहनों का सुख भी प्राप्त होता है। कुंडली के चौथे घर में स्थित शुभ नीच का शनि जातक को आध्यात्मिक विकास भी प्रदान कर सकता है तथा इस प्रकार के शुभ शनि के प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों को किसी सरकारी विभाग में प्रभुत्व और प्रतिष्ठा का कोई पद भी प्राप्त हो सकता है। वहीं दूसरी ओर, कुंडली के चौथे घर में स्थित नीच का शनि अशुभ होने की स्थिति में जातक के विवाह तथा वैवाहिक जीवन पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातकों का विवाह बहुत देर से हो सकता है जबकि इस प्रकार के कुछ अन्य जातकों को विभिन्न कारणों के चलते अपनी पत्नियों से बहुत लंबे समय के लिए दूर रहना पड़ सकता है और इनमें से कुछ जातकों का विवाह लंबे अलगाव के पश्चात टूट भी सकता है। कुंडली के चौथे घर में स्थित अशुभ नीच का शनि जातक के व्यवसाय को भी विपरीत रूप से प्रभावित कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के अशुभ प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों का व्यवसाय स्थिर नहीं रह पाता तथा ऐसे जातकों को विभिन्न कारणों के चलते अपना व्यवसाय बार बार बदलना पड़ सकता है जिसके कारण ऐसे जातक व्यवसायिक रूप से अच्छी तरह स्थापित नहीं हो पाते तथा इनमें से कुछ जातकों को जीवन में समय समय पर व्यवसायहीन भी रहना पड़ सकता है।

कुंडली के पांचवें घर में नीच का शनि : किसी कुंडली के पांचवें घर में स्थित नीच का शनि शुभ होने की स्थिति में जातक को कलात्मक तथा रचनात्मक विशेषताएं प्रदान कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले जातक विभिन्न प्रकार के कलात्मक तथा रचनात्मक क्षेत्रों में सफलता प्राप्त कर सकते हैं। इस प्रकार के शुभ शनि के प्रभाव में आने वाले कुछ जातक पुलिस अधिकारी, सैन्य अधिकारी, सिने जगत के अभिनेता, अभिनेत्रियां, निर्देशक, निर्माता, बैंक अधिकारी तथा अन्य वित्तिय संस्थाओं में कार्यरत अधिकारी, प्रशिक्षक, पत्रकार, टैलीविजन रिपोर्टर आदि भी बन सकते हैं। कुंडली के पांचवें घर में स्थित शुभ नीच का शनि जातक को आध्यात्म तथा परा विज्ञान के क्षेत्रों में विकास भी प्रदान कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातक ऐसे ही किसी क्षेत्र में उपलब्धियां प्राप्त करके ऐसे क्षेत्र को अपना व्यवसायिक क्षेत्र भी बना सकते हैं। इस प्रकार के कुछ जातक ज्योतिषी, वास्तु विशेषज्ञ, हस्त रेखा शास्त्री, आध्यत्मिक गुरु, अंक शास्त्री आदि भी बन सकते हैं। वहीं दूसरी ओर, कुंडली के पांचवें घर में स्थित नीच का शनि अशुभ होने की स्थिति में जातक के वैवाहिक जीवन तथा प्रेम संबंधों पर दुष्प्रभाव डाल सकता है जिसके चलते इस प्रकार के अशुभ प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों को अपने प्रेम संबंधों के माध्यम से पीड़ा उठानी पड़ सकती है जबकि इस प्रकार के कुछ अन्य जातकों का वैवाहिक जीवन सामान्य तथा सुखी नहीं रह पाता तथा इन जातकों के अपनी पत्नियों के साथ गंभीर वैचारिक मतभेद रहते हैं जिनके कारण इन जातकों का विवाह टूट भी सकता है। कुंडली के पांचवें घर में स्थित अशुभ नीच का शनि जातक में अहंकार तथा अभिमान की मात्रा बढ़ा सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातकों को अपने जीवन के अनेक क्षेत्रों में हानि उठानी पड़ सकती है तथा बहुत से संबंधों से हाथ भी धोना पड़ सकता है।

कुंडली के छठे घर में नीच का शनि : किसी कुंडली के छठे घर में स्थित नीच का शनि शुभ होने की स्थिति में जातक को साहस तथा पराक्रम आदि जैसीं विशेषताएं प्रदान कर सकता है जिनके चलते इस प्रकार के जातक ऐसे व्यवसायिक क्षेत्रों में सफलता प्राप्त कर सकते हैं जिनमें सफलता प्राप्त करने के लिए इन विशेषताओं की आवश्यकता पड़ती हो। इस प्रकार के कुछ जातक पुलिस अधिकारी, सैन्य अधिकारी अथवा अन्य किसी प्रकार के रक्षा सुरक्षा विभाग में कार्यरत अधिकारी बन सकते हैं। कुंडली के छठे घर में स्थित शुभ नीच का शनि जातक को व्यवसाय के माध्यम से धन और सफलता के साथ साथ नाम, यश और प्रसिद्धि भी प्रदान कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातक अपने साहसिक कार्यों के चलते समाज में प्रसिद्धि तथा प्रतिष्ठा प्राप्त कर सकते हैं। वहीं दूसरी ओर, कुंडली के छठे घर में स्थित नीच का शनि अशुभ होने की स्थिति में जातक को विभिन्न प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं तथा रोग प्रदान कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातक किसी न किसी रोग से पीड़ित हो सकते हैं तथा इनमें से कुछ जातकों को गंभीर, कष्टप्रद, लंबे समय तक चलने वाले अथवा स्थायी रोग भी लग सकते हैं जो इन जातकों को समय समय पर बहुत कष्ट दे सकते हैं तथा इनमें से कुछ जातकों की ऐसे ही किसी रोग के कारण मृत्यु भी हो सकती है। कुंडली के छठे घर में स्थित अशुभ नीच का शनि जातक को शत्रुओं के माध्यम से भी पीड़ित कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातकों को अपने जीवन में समय समय पर अपने शत्रुओं द्वारा रचे गये षड़यंत्रों के कारण हानि उठानी पड़ सकती है तथा इनमें से कुछ जातकों को अपने शत्रुओं द्वारा रचे गये किसी आक्रमण में भारी शारीरिक क्षति भी उठानी पड़ सकती है।

लेखक
हिमांशु शंगारी

नीच का बुध 02

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संबंधित लेख : नीच का बुध 01 , कुंडली में नीच के ग्रह

पिछले लेख में हमने नीच के बुध के कुंडली के पहले घर से लेकर कुंडली के छठे घर तक स्थित होने से जातक को मिलने वाले संभावित शुभ अशुभ फलों के बारे में चर्चा की थी तथा इस लेख में हम नीच के बुध के कुंडली के सातवें घर से लेकर कुंडली के बारहवें घर तक स्थित होने से जातक को मिलने वाले संभावित शुभ अशुभ फलों के बारे में चर्चा करेंगे।

कुंडली के सातवें घर में नीच का बुध : किसी कुंडली के सातवें घर में स्थित नीच का बुध शुभ होने की स्थिति में जातक के वैवाहिक जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है जिसके चलते इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले जातकों का वैवाहिक जीवन सामान्यतया सुखी रहता है तथा इस प्रकार के कुछ जातकों का आर्थिक स्तर और व्यवसायिक सफलता भी विवाह के पश्चात बढ़ जाती है। कुंडली के सातवें घर में स्थित शुभ नीच बुध के प्रभाव में आने वाले कुछ जातक विवाह के आधार पर विदेशों में भी जाकर बस सकते हैं तथा इनमें से कुछ जातकों का विवाह किसी विदेशी पुरुष या महिला के साथ भी हो सकता है। कुंडली में इस प्रकार के शुभ नीच बुध का प्रभाव जातक को व्यवसायिक सफलता भी प्रदान कर सकता है। वहीं दूसरी ओर, कुंडली के सातवें घर में स्थित नीच का बुध अशुभ होने की स्थिति में जातक के विवाह तथा वैवाहिक जीवन में अनेक प्रकार की समस्याएं पैदा कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातकों का विवाह देर से हो सकता है जबकि इस प्रकार के कुछ अन्य जातकों को विभिन्न कारणों के चलते अपनी पत्नियों से लंबे समय के लिए दूर रहना पड़ सकता है। कुंडली के सातवें घर में स्थित शुभ नीच के बुध के प्रभाव में आने वाले कुछ जातक अपने गृहस्थ जीवन के दायित्वों से चिंतित होकर सदा के लिए घर छोड़कर किसी आश्रम आदि में जाकर भी रह सकते हैं।

कुंडली के आठवें घर में नीच का बुध : किसी कुंडली के आठवें घर में स्थित नीच का बुध शुभ होने की स्थिति में जातक को व्यवसायिक सफलता तथा आर्थिक लाभ प्रदान कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले जातक अपने व्यवसाय के माध्यम से अथवा किसी अन्य माध्यम से धन लाभ प्राप्त कर सकते हैं। कुंडली के आठवें घर में स्थित शुभ नीच के बुध के प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों को उत्तराधिकार के माध्यम से भी धन अथवा संपत्ति की प्राप्ति हो सकती है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातक अपने पैतृक परिवार की ओर से, माता के परिवार की ओर से अथवा किसी अन्य संबंधी की ओर से उत्तराधिकार में धन की प्राप्ति कर सकते हैं। वहीं दूसरी ओर, कुंडली के आठवें घर में स्थित नीच का बुध अशुभ होने की स्थिति में जातक के वैवाहिक जीवन में गंभीर समस्याएं पैदा कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के अनेक जातकों का वैवाहिक जीवन दुखी रह सकता है। इस प्रकार के अशुभ प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों के अपनी पत्नियों के साथ सदा ही गंभीर वैचारिक मतभेद रहते हैं जिसके चलते ऐसे जातक अपने वैवाहिक जीवन में मानसिक रूप से पीड़ित ही रहते हैं। कुंडली के आठवें घर में स्थित अशुभ नीच का बुध जातक की आर्थिक स्थिति को भी विपरीत रूप से प्रभावित कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातकों को अपने जीवन में समय समय पर धन की कमी का सामना करना पड़ सकता है।

कुंडली के नौवें घर में नीच का बुध : किसी कुंडली के नौवें घर में स्थित नीच का बुध शुभ होने की स्थिति में जातक के व्यवसाय पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है जिसके चलते इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले जातक विभिन्न प्रकार के व्यवसायिक क्षेत्रों के माध्यम से सफलता प्राप्त कर सकते हैं। कुंडली के नौवें घर में स्थित शुभ नीच का बुध जातक को रचनात्मक विशेषताएं प्रदान कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातक रचनात्मक क्षेत्रों में विशेष रूप से सफलता प्राप्त कर सकते हैं। कुंडली के इस घर में स्थित शुभ नीच का बुध जातक को व्यवसाय के आधार पर स्थायी रूप से विदेश में भी स्थापित कर सकता है। वहीं दूसरी ओर, कुंडली के नौवें घर में स्थित नीच का बुध अशुभ होने की स्थिति में जातक के व्यवसायिक क्षेत्र में गंभीर समस्याएं पैदा कर सकता है तथा ये समस्यायें उस स्थिति में और भी गंभीर हो सकतीं हैं जब कुंडली के नौवें घर में स्थिति ऐसा अशुभ नीच का बुध कुंडली में पितृ दोष बनाता हो। इस प्रकार के पितृ दोष के प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों को लंबे समय के लिए व्यवसायहीन रहना पड़ सकता है तथा इस प्रकार के कुछ जातकों को अपने आप को व्यवसायिक रूप से स्थापित करने के लिए बहुत लंबी प्रतीक्षा करनी पड़ सकती है। कुंडली के नौवें घर में स्थित अशुभ नीच के बुध के प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों को अपने व्यवसाय के माध्यम से धन हानि का सामना करना पड़ सकता है जबकि इस प्रकार के कुछ अन्य जातकों को किसी गंभीर आरोप के चलते अपयश और मानहानि का सामना करना पड़ सकता है तथा व्यवसाय से हाथ भी धोना पड़ सकता है।

कुंडली के दसवें घर में नीच का बुध : किसी कुंडली के दसवें घर में स्थित नीच का बुध शुभ होने की स्थिति में जातक के व्यवसाय को सकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातक विभिन्न प्रकार के व्यवसायिक क्षेत्रों में कार्यरत होकर इनमें सफलता प्राप्त करते हैं तथा इनमें से कुछ जातक अपने व्यवसाय के माध्यम से धन के साथ साथ प्रतिष्ठा, प्रभुत्व तथा प्रसिद्धि भी अर्जित कर सकते हैं। इस प्रकार के शुभ नीच बुध के प्रभाव में आने वाले कुछ जातक पुलिस अधिकारी, सैन्य अधिकारी, वकील, जज, इंजीनियर, बैंक अधिकारी, कंप्यूटर प्रोग्रामर आदि भी बन सकते हैं। कुंडली के दसवें घर में स्थित शुभ नीच का बुध जातक को किसी सरकारी विभाग में लाभ, प्रभुत्व तथा प्रतिष्ठा का कोई पद भी प्रदान कर सकता है तथा इस प्रकार के कुछ जातक सरकार में मंत्री पद भी प्राप्त कर सकते हैं। वहीं दूसरी ओर, कुंडली के दसवें घर में स्थित नीच के बुध के अशुभ होने की स्थिति में जातक के व्यवसायिक क्षेत्र को बुरी प्रकार से प्रभावित कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के अशुभ प्रभाव में आने वाले जातकों को अपने व्यवसायिक क्षेत्रों में समस्याओं, रुकावटों, बाधाओं, असफलताओं आदि का सामना करन पड़ सकता है। इस प्रकार के अशुभ नीच बुध के प्रबल प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों को व्यवसाय के माध्यम से धन हानि का सामना करना पड़ सकता है जबकि इस प्रकार के कुछ अन्य जातकों को अपने जीवन में लंबे समय तक व्यवसायहीन रहना पड़ सकता है। कुंडली के दसवें घर में स्थित अशुभ नीच का बुध जातक को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं तथा रोगों से भी पीड़ित कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातक विभिन्न प्रकार के शारीरिक तथा मानसिक रोगों से पीड़ित हो सकते हैं।

कुंडली के ग्यारहवें घर में नीच का बुध : किसी कुंडली के ग्यारहवें घर में स्थित नीच का बुध शुभ होने की स्थिति में जातक को धन तथा व्यवसायिक सफलता के साथ अन्य अनेक प्रकार के शुभ फल प्रदान कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले जातक विभिन्न प्रकार के व्यवसायिक क्षेत्रों में सफलता प्राप्त करते हैं तथा इस सफलता के साथ साथ यश, प्रतिष्ठा तथा प्रसिद्धि भी अर्जित कर सकते हैं। कुंडली में इस प्रकार के शुभ नीच बुध के प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों को व्यवसाय के अतिरिक्त अन्य माध्यमों से भी धन की प्राप्ति हो सकती है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातक लाटरी, शेयर बाजार आदि के माध्यम से भी धन लाभ प्राप्त कर सकते हैं। वहीं दूसरी ओर, कुंडली के ग्यारहवें घर में स्थित नीच का बुध अशुभ होने की स्थिति में जातक की आर्थिक स्थिति को विपरीत रूप से प्रभावित कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातकों को समय समय पर व्यवसाय में हानि तथा अवांछित खर्चों के कारण धन की तंगी का सामना करना पड़ सकता है। कुंडली के ग्यारहवें घर में स्थित अशुभ नीच का बुध जातक के वैवाहिक जीवन में भी समस्याएं पैदा कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातकों का वैवाहिक जीवन दुखी अथवा बहुत दुखी रह सकता है तथा इनमें से कुछ जातकों का विवाह टूट भी सकता है। कुंडली के ग्यारहवें घर में स्थित अशुभ नीच का बुध जातक को संतान जन्म से संबंधित समस्याएं भी दे सकता है।

कुंडली के बारहवें घर में नीच का बुध : किसी कुंडली के बारहवें घर में स्थित नीच का बुध शुभ होने की स्थिति में जातक का संबंध विदेश के साथ स्थापित कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले कुछ जातक अपने व्यवसाय के आधार पर स्थायी रूप से विदेशों में बस जाते हैं जबकि इस प्रकार के कुछ अन्य जातक लंबे समय तक विदेशों में रहते हैं। कुंडली के बारहवें घर मे शुभ नीच बुध का प्रभाव जातक को आध्यात्मिक विकास भी प्रदान कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातक आध्यात्म तथा परा विज्ञान से संबंधित क्षेत्रों में रुचि रखने वाले तथा इन क्षेत्रों में शोध करने वाले होते हैं तथा इनमें से कुछ जातक ऐसे ही किसी क्षेत्र को स्थायी रूप से अपना व्यवसायिक क्षेत्र भी बना सकते हैं। वहीं दूसरी ओर, कुंडली के बारहवें घर में स्थित नीच का बुध अशुभ होने की स्थिति में जातक के विवाह तथा वैवाहिक जीवन पर बुरा प्रभाव डाल सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातकों का विवाह देर से अथवा बहुत देर से हो सकता है जबकि इस प्रकार के कुछ अन्य जातकों के वैवाहिक जीवन में गंभीर समस्याएं आ सकतीं हैं जिनके कारण कई बार ऐसे कुछ जातकों का विवाह टूट भी सकता है। कुंडली के बारहवें घर में स्थित अशुभ नीच का बुध जातक को आर्थिक समस्याओं से भी पीड़ित कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातकों को अपने जीवन में समय समय पर धन की कमी का सामना करना पड़ सकता है तथा इनमें से कुछ जातकों को गंभीर आर्थिक समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है।

                इस प्रकार कुंडली के प्रत्येक घर में स्थित नीच का बुध कुंडली में शुभ होने की स्थिति में जातक को शुभ फल तथा अशुभ होने की स्थिति में जातक को अशुभ फल प्रदान कर सकता है। इसलिए किसी कुंडली के किसी घर में केवल नीच के बुध के स्थित होने से ही यह निर्णय नहीं ले लेना चाहिए कि ऐसा नीच का बुध जातक को सदा अशुभ फल ही देगा तथा कुंडली में ऐसे नीच के बुध के फलों का निर्णय करने से पूर्व कुंडली में बुध के शुभ अथवा अशुभ स्वभाव का भली भांति निरीक्षण कर लेना चाहिए तथा तत्पश्चात ही कुंडली में उपस्थित नीच के बुध के शुभ अथवा अशुभ फलों का निर्णय करना चाहिए।

लेखक
हिमांशु शंगारी

नीच का बुध 01

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संबंधित लेख : नीच का बुध 02 , कुंडली में नीच के ग्रह

वैदिक ज्योतिष के अनुसार मीन राशि में स्थित होने पर बुध को नीच का बुध कहा जाता है जिसका साधारण शब्दों में अर्थ यह होता है कि मीन राशि में स्थित होने पर बुध अन्य सभी राशियों की तुलना में सबसे बलहीन हो जाते हैं। कुछ वैदिक ज्योतिषी यह मानते हैं कि कुंडली में नीच का बुध सदा अशुभ फलदायी होता है जो सत्य नहीं है क्योंकि कुंडली में बुध का नीच होना केवल उसके बल को दर्शाता है तथा उसके शुभ या अशुभ स्वभाव को नहीं जिसके चलते किसी कुंडली में नीच का बुध शुभ अथवा अशुभ दोनों प्रकार के फल ही प्रदान कर सकता है जिसका निर्णय उस कुंडली में बुध के शुभ अशुभ स्वभाव को देखकर ही लिया जा सकता है। आज के इस लेख में हम कुंडली के विभिन्न 12 घरों में स्थित होने पर नीच के बुध द्वारा प्रदान किये जाने वाले कुछ संभावित शुभ तथा अशुभ फलों के बारे में विचार करेंगे।

कुंडली के पहले घर में नीच का बुध : किसी कुंडली के पहले घर में स्थित नीच का बुध शुभ होने की स्थिति में जातक के व्यवसाय पर शुभ प्रभाव डाल सकता है जिसके चलते इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले अनेक जातक विभिन्न प्रकार के व्यवसायिक क्षेत्रों में सफलता प्राप्त कर सकते हैं। इस प्रकार के शुभ नीच बुध का प्रभाव जातक की आर्थिक स्थिति को भी अच्छा बना सकता है तथा इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले अनेक जातक सुविधा और साधन संपन्न जीवन व्यतीत करते हैं। कुंडली के पहले घर अर्थात लग्न में स्थित शुभ नीच का बुध जातक के वैवाहिक जीवन को भी सकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के जातकों का वैवाहिक जीवन सामान्यतया सुखी ही रहता है तथा इस प्रकार के कुछ जातकों को धार्मिक तथा सेवा भाव रखने वालीं पत्नियों की प्राप्ति हो सकती है। वहीं दूसरी ओर, कुंडली के पहले घर में स्थित नीच का बुध अशुभ होने की स्थिति में जातक के विवाह तथा वैवाहिक जीवन पर दुष्प्रभाव डाल सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातकों का विवाह देर से अथवा बहुत देर से हो सकता है जबकि इस प्रकार के कुछ अन्य जातकों के वैवाहिक जीवन में विभिन्न प्रकार की समस्याएं आ सकतीं हैं तथा इनमें से कुछ जातकों को अपनी पत्नियों से लंबे समय के लिए दूर रहना पड़ सकता है जबकि इस प्रकार के कुछ अन्य जातकों का विवाह टूट भी सकता है। कुंडली के पहले घर में स्थित अशुभ नीच का बुध जातक के स्वास्थ्य पर भी बुरा प्रभाव डाल सकता है जिसके चलते इस प्रकार के अशुभ प्रभाव में आने वाले अनेक जातक किसी न किसी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या या रोग से पीड़ित हो सकते है तथा इनमें से कुछ जातकों को ऐसे रोग जन्म के समय से ही या बाल्यकाल में ही लग सकते हैं।

कुंडली के दूसरे घर में नीच का बुध : किसी कुंडली के दूसरे घर में स्थित नीच का बुध शुभ होने की स्थिति में जातक को आर्थिक लाभ प्रदान कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले जातकों की आर्थिक स्थिति अच्छी रहती है तथा इनमें से कुछ जातक विभिन्न प्रकार के व्यवसायिक क्षेत्रों के माध्यम से बहुत धन कमा सकते हैं। कुंडली के दूसरे घर में स्थित शुभ नीच का बुध जातक को आध्यात्म तथा परा विज्ञान के क्षेत्रों में रूचि एवं विकास प्रदान कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातक विभिन्न प्रकार के आध्यात्मिक तथा परा वैज्ञानिक क्षेत्रों में उपलब्धियां प्राप्त कर सकते हैं तथा इनमें से कुछ जातक ऐसे ही किसी क्षेत्र को अपना व्यवसायिक क्षेत्र भी बना सकते हैं। वहीं दूसरी ओर, कुंडली के दूसरे घर में स्थित नीच का बुध अशुभ होने की स्थिति में जातक के वैवाहिक जीवन पर दुष्प्रभाव डाल सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातकों का वैवाहिक जीवन सामान्य नहीं रह पाता तथा इन जातकों को अपने वैवाहिक जीवन में अनेक प्रकार की समस्याओं तथा कष्टों का सामना करना पड़ सकता है तथा इनमें से कुछ जातकों का विवाह टूट भी सकता है। कुंडली के दूसरे घर में स्थित अशुभ नीच का बुध जातक की आर्थिक स्थिति को भी बलहीन बना सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातकों को अपने जीवन में समय समय पर धन की कमी का सामना करना पड़ सकता है। इस प्रकार के अशुभ नीच बुध का प्रभाव जातक को संतान के जन्म से संबंधित समस्याओं से भी पीड़ित कर सकता है।

कुंडली के तीसरे घर में नीच का बुध : किसी कुंडली के तीसरे घर में स्थित नीच का बुध शुभ होने की स्थिति में जातक को व्यवसायिक सफलता प्रदान कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले जातक विभिन्न प्रकार के व्यवसायिक क्षेत्रों में सफलता प्राप्त कर सकते हैं तथा इनमें से कुछ जातक पुलिस अधिकारी, सैन्य अधिकारी, बैंक अधिकारी तथा अन्य वित्तिय संस्थाओं में कार्यरत अधिकारी, प्रशिक्षक, पत्रकार, टैलीविजन रिपोर्टर आदि भी बन सकते हैं। कुंडली के तीसरे घर में स्थित शुभ नीच का बुध जातक का संबंध विदेशों के साथ भी स्थापित कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातक अपने व्यवसाय के संबंध में विदेशों में जाते रहते हैं हालांकि इस प्रकार के अधिकतर जातक स्थायी रूप से विदेशों में स्थापित नहीं होते। वही दूसरी ओर, कुंडली के तीसरे घर में स्थित नीच का बुध अशुभ होने की स्थिति में जातक के व्यवसाय पर दुष्प्रभाव डाल सकता है जिसके चलते इस प्रकार के अशुभ प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों को अपने आप को व्यवसायिक रूप से स्थापित करने के लिए लंबा संघर्ष तथा लंबी प्रतीक्षा करनी पड़ सकती है जबकि इस प्रकार के कुछ अन्य जातकों को व्यवसाय के माध्यम से धन हानि और मान हानि का सामना करना पड़ सकता है। कुंडली के तीसरे घर में स्थित अशुभ नीच का बुध जातक के अपने भाई बहनों के साथ संबंध भी बिगाड़ सकता है तथा इस प्रकार के अशुभ प्रभाव में आने वाले कुछ जातक विभिन्न प्रकार की शारीरिक समस्याओं और रोगों से पीड़ित भी हो सकते हैं।

कुंडली के चौथे घर में नीच का बुध : किसी कुंडली के चौथे घर में स्थित नीच का बुध शुभ होने की स्थिति में जातक को धन, संपत्ति, सुविधाएं, ऐश्वर्य तथा वैभव प्रदान कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले अनेक जातक अपने जीवन में बहुत धन अर्जित कर पाते हैं तथा ऐसे जातकों का जीवन सुख सुविधापूर्वक व्यतीत होता है और इन्हें अच्छे आवास और अच्छे वाहनों का सुख भी प्राप्त होता है। कुंडली के चौथे घर में स्थित शुभ नीच का बुध जातक को आध्यात्मिक विकास भी प्रदान कर सकता है तथा इस प्रकार के शुभ बुध के प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों को किसी सरकारी विभाग में प्रभुत्व और प्रतिष्ठा का कोई पद भी प्राप्त हो सकता है। वहीं दूसरी ओर, कुंडली के चौथे घर में स्थित नीच का बुध अशुभ होने की स्थिति में जातक के विवाह तथा वैवाहिक जीवन पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातकों का विवाह बहुत देर से हो सकता है जबकि इस प्रकार के कुछ अन्य जातकों को विभिन्न कारणों के चलते अपनी पत्नियों से बहुत लंबे समय के लिए दूर रहना पड़ सकता है और इनमें से कुछ जातकों का विवाह लंबे अलगाव के पश्चात टूट भी सकता है। कुंडली के चौथे घर में स्थित अशुभ नीच का बुध जातक के व्यवसाय को भी विपरीत रूप से प्रभावित कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के अशुभ प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों का व्यवसाय स्थिर नहीं रह पाता तथा ऐसे जातकों को विभिन्न कारणों के चलते अपना व्यवसाय बार बार बदलना पड़ सकता है जिसके कारण ऐसे जातक व्यवसायिक रूप से अच्छी तरह स्थापित नहीं हो पाते तथा इनमें से कुछ जातकों को जीवन में समय समय पर व्यवसायहीन भी रहना पड़ सकता है।

कुंडली के पांचवें घर में नीच का बुध : किसी कुंडली के पांचवें घर में स्थित नीच का बुध शुभ होने की स्थिति में जातक को कलात्मक तथा रचनात्मक विशेषताएं प्रदान कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले जातक विभिन्न प्रकार के कलात्मक तथा रचनात्मक क्षेत्रों में सफलता प्राप्त कर सकते हैं। कुंडली के पांचवें घर में स्थित शुभ नीच का बुध जातक को आध्यात्म तथा परा विज्ञान के क्षेत्रों में विकास भी प्रदान कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातक ऐसे ही किसी क्षेत्र में उपलब्धियां प्राप्त करके ऐसे क्षेत्र को अपना व्यवसायिक क्षेत्र भी बना सकते हैं। इस प्रकार के कुछ जातक ज्योतिषी, वास्तु विशेषज्ञ, हस्त रेखा शास्त्री, आध्यत्मिक गुरु, अंक शास्त्री आदि भी बन सकते हैं। वहीं दूसरी ओर, कुंडली के पांचवें घर में स्थित नीच का बुध अशुभ होने की स्थिति में जातक की शिक्षा में विभिन्न प्रकार के विघ्न तथा समस्याएं उतप्न्न कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातक विभिन्न कारणों के चलते अपनी शिक्षा पूरी नहीं कर पाते जबकि इस प्रकार के कुछ अन्य जातक बहुत समस्याओं के पश्चात ही अपनी शिक्षा पूरी कर पाते हैं। इस प्रकार के कुछ जातकों को उच्च शिक्षा प्राप्त होने के पश्चात भी अनेक बार ऐसी शिक्षा इनके किसी विशेष काम नहीं आ पाती तथा ऐसे जातकों को अपनी शैक्षिक योग्यता से बिल्कुल ही भिन्न कोई व्यवसाय करना पड़ सकता है। कुंडली के पांचवें घर में स्थित नीच का बुध जातक को संतान जन्म से संबंधित समस्याएं भी दे सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातकों को संतान का सुख देर से अथवा बहुत देर से प्राप्त हो सकता है तथा इनमें से कुछ जातकों को संतान का सुख प्राप्त करने के लिए लंबा उपचार भी करवाना पड़ सकता है।

कुंडली के छठे घर में नीच का बुध : किसी कुंडली के छठे घर में स्थित नीच का बुध शुभ होने की स्थिति में जातक को व्यवसायिक सफलता प्रदान कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले जातक विभिन्न प्रकार के व्यवसायिक क्षेत्रों के माध्यम से सफलता प्राप्त कर सकते हैं तथा इनमें से कुछ जातक चिकित्सक, वकील, जज, इंजीनियर, ज्योतिषी, कंप्यूटर प्रोग्रामर आदि भी बन सकते हैं। कुंडली के छठे घर में स्थित शुभ नीच का बुध जातक को उत्तराधिकार के माध्यम से अथवा किसी न्यायालय के निर्णय के माध्यम से धन और संपत्ति का लाभ भी प्रदान कर सकता है। वही दूसरी ओर, कुंडली के छठे घर में स्थित नीच का बुध अशुभ होने की स्थिति में जातक को विभिन्न प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं तथा रोग प्रदान कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातक किसी न किसी रोग से पीड़ित हो सकते हैं तथा इनमें से कुछ जातकों को गंभीर, कष्टप्रद, लंबे समय तक चलने वाले अथवा स्थायी रोग भी लग सकते हैं जो इन जातकों को समय समय पर बहुत कष्ट दे सकते हैं तथा इनमें से कुछ जातकों की ऐसे ही किसी रोग के कारण मृत्यु भी हो सकती है। कुंडली के छठे घर में स्थित अशुभ नीच का बुध जातक की आर्थिक स्थिति पर बहुत बुरा प्रभाव डाल सकता है जिसके कारण इस प्रकार के कुछ जातकों को अपने जीवन में अधिकतर समय धन की कमी का सामना करना पड़ सकता है तथा इनमें से कुछ जातकों को अपने जीवन में अनेक बार आर्थिक संकट का सामना भी करना पड़ सकता है।

लेखक
हिमांशु शंगारी